छ्पी-अनछपी: मोदी सरकार जातीय जनगणना के लिए तैयार, वक़्फ़ क़ानून के ‘खिलाफ ब्लैकआउट’
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। लंबे टाल मटोल के बाद मोदी सरकार ने देश में जातीय जनगणना करने का ऐलान किया है। विवादास्पद वक़्फ़ कानून के खिलाफ पूरे भारत में सांकेतिक ब्लैकआउट रहा लेकिन अधिकतर अखबारों ने इस खबर को ही ब्लैक आउट कर दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह भारत के साथ व्यापार समझौते के करीब हैं। एनआईए पहलगाम हमले की हाईटेक जांच करेगी।
और, जानिएगा कि कैसे बिहार में 7.93 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन घट गया।
पहली ख़बर
भास्कर के अनुसार पहलगाम हमले के बाद जनता में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से के बीच सरकार ने जाति जनगणना की घोषणा करके चौंका दिया। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्ष में केंद्रीय कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति ने आगामी जनगणना के साथ जाति की गिनती करने का फैसला किया। आजादी के बाद पहली बार सरकार घर-घर जाकर जाति पूछेगी। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया। वहीं कांग्रेस सहित विपक्ष ने वर्षों पुरानी मांग की जीत कहा। ओबीसी की बढ़ती प्रासंगिकता के बीच यह कदम भाजपा के नीतिगत परिवर्तन को दिखाता है। यह फैसला इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ है। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा जनगणना केंद्र के अधिकार क्षेत्र में है। हालांकि जनगणना कब शुरू होगी सरकार ने इसकी तारीख़ नहीं बताई। हर 10 साल में होने वाली जनगणना 2021 में कोविड-19 के चलते टल गई थी।
जाति जनगणना के फैसले पर किसने क्या कहा:
- पहले पीएम कहते थे कि चार ही जातियां हैं, हमने कहा था जाति गणना कराएंगे, 50% आरक्षण की सीमा बढ़ाएंगे, सरकार टाइमलाइन बताए: राहुल गांधी
- जातिगत जनगणना की मांग करने पर हमें जातिवादी खाने वाले को करारा जवाब मिला: लालू प्रसाद
- यह ऐतिहासिक कदम, कांग्रेस ने इस पर सिर्फ राजनीति की: अमित शाह
- केंद्र के फैसले का स्वागत है। यह हमारी पुरानी मांग रही है: नीतीश कुमार
- जाति जनगणना पर देरी से लिया गया निर्णय: दीपंकर भट्टाचार्य
- नीतीश कुमार वर्षों से कर रहे जाति गणना की मांग: विजय चौधरी
विवादास्पद वक़्फ़ कानून के खिलाफ ब्लैकआउट
विवादास्पद वक़्फ़ कानून के खिलाफ बुधवार को 9:00 बजे रात से 9:15 बजे रात तक पूरे देश में इंसाफ पसंद लोगों ने ब्लैकआउट किया। हिन्दुस्तान में छ्पी छोटी सी ख़बर में बताया गया है कि नए वक्फ कानून के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर विभिन्न मुस्लिम बहुल इलाकों में 15 मिनट के लिए ब्लैकआउट किया गया। इनमें फुलवारी शरीफ स्थित हारून नगर, ताज एनक्लेव, नया टोला, ईसोपुर, न्यू मिल्लत कॉलोनी अपना घराना, एवं अल्वा कॉलोनी, सब्जी बाग में मुरादपुर, दरियापुर कुतुबुद्दीन लेन आदि तथा बाकरगंज के मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र में अधिकतर घरों में रात 9:00 से 9:15 तक अपने घरों की बत्ती बंद रखी। कई लोगों ने बताया कि यहां शत प्रतिशत घरों में तय वक्त के मुताबिक तमाम बत्तियों को बुझाया गया।
भारत के साथ व्यापार समझौता जल्द: ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ शुल्क पर वार्ता बहुत अच्छी चल रही है। उन्हें लगता है कि दोनों देशों में व्यापार समझौता हो जाएगा। ट्रंप ने यह टिप्पणी अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के बयान के एक दिन बाद की है। बेसेंट ने कहा था, भारत जवाबी शुल्क से बचने के लिए अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने वाले पहले देशों में शामिल होगा।
एनआईए पहलगाम हमले की हाईटेक जांच करेगी
प्रभात खबर के अनुसार पहलगाम के आतंकी हमले की जांच में तेजी आई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए की टीम भी मौके पर पहुंचकर हर एंगल से जांच में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार एजेंसी अब घटनास्थल की 3D मैपिंग करने की योजना बना रही है ताकि हमले की बारीकी से पड़ताल की जा सके। एनआईए की टीम घटनास्थल के डिजिटल मैपिंग और रिकंस्ट्रक्शन की मदद से जानने की कोशिश करेगी कि हमलावरों ने किस तरह घुसपैठ की और हमले को किस तरह अनजाम दिया गया।
बिहार में चीनी के उत्पादन में भारी कमी
हिन्दुस्तान के अनुसार मौसम की मार से गन्ने की फसल बर्बाद होने के बाद राज्य में इस वर्ष चीनी उत्पादन घट गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 7.93 लाख क्विंटल कम चीनी का उत्पादन हुआ है। सितंबर अंत में बारिश के बाद आई बाढ़ से गन्ने की फसल को काफी नुकसान हुआ। रेडरॉट बीमारी ने गन्ने की मिठास कम कर दी। गन्ना उद्योग विभाग और बिहार शुगर मिल्स एसोसिएशन की ओर से चीनी उत्पादन का आंकड़ा जारी कर दिया गया है। इसके अनुसार पेराई सत्र 2024-25 में 60.84 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ, जो एक वर्ष पहले 68.77 लाख क्विंटल रहा था। पिछले तीन वर्षों में यह सबसे कम है। वर्ष
कुछ और सुर्खियां:
- डाकघर में केवल बायोमेट्रिक से ही हर तरह के खाते खुलेंगे, आधार कार्ड और पैन कार्ड के साथ किसी और दस्तावेज की जरूरत नहीं
- कोलकाता के बड़ा बाजार के एक होटल में आग लगने से 14 लोग जिंदा जले
- पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा- भारत के साथ जंग का खतरा बढ़ रहा
- 34 साल की सर्विस में 57 बार ट्रांसफर किए गए आईएएस अधिकारी अशोक खेमका रिटायर हुए
अनछपी: पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब देश-विदेश में इस बात पर चर्चा हो रही थी कि भारत का अगला कदम क्या होगा, मोदी सरकार ने जातीय जनगणना कराने के फैसले की जानकारी दी। बहुत से लोगों को यह लगता है कि इस समय इस फैसले का ऐलान करना सही नहीं था और यह असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश के तौर पर उठाया गया कदम है। इस फैसले की सबसे ज्यादा चर्चा इस समय बिहार में होगी क्योंकि यहां विधानसभा चुनाव की घोषणा में अब बस चार ही महीने की देर है। इसकी चर्चा बिहार में इसलिए भी ज्यादा होगी क्योंकि बिहार में महागठबंधन की सरकार के समय जातीय गणना कराने का फैसला किया गया और उसे लागू भी किया गया। जातीय जनगणना के समर्थकों को इस बात की कसक रह गई थी कि इस गणना के आधार पर आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65% कर दिया गया था लेकिन इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद और दूसरे नेताओं की मांग थी कि इसे नवीं अनुसूची में शामिल किया जाए ताकि अदालत में इस मामले को चुनौती देने का आधार खत्म हो जाए। नीतीश कुमार की बिहार सरकार और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की और आरक्षण बढ़ाने का फैसला वापस हो गया। मोदी सरकार अपनी राजनीतिक चालों के लिए जानी जाती है और लोकसभा चुनाव के ठीक पहले दो लोगों- चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर- को भारत रत्न देने का फैसला उसी राजनीतिक चाल का हिस्सा माना गया था। उस वक्त यह माना गया था कि इस फैसले का चुनावी फायदा भारतीय जनता पार्टी को हुआ, हालांकि इसके बावजूद 400 पार का नारा लगाने वाली भारतीय जनता पार्टी की सीटों की संख्या कम हुई और वह 240 पर आकर टिकी लेकिन लोगों का कहना है कि अगर यह राजनीतिक चाल नहीं चली जाती तो सीटों की संख्या और कम हो सकती थी। याद दिलाने की बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी और उसके पितृ संगठन आरएसएस के बड़े नेताओं ने जातीय जनगणना को हिंदू समाज को बांटने वाला बताया था लेकिन आज यही लोग इसे मास्टरस्ट्रोक बताएं तो किसी को हैरत नहीं होगी। वैसे राजनीति में इस तरह की बातें आम हैं और विपक्षी नेता इसकी शिकायत नहीं कर सकते बल्कि उन्हें देखना होगा कि क्या मोदी सरकार ने उनके एक महत्वपूर्ण मुद्दे को खत्म कर दिया है? राहुल गांधी ने कांग्रेस के लिए इसे बेहद अहम मुद्दा बनाया था और यह भी कहा था कि जातीय जनगणना देश का एक्सरे है। इस एक्सरे से देश की हालत का तो पता चलेगा लेकिन हालात के सुधार के लिए जो कदम उठाए जाने हैं क्या सरकार उसे भी उठाएगी? अब विपक्ष के लिए यही सबसे बड़ा मुद्दा होगा क्योंकि फिलहाल जनगणना नहीं हुई है और इसे 2027 में कराए जाने की बात कही जा रही है। उसी के साथ जातीय जनगणना भी होगी और इनका रिजल्ट 2031 तक आने की संभावना जताई जा रही है। इसलिए ऐसा लगता है कि जातीय जनगणना का मुद्दा अभी मरेगा नहीं बल्कि इस पर अलग-अलग तरीके से अगले कई वर्षों तक बहस होती रहेगी।
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