छ्पी-अनछपी: भाजपा नेताओं की मुराद पूरी- 7 मंत्री बने, 50 लाख डॉलर के रास्ते अमेरिकी नागरिकता
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में भारतीय जनता पार्टी के सात और नेताओं की मुराद पूरी हुई और उन्हें मंत्री बना दिया गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकता लेने के लिए 50 लाख डॉलर यानी 44 करोड़ रुपए की कीमत लगाई है। पटना के कलेक्ट्रेट घाट में गंगा नदी में 8 बच्चे डूबे, जिनमें से चार की लाश मिली। बिहार में सहायक उर्दू अनुवादकों के लिए 1064 पद सृजित होंगे।
और, जानिएगा कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल में कितने दिन भूंजा खाएंगे।
भास्कर ने लिखा है कि चुनावी साल में आखिरकार बिहार कैबिनेट का विस्तार हो ही गया। भाजपा के सात विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। सत्ता पक्ष ने अपने हिसाब से इस विस्तार के जरिए बहुत कुछ साधने की कोशिश की। जाति, इलाका आदि का खास ख्याल रखा गया। शपथ लेने वाले मंत्रियों में दो सवर्ण, दो अति पिछड़ी और तीन पिछड़ी जाति के हैं। मंत्री पद की शपथ लेने सबसे पहले दरभंगा विधायक संजय सरावगी आए। उसके बाद क्रमवार बिहारशरीफ (नालंदा) के डॉ. सुनील कुमार, जाले (दरभंगा) के जिवेश मिश्रा, साहेबगंज (मुजफ्फरपुर) के राजू कुमार सिंह, रीगा(सीतामढ़ी) के मोतीलाल प्रसाद, अमनौर (सारण) के कृष्ण कुमार मंटू और सिकटी (अररिया) के विधायक विजय मंडल ने शपथ ली। सभी नए मंत्री विधानसभा सदस्य हैं। बुधवार की सुबह करीब 9:30 बजे जब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप जायसवाल ने मंत्री पद से इस्तीफा देने की बात कही तो साफ हो गया कि कैबिनेट विस्तार होगा। उनका इस्तीफा तुरंत मंजूर हो गया। इसी दौरान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास मंत्रियों की लिस्ट लेकर गए। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद शपथ ग्रहण समारोह का आधिकारिक ऐलान हुआ।
$50 लाख में अमेरिकी नागरिकता
जागरण के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने निवेशकों के लिए 35 वर्ष पुराने ईबी-5 वीजा की जगह 50 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 44 करोड़ रुपए) में गोल्ड कार्ड वीजा पेश करने की योजना बनाई है। इसे लेने वालों के लिए अमेरिकी नागरिकता पाने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। बुधवार को अपने दूसरे कार्यकाल की पहली बैठक में भी उन्होंने इस योजना को रखा और कहा कि अमेरिका अगर 10 लाख कार्ड भी बचेगा तो पांच लाख करोड़ डॉलर अर्जित करेगा। एक अमेरिकी मंत्री का कहना है कि गोल्ड कार्ड अमेरिका में नागरिकता देने वाले ग्रीन कार्ड के जैसा होगा।
गंगा में खेलने गए 8 बच्चे डूबे, चार की लाश मिली
प्रभात खबर के अनुसार पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र के कलेक्ट्रेट घाट पर बुधवार को गंगा नदी में वॉलीबॉल खेलने के दौरान 8 लड़के डूब गए। इस हादसे में तीन छात्रों और एक बच्चे की मौत हो गई। तीन छात्रों को नाविकों ने बांस फेंक कर बचा लिया लेकिन एक बच्चा अब भी लापता है। इस बारे में जो जानकारी मिली उसके अनुसार सुबह 9:30 बजे लॉज में रहने वाले 6 छात्र नहाने गए थे। इनमें से एक छात्र किनारे ही बैठा रहा। बाकी छात्र नहाने के दौरान वॉलीबॉल खेलने लगे। इसी दौरान कुछ बच्चे भी आ गए और उनके साथ खेलने लगे। इसी दौरान यह हादसा हुआ।
सहायक उर्दू अनुवादकों के 1064 पद सृजित होंगे
भास्कर की खबर है कि बिहार के सभी जिलों में अंचल कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट तक सहायक उर्दू अनुवादकों की नियुक्ति होगी। सरकार के स्तर से इसके लिए कुल 1064 पदों के सृजन की तैयारी चल रही है। उनकी नियुक्ति कलेक्ट्रेट स्थित जिला उर्दू भाषा कोषांग सहित सभी अनुमंडल, अंचल व प्रखंड कार्यालय में की जाएगी। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग उर्दू निदेशालय के अंतर्गत बिहार राज्य उर्दू अनुवादक संवर्ग नियमावली 2016 के अधीन नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। द्वितीय राजभाषा उर्दू के विकास व प्रचार-प्रसार सहित सरकारी कार्यालय में काम का सुगम बनाने के लिए सहायक उर्दू अनुवाकों की नियुक्ति की जानी है। सहायक उर्दू अनुवादकों के वेतन पर सरकार सालाना 68 करोड़ 70 लाख 58848 खर्च करेगी।
दोषियों के चुनाव लड़ने पर ताउम्र पाबंदी नहीं चाहती केंद्र सरकार
जागरण की खबर है कि केंद्र सरकार ने सजायाफ्ता दोषियों के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग का सुप्रीम कोर्ट में विरोध करते हुए मौजूदा 6 वर्ष के प्रबंध के कानून को सही ठहराया है। केंद्र ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर कहा है कि दोषियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाना संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। केंद्र ने कहा है कि याचिकाकर्ता की मांग के मुताबिक दोषियों के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाना उचित नहीं होगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अब चार मार्च को सुनवाई करेगा।
नरेंद्र मोदी 300 दिन भूंजा खाएंगे :लालू
हिन्दुस्तान के अनुसार राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार दौरा के दौरान दिए गए वक्तव्यों पर तंज किया और कहा कि अबकी बार तो हमारे सवालों पर प्रधानमंत्री ने साल में 300 दिन ही मखाना खाने की बात कही है। “अगली बार 350 दिन बिहारी भूंजा खाएंगे। बुधवार को जारी बयान में लालू प्रसाद ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री 100 दिन भागलपुरी सिल्क पहनेंगे। छठ मैया का व्रत करेंगे। गंगा मैया में डुबकी लगायेंगे। जानकी मैया के मंदिर जाएंगे। बिहार से बचपन का रिश्ता स्थापित करेंगे।”
कुछ और सुर्खियां:
- चैंपियंस ट्रॉफी में अफगानिस्तान ने इंग्लैंड को 8 रनों से हराया, इब्राहीम जारदान (177 रन) और अज़्मतुल्लाह (5 विकेट) जीत के हीरो
- सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए होने वाली सीयूईटी पीजी 13 मार्च से 1 अप्रैल तक
- पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भाजपा को बताया आरक्षण खोर और आरक्षण चोर
- नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने कहा लालू प्रसाद अंकल लेकिन “2005 से पहले बिहार की हालत खराब थी”
अनछपी: हर रिश्ते को कानून की मजबूरी में निभाना समाज के लिए कितना भयानक हो सकता है इसका अंदाजा इस रिपोर्ट से लगता है जिसमें बताया गया है कि एक 77 साल की मां को उसके बेटे ने अपनी जिंदगी चलाने के लिए हर महीने ₹5000 देने की अदालत की व्यवस्था को मानने से इनकार कर दिया। दरअसल पंजाब के एक फैमिली कोर्ट ने यह फैसला दिया था तो बेटे ने इसके खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में अपील कर दी। इस मामले में सबसे अफसोसनाक पहलू यह है कि आखिर एक मां को अपने बेटे से भरण पोषण के पैसों के लिए अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ा? और ऐसे रिश्तों में जब अदालत का दखल होगा तो कानूनी दांवपेच भी होगा और मां बेटे का सबसे पवित्र रिश्ता भी टूट जाएगा। क्या एक बेटे के लिए अपनी मां को कुछ पैसे देना एक स्वाभाविक बात नहीं होनी चाहिए? बेटे का तर्क यह है कि चूंकि उसकी मां उसके साथ नहीं रह रही थी इसलिए परिवार अदालत कोई आदेश पारित नहीं कर सकती। यहां सोचने की बात यह भी है कि जिस बेटे ने मां को भरण पोषण के पैसे देने के अदालती फैसले के खिलाफ अपील की है वह अपने पिता की संपत्ति का वारिस है लेकिन उसकी मां के पास आमदनी का कोई स्रोत नहीं है। ऐसे में यह सवाल पैदा होता है कि आखिर उस मां को अपने मृत पति की संपत्ति में हिस्सा क्यों नहीं मिला? कानून के जानकार बताते हैं कि नियम अनुसार पति की मौत के बाद उसकी संपत्ति में पत्नी का भी अधिकार होता है। यह पता नहीं चल पाया कि अगर हिस्सा मिला तो उस संपत्ति का क्या हुआ या ऐसा तो नहीं कि उससे कोई आमदनी नहीं पा रही। इस दुखद मामले का एक पहलू यह भी है की मां अपनी बेटी के साथ रहती है और अक्सर भाई बहन के झगड़े में मां या बाप को नुकसान उठाना पड़ता है। ठीक उसी तरह जैसे मां-बाप के झगड़े में बच्चों को नुकसान उठाना पड़ता है। सोचने की बात यह है कि जब इंसान के दिल में अपने रब का डर ना हो तो फिर ऐसी अदालती दखल की ज़रूरत पड़ती है लेकिन क्या इससे समाज का यह रोग दूर हो सकेगा?
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