छ्पी-अनछपी: पांच दिन में निवेशकों के 17 लाख करोड़ डूबे, जेईई मेन में 14 को 100 पर्सेंटाइल
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के ऐलान से भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें दिन घाटे में रहा और इन पांच दिनों में निवेशकों के 17 लाख करोड़ रुपए डूब गए। इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जईई में में 14 विद्यार्थियों ने 100 पर्सेंटाइल लाए हैं। बिहार में आवास बोर्ड से जमीन लेने वाले लोग अपने नाम से म्यूटेशन करा सकेंगे। ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट के अनुसार भारत में भ्रष्टाचार और बढ़ा है और देश 96वें स्थान पर पाया गया है।
और जानिएगा कि बिहार में कितने लोगों के पास है 10 से ज्यादा फोन सिम और उनका क्या होगा।
हिन्दुस्तान के अनुसार बीते पांच दिनों की गिरावट में शेयर बाजार निवेशकों को 16.97 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। इन पांच दिनों में लगातार विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी और नए अमेरिकी शुल्कों के कारण व्यापार युद्ध की आशंकाओं ने बाजार का नकारात्मक दायरे में अटका रखा है। गौरतलब है कि पिछले पांच दिनों में बीएसई सूचकांक 2,290.21 अंक या 2.91 प्रतिशत लुढ़क चुका है जबकि निफ्टी में 667.45 अंक यानी 2.81 प्रतिशत की गिरावट आई है। मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने 4,486.41 करोड़ रुपये की निकासी की। अमेरिका के सभी इस्पात और एल्युमीनियम आयात पर 25 प्रतिशत शुल्क की पुष्टि से रियल्टी, औद्योगिक, सोच-विचार कर खर्च किए जाने से जुड़े उपभोक्ता सामान और पूंजीगत सामान बनाने वाली कंपनियों के शेयर नुकसान में रहे। यूरोपीय संघ के नेताओं ने भी अमेरिकी शुल्क के जवाब में कदम उठाने का संकल्प लिया है। इससे व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ी है।
जेईई मेन में 14 को 100 पर्सेंटाइल, पाणिनि बिहार टॉपर
भास्कर के अनुसार एनटीए ने जेईई ने जनवरी सेशन का रिजल्ट मंगलवार को जारी कर दिया। परीक्षा में 14 छात्रों ने 100% टाइल हासिल किया। हालांकि इसमें बिहार-झारखंड का एक भी छात्र नहीं है। हाजीपुर के पाणिनि स्टेट टॉपर बने हैं। पाणिनि को 99.99442 परसेंटाइल मिला है। देश में पहले स्थान पर आयुष सिंघल (राजस्थान), दूसरे स्थान पर कुशाग्र गुप्ता (कर्नाटक) व तीसरे स्थान पर दक्ष (दिल्ली एनसीटी) रहे हैं। हाजीपुर के रहने वाले पाणिनि के माता- पिता सरकारी शिक्षक हैं। पाणिनि बने बताया कि वह इस बार सीबीएसई बोर्ड से +2 की परीक्षा देगा। उसने बताया कि खुद से 10 घंटे पढ़ाई कर यह सफलता पाई है। पाणिनि का ऑल इंडिया रैंक 23 है।
आवास बोर्ड से ली गई जमीन का कर सकेंगे म्यूटेशन
प्रभात खबर की सबसे बड़ी खबर के अनुसार बिहार राज्य आवास बोर्ड से जमीन लेने वाले लोग आसानी से अपने नाम से दाखिल खारिज यानी म्यूटेशन कर सकेंगे। इसे लेकर राजस्व एवं भूमि सुधीर सुधार विभाग ने नई व्यवस्था की है। साथ ही इसके पालन के संबंध में विभाग के अवर सचिव ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त और सभी समानताओं को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार राज्य आवास बोर्ड द्वारा पूर्व में अधिग्रहित भूमि को फ्री होल्ड करने के बाद इसके आवंटियों को उनके नाम से जमाबंदी काम करने की व्यवस्था की है।
भारत भ्रष्टाचार के 96वें पायदान पर
जागरण के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले में भारत 180 देशों की सूची में 96वें पायदान पर पहुंच गया है। ध्यान रहे कि जिस देश में सबसे कम भ्रष्टाचार होता है उसे पहले नंबर पर रखा जाता है। मंगलवार को जारी ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2024 में भारत 180 देशों में 96वें स्थान पर है जबकि 2023 में भारत की रैंक 93 थी। भारत के पड़ोसी पाकिस्तान का और बुरा हाल है और वह 135 वें नंबर पर है। चीन का स्थान 76वां है। डेनमार्क सबसे कम भ्रष्ट देश होने की सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर हैं।
आठ यूनिवर्सिटीज में सेशन लेट
बिहार के आठ विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर संकाय के शैक्षणिक सत्र एक माह से लेकर 30 महीने तक लेट चल रहे हैं। यह मामला शिक्षा विभाग की ओर से मंगलवार को सभी कुलपतियों और रजिस्ट्रार की आयोजित बैठक में सामने आया। जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में स्नातकोत्तर संकाय का विभिन्न सेमेस्टर संबंधी अकादमी सत्र तीन माह से 30 महीने तक लेट चल रहा है। इसी विश्वविद्यालय में स्नातक संकाय की विभिन्न परीक्षाएं 3 माह से 24 माह की देर से चल रही हैं। मगध विश्वविद्यालय में स्नातक संकाय के विभिन्न सेमेस्टर 2 से 6 माह और स्नातकोत्तर संकाय के तीन सेमेस्टर 2 से 24 माह की देर से चल रहे हैं।
हर एक उपभोक्ता के 9 से ज़्यादा सभी सिम बंद होंगे
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में नौ से अधिक सिम रखने वाले उपभोक्ताओं का दसवां या उसके बाद वाले सभी नंबर बंद कर दिए जाएंगे। ऐसे 27.55 लाख नंबर चिह्नित किए गए हैं। दूर संचार विभाग ने ये नंबर चिह्नित किए हैं। फिलहाल विभाग ने इन उपभोक्ताओं को जानकारी देकर नौ सिम चयन करने का विकल्प दिया है। अगर उपभोक्ता इसकी जानकारी नहीं देंगे तो दूर संचार विभाग नौ सिम के बाद रेंडमली बाकी के सिम को बंद कर देगा। बता दें कि साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए दूर संचार विभाग यह कार्रवाई करने जा रहा है। राज्य में पांच हजार से अधिक ऐसे लोग हैं जिनके पास पांच से छह हजार सिम हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- लाइन ऑफ़ कंट्रोल के पास धमाके में झारखंड के कैप्टन समय दो जवानों की मौत
- मुजफ्फरपुर में 2019 बैच का दारोगा रौशन कुमार सिंह ₹75000 रिश्वत लेते गिरफ्तार
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ऐलान, औरंगाबाद में मेडिकल कॉलेज के साथ ट्रामा सेंटर भी बनाया जाएगा
- बिहार के 33 जिलों में अंडरग्राउंड वाटर में आयरन की मात्रा ज्यादा मिली, 20 जिले आर्सेनिक प्रभावित
अनछपी: मॉब लिंकिंग के बारे में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को जो बात कही वह भारत के सभी अल्पसंख्यकों और कमजोर तबके को लोगों के लिए बेहद निराशाजनक है। यह बात याद रखने की है कि मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या किए जाने के मामले में अधिकांश पीड़ित अल्पसंख्यक वर्ग और कमजोर वर्ग के लोग रहते हैं। भारत में गोहत्या के झूठे आरोपों में मॉब लिंचिंग के सबसे ज़्यादा शिकार मुसलमान रहे हैं, और मुसलमान में भी वह तबका ज्यादा पीड़ित रहा है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बहुत याद करते हैं यानी पसमांदा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मॉब लिंचिंग के मामलों में दिल्ली में बैठकर बारीकी से निगरानी करना संभव नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी गौ रक्षा के नाम पर एक खास समुदाय के लोगों के खिलाफ हो रही हिंसा पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कही। जस्टिस बीआर गवई और के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के उस फैसले का उल्लेख किया जिसमें मॉब लिंचिंग और गौ रक्षा के नाम पर होने वाले अपराधों से निपटने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए थे। जजों ने कहा कि जब भी इस अदालत द्वारा निर्देश जारी किये जाते हैं तो वे संविधान के अनुच्छेद 141 के मद्देनजर सभी अधिकारियों और अदालतों पर बाध्यकारी होते हैं। जस्टिस गवई ने कहा कि दिल्ली में बैठकर हम देश के विभिन्न है राज्यों में होने वाली घटनाओं की निगरानी नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों ने जो बात कही है उस पर टिप्पणी किए बिना यह पूछा जा सकता है कि आखिर ऐसे लोगों को जो मॉब लिंचिंग के शिकार हुए हैं, इंसाफ कैसे मिलेगा और मॉब लिंचिंग की घटनाएं कैसे रुकेंगी जब राज्य सरकार मॉब लिंचिंग वालों के साथ हो और अदालत भी कहे कि वह हर घटना पर नजर नहीं रख सकती? यह बात किसी से ढकी छुपी नहीं है कि भाजपा शासित प्रदेशों में मॉब लिंचिंग के आरोपी लोगों के साथ सरकार ही खड़ी नजर आती है। ऐसे लोगों के खिलाफ केस कमजोर कर दिए जाते हैं और राज चला रही पार्टी में उनका स्वागत किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बहुत मायूसी हुई है और लगता है कि मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकना फिलहाल भारत में संभव नहीं है। इसके बावजूद जो लोग मॉब लिंचिंग के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं उन्हें यह लड़ाई जारी रखनी चाहिए।
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