छ्पी-अनछपी: सूत्रों को मिले बिहार में विदेशी वोटर, जनता बोली- पैसे ले रहे बीएलओ
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। आज के अखबारों में चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है कि बिहार में विदेशी वोटर पाए गए हैं। जनता की उस आवाज को आज जगह मिली है जिसमें लोग बीएलओ द्वारा अवैध वसूली और रिसीविंग नहीं देने की बात कह रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में 2030 तक एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने का वादा किया है। पटना में एक वकील की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई।
और, जानिएगा कि रेलवे ने अपनी परीक्षा में कल और हिजाब जैसे धार्मिक प्रतीकों के साथ शामिल होने की इजाजत दी है।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग की ओर से दावा किया गया है कि घर-घर चलाए जा रहे इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के लोग पाए जाने की जानकारी सामने आई है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि ऐसे लोगों की संख्या लाखों में है। घर-घर सत्यापन में जुटे बूथ लेवल ऑफिसर बीएलओ की इस रिपोर्ट के मद्देनजर चुनाव आयोग में ऐसे लोगों की जांच के लिए 1 से 30 अगस्त के बीच विशेष अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। यदि ऐसे लोगों की दस्तावेज गलत पाए गए तो 30 सितंबर को प्रकाशित होने वाले अंतिम मतदाता सूची से उनके नाम हटा दिए जाएंगे। चुनाव आयुक्त जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सत्यापन में लगे बीएलओ से जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार राज्य में रह रहे इन विदेशी नागरिकों में ज्यादातर ने गलत तरीके से आधार कार्ड, राशन कार्ड व मूल निवासी प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज भी हासिल कर लिए हैं। ऐसे सभी लोगों की सूची तैयार कराई जा रही है। हालांकि आयोग की ओर से विदेश की नागरिकों की मतदाता सूची में होने का कोई ब्यौरा साझा नहीं किया गया है।
तेजस्वी ने कहा, प्लांटेड दावा
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि चुनाव आयोग स्वयं सामने आने की बजाय सूत्रों के हवाले से खबर प्लांट करवा रहा है ताकि इसकी आड़ में खेला कर सके। ये वही सूत्र है जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्लामाबाद, लाहौर-कराची पर कब्जा कर चुके थे। आयोग सामने आकर स्थिति स्पष्ट करे।
फॉर्म भरने के लिए बीएलओ ले रहे पैसे
भास्कर के अनुसार बिहार में मतदाता सूची निरीक्षण कार्य में लापरवाही भी सामने आ रही है। कहीं फॉर्म की कमी है। कहीं पावती रसीद (रिसीविंग) का अभाव। बीएलओ ना घर जा रहे, ना ही ठीक से फॉर्म भरवा रहे हैं। वह खुद भी कंफ्यूज हैं। नतीजा लोगों में असमंजस है। रविवार को राजभर में भास्कर के 100 से अधिक रिपोर्टों ने पुनरीक्षण कार्य का जायजा लिया। कहीं भी पावती रसीद नहीं दी जा रही है। ना ही घरों पर स्टिकर चिपकाए गए। अधिकांश जगहों पर बीएलओ घर जाने की बजाय किसी पेड़ या सरकारी भवन पर बैठे दिखे। कई मतदाता सिर्फ आधार लेकर पहुंचे। उन्हें दस्तावेजों की जानकारी नहीं थी। कई फॉर्म नहीं भर पा रहे थे। हद तो यह है कि बीएलओ अधूरे फॉर्म भी जमा कर रहे हैं। गया जिले के मानपुर प्रखंड में जनता के संवैधानिक अधिकार भी चाय पानी के नाम पर बेचे जा रहे हैं। मामला मध्य विद्यालय नौरंगा के बूथ संख्या 119 का है। यहां बीएलओ गौरीशंकर मतदाता प्रपत्र ऑनलाइन करने के एवज में पैसे मांग रहे थे। वसूली का उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
सरकार की कठपुतली बन चुका है चुनाव आयोग: सिब्बल
जागरण के अनुसार राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग हमेशा मोदी सरकार के हाथों की कठपुतली रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया असंवैधानिक है और उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बहुसंख्यक सरकारी सत्ता में बनी रहे। सिब्बल ने कहा कि हर चुनाव आयुक्त इस सरकार के प्रति अपनी वफादारी में पिछले से आगे निकल जाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को नागरिकता के मुद्दे पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह संशोधन 22 वर्षों के बाद हो रहा है जिसका उद्देश्य आरोग्य मतदाताओं को हटाना और योग मतदाताओं को शामिल करना है। सिब्बल ने कहा कि यह प्रक्रिया गरीबों, हाशिए पर रहने वालों और आदिवासियों के नाम हटाने का एक तरीका है जिससे बहुसंख्यक पार्टी हमेशा जीतती है।
2030 तक एक करोड़ नौकरी और रोजगार का वादा
प्रभात खबर के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा है कि अगले 5 साल में 2025 से 2030 तक वर्ष 2020-25 के लक्ष्य को दुगना करते हुए एक करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य तय किया जा रहा है। इसके लिए निजी विशेष कर औद्योगिक क्षेत्र में भी नौकरी और रोजगार के नए और सर्वजीत किए जाएंगे। इसे लेकर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जा रहा है। उन्होंने लिखा है कि आने वाले समय में कौशल विकास के लिए एक कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इसका नाम बिहार के गौरव भारत रत्न जननायक कर्पूरी उठाया ठाकुर के नाम पर होगा।
पटना में दिनदहाड़े वकील की हत्या
भास्कर के अनुसार पटना जिले के सुलतानगंज थाना से करीब 1 किलोमीटर दूर अशोक राजपथ महेंद्रू ट्रेनिंग कॉलेज के पास अपराधियों ने वकील जितेंद्र मेहता को गोलियों से दिनदहाड़े भून डाला। बाइक पर सवार हथियारबंद अपराधियों ने रविवार को दिन में करीब 3:00 बजे 50 साल के जितेंद्र को उस वक्त बीच सड़क पर निशाना बनाया जब वह चाय पीकर लौट रहे थे। हेलमेट पहने शूटरों ने पहले उन्हें एक गोली मारी जिससे वह इंडियन बैंक के पास गिर गए। इसके बाद उनके सर और सीने में दो गोली मारी। उन्हें पीएमसीएच ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हत्या करने के बाद दोनों अपराधी बाइक से पास की ही गली से होते हुए हथियार लहराते हुए फरार हो गए।
पगड़ी और हिजाब पहन कर भी दे सकते हैं रेलवे की परीक्षा
जागरण के अनुसार रेलवे भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए कई पुराने नियम बदले गए हैं। पहले परीक्षा के दौरान धार्मिक प्रतीकों को पहन कर परीक्षा केंद्रों में जाने की अनुमति नहीं थी। कारण था इलेक्ट्रॉनिक गैजेट छिपा कर नकल करने की आशंका जिससे परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी। अभ्यर्थियों की आस्था को देखते हुए यह प्रतिबंध हटा लिया गया है। परीक्षार्थी पगड़ी, हिजाब, कड़ा और क्रॉस लॉकेट जैसे प्रतीकों को भी धारण कर परीक्षा केंद्रों में जा सकते हैं बशर्ते उनके ऐसा करने से सुरक्षा मानकों का उल्लंघन ना होता हो।
कुछ और सुर्खियां:
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अनछपी: ऐसा लगता है कि बिहार में चुनाव आयोग केवल एसआईआर यानी मतदाता गहन पुनरीक्षण नहीं कर रहा है बल्कि माइंड गेम भी खेल रहा है। एक तो चुनाव आयोग अब तक न जाने कितनी बार अपने आदेशों में बदलाव ला चुका है लेकिन उसका दावा है कि उसके नियम में कोई तब्दीली नहीं आई है। दूसरी और उसकी तरफ से सूत्रों का हवाला देकर बहुत सी विवादास्पद जानकारी भी जारी की जा रही है। इन्हीं सूत्रों के हवाले से आज अखबारों में खबर छपी है कि चुनाव आयोग का यह मानना है कि बिहार में बहुत से विदेशी वोटर पाए गए हैं। यह एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है और यह एक अलग बहस है कि इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार माना जाना चाहिए लेकिन असल बात यह है कि इतनी महत्वपूर्ण जानकारी सूत्रों के हवाले से क्यों लीक की गई और चुनाव आयोग ने इसकी जानकारी औपचारिक रूप से क्यों नहीं दी? दिलचस्प बात यह है कि जब इसके बारे में बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह खबर सही है या नहीं, इस मामले की जांच चल रही है। अब सवाल यह है कि ऐसे में अगर तेजस्वी यादव गुस्से में यह बात कहते हैं कि वह ऐसे सूत्रों को मूत्र मानते हैं तो उनके इस शब्द के प्रयोग पर तो आपत्ति हो सकते हैं लेकिन उनकी भावना से कौन इनकार कर सकता है। चुनाव आयोग दरअसल बिहार के लाखों लोगों को लावारिस समझ रहा है और वह समझता है कि वह उन्हें जैसे चाहेगा हांक देगा। इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी इतिहास लिखा जाएगा कि वह कैसे उस घड़ी में चुप्पी साधे रहे जब बिहार के लाखों बेसहारा लोग चुनाव आयोग के रहमो करम पर जी रहे थे। चुनाव आयोग को या तो इस खबर को औपचारिक रूप से मीडिया को बताना चाहिए या इस खबर को गलत घोषित करना चाहिए। मीडिया कवरेज के बारे में यह बात याद रखने की रहेगी कि अक्सर मीडिया आउटलेट्स ने इसे चुनाव आयोग के सूत्रों का दावा बता कर नहीं दिखाया बल्कि ऐसे पेश किया जैसे उसकी बात औपचारिक रूप से सत्यापित हो चुकी है। चुनाव आयोग को उन सूत्रों का नाम भी बताना चाहिए जिन्होंने इस तरह की चीज़ें मीडिया में लीक की हैं। अगर चुनाव आयोग में निष्पक्षता और पारदर्शिता का जरा भी ख्याल है तो वह इस तरह की हरकतों पर काबू करे। वैसे अब तक के रिकॉर्ड को देखते हुए इस बात की आशंका है कि चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से कुछ और विवादास्पद खबरें आ सकती हैं। ऐसे में विपक्षी दलों के साथ-साथ आम लोगों को भी सतर्क रहना होगा।
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