छ्पी-अनछपी: वक़्फ़ बिल पर खड़गे बोले- मुस्लिमों को दबाने की कोशिश, ट्रंप के टैरिफ से बाज़ार धड़ाम

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। विवादस्पद वक़्फ़ संशोधन विधायक लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हो गया जिसके बारे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह मुसलमानों को दबाने की कोशिश है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से दुनिया भर के शेयर बाजार धड़ाम। भाजपा के एमएलसी नवल किशोर ने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को मारने की धमकी दी। वक़्फ़ संशोधन बिल के खिलाफ जदयू के कुछ नेताओं ने इस्तीफा दिया।

और जानिएगा कि ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले सबसे ज़्यादा किस गाड़ी को चलाने वाले लोग हैं।

जागरण के अनुसार वक़्फ़ संशोधन विधेयक पर लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी बहस के दौरान कांग्रेस समेत अन्य अनेक विपक्षी दलों ने प्रस्तावित कानून के प्रावधानों के साथ ही सरकार की नीयत और इरादे पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस बिल के जरिए मुसलमानों को दबाने की कोशिश कर सरकार विवाद और टकराव के बीच होने का काम कर रही है। खड़गे ने अपील के रूप में सरकार को चेताया भी कि वह देश की शांति और सौहार्द को ना बिगाड़े। उन्होंने कहा कि यह विधेयक असंवैधानिक और भारतीय मुसलमानों के खिलाफ है। खड़गे ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार इसके बहाने वक़्फ़ की जमीन हथियाने की कोशिश कर रही है। चर्चा के दौरान कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर यह विधेयक पारित होकर कानून बनता है तो उसे अगले कुछ वर्षों में न्यायपालिका से खारिज हो जाएगा।

समर्थन में 128 और विरोध में 95 वोट

वक़्फ़ विधेयक पर संसद ने अपनी मुहर लगा दी है। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी गुरुवार को 12 घंटा से अधिक चली मैराथन बहस के बाद इसे पारित कर दिया गया। विधेयक के समर्थन में 128 और विरोध में 95 वोट पड़े। विधेयक पर विपक्ष की ओर से कई संशोधन पेश किए गए जिसे सदन ने खारिज कर दिया। दोनों सदनों से पारित होने के बाद इसे तुरंत ही राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलते ही विधेयक कानून का रूप ले लेगा।

भाजपा की मंशा दंगा फैलाने की: संजय सिंह

हिन्दुस्तान के अनुसार आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि साल 2020 में भाजपा सरकार ने शपथ पत्र देकर कहा था कि वक्फ संपत्तियां डिजिटल हो चुकी हैं। केंद्र की भाजपा सरकार की मंशा देश में दंगा कराने की है। केंद्र देश में नफरत फैला रहा है। उच्च सदन में वक्फ़ संशोधन विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ़ (निरसन) विधेयक पर चर्चा के दौरान सिब्बल ने प्रस्तावित कानून का विरोध किया और कहा कि गैर-मुस्लिमों को भी वक्फ बनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा, ‘जब जमीन मेरी है तो आप इसके लिए कानून बनाने वाले कौन होते हैं।’ उन्होंने विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चार राज्यों में हिंदू (धार्मिक) संस्थानों में 10 लाख एकड़ से अधिक भूमि है।

ट्रंप के टैरिफ से बाजार धड़ाम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बुधवार को 60 देशों पर पारस्परिक जवाबी आयात शुल्क लगाने से व्यापारिक तनाव की आशंका बढ़ गई है। इसका व्यापक असर गुरुवार को भारत और अमेरिका सहित दुनियाभर के प्रमुख शेयर बाजारों में दिखाई पड़ा। इनमें तेज गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख अमेरिकी सूचकांक डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल शुरुआती 1400 अंक से अधिक लुढ़क गया। वहीं, नैस्डैक में भी पांच फीसदी से अधिक की गिरा‌वट आई। यह 900 अंक से अधिक टूट गया। शुल्क के फैसले का असर डॉलर सूचकांक पर भी दिखा। अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला यह सूचकांक करीब दो फीसदी की गिरावट के साथ 102 पर रहा। एशियाई बाजार भी बिकवाली के दबाव में ढह गए।

सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष दलों का अंतर खत्म: बलियावी

जागरण के अनुसार वक़्फ़ संशोधन बिल के समर्थन के बाद जदयू के कुछ नेताओं का विरोध मुखर हो गया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सांसद गुलाम रसूल बलियावी ने कहा कि बुधवार की रात संसद में सभी दलों का पर्दा उठ गया। सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष दलों का अंतर समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि जल्द ही मुस्लिम संगठनों की बैठक बुलाएंगे और विचार करेंगे कि इस बिल को किस अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इधर जदयू के विधान परिषद सदस्य प्रोफेसर गुलाम गौस ने कहा कि वक़्फ़ संशोधन विधेयक मुसलमानों के जख्म पर नमक छिड़कने की तरह है। उन्होंने कहा कि कभी बाबरी- दादरी, कभी लव जिहाद, घर वापसी, तीन तलाक, सीएए/ एनआरसी, 370, मॉब लिंचिंग वगैरा का कहर बरपा किया जाता रहा है। अब वक़्फ़ की आड़ में समस्त मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। इस समाज को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पूर्वी चंपारण जिले के जदयू चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रवक्ता कासिम अंसारी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत अन्य जिम्मेदारियों से त्याग पत्र दे दिया है। संसद में वक्फ संसोधन बिल पर जदयू के द्वारा समर्थन दिये जाने को लेकर कासिम अंसारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए यह कदम उठाया है।

बीजेपी एमएलसी ने रजिस्ट्रार से तुम तड़ाक किया

प्रभात खबर के अनुसार पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की सीनेट की बैठक वाइस चांसलर प्रोफेसर शरद कुमार यादव की अध्यक्षता में हंगामे के बीच संपन्न हुई। बैठक के दौरान वीसी और रजिस्ट्रार के विवाद में भाजपा के एमएलसी नवल किशोर यादव ने रजिस्ट्रार एनके झा को अपशब्द कह डाले और मारने की बात कही। बैठक में जब कुलसचिव प्रोफेसर एनके झा पोडियम पर आए तो एमएलसी नवल किशोर यादव ने विरोध करते हुए अपशब्द कहे। कुलसचिव ने विरोध किया तो मंच पर आकर मरने तक की बात कही। इस पर पालीगंज विधायक डॉक्टर सौरभ ने कहा कि यह लड़ाई का मैदान नहीं है।

सबसे ज्यादा लापरवाह दोपहिया वाहन चालक

भास्कर की खबर है कि दोपहिया वाहन चलाते समय भागलपुर के लोग सबसे ज्यादा लापरवाही भारत रहे हैं। उसके बाद मुजफ्फरपुर का नंबर है। यातायात विभाग के अनुसार राज्य के 28 जिलों में 10 माह में 13000 से ज्यादा लोगों ने तीन से अधिक बार ट्रैफिक रूल तोड़े हैं। विभाग ने जनवरी से अक्टूबर 2024 तक रूल तोड़ने वालों की एक सूची बनाई है। इस दौरान भागलपुर में 8051 और मुजफ्फरपुर में 4966 गाड़ियों ने तीन से अधिक बार ट्रैफिक रूल तोड़े और उन्हें चालान हुआ। इनमें से चार जिले ऐसे भी हैं जहां एक ही चालक ने तीन बार से अधिक नियम को तोड़ा है। भागलपुर में एक ऐसा दोपहिया भी है जिसका 78 बार चालान हुआ है।

कुछ और सुर्खियां:

  • एम्स, दिल्ली में राजद प्रमुख लालू प्रसाद के कंधे और पीठ के घाव का सफल ऑपरेशन
  • बिहार में B.Ed. प्रवेश परीक्षा का आवेदन आज से, परीक्षा 24 मई को
  • पटना हाई कोर्ट ने 2969 लैब टेक्निशियन की बहाली पर रोक लगाते हुए बिहार सरकार से जवाब मांगा
  • आरजेडी का दावा- 80 लाख से अधिक हुए सदस्य
  • पारदर्शिता के लिए सुप्रीम कोर्ट के सभी जज अपनी संपत्ति सार्वजनिक करेंगे

अनछपी: बिहार के एक विश्वविद्यालय में तीन दिनों से अजीबोगरीब और बेहद अफसोसनाक मामला चल रहा है। यह विश्वविद्यालय मगध विश्वविद्यालय के कॉलेजों को अलग कर बनाया गया पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय है। इसके रजिस्ट्रार हैं प्रोफेसर एनके झा जिन्होंने अपने ही वाइस चांसलर प्रोफेसर शरद कुमार यादव पर धमकी देकर फाइलों पर दस्तखत करने का आरोप लगाया है और इस संबंध में एफआईआर के लिए थाने में आवेदन दे रखा है। इसके बाद वाइस चांसलर ने डीजीपी और राजभवन में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इस तरह विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और वाइस चांसलर में आरोप प्रत्यारोप चल ही रहा था कि भाजपा के एमएलसी नवल किशोर यादव ने ऐसी भाषा का प्रयोग किया जिससे पूरा शिक्षा जगत शर्मसार महसूस कर रहा होगा। दिलचस्प बात यह है कि दो अखबारों ने यह नहीं बताया कि एमएलसी नवल किशोर यादव का संबंध भारतीय जनता पार्टी से है। शिक्षा विभाग अपनी ऐसे विवादास्पद बातों के लिए पहली बार चर्चा में नहीं आया है। पूर्व शिक्षा सचिव केके पाठक के जमाने में शिक्षा विभाग और राजभवन में जिस तरह का आरोप प्रत्यारोप चला है उसकी याद एक बार फिर ताजा हो गई है। सवाल यह है कि नवल किशोर यादव ने जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया इसके लिए उन्हें क्या सजा मिलेगी? कुछ लोगों का कहना है कि नवल किशोर यादव की सदस्यता रद्द होनी चाहिए। आखिर एक शिक्षक के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है। जो विवाद वाइस चांसलर शरद यादव और रजिस्टर एनके झा का है, उसका निपटारा जरूर करना चाहिए लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई सीनेट का सदस्य जो भाजपा का विधान पार्षद भी है, रजिस्ट्रार के लिए इस तरह खुले आम अपशब्दों का प्रयोग करे। इस मुद्दे पर राज्यपाल सह चांसलर आरिफ मोहम्मद खान और शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को जरूर कोई ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। फिलहाल यह जरूरी है कि नवल किशोर यादव को उनकी अभद्र भाषा के लिए सीनेट की सदस्यता से बाहर किया जाए। रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके झा चाहें तो उन पर मारने की धमकी देने की एफआईआर भी करा सकते हैं।

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