छ्पी-अनछपी: बॉर्डर पर फौज घटाने पर बातचीत, मोदी बोले- न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग नहीं सहेंगे
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भारत और पाकिस्तान बॉर्डर पर फौज घटाने के बारे में विचार करेंगे, हालांकि इस खबर को बहुत अहमियत नहीं दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग नहीं सहेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया की व्यापार रोकने की उनकी बात के बाद सीजफायर के लिए तैयार हुए भारत और पाकिस्तान। भारत-पाकिस्तान के बीच सीज़फायर के बाद शेयर बाजार में भारी तेरी देखी गई। विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया है।
और, जानिएगा कि किशनगंज में पैदा होने वाली चाय बिक रही पश्चिम बंगाल में, बिहार को इसे कैसे हो रहा है घाटा।
पहली खबर
जागरण के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई और सैन्य टकराव के बाद बड़े तनाव के बीच भारत और पाकिस्तान ने तनाव घटाने की दिशा में अहम कदम बढ़ाते हुए सीमाओं पर तैनाद सैनिकों की संख्या घटने पर विचार करने को लेकर आपसी सहमति जताई है। सैनिक कार्रवाई रोक जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के सैन्य महानिदेशकों डीजीएमओ की सोमवार को हुई बेहद महत्वपूर्ण बातचीत में इस दिशा में आगे बढ़ने पर दोनों तरफ से हामी भरी गई। साथ ही दोनों पक्षों ने कहा कि सीमा पर एक भी गोली एक दूसरे के विरुद्ध नहीं चलनी चाहिए, ना ही शत्रुतापूर्ण आक्रामक कार्रवाई करनी चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच लगभग जंग जैसी बनी स्थिति के तत्काल बाद संघर्ष विराम को आगे बढ़ने पर बनी सहमति सीमाओं पर टकराव घटाने के लिहाज से सकारात्मक और महत्वपूर्ण है। सैनिक सूत्रों ने लगभग 45 मिनट की इस डीजीएमओ बातचीत के बारे में बताया, “इसमें इस प्रतिबद्धता को जारी रखते हुए संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई कि दोनों पक्षों को एक भी गोली नहीं चलनी चाहिए या एक दूसरे के विरुद्ध कोई आक्रामक और शत्रुतापूर्ण कार्रवाई शुरू नहीं करनी चाहिए।”
न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग नहीं सहेंगे: मोदी
भास्कर के अनुसार पहलगाम में आतंकी हमले और 6-7 मई को हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया। मोदी ने पाकिस्तान के लिए कहा भारत कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल नहीं सहेगा। “पहलगाम में आतंकवादियों ने जो बर्बरता दिखाई थी उसने देश और दुनिया को झकझोर दिया था। हमने आतंकवादियों को मिट्टी में मिलाने के लिए भारत की सेनो को पूरी छूट दे दी। दुनिया ने देखा कि कैसे पाकिस्तान के ड्रोन और पाकिस्तान की मिसाइल भारत के सामने तिनके की तरह बिखर गई।” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का मत एकदम स्पष्ट है टेरर और टॉक एक साथ नहीं, टेरर और ट्रेड एक साथ नहीं चल सकते, पानी और खून भी एकसाथ नहीं बह सकता। उन्होंने कहा कि हमारी घोषित नीति रही है कि अगर पाकिस्तान से बात होगी तो टेररिज्म और पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर परी होगी।
ट्रंप ने फिर दावा किया जंग हमने रुकवाई
जागरण के अनुसार बीते शनिवार को दो बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम उन्होंने करवाया। अब तीसरी बार उन्होंने दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु संघर्ष को रोकने में उनकी सरकार ने मध्यस्थता की और लाखों लोगों की जान बचाई। ट्रंप ने सोमवार को कहा, “मुझे आप सभी को पिछले कुछ दिनों में घटित एक ऐतिहासिक घटना के बारे में बताना है। शनिवार को हमारी सरकार ने भारत-पाकिस्तान के बीच एक बड़े संघर्ष को खत्म करने के लिए स्थाई संघर्ष विराम करने में मदद की। यह दोनों परमाणु हथियारों से संपन्न देश हैं। भारत व पाकिस्तान का नेतृत्व बहुत मजबूत है। दोनों के पास स्थित की गंभीरता को समझने की जरूरी बुद्धिमता है। हमने उनकी बहुत मदद की। हमने कारोबार में भी उनके साथ मदद की। मैंने कहा कि इसे स्थगित करो और हम दोनों के साथ कारोबार करने को तैयार हैं। अगर स्थगित नहीं करोगे तो हम कारोबार नहीं कर सकते। कारोबार का जैसा मैं इस्तेमाल करता हूं और कोई नहीं करता।”
शेयर बाज़ार में भारी तेज़ी
हिन्दुस्तान के अनुसार भारत-पाक के बीच संघर्ष विराम और अमेरिका-चीन में टैरिफ युद्ध थमने से दुनियाभर के शेयर बाजारों में सोमवार को शानदार तेजी आई। इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर दिखा और यहां पिछले चार सालों में एक दिन का सबसे बड़ा ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया। चौतरफा खरीदारी से सेंसेक्स और निफ्टी ने लगभग चार फीसदी की बढ़त दर्ज की। सेंसेक्स 2,975.43 अंक यानी 3.74 प्रतिशत बढ़कर सात महीने से अधिक के उच्चस्तर 82,429.90 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 3,041.5 अंक बढ़कर 82,495.97 अंक पर पहुंच गया था। वहीं, निफ्टी 916.70 अंक यानी 3.82 प्रतिशत की शानदार तेजी के साथ 24,924.70 अंक पर बंद हुआ।
विराट कोहली का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास
विराट कोहली ने सोमवार को क्रिकेट के लंबे प्रारूप से विदाई लेने की घोषणा की। इसी के साथ टेस्ट में एक युग का अंत हो गया। भारत के सफलतम टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने पिछले साल टी-20 से भी संन्यास ले लिया था। अब वह सिर्फ वनडे क्रिकेट खेलेंगे। टेस्ट करियर में 46.85 की औसत से 9230 रन बनाने वाले 36 वर्षीय कोहली ने इंस्टाग्राम पर लिखा, जिन लोगों के साथ मैदान में खेला और जिन्होंने मुझे खेलते हुए देखा, हर उस व्यक्ति का आभार लेकर जा रहा हूं । कोहली ने माना कि यह फैसला आसान नहीं था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उन्हें इंग्लैंड दौरे तक रोकने का प्रयास किया था मगर विराट ने अपने दिल की सुनी। उनके ऐलान के बाद बीसीसीआई ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, विरासत हमेशा कायम रहेगी। दिल्ली के पश्चिम विहार में खेलकर निकले कोहली के योगदान को टीम इंडिया में संजोकर रखा जाएगा। खास बात है कि विराट ने 2011 में सोमवार को ही टेस्ट करियर शुरू किया था और 14 साल बाद इसी दिन खत्म किया।
अमेरिका और चीन ने 90 दिनों के लिए घटाया शुल्क
भास्कर की खबर है कि टैरिफ वार के बीच अमेरिका और चीन सोमवार को ट्रेड डील पर सहमत हो गए। जेनेवा में दुनिया की पहले और दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था अमेरिका चीन ने टैरिफ को कम करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देश अगले 90 दिनों के लिए एक दूसरे पर लगाए गए टैरिफ को 115% तक काम करेंगे। अमेरिका अब चीन के आयात पर 145 प्रतिशत के बजाय 30% टैरिफ लगाएगी जबकि चीन अमेरिकी आयातित सामान पर 125% से घटकर 10% ही टैरिफ लगाएगा।
किशनगंज की चाय बिक रही बंगाल में, बिहार को घाटा
बिहार चाय उत्पादन के मामले में देश में पांचवें पायदान पर है। किशनगंज में भारी मात्रा में चाय की खेती होती है। लेकिन, यहां उत्पादित चाय की हरी पत्तियां बिकने के लिए पश्चिम बंगाल में चली जाती है। बंगाल के सिल्लीगुड़ी स्थित चाय की मंडी में बिहार उत्पाद चाय की पत्तियों की खपत होती है। इससे राज्य को राजस्व का नुकसान होता है और चाय की खेती करने वाले किसानों की परेशानी होती है। बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) के अध्यक्ष केपीएस केसरी ने कहा कि किशनगंज और ठाकुरगंज में चायपत्ती के प्रसंस्करण यूनिट की काफी जरूरत है। यूनिट नहीं होने से यहां की पत्तियां बाहर जा रही है। चाय उत्पादन में बिहार पांचवें स्थान पर है। राज्य के किशनगंज में लगभग दस हजार हेक्टेयर (25 हजार एकड़) में चाय की खेती हो रही है। इसमें अभी और विस्तार की काफी संभावनाएं है। किशनगंज इलाके में चाय खेती के विस्तार में छोटी जोत बड़ी समस्या है। बीआईए अध्यक्ष ने बताया कि लैंड सिलिंग एक्ट के तहत चाय पौधरोपण की जोत बढ़ाने के लिए प्रयास होना चाहिए।
कुछ और सुर्खियां:
- पाकिस्तान के साथ तनाव के दौरान बंद किए गए 32 हवाई अड्डे फिर खोले गए
- आईपीएल की दोबारा शुरुआत 17 मई से, 3 जून को फाइनल
- अब पंचायत में भी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनेंगे
- देशभर में फोन पर के जरिए डिजिटल लेनदेन करने में लोगों को सोमवार शाम को हुई परेशानी
अनछपी: आधार कार्ड को भारत में लोगों की सुविधाओं के लिए लाया गया था लेकिन यह तय करना मुश्किल है कि इसकी वजह से लोगों को आसानी ज्यादा हो रही है या परेशानी। इस वक्त नया आधार कार्ड बनाने और आधार में सुधार के लिए लोगों को परेशान होते हुए देखा जा सकता है। एक तो किस सुधार के लिए किस कागज की जरूरत है, इस बात को लेकर लोगों के बीच उलझन रहती है। दूसरी सच्चाई यह भी है कि पहले आधार केंद्रों में कुछ आसानी से यह काम हो जाता था, वह अब जिलों में नहीं हो पा रहा है और बहुत से लोग इसके लिए पटना आते हैं। अब एक नई समस्या यह आई है कि बिहार की 5 लाख से अधिक ग्रेजुएट छात्राओं को राज्य सरकार की ओर से जो प्रोत्साहन राशि आधार कार्ड जांच के बाद दी जानी थी, वह जांच ही अटक गई है। खबरों के अनुसार आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था यूआईडीएआई ने मार्च माह में ही बिहार की छात्राओं की आधार जांच पर आपत्ति जताते हुए इसे रोक दिया था। आधार अथॉरिटी का कहना है कि उसकी अनुमति के बिना किसी व्यक्ति के आधार कार्ड की जांच नहीं की जा सकती। ऐसे में उन छात्राओं को मायूसी हुई है जिन्हें ग्रेजुएशन के आधार पर राज सरकार 50 हजार की प्रोत्साहन राशि देती है। इससे पहले भी वेरिफिकेशन की वजह से छात्रों को प्रोत्साहन राशि मिलने में बहुत परेशानी और देरी होती थी। वैसे तो बिहार सरकार ने आधार जांच इसलिए शुरू की ताकि फर्जीवाड़ा ना हो लेकिन फर्जीवाड़ा रोकने में उसने शायद आधार अथॉरिटी से जो जरूरी इजाजत लेनी थी उसे लेने में कोताही की। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की एक एजेंसी के बीच इस तरह की संवाधीनता बेहद अफसोसनाक है। क्या राज्य सरकार के जिस अधिकारी ने आधार जांच की शर्त प्रोत्साहन राशि देने के लिए जोड़ी थी उसे यह नहीं मालूम था कि इसके लिए आधार अथॉरिटी की इजाजत जरूरी है? इससे यह बात भी साबित होती है कि आधार कार्ड का जिस धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है उसमें जरूरी सतर्कता बरतने में सरकारी एजेंसी भी फेल है और यह आम लोगों के डेटा को लेकर बहुत गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि बिहार सरकार इस समस्या का जल्द हल निकालेगी ताकि छात्राओं को प्रोत्साहन राशि लेने में हतोत्साहित ना होना पड़े।
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