छ्पी-अनछपी: इसराइल-अमेरिका ने जारी रखे हमले, डीडीसी के पास अकूत दौलत

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ बातचीत संबंधी दावों के उलट इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले जारी रखे। शिवहर के डीडीसी बृजेश कुमार के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी में आय से अधिक अकूत संपत्ति का पता चला है। रसोई गैस के डबल सिलिंडर धारकों के लिए एक सिलिंडर डिलीवरी के बाद अगला सिलिंडर 35 दिन से पहले नहीं मिलेगा। नीतीश कुमार एक बार फिर अपनी पार्टी के अध्यक्ष बने हैं।

और, जानिएगा कि ट्रेन टिकट कैंसिल कराना कैसे यात्रियों के लिए दुखद हुआ।

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ बातचीत संबंधी दावों के विपरीत पश्चिम एशिया में मंगलवार को संघर्ष पूरी तीव्रता के साथ जारी रहा। ट्रंप द्वारा पांच दिनों तक ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर हमले रोकने की घोषणा के बावजूद अमेरिकी इसरायली बलों ने ईरान के दो ऊर्जा प्रतिष्ठानों समेत 50 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। जवाब में ईरान ने तेल अवीव की ओर लगभग 100 किलोग्राम विस्फोटक क्षमता वाली मिसाइल दागी। पाकिस्तान ने ईरानी नेतृत्व को वार्ता के लिए इस्लामाबाद आने का निमंत्रण दिया है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट किया है कि “संपूर्ण विजय” से पहले किसी वार्ता का प्रश्न नहीं है। इसी बीच कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत 1.8 प्रतिशत बढ़कर 101.77 डालर प्रति बैरल पहुंच गई। ईरान ने मोहम्मद बकर जोलकद्र को नया सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिव नियुक्त किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान में “सही लोगों से संपर्क में है और शीघ्र समझौते की संभावना बनी हुई है।

ईरान ने अरब देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए

हिन्दुस्तान के अनुसार युद्ध से तनातनी के बीच मंगलवार को ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया। कुवैत में हवाई रक्षा प्रणालियों के मलबे से बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे कुछ घंटों के लिए बिजली गुल रही। बहरीन में मिसाइल अलर्ट सायरन बजे। यूएई में ईरान ने सात बैलिस्टिक मिसाइल और 16 ड्रोन दागे। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हवाई रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागे गए प्रोजेक्टाइल्स को सफलतापूर्वक रोक दिया। मंत्रालय ने बताया कि हमले में अब तक सशस्त्र बलों के 2 जवान शहीद हो गए, छह लोगों की मौत हुई है।

शिवहर के डीडीसी के पास अकूत संपत्ति, निगरानी का छापा

भास्कर के अनुसार विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शिवहर के डीडीसी बृजेश कुमार के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। मंगलवार सुबह से शुरू हुई यह कार्रवाई देर शाम तक शिवहर, बेतिया और सीतामढ़ी में पैतृक आवास से लेकर संसुराल तक हुई। छापेमारी के दौरान एसवीयू को बृजेश कुमार की पत्नी गीताजंली कुमारी के नाम से दानापुर में जमीन, सुगना मोड़ के आगम गंगा कॉम्प्लेक्स में दो व्यवसायिक दुकान, सगुना मोड़ के पास प्रगति टावर में एक व्यवसायिक दुकान के कागजात मिले। इनका बाजार मूल्य 2 करोड़ 26 लाख 69 हजार है। इसके अलावा विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों में 21 लाख 31 हजार 324 रुपए के निवेश के कागजात भी मिले हैं। दानापुर में जमीन और दुकानों की खरीदारी 2022-23 में हुई है जब बृजेश मुजफ्फरपुर के एसडीओ थे।

अगला सिलिंडर 35 दिन से पहले नहीं मिलेगा 

प्रभात खबर के अनुसार एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. सामान्य उपभोक्ताओं के लिए भी अलग-अलग नियम तय किये गये हैं. सिंगल बॉटल कनेक्शन (एसबीसी) धारकों को 25 दिन और डबल कनेक्शन (डीबीसी) धारकों को 35 दिन के बाद ही गैस की बुकिंग हो सकेगी. वहीं नयी गाइडलाइन के अनुसार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले सभी उपभोक्ताओं को अब 45 दिनों के अंतराल के बाद ही अगली गैस बुकिंग की अनुमति होगी.

नीतीश कुमार एक बार फिर अपनी पार्टी के अध्यक्ष बने

हिन्दुस्तान के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। वे चौथी बार पार्टी की कमान संभालेंगे। पार्टी के निर्वाचन पदाधिकारी अनिल हेगड़े ने मंगलवार को नीतीश कुमार के निर्वाचित होने की घोषणा की। उन्होंने पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा को नीतीश कुमार के निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र सौंपा। नीतीश कुमार इस पद के लिए पार्टी के एकमात्र उम्मीदवार थे। लिहाजा, उनको 24 मार्च को ही विधिवत निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। नीतीश कुमार का नया कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। इस समय भी वही जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। पिछली बार वे 29 दिसंबर को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। जबकि, पहली बार 10 अप्रैल 2016 को पार्टी की कमान संभाली थी। तब उन्हें शरद यादव के स्थान पर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था।

ट्रेन टिकट कैंसिल कराना कैसे यात्रियों के लिए दुखद

टिकट रद्द करने पर रिफंड के नए नियम के तहत यदि ट्रेन छूटने में आठ घंटे से कम समय बचा है तो टिकट रद्द कराने पर कोई रिफंड (किराया वापस) नहीं मिलेगा। अभी तक रिजर्वेशन चार्ट ट्रेन छूटने के आठ से दस घंटे पहले बनता था। अब यह 9 से 18 घंटे पहले बनेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को यह जानकारी दी। नए नियमों के तहत अब ट्रेन छूटने से आठ घंटे के पहले तक ही टिकट रद्द कराने वालों को रिफंड मिलेगा। रिफंड को लेकर वर्तमान में यह समय सीमा चार घंटे की थी। नए नियम एक से 15 अप्रैल के बीच प्रभावी हो जाएंगे। ध्यान रहे कि अब ट्रेन छूटने के 8 घंटे से कम समय में कोई रिफंड नहीं मिलेगा। पहले यह समय 4 घंटे से कम था। अब 8 से 24 घंटे के बीच 50 फीसदी कटौती होगी। 24 से 72 घंटे के बीच 25 फीसदी रिफंड मिलेगा। अब 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर ही पूरा रिफंड मिलेगा।

कुछ और सुर्खियां:

  • गया रेल डिवीजन में ट्रायल के तौर पर 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन
  • बेगूसराय के तेघड़ा में एक्सिस बैंक में गार्ड को घायल कर चार लाख की लूट
  • 26, 29 और 31 मार्च को भी जमीन रजिस्ट्री के लिए खुले रहेंगे निबंधन कार्यालय
  • नारकोटिक्स टीम ने पटना और दरभंगा में छापेमारी कर 69 लाख की हेरोइन ज़ब्त की, पांच तस्कर गिरफ्तार

अनछपी: वैसे तो भारत के संविधान के मूल में समानता की बात कही गई है लेकिन कुछ मामलों में धर्म के आधार पर साफ तौर पर भेदभाव होता है और जब इसे ठीक करने की बारी आती है तो सुप्रीम कोर्ट संविधान के इस प्रावधान को समानता के प्रावधान पर ऊपर रखता है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताज़ा फ़ैसले में कहा है कि हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (एससी) का सदस्य नहीं माना जा सकता है। इतना ही नहीं बल्कि एक कदम आगे बढ़कर कोर्ट ने कहा कि ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाने पर व्यक्ति का अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाता है और साथ ही वह नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में इस श्रेणी में मिलने वाले आरक्षण के लाभ से भी वंचित हो जाएगा। पीठ ने कहा, ऐसे किसी भी व्यक्ति को खंड-3 के प्रावधानों के तहत अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता है। वह संविधान या संसद, राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत क़ानूनी लाभ, सुरक्षा, आरक्षण या अधिकार का दावा नहीं कर सकता। दरअसल जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को बहाल रखते हुए यह सारी बातें कहीं हैं। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा था, एक बार जब कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है तो उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि अनुसूचित जाति की परिभाषा को देखा जाए और फिर फैसला किया जाए कि क्या सिर्फ धर्म बदलने से हालात बदल जाते हैं। इसकी भी समीक्षा होनी चाहिए कि किसी जाति को अनुसूचित जाति घोषित करने का जो आधार था क्या वह अब भी भारत में वैसा ही है? अगर ऐतिहासिक तौर पर भेदभाव कोई आधार है तो धर्म बदलने से उस ऐतिहासिक भेदभाव का असर खत्म हो जाता है? सुप्रीम कोर्ट ने शायद इन बातों पर ध्यान नहीं दिया।

 

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