छ्पी-अनछपी: भारत की एडवाइज़री- ईरान से जल्दी निकलें, पहाड़ों से ठंडे मैदान

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भारत सरकार ने ईरान में भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइज़री जारी की है कि वह जल्द से जल्द वहां से निकल जाएं। कटिहार में एक मुस्लिम फेरीवाले की बांग्लादेशी कहकर पिटाई का मामला दर्ज किया गया है।और, जानिएगा कि क्यों ज़ीरो परसेंटाइल पर भी मेडिकल पीजी में एडमिशन होगा।

पहली ख़बर

प्रभात खबर के अनुसार ईरान की राजधानी तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने बेहद गंभीर स्थिति को देखते हुए बुधवार को एडवाइजरी जारी कर सभी भारतीय नागरिकों छात्रों, पर्यटकों और व्यापारियों को तत्काल ईरान छोड़ने की सलाह दी है. भारत ने अपने नागरिकों को उपलब्ध कामर्शियल उड़ानों के जरिये जल्द से जल्द बाहर निकलने को कहा है. वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची से फोन पर बातचीत की हालात पर चर्चा की. बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने कतर में स्थित एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कुछ कर्मचारियों को वहां से निकलने की सलाह दी है.

ट्रंप की धमकी ईरान पर बेअसर

हिन्दुस्तान ने लिखा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बावजूद ईरान की न्यायपालिका के रुख में नरमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। जारी प्रदर्शनों के बीच ईरानी न्यायपालिका ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के मामलों में तत्काल सुनवाई और फांसी जैसी सख्त सजाओं के संकेत देकर हालात और तनावपूर्ण बना दिया है।ईरान के मुख्य न्यायाधीश गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई ने एक वीडियो संदेश में कहा कि जिन मामलों में कार्रवाई जरूरी है, वह तुरंत होनी चाहिए। अगर कार्रवाई में दो-तीन महीने की देरी होती है तो उसका प्रभाव कम हो जाता है, इसलिए फैसले तेजी से लिए जाने चाहिए। उनके इस बयान को अमेरिका की चेतावनी की अनदेखी के तौर पर देखा जा रहा है।

पहाड़ों से ठंडे मैदान

भास्कर के अनुसार बीते तीन-चार दिनों से उत्तर भारत में सर्दी ने अचानक तेवर बदले हैं। ऐसा लग रहा है मानो कोल्ड ब्लास्ट हुआ हो। यानी एक झटके में ठिठुरन बढ़ गई है। कोहरा लगभग गायब है, लेकिन पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में कड़ाके की सर्दी पहाड़ों जैसा अहसास करा रही है। हिमालय के ऊंचे इलाकों में तापमान माइनस में बना है, पर हैरानी की बात यह है कि पहाड़ी राज्यों के कई शहरों की तुलना में मैदानी शहरों के तापमान 4-5 डिग्री तक नीचे चल रहे हैं। इधर, बिहार में सुबह आठ बजे से ही खिली धूप निकल रही है। इससे दोपहर होते-होते मौसम में गर्माहट महसूस हो रही है, लेकिन शाम चार बजते ही ठंड से कनकनी बढ़ जा रही है। मौसम विज्ञान केन्द्र के अनुसार 17 जनवरी तक ऐसा ही मौसम रहेगा, लेकिन 17 जनवरी को एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ आने वाला है, इससे उत्तर-पश्चिमी हवा की रुख में बदलाव होने की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिक एसके पटेल के अनुसार इससे न्यूनतम तापमान में हल्की वृद्धि हो सकती है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश की संभावना है।

कटिहार में मुस्लिम फेरीवाले की बांग्लादेशी कहकर पिटाई

कटिहार से जागरण की ख़बर है कि बांग्लादेशी कहकर एक फेरीवाले के साथ मारपीट व छिनतई की गई। पुलिस मामले में केस कर छानबीन में जुट गई है। घटना 11 जनवरी की शाम पोठिया थाना क्षेत्र के चकला गांव की है। पीड़ित कोढ़ा थाना के सिमरिया निवासी है। पीड़ित मु. अकमल हुसैन ने बताया कि 11 जनवरी को शाम पांच बजे वह पोठिया थाना क्षेत्र के चकला गांव में बर्तन की फेरी लगा रहा था। इसी दौरान साइकिल से आए दो लोगों ने बांग्लादेशी कह कर गाली गलौज शुरू कर दी। जब स्थानीय महिलाओं ने इसका विरोध किया तो आरोपित उग्र हो गए और मारपीट करने लगे। आरोपीटोन ने सिर पर मारा हाथापाई की और उनसे ₹12000 छीन लिए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इधर कटिहार के एसपी शिखर चौधरी ने बताया कि बर्तन बेचने वाले अकमल हुसैन के साथ दो लोगों द्वारा बाहरी और बांग्लादेशी कहकर मारपीट की घटना को लेकर पोटिया थाना में केस दर्ज किया गया है।

मणिपुर में अलग प्रदेश के लिए कुकी समुदाय का प्रदर्शन

भास्कर की खबर है कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बावजूद जातीय तनाव और प्रशासनिक गतिरोध बरकरार है। बुधवार को चूराचांदपुर, मोरेह सहित कुकी-जो बहुल जिलों में हजारों की संख्या में समुदाय के सड़कों पर उतरे और पहाड़ी क्षेत्री के लिए विधायिका वाले केंद्रशासित क्षेत्र की मांग को दोहराया। इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम के बैनर तले रैली में चूराचंदपुर में हजारों की संख्या में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। इसी तरह की रैलियां अन्य जिलों में भी निकाली गईं।

ज़ीरो पर्सेंटाइल पर भी मेडिकल पीजी में एडमिशन

हिन्दुस्तान के अनुसार मेडिकल सीटों के लिए वैसे तो मारामारी रहती है, लेकिन इस साल मेडिकल की पीजी सीटों को भर पाना मुश्किल हो रहा है। दूसरे दौर की काउंसलिंग के बाद भी पीजी की करीब 18 हजार सीटें खाली हैं। सरकार को सीटों के नहीं भर पाने की आशंका है। इस वजह से नीट पीजी का कटऑफ घटाकर शून्य पर्सेंटाइल तक करने का फैसला लिया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सीटों के नहीं भर पाने के कारण प्रवेश के लिए नीट पीजी की 50 फीसदी पर्सेन्टाइल की अर्हता को घटाकर सात पर्सेन्टाइल कर दिया गया है, जबकि आरक्षित श्रेणियों के लिए इसे 40 से घटाकर शून्य पर्सेन्टाइल कर दिया गया है।

कुछ और सुर्खियां:

  • चांदी 15 दिनों में 47000 चढ़ी, 2.86 लाख प्रति किलो हुई चांदी की कीमत
  • बीपीएससी 71वीं की मुख्य परीक्षा 25 अप्रैल से
  • थाईलैंड में चलती ट्रेन पर क्रेन गिरी, 30 लोगों की मौत
  • सीनियर आईपीएस अधिकारी राकेश अग्रवाल को एनआईए का डायरेक्टर जनरल नियुक्त किया गया
  • गया एयरपोर्ट से मुंबई के लिए 29 मार्च से सीधी उड़ान शुरू होगी
  • दुनिया के दूसरे नंबर के बैडमिंटन खिलाड़ी डेनमार्क के एंडर्स एंटोन्सन प्रदूषण के कारण इंडिया ओपन सुपर बैडमिंटन टूर्नामेंट में नहीं खेलेंगे

अनछपी: मां बाप की कद्र करना और शादी के बाद भी उनकी देखभाल करते रहना वैसे तो आम इंसानियत की मांग है लेकिन यह भी एक तल्ख सच्चाई है कि बहुत से मामालों में इसका ध्यान नहीं रखा जता और मां-बाप को काफी परेशानियों में जीना पड़ता है। आज हम इसकी चर्चा इसलिए कर रहे हैं कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी ने माता-पिता की देखभाल न करने वाले सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कटौती का कानून प्रस्तावित किया है। उनका कहना है कि ग्रुप एक और ग्रुप 2 की सरकारी नौकरियों में आने वाले 90% गरीब परिवारों से आते हैं और अगर शादी के बाद उनमें से कोई भी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करता है तो उनके वेतन से 10 से 15% की कटौती की जाएगी और सीधे उनके माता-पिता को दी जाएगी। याद रखने की बात यह है कि बहुत थोड़े से लोग ही सरकारी नौकरी में रहते हैं और इसे एक छोटी आबादी को तो मदद मिल सकती है लेकिन इसके लिए जो नैतिक दबाव होना चाहिए वही इस मामले में कारगर साबित होगा। वेतन कटौती के डर से ही सही मां-बाप का ध्यान नहीं रखने वाले बच्चे अगर उनकी कद्र करने लगते हैं तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए हालांकि यह कोई आदर्श आधार नहीं माना जाएगा। वैसे इस तरह के कानून से पारिवारिक झगड़ों के बढ़ाने की भी आशंका रहती है। यह भी तय करना होगा कि मां-बाप की कद्र नहीं की जा रही है इसका फैसला किस आधार पर हो। इस मामले में इस बात पर भी गौर किया जा सकता है कि विभिन्न धार्मिक ग्रन्थों में मां-बाप के प्रति जो जिम्मेदारी बताई गई है, उसकी सीख बच्चों कम उम्र से ही दी जाए।

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