छ्पी-अनछपी: मुसलमानों के लिए काम पर नीतीश और तेजस्वी आमने-सामने, अदानी व एलआईसी का क्या रिश्ता?

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार मुसलमानों के लिए किए गए काम को लेकर आमने-सामने नजर आए। उद्योगपति गौतम अडानी के समूह पर एलआईसी से गलत तरीके से निवेश कराने का गंभीर आरोप लगा है। भाजपा नेता अमित शाह ने ध्रुवीकरण के लिए लिया खिलजी का नाम। मुजफ्फरपुर में एक रिटायर्ड प्रोफेसर के खाते से साइबर फ्रॉड ने 25 लाख रुपया निकल लिए तो आवेदन लिखते समय उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई।

और, जनिएगा कि क्या सरनेम नहीं होने से फ्लाइट में चढ़ने से रोका जा सकता है? अदालत में क्या कहा?

पहली ख़बर

भास्कर के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को राजद-कांग्रेस पर मुसलमानों के बहकावे का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके राज में मुस्लिम समुदाय के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ। उन्होंने 1989 के भागलपुर दंगा का भी जिक्र किया और कहा कि तब की सरकार दंगा रोकने में विफल रही और पीड़ितों के लिए कोई राहत नहीं दी। हमारी सरकार बनने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई और पीड़ितों को मुआवजा व पेंशन दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2005 से पहले बिहार में अक्सर सांप्रदायिक झगड़े होते थे, लेकिन उनकी सरकार बनने के बाद मुस्लिम समुदाय के लिए लगातार काम किए जा रहे हैं। 2025-26 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट 1080.47 करोड रुपए तय किया गया जो 306 गुना अधिक है। 2006 से कब्रिस्तानों की घेराबंदी की प्रक्रिया शुरू हुई और अब तक 8000 से अधिक कब्रिस्तानों की घेराबंदी हो चुकी है। श्री यादव ने युवा नेता वसीम नैयर अंसारी को अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए आयोजित समारोह में कहा कि वह अति पिछड़ा मुसलमान को सम्मान देंगे और सरकार और संगठन में पूरी भागीदारी देंगे। उन्होंने कहा कि इस बार अंसारी समुदाय को दो टिकट समेत अति पिछड़ा मुसलमान को साथ टिकट दिया गया है। तेजस्वी ने कहा, “हम मुसलमानों के साथ न्याय न्याय करेंगे। अल्पसंख्यक समाज को हर तरह से सम्मान, हक और अधिकार देने के प्रति हम सजग है। भाजपा जिस तरह से नफरत का माहौल खड़ा करना चाहती है उसे हम सभी को सचेत रहना है।”

अमित शाह बोले- अब 100 खिलजी भी …

बिहारशरीफ में शनिवार को हुई एनडीए की चुनावी सभा में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह संबोधित ने मोदी-नीतीश सरकारों की उपलब्धियां गिनायीं, तो 20 साल पहले की लालू-राबड़ी के शासन काल को बिहार के पिछड़ेपन का काण बताया। उन्होंने कहा कि नालंदा की भूमि का समृद्ध इतिहास रहा है। “महाराजा बिम्बिसार, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर जैसे महापुरुषों ने इसकी शान बढ़ायी है। पावापुरी में भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया। कुमारगुप्त ने विश्वप्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण कराया था। इसके पुस्तकालय में इतनी पुस्तकें थीं कि छह महीने तक धुआं निकलता रहा। बख्तियार खिलजी ने विनाश किया था। मोदी ने फिर से इसका निर्माण करा नालंदा की विरासत को गौरव दिया है। अब 100 खिलजी भी इसे छू नहीं सकते।”

चुनाव बुलेटिन:

  • तेजस्वी यादव के वीडियो के खिलाफ चुनाव आयोग पहुंची भाजपा, नीतीश कुमार व सम्राट चौधरी को गलत ढंग से पेश करने का आरोप
  • बिहार के 7 लाख विकलांग और वरिष्ठ नागरिक घर से दे सकेंगे वोट
  • कांग्रेस ने बिहार चुनाव के लिए समन्वय और रणनीति की जिम्मेदारी पार्टी महासचिव पूर्व राज्यसभा सदस्य अविनाश पांडे को दी
  • बिहार चुनाव प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने कहा कि महागठबंधन सरकार बनी तो एक उपमुख्यमंत्री कांग्रेस से भी होगा
  • जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पूछा, पलायन रोकने पर क्यों नहीं बोलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • लालू के बेटे तेज प्रताप बोले- महुआ में स्टेडियम बना कराएंगे भारत-पाक मैच

अदानी को कर्ज से उबारने में लगा एलआईसी

जागरण के अनुसार अदानी समूह को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट सहित अन्य आरोपों के बाद अब अमेरिकी अखबार ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने अपनी रिपोर्ट में नया आरोप लगाया है। अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि सरकारी अधिकारियों ने इस वर्ष भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) को अदानी समूह में निवेश करने के लिए प्रभावित किया था जब अदानी समूह भारी कर्ज में दबा था और अमेरिका में जांच का सामना कर रहा था। रिपोर्ट में एलआईसी द्वारा में 2025 में अदानी पोर्ट्स एंड एसईजेड में लगभग 58 करोड़ डॉलर के निवेश को रेखांकित किया गया है जिसकी भारत में सर्वोच्च ए ए ए क्रेडिट रेटिंग है। इसके जवाब में एलआईसी ने शनिवार को कहा कि उसने अदानी समूह की कंपनियों में निवेश स्वतंत्र रूप से और विस्तृत जांच पड़ताल के बाद किया है। यह निवेश उसके निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित नीतियों के अनुसार किया गया है। द वॉशिंगटन पोस्ट ने आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से रिपोर्ट में कहां है कि भारतीय अधिकारियों ने मई में एक प्रस्ताव तैयार किया था कि किस तरह सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनी एलआईसी से अदानी समूह में 3.9 अरब डॉलर का निवेश लाया जाएगा।

साइबर फ्रॉड ने 25 लाख निकाले, रिपोर्ट लिखाते समय मौत

प्रभात खबर के अनुसार मुजफ्फरपुर के काजीमोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के नया टोला निवासी रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ मुकेश प्रसाद सिंह के खाते से साइबर अपराधियों ने 25 लाख रुपये का फ्रॉड कर लिया. इसकी शिकायत करने जब वह साइबर थाना पहुंचे. यहां उन्होंने आधा आवेदन लिखा ही था कि उनको हार्ट अटैक आ गया. पुलिस की मदद से परिजन उनको हॉस्पिटल ले गये, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. डॉ मुकेश पूसा एग्रीकल्चर कॉलेज में लंबे समय तक प्रोफेसर थे और हाल में रिटायर हुए थे. वह शहर की मशहूर डॉक्टर मंजू कुमारी के भाई थे. साइबर थानेदार के नाम लिखे आधे आवेदन में रिटायर्ड प्रोफेसर ने बताया था कि अपराधियों ने उनको पीएनबी का अधिकारी बनकर 22 अक्टूबर को वाट्सएप पर एपीके फाइल भेजा. जिस पर पीएनबी बैंक के एप के लिए डिटेल्स उनसे भवराया गया.

सरनेम नहीं होने से फ्लाइट में चढ़ने से रोका जा सकता है?

जागरण के अनुसार चेन्नई की उत्तर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गल्फ एयर एयरलाइंस को आदेश दिया है कि वह तमिलनाडु के पूर्व विधायक और वकील निजामुद्दीन को नौ प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ 1.4 लाख रुपये का मुआवजा दे। एयरलाइंस ने पासपोर्ट पर सिर्फ उनके नाम के साथ सरनेम न होने की वजह से निजामुद्दीन को मास्को में फ्लाइट पकड़ने से रोक दिया था, जबकि वह भारत से उसी पासपोर्ट के साथ मास्को पहुंचे थे। पेरियापेट के रहनेवाले निजामुद्दीन के साथ नौ फरवरी, 2023 को ये घटना हुई थी। वह मास्को से बहरीन होते हुए दुबई जा रहे थे। उन्होंने दावा किया था कि भारत से मास्को की फ्लाइट उन्होंने इसी नाम और पासपोर्ट से पूरी की थी। अगले दिन दुबई में उनकी एक मीटिंग थी। आयोग ने एयरलाइंस को टिकट का पैसा 29,689 रुपये भी लौटाने को कहा।

कुछ और सुर्खियां:

  • बिहार के मुख्य सचिव ने पूरे प्रदेश में कार्बाइड गन पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का निर्देश दिया
  • दिग्गज कॉमेडियन सतीश शाह का 74 साल की उम्र में मुंबई में निधन
  • स्वास्थ्य की समस्या की वजह से इस बार पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर नहीं होगी छठ पूजा
  • छठ पर्व के दौरान बढ़े दबाव के बीच आईआरसीटीसी की वेबसाइट शनिवार को रही ठप, कई लोग नहीं बुक कर सके टिकट
  • चक्रवाती तूफान मोंथा से बिहार में भी 28 या 29 अक्टूबर को हो सकती है बारिश
  • पटना के खुसरूपुर थाना क्षेत्र में बने घाट पर गंगा में नहा रहे तीन दोस्तों की डूबने से मौत

अनछपी: टेलीविजन की तरह अखबारों में भी यह बात ध्यान देने लायक रहती है कि कौन सी खबर या तो छपी नहीं या छपी तो ऐसे ढंग से कि उसका हक अदा नहीं हुआ। आज हम एक ऐसी ही खबर पर अपनी बात रख रहे हैं जिसमें विवादस्पद उद्योगपति गौतम अदानी और एलआईसी की मिलीभगत का आरोप लगा है। आरोप है कि अमेरिका में अदानी समूह के विरुद्ध कानूनी मामला दर्ज होने के बाद कंपनी की बाजार में गिरावट थामने के लिए एलआइसी से 33,000 करोड़ रुपये निवेश कराया गया। इस बारे में कांग्रेस पार्टी ने दावा किया कि अदानी समूह को लाभ पहुंचाने के लिए एलआइसी के 30 करोड़ पालिसी धारकों की जमापूंजी का व्यवस्थित तरीके से दुरुपयोग किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तो यहां तक कह दिया कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के लाभार्थी आम जनता नहीं, प्रधानमंत्री मोदी के परम मित्र हैं। इसी वजह से इसने इस मामले की जांच संसदीय लौक लेखा समिति (पीएसी) से कराने की मांग की। इस समय बिहार में चुनाव का माहौल है और अदानी समूह की चर्चा भागलपुर के पीरपैंती में बनने वाले बिजली प्लांट की वजह से भी है जिसके बारे में विपक्ष का आरोप है के उसे दी गई बहुत बड़ी जमीन के लिए महज़ ₹1 लिया गया। विपक्ष का यह सवाल सही है कि एक आम वेतनभोगी मध्यम वर्ग का व्यक्ति जो पाई-पाई जोड़कर एलआईसी का प्रीमियम भरता है, उसकी जमा पूंजी अदानी को बेलआउट करने में क्यों लगाई जा रही? जाहिर है, इस आरोप के लगने के बाद एलआईसी ने सरकार की मंशा के मुताबिक ही इसे गलत तो करार दिया है लेकिन क्या सरकार और एलआईसी की जिम्मेदारी यह नहीं है कि इससे उपजे सारे सवालों का जवाब जनता के सामने आकर दे। भारत में एक बहुत बड़ी आबादी ऐसी है जो समझती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी ऐसे बड़े उद्योगपतियों को सरकारी मदद देकर जवाब में उनसे भी मदद लेते हैं। इस तरह दोनों तरफ से जनता मारी जाती है और नेता और उद्योगपति मालामाल होते हैं।

 

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