छपी-अनछपी: नेतन्याहू- जिंदा हूं, ईरान- खोजकर मारेंगे, बंगाल में दो चरणों में चुनाव
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के मारे जाने के चर्चा के बीच ईरान ने कहा है कि अगर वह नहीं मारे गए हैं तो उन्हें खोज कर मारेंगे हालांकि नेतन्याहू एक वीडियो में कॉफी पीते नजर आए और उन्होंने खुद को जिंदा बताया है। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में और बाकी चार राज्यों में एक चरण में चुनाव की घोषणा की गई है। बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट के लिए तेजस्वी यादव ने ओवैसी से समर्थन लिया है जिन्हें कभी उन्होंने एक्सट्रीमिस्ट कहा था। ओडिशा के कांग्रेस विधायकों को पांच-पांच करोड़ रुपए में खरीदने की कोशिश का दावा किया गया है।
पहली ख़बर
मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष 16वें दिन में प्रवेश कर चुका है. अब जंग और भयावह होती जा रही है. अमेरिका और इसराइल के भीषण हमलों से जूझ रहा ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है. वहीं, इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया में उनके मारे जाने की चल रही खबरों के बीच एक्स पर एक वीडियो साझा करके खुद के सही-सलामत होने की पुष्टि की है. वीडियो में वे एक कॉफी शॉप पर काफी पीते और बातचीत करते हुए दिखाये गये हैं. नेतन्याहू ने कहा कि मैं जिंदा हूं. मुझे कॉफी और अपने लोगों से बहुत प्यार है. वहीं, इससे पहले इसराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ऐसे दावे को नकार दिया था और इसे फर्जी खबर करार दिया था. उधर, ईरान के आइआरजीसी ने संकल्प लिया है कि अगर वो जिंदा हैं तो वो नेतन्याहू का पीछा कर और उन्हें ढूंद कर मारेंगे. ईरानी सैन्य संगठन ने नेतन्याहू को बच्चों का हत्यारा बताते हुए कहा कि जब तक वो जिंदा हैं, पीछा किया जायेगा. ईरान ने डांसिंग मिसाइलें दागीं: इस जंग में अब तक इस हिंसक टकराव में लगभग 1,450 लोगों की मौत हो चुकी है. अरब खाड़ी देशों पर भी ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन से हमले हो रहे हैं. रविवार को ईरान की ओर से डांसिंग मिसाइलें दागने की भी खबर है, वहीं, इसराइल की सेना ने रविवार को कहा कि उसने पश्चिमी ईरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिये हैं. उधर, इराक में सक्रिय शिया मिलिशिया समूह सराया अवलिया अल-दम ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले की जिम्मेदारी ली है.
ईरान से भारतीय छात्रों का पहला समूह लौटा
हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान में तनावपूर्ण हालात के बीच फंसे 70 से अधिक भारतीय छात्र लंबी और थकाऊ यात्रा के बाद सुरक्षित भारत लौट आए। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनके पहुंचते ही परिवारों और परिचितों के चेहरों पर सुकून साफ दिखाई दिया। अपने बच्चों को देखकर कई अभिभावकों की आंखों से आंसू निकल आए। जम्मू कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने बताया कि ईरान में जारी तनावपूर्ण स्थिति के बीच फंसे भारतीय छात्रों का पहला जत्था रविवार सुबह दिल्ली पहुंचा। इन छात्रों में अधिकांश जम्मू कश्मीर के हैं, जो ईरान के विभिन्न चिकित्सा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने बताया कि छात्रों की वापसी एक लंबी और कठिन यात्रा के बाद संभव हो पाई। छात्र पहले अलग अलग शहरों से बसों के जरिए आर्मेनिया पहुंचे। वहां से ये फ्लाई दुबई की उड़ान से दुबई पहुंचे और फिर दुबई से दूसरी उड़ान के जरिए रविवार सुबह करीब 9 बजकर 45 मिनट पर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे।
बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग
जागरण के अनुसार चुनाव आयोग ने रविवार को बंगाल सहित पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों का एलान कर दिया है। बंगाल में 23 व 29 अप्रैल को दो चरणों में, तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में जबकि असम, केरल और पुड्डुचेरी में नौ अप्रैल को एक चरण में चुनाव होंगे। सभी राज्यों के नतीजे चार मई को एक साथ ही आएंगे। बंगाल में 23 अप्रैल को 152 सीटों के लिए और 29 अप्रैल को 142 सीटों के लिए मतदान होंगे।
राज्यसभा की पांचवीं सीट किसके खाते में जाएगी?
भास्कर के अनुसार जीत के दोतरफा दावों के बीच राज्यसभा की 5 सीटों के लिए सोमवार को वोटिंग होगी। रविवार की देर रात दोनों पक्ष (एनडीए, महागठबंधन) 5 वीं सीट के लिए अपने-अपने वोटों के इंतजाम में जुटे रहे। साथ में यह दावा भी करते रहे कि इंतजाम चुका है, हम जीत रहे हैं। एनडीए को पांचवीं सीट के लिए 3 वोट और महागठबंधन को 6 वोट चाहिए। इसके लिए दोनों तरफ से साम, दाम, दंड, भेद जैसे तमाम उपायों का भरपूर सहारा लिया जा रहा। महागठबंधन उम्मीदवार एडी सिंह ने 40 वोट जुटा लिए हैं तो एनडीए के 5वें उम्मीदवार शिवेश राम अब भी 38 वोट ही जुटा पाए हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को एआईएमआईएम नेता अख्तरुल ईमान के घर पहुंच समर्थन मांगा तो अख्तर ने राजद उम्मीदवार को समर्थन देने का एलान कर दिया। तेजस्वी यहां इफ्तार में पहुंचे थे। अख्तर ने कहा कि सेक्युलर जमात को वोट देने का निर्णय किया गया है। राजद उम्मीदवार एडी सिंह को एआईएमआईएम के 5 विधायक वोट देंगे।
ओडिशा के कांग्रेस विधायकों को पांच-पांच करोड़ में खरीदने की कोशिश
जागरण के अनुसार राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग की आशंका के बीच ओडिशा कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बेंगलुरु में भाजपा ने उनकी पार्टी के विधायकों को पांच-पांच करोड़ रुपये की रिश्वत देने का प्रयास किया। बेंगलुरु पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। कांग्रेस ने आठ विधायकों को क्रास वोटिंग से बचाने के लिए तीन दिन पहले बेंगलुरु भेजा था, जहां वे कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की देखरेख में हैं। शिवकुमार ने बताया कि चार संदिग्ध लोग आए थे। सुरेश की मदद से उन्होंने एक होटल में कमरा बुक कराया था जहां आठ कांग्रेस विधायक ठहरे हुए हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- चुनाव की तारीखों के ऐलान के फौरन बाद चुनाव आयोग ने बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव को हटाया
- पश्चिम बंगाल सरकार ने पुरोहितों और मस्जिदों के मासिक मानदेय में ₹500 की बढ़ोतरी की
- बिहार में आज आंधी और बारिश की चेतावनी
- पटना के मसौढ़ी में ट्यूशन से लौट रहे 10 साल और 6 साल के दो भाइयों को ट्रैक्टर ने रौंदा, दोनों की मौत
- तेलंगाना के मोईनाबाद में ड्रग्स पार्टी में आंध्र प्रदेश से तेलुगू देशम पार्टी के सांसद पुट्टा महेश कुमार यादव समेत 11 लोग गिरफ्तार
अनछपी: इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ईरान के हमले में मारे गए हों या अब भी जिंदा हों, ईरान के लिए यह बात भी एक कामयाबी है कि कम से कम ऐसी चर्चा भी हो रही है। दुनिया में आम लोग नेतन्याहू को फलस्तीन के बच्चों और आम लोगों का हत्यारा मानते हैं और उन्हें इस बात पर कोई अफसोस नहीं होगा की वह किसी हमले में मारे जाएं। ईरान ने आधिकारिक तौर पर यह दावा नहीं किया है कि नेतन्याहू हमले में मारे गए हैं लेकिन उसका यह कहना जरूर है कि अगर वह मारे नहीं भी गए हैं तो वह उन्हें ढूंढ कर मारेगा। ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमले के 16 दिन गुजर जाने के बाद भी ईरान की तरफ से इस तरह की घोषणा यह बताता है कि यह जंग जीतना उन दोनों हमलावर देशों के लिए आसान नहीं है। दूसरी तरफ यह भी सही है कि अगर नेतन्याहू हमले में मारे गए हों या आने वाले हमले में मारे जाएं तब भी फलस्तीन पर होने वाले अत्याचार में कमी लाना मुश्किल ही होगा। इसकी वजह यह है कि इस पूरे मामले में अमेरिका इसराइल का सबसे बड़ा मददगार है और उसके लिए इसराइल में दूसरा ऐसा नेता ढूंढना मुश्किल नहीं होगा। इसलिए अगर उस क्षेत्र में शांति लानी है तो किसी एक नेता के मारे जाने से वह शांति नहीं आएगी बल्कि इसके लिए पूरी दुनिया के देशों को मिलकर कोशिश करनी होगी और लंबे समय से चले आ रहे अमेरिका के उस वर्चस्व को तोड़ना होगा जिसकी वजह से वह कभी किसी देश के नेता का अपहरण कर लेता है और कभी किसी देश पर हमला कर वहां के नेता को मार देता है। शायद यह बात अमेरिकी जनता भी धीरे-धीरे समझने लगी है हालांकि ऐसा कोई संकेत नहीं है कि इसके बाद अमेरिका अब किसी और देश पर हमला नहीं करेगा। फिर भी तसल्ली की बात यह है कि इस बार अमेरिका को उस तरह का समर्थन नहीं मिला है और कई देशों ने अमेरिका की इस कार्रवाई का विरोध किया है जो पहले उसके साथ हुआ करते थे।
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