छ्पी-अनछपी: ईरान-अमेरिका तनाव खतरनाक मोड़ पर, ग़ालिब कॉलेज में 20 प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। पटना उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ ने गया के सरकारी वित्त पोषित अल्पसंख्यक मिर्जा गालिब कॉलेज के 20 सहायक प्रध्यापकों की नियुक्ति को अवैध मानते हुए उसे रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है. बिहार के 28 विधायकों को हाईकोर्ट से नोटिस मिला है।
और, जानिएगा कि स्क्रैप कारोबारी हाजी अख्तर ने कबाड़ के साथ बेचे गए 15 लाख का सोना फरीदाबाद के अशोक शर्मा को लौटाया।
पहली ख़बर
जागरण में छपी खबर के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक कहा है कि ईरान को सार्थक समझौता करना होगा, अन्यथा उसे बहुत बुरे परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यह चेतावनी स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हुई उच्चस्तरीय परमाणु वार्ता के बाद आई, जहां अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। ईरान ने अमेरिकी चिंताओं पर एक लिखित प्रस्ताव भेजने पर सहमति जताई है, जबकि वाशिंगटन उसके इंतजार में है। मध्य-पूर्व और आसपास के जलक्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ी है। क्षेत्र में तीन विमानवाहक पोत- यूएसएस अब्राहम लिंकन, यूएसएस विध्वंसक पोत हैं, जिन पर टॉमहाक जेराल्ड आर. फोर्ड और एक अन्य स्ट्राइक ग्रुप- तैनात बताए जा रहे हैं।
ग़ालिब कॉलेज में 20 प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द
प्रभात ख़बर के अनुसार पटना उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ ने गया के सरकारी वित्त पोषित अल्पसंख्यक मिर्जा गालिब कॉलेज के 20 सहायक प्रध्यापकों की नियुक्ति को अवैध मानते हुए उसे रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है. मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने वर्ष 2024 में न्यायमूर्ति अंजनी कुमार शरण के पूर्व के उस फैसले पर सहमति जतायी, जिसने नियुक्ति प्रक्रिया में घोर अनियमितताओं और चयन समिति के दोषपूर्ण गठन के आधार पर उनकी नियुक्तियों को रद्द कर दिया था. डबल बेंच ने 16 फरवरी को प्रभावित शिक्षकों की ओर से दाखिल सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया.
गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.4 लाख करोड़ के राहत पैकेज का एलान
भास्कर के अनुसार ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में 1.4 लाख करोड़ रु. के राहत पैकेज का ऐलान किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि 9 सदस्य देशों ने ग़ज़ा राहत पैकेज के लिए 59,500 करोड़ रु. (7 अरब डॉलर) देंगे। जबकि, अमेरिका खुद 85,000 करोड़ रु. (10 अरब डॉलर) देगा। वहीं, 5 देशों ने युद्ध से तबाह फलस्तीनी इलाके में सैनिक तैनात करने पर सहमति दी है। बैठक में पाकिस्तान समेत 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। ट्रम्प ने यह भी साफ किया कि यह बोर्ड अब दुनिया भर के संघर्ष सुलझाने में भी भूमिका निभाएगा। ट्रम्प ने कहा, बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की निगरानी करेगा और सुनिश्चित करेगा कि वह ठीक से काम कर रहा है। वहीं, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक से ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक हुई। इसमें वेस्ट बैंक में इसराइल के नियंत्रण बढ़ाने के प्रयासों की तीखी आलोचना की गई।
बिहार के 28 विधायकों को हाईकोर्ट से नोटिस
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव में विजयी उम्मीदवारों के निर्वाचन को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने हलफनामे में गलत जानकारी देने के आरोप में 28 विधायकों को नोटिस जारी किया है। 10 अन्य विधायकों के खिलाफ सुनवाई चल रही है। वर्ष 2025 में हुए चुनाव के बाद अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने निर्वाचन क्षेत्र से जीते उम्मीदवारों के खिलाफ हाईकोर्ट में 40 चुनाव याचिकाएं दायर की हैं। हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति शशि भूषण प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति अशोक कुमार पांडेय को चुनाव याचिकाएं लेने के लिए अधिकृत किया था। सभी 40 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद नवनिर्वाचित विधायकों को नोटिस जारी किया गया।
राहुल गांधी को धमकी हिंसा की साज़िश: कांग्रेस
कांग्रेस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जान से मारने की धमकी दिए जाने को लेकर सरकार को घेरा है। पार्टी ने इसे राहुल गांधी के खिलाफ हिंसा की सुनियोजित साजिश करार देते हुए कहा है कि एक और गोडसे को तैयार किया जा रहा है। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर कहा कि पहले भी नाथूराम गोडसे तैयार किया गया था। आज फिर एक और गोडसे को तैयार किया जा रहा है। उन्होंने अपने पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया है। इस वीडियों में राजस्थान के शख्स को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का अपमान करने को लेकर राहुल गांधी सहित 25 सांसदों को कथित तौर पर गोली मारने की धमकी देते हुए सुना जा सकता है। जागरण के अनुसार उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
कबाड़ व्यापारी हाजी अख्तर ने 15 लाख का सोना लौटाया
जागरण की ख़बर है कि एक तरफ सोने की कीमतें रोजाना उछाल मार रही हैं, वहीं एलआइसी एजेंट अशोक शर्मा एक साल पहले महाकुंभ स्नान में जाने से पहले घर में रखे सोने के आभूषणों से भरा डिब्बा कबाड़ के बोरे में छिपाकर भूल गए। दीवाली के पहले सफाई के दौरान इस बोरे को कबाड़ी को बेच दिया गया। जब दीवाली पर घर में पूजा की तैयारी हुई तब सोने की खोजबीन शुरू हुई, पर निराशा हाथ लगी। अब स्क्रैप कारोबारी हाजी अख्तर थोक में अपना कबाड़ बेचने के लिए ट्रक में माल लोड कराने लगे तो डिब्बा सामने आया। करीब 15 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण से भरा डिब्बा स्क्रैप कारोबारी ने उसके असली मालिक तक पहुंचा कर एलआइसी एजेंट के परिवार की खुशियां वापस ला दीं।
कुछ और सुर्खियां:
- ग़ज़ा पर इसराइल के हमले की निंदा करने से शुरुआत में इंकार के बाद अब भारत ने भी निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया
- बिहार के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेज में आई की पढ़ाई मुफ्त होगी
- झारखंड सहित 22 राज्यों में अप्रैल से एसआईआरकी तैयारी
- सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली अर्शिया पर 5 मई से सुनवाई शुरू होगी
अनछपी: चुनाव से ठीक पहले अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए दी जाने वाली फ्रीबीज के बारे में सुप्रीम कोर्ट की चिंता और आलोचना सही तो है लेकिन यह एक गंभीर सवाल भी है क्योंकि यह देखा जा रहा है कि ऐसी टिप्पणियां विपक्ष की सरकार के बारे में आ रही हैं और केंद्र में सरकार चला रही पार्टी का जिस राज्य में राज है, वहां सुप्रीम कोर्ट कोई रोल निभाते हुए नहीं दिख रहा है। बल्कि एक तरह से सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार चला रही पार्टी और गठबंधन के पक्ष में ही चुप्पी साध लेता है। चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि सरकारों द्वारा चुनाव से ठीक पहले मतदाताओं को मुफ्त उपहार और नगद देने के चालान पर लोग नहीं लगी तो इससे देश के आर्थिक विकास में रुकावट आएगी। यह मामला वैसे तो तमिलनाडु से जुड़ा हुआ है और सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह केवल तमिलनाडु की बात नहीं कर रहे बल्कि सभी राज्य सरकारों की बात कर रहे हैं। ध्यान रहे कि तमिलनाडु में एक ऐसी पार्टी की सरकार है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के सख्त खिलाफ रहती है। दूसरी तरफ बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड वाले गठबंधन की सरकार ने ठीक चुनाव के दौरान 10-10 हज़ार रुपये बांटे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी कोई टिप्पणी तब नहीं की। सुप्रीम कोर्ट चाहता तो स्वतः संज्ञान लेकर भी इस पर अपनी राय दे सकता था। इस मामले में जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर चुनाव के बाद सुप्रीम कोर्ट गए तब सरकार द्वारा मुफ्त में बांटी गई रेवड़ी पर टिप्पणी करने के बजाय खुद प्रशांत किशोर की पार्टी के प्रदर्शन पर टिप्पणी की गई। सुप्रीम कोर्ट पीठ ने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि हाल के चुनाव में कुछ राज्यों में क्या हुआ और चुनाव से ठीक पहले अचानक कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की गई। चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने सवाल उठाया कि अगर लोगों के खाते में मुफ्त में सीधे पैसे जाने लगे तो क्या लोग काम करेंगे? इस पर बस यही एक सवाल है कि ऐसी सुंदर और सैद्धांतिक टिप्पणियां बिहार के मामले में क्यों नहीं की गईं? आम लोगों के बीच सुप्रीम कोर्ट के इस रवैए पर जरूर सवाल खड़ा होगा।
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