छ्पी-अनछपी: पटना यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की पिटाई, ट्रंप टैरिफ 10% से बढ़कर 15%

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पटना यूनिवर्सिटी के सायंस कॉलेज में क्लासरूम में प्रचार करने से मना करने पर छात्रों ने एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर हाथ चला दिया। राष्ट्रपति ट्रम्प ने यू-टर्न लेते हुए भारत समेत सभी देशों पर टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है। योगी सरकार के आलोचक शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर पॉक्सो के तहत केस होगा। बिहार में घुसपैठ के ख़िलाफ़ सात जिले बनाएंगे रणनीति।

पहली ख़बर

प्रभात ख़बर के अनुसार पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव को लेकर शनिवार को पूरे दिन हाइ वोल्टेज ड्रामा चलता रहा. पिछले दो तीन दिनों में लगातार छात्रों द्वारा किये जा रहे आचार संहिता उल्लंघन और शनिवार को पटना सायंस कॉलेज में चुनाव प्रचार के दौरान अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष से हुई मारपीट के बाद विश्वविद्यालय ने शाम 7:48 बजे चुनाव स्थगित करने का पत्र जारी कर दिया. लेकिन, इसके कुछ देर बाद 8:56 बजे विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ वीरेंद्र कुमार पासवान और फिर कुलपति प्रो नमिता सिंह ने पहले से निर्धारित तिथि 28 फरवरी को ही छात्र संघ चुनाव कराने की बात कही. कुलपति प्रो नमिता सिंह ने बताया कि चुनाव स्थगित होने की सूचना पर प्रत्याशी मिलने आये थे. उन्होंने चुनाव के दौरान आचार संहिता का पालन करने का वादा किया है. पीयू के डीन प्रो योगेंद्र कुमार वर्मा ने रात 9:35 बजे सादे कागज पर हस्ताक्षर कर अधिसूचना जारी की कि 28 फरवरी को ही छात्रसंघ चुनाव होगा.

क्लासरूम में प्रचार करने से मना करने पर प्रोफ़ेसर पर हाथ उठा दिया

पीयू संकायाध्यक्ष, छात्र कल्याण (डीन) प्रो योगेंद्र कुमार वर्मा ने शाम 7:48 बजे पत्र जारी करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में-विगत कुछ दिनों में अमर्यादित व अप्रत्याशित घटनाएं हुई हैं. उन्होंने आचार संहिता का उल्लंघन का हवाला दे हुए कहा कि 18 फरवरी को छात्रों के एक गुट ने पटना वीमेंस कॉलेज परिसर में बिना अनुमति जबरन प्रवेश कर नारेबाजी की. तय समयावधि से पूर्व ही उन्होंने बैनर पोस्टर और महंगी गाड़ियों का उपयोग कर प्रचार शुरू किया. साथ ही शनिवार को पटना सायंस कॉलेज में क्लासरूम में प्रचार करने से मना करने पर छात्रों ने असिस्टेंट प्रोफेसर शोभन चक्रवर्ती व पदाधिकारियों से मारपीट की. इन सबको लेकर छात्रसंघ चुनाव अगले आदेश तक स्थगित करने का पत्र जारी किया गया था.

ट्रंप पलटे, भारत समेत सभी देशों पर 15% टैरिफ लगाया

भास्कर के अनुसार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से टैरिफ तो खारिज हुए लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ‘टैरिफ राग’ कायम है। ट्रम्प ने शनिवार को यू-टर्न लेते हुए सभी देशों पर टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान कर फिर चौंका दिया है। इसके अनुसार 24 फरवरी से सभी देशों पर अलग-अलग टैरिफ दरों की जगह 15% का टैरिफ 150 दिन (24 जुलाई) तक रहेगा। भारतीय समयानुसार शुक्रवार देर रात कोर्ट के फैसले के बाद ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर समान 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। पर 24 घंटे बाद ही इसे 15% धारा 122 के तहत नए 15% टैरिफ लगाए हैं उसमें टैरिफ की अधिकतम सीमा ही 15% है। इस बीच, भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ पर फैसले और राष्ट्रपति ट्रम्प की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बिन्दुओं का अध्ययन किया जा रहा है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर योगी सरकार में केस

इलाहाबाद जिला न्यायालय पॉक्सो एक्ट की अदालत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य दंडी स्वामी प्रत्यक्त चैतन्य मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण के मामले में झूसी थाने में एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया है. यह आदेश शाकुंभरी पीठीधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए स्पेशल कोर्ट ने दिया है. स्पेशल कोर्ट पॉक्सो के न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने यह आदेश दिया है. न्यायालय के आदेश के बाद अब झुंसी थाने में मामला दर्ज किया जायेगा. शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच करने की मांग को लेकर कोर्ट में वाद दायर किया था। वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि हम योगी आदित्यनाथ नहीं हैं, जो अपने ऊपर लगे आरोप हटवा लें.

घुसपैठ के ख़िलाफ़ सात जिले बनाएंगे रणनीति

हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार के सात सीमाई जिले विदेशी घुसपैठ के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करेंगे। रणनीति तैयार होने के बाद गृह मंत्रालय इसकी समीक्षा करेगा। विदेश मंत्रालय के निर्देश के बाद सभी जिले इस पर एक साथ अमल करेंगे। जिलों में बनने वाली इस रणनीतिक योजना में खुफिया विभाग और विदेश प्रभाग भी सहयोग करेगा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अगले सप्ताह प्रस्तावित बिहार दौरे में इसकी समीक्षा होगी। बिहार के सात सीमाई जिलों- पश्चिम व पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से घुसपैठ के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इसकी वजह से इन जिलों में जनसांख्यिकी बदलाव आ रहा है। इसे कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है।

11 हज़ार असिस्टेंट लोको पायलट की होगी भर्ती

जागरण के अनुसार रेल मंत्रालय ने वर्ष 2026 में सहायक लोको पायलट (एएलपी) के 11 हजार 127 पदों पर भर्ती की मंजूरी दी है। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे और चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स के लिए वेतन स्तर-2 के इन पदों पर केंद्रीकृत रोजगार अधिसूचना जारी करने का निर्णय किया है। 19 फरवरी 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, रिक्तियों का जोनवार ब्योरा भी निर्धारित किया गया है। पूर्व तटीय रेलवे में सर्वाधिक 1625 तथा पूर्वोत्तर रेलवे में सबसे कम 105 पदों पर भर्ती होगी।

कुछ और सुर्खियां:

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ 10 से बढ़कर 15 फ़ीसद किया
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 और 26 को आ सकते हैं बिहार
  • दो नाम और दो मैट्रिक प्रमाण पत्र वाले पूर्व अंचल अधिकारी (सीओ) प्रिंस राज किए गए बर्खास्त
  • टी-20 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड और पाकिस्तान का सुपर 8 का मैच बारिश के कारण रद्द, दोनों को बीच एक अंक मिले
  • नेपाल के राठौर जिले में हिंसा भड़की, आगजनी के बाद कर्फ्यू लगाया गया
  • अप्रैल से टोल पर नहीं चलेगा कैश, फास्टैग और यूपीआई से ही होगी पेमेंट

अनछपी: जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए हैं तो केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय में न केवल कमी आई है बल्कि भिड़ंत बढ़ी है। ऐसा ही मामला सीबीआई के इस्तेमाल का है जिसकी कार्रवाई के लिए राज्य सरकारों की अनुमति जरूरी थी और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों ने केंद्र पर सीबीआई के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए इस अनुभूति को वापस ले लिया था। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार अब एक नया कानून लाकर इसकी कोशिश कर रही है कि सीबीआई को अनुमति लेने की जरूरत ही ना पड़े और वह जब जिस राज्य में चाहे कार्रवाई कर ले। हालांकि यह बात फिलहाल साइबर अपराध की रोकथाम के लिए और उसकी तह तक जाने के संदर्भ में की जा रही है लेकिन सवाल यह है कि ऐसे अपराधों में कार्रवाई के लिए राज्य सरकार की सहमति ले ली जाए तो इसमें क्या दिक्कत है? आखिर सीबीआई को खुली छूट देने की तैयारी क्यों की जा रही है? यह खुली छूट वास्तव में केंद्र सरकार को मिलने वाली है, जो वैसे तो कहती है कि सीबीआई पर नियंत्रण नहीं रखती लेकिन सबको हकीकत का अंदाजा है। यह भी कहा जा रहा है कि कानून में बदलाव से सियासी घमासान नहीं हो इसलिए बदलाव केवल साइबर अपराध तक के दायरे में रखा जाएगा। भले ही अभी यह केवल साइबर अपराध तक सीमित हो लेकिन दरअसल पूर्ण बदलाव दिशा में यह पहला कदम हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस विषय पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं क्योंकि यह भी दावा किया जा रहा है कि इसके बारे में राज्यों से बातचीत हो चुकी है। दरअसल सारा मामला नीयत का है और केंद्र सरकार की नीयत पर विपक्षी पार्टियों वाली राज्य सरकारों को भरोसा नहीं है।

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