छ्पी-अनछपी: तेजस्वी का नाम क्लियर- शिंदे बन जाएंगे नीतीश? सीतामढ़ी का गैंगस्टर दिल्ली में ढेर

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। तेजस्वी यादव का नाम मुख्यमंत्री के लिए महागठबंधन द्वारा सामूहिक रूप से क्लियर करने के बाद अब एनडीए इस सवाल के घेरे में आ गया है कि क्या वह नीतीश कुमार का नाम अगले मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करेगा। सीतामढ़ी के इनामी गैंगस्टर रंजन पाठक समेत 4 अपराधियों को दिल्ली में एनकाउंटर में करने का दावा किया गया है। कर्नाटक में वोट चोरी की जांच कर रही इस इट ने बताया है कि हर वोट काटने के लिए ₹80 वसूले गए थे।

पहली ख़बर

प्रभात खबर के अनुसार विधानसभा चुनाव के बाद कौन बनेगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री. इसको लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा नेता व गृहमंत्री अमित शाह से सवाल पूछा है. उन्होंने कहा कि शाह को बताना चाहिए कि चुनाव के बाद एनडीए का मुख्यमंत्री कौन होगा. कहीं महाराष्ट्र के मॉडल का प्रयोग तो बिहार में नहीं किया जायेगा. (ध्यान रहे कि महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी शिवसेना से अलग हुए नेता मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के चेहरे पर चुनाव लड़ी लेकिन चुनाव के बाद उसने अपनी पार्टी के देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया।) कांग्रेस के वरीय पर्यवेक्षक अशोक गहलोत गुरुवार को पटना के एक स्थानीय होटल में महागठबंधन के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बताया कि देश के सत्ता में बैठी भाजपा लोकतंत्र का मुखौटा पहन रखा है. ये लोग शाम-दाम-दंड-भेद का प्रयोग कर रहे हैं. इधर, सीएम फेस बने तेजस्वी ने कहा कि एनडीए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सीएम फेस क्यों घोषित नहीं कर रही है. मुझे पूरा यकीन है कि नीतीश कुमार का यह अंतिम चुनाव है. उनकी पार्टी के लोग भाजपा के लिए काम कर रहे हैं. अब तक उनकी संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस क्यों नहीं हुई. राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि बिहार से सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ संदेश जाना चाहिए।

जब तक भाजपा को तोड़ेंगे नहीं, छोड़ेंगे नहीं: मुकेश सहनी

वीआईपी के संयोजक मुकेश सहनी ने कहा कि साढ़े तीन साल से हम एवं हमारे कार्यकर्ता इस समय का इंतजार कर रहे थे. भाजपा ने हमारे विधायकों को तोड़, पार्टी को तोड़ा मुझे सड़क पर ले आया. उसी वक्त हमने बिहार में यात्रा की गंगाजल हाथ में लेकर संकल्प लिया था कि जब तक भाजपा को तोड़ेंगे नहीं, उसे छोड़ेंगे नहीं. अब समय आया है भाजपा को तोड़ेंगे और बिहार से बाहर करेंगे. यहां महागठबंधन की सरकार बनेगी. महागठबंधन मजबूत से एकजुट है।

तीन सीटों पर महागठबंधन की फ्रेंडली फाइट खत्म हुई

प्रभात खबर के अनुसार महागठबंधन में सुलह के बीच गुरुवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद नामांकन वापस लेने का सिलसिला शुरू हुआ. सबसे पहले नवादा जिले की वारिसलीगंज सीट से कांग्रेस के सतीश कुमार ने नाम वापस लिया. यहां से राजद की अनीता देवी मैदान में हैं. वहीं, कटिहार जिले की प्राणपुर सीट से तौकीर आलम ने नाम वापस ले लिया. यहां से राजद की इशरत परवीन मैदान में हैं. मधुबनी जिले की बाबूबरही सीट से वीआइपी की प्रत्याशी बिंदु गुलाब यादव ने भी नाम वापस ले लिया है. इन सबके बीच अटकलें थीं कि कैमूर जिले की चैनपुर सीट से वीआईपी के गोविंद बिंद या राजद के बृज किशोर बिंद अपने नाम वापस लें, पर ऐसा हुआ नहीं और दोनों मैदान में हैं.

चुनाव बुलेटिन:

  • टिकट बंटवारे में कांग्रेस नेताओं में असंतोष के बीच कृष्णा अल्लाह वरुण युवा कांग्रेस प्रभारी पद से हटाए गए
  • बिहार में सबसे अधिक 17128 प्रवासी मतदाता पूर्णिया में, पटना के प्रवासी मतदाता 14462, इन सब के नाम वोटर लिस्ट से हटाए
  • सीपीआई ने पहले चरण के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में उतारे
  • चिराग पासवान बोले- 14 नवंबर के बाद नीतीश को सीएम पद की शपथ दिलाई जाएगी
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज समस्तीपुर में फूकेंगे चुनाव अभियान का बिगुल
  • महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव आज से शुरू करेंगे चुनाव प्रचार
  • भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह आज सिवान और बक्सर में करेंगे चुनावी जनसभा

सीतामढ़ी का गैंगस्टर दिल्ली में ढेर
भास्कर के अनुसार दिल्ली के रोहिणी इलाके में बिहार एसटीएफ, दिल्ली पुलिस और सीतामढ़ी पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन में बिहार के 4 कुख्यात बदमाशों का एनकाउंटर कर दिया। चारों बदमाश की पहचान सीतामढ़ी के कुख्यात रंजन पाठक, उसके गुर्गे अमन ठाकुर, विमलेश महतो और मनीष पाठक के रूप में हुई। रंजन पाठक और मनीष पाठक दोनों साग चचेरा भाई है। चारों कुख्यात उत्तर बिहार में सिग्मा एंड कंपनी गिरोह चलाते थे। पुलिस की टीम ने गुरुवार की सुबह रोहिणी इलाके में घेराबंदी कर इन सबों को गिरफ्तार करने की कोशिश की पर इन सबों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। करीब 10 राउंड फायरिंग के बाद पुलिस ने मोर्चा संभाला और जवाबी गोलीबारी की। पुलिस की गोली से चारों गंभीर रूप से घायल हो गए। चारों को रोहिणी स्थित डॉ. बीएसए अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। इन चारों के पास से पुलिस ने एके-47 समेत कई आधुनिक हथियार, तीन पिस्टल, एक देसी कट्टा और एक फर्जी नंबर की कार बरामद की है।

कर्नाटक में वोट चोरी: एसआईटी ने किया अहम दावा

जागरण के अनुसार कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनावों में आलंद विधानसभा क्षेत्र में कथित ‘वोट चोरी की जांच कर रही एसआइटी ने पाया है कि मतदाता सूची से नाम काटने के प्रयास किए गए थे और इस घोटाले में शामिल कम से कम छह संदिग्धों की पहचान कर ली गई है। सीआइडी के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि प्रत्येक काटे गए नाम के लिए संदिग्धों को 80 रुपये का भुगतान किया गया था। 6, 994 नाम काटने के आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन कुछ वास्तविक मामलों को छोड़कर अन्य आवेदन फर्जी थे। कांग्रेस ने बताया कि 6,018 आवेदन फर्जी थे. जिसके लिए कुल 4.8 लाख रुपये का भगतान किया गया था। ये फर्जी आवेदन कलबुर्गी स्थित एक डाटा सेंटर से भेजे जा रहे थे।

कुछ और सुर्खियां

  • झारखंड में सहारा समूह की कंपनियों से जुड़े 400 करोड़ के फर्जीवाड़ा मामले में सहारा प्रमुख सुब्रत राय के बेटों को भारत लाने की तैयारी
  • पटना जिले के दनियावां में छठ घाट के पास पैन में नहा रहे तीन बच्चे की डूबने से मौत
  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध, भारत की चुनौती बढ़ी
  • अगले चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया होने वाले जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू 23 नवंबर को रिटायर होंगे वर्तमान चीफ जस्टिस बीआर गवई

अनछपी: दिल्ली में पुलिस ने जिस रंजन पाठक को तीन और अपराधियों के साथ मुठभेड़ में मार गिराने का दावा क्या है उसके बारे में सबसे अहम बात यह है कि वह उस समय 5 साल का था जब नीतीश कुमार 2005 में दोबारा मुख्यमंत्री बने थे। एक अपराधी की उम्र की चर्चा नीतीश कुमार के दोबारा मुख्यमंत्री बनने से इसलिए जुड़ा हुआ है क्योंकि नीतीश कुमार का यह दावा रहा है कि उन्होंने पिछले 20 साल में बिहार से अपराध को समाप्त कर दिया है और अगर कभी कोई अपराधिक घटना होती थी तो उनकी दलील यह होती थी कि यह ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नहीं है। बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने इस मुठभेड़ के बारे में यह बताया कि रंजन पाठक के नेतृत्व वाले इस गिरोह ने अपना नाम सिग्मा एंड कंपनी रखा था जो लगभग हर महीने अपराध की घटना को अंजाम दे रहा था। डीजीपी का यह बयान दरअसल एक कबूलनामा है के बिहार में संगठित अपराध खत्म नहीं हुआ और ध्यान देने की बात यह भी है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। रंजन पाठक पर ₹50000 का इनाम घोषित था और उसके गैंग पर कई लोगों के मर्डर और कई जगह से रंगदारी मांगने व लूट का केस है। रंजन के अलावा मुठभेड़ में मारे गए दूसरे बदमाशों में से अमन ठाकुर की उम्र 21 साल, विमलेश महतो की 25 साल और मनीष पाठक की उम्र 33 साल थी। नीतीश कुमार और उनके समर्थक बराबर 2005 से पहले के बिहार और राजद के शासनकाल की याद दिलाकर लोगों में भय डालने और तेजस्वी यादव के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करते हैं लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि बिहार में अपराध की जितनी घटनाएं अब हो रही हैं वह सभी अपराधी नीतीश कुमार के पिछले 20 साल के शासनकाल में ही पले बढ़े हैं। हाल की घटनाओं में पटना के पारस अस्पताल में जिस तरह दिनदहाड़े खुले आम गोलियों की बौछार की गई और जिस तरह पटना के एक उद्योगपति का मर्डर हुआ उसे यह बात जाहिर है कि नीतीश कुमार संगठित अपराध को भी रोकने में नाकाम रहे हैं। उनके दावे को ऐसी घटनाएं चुनौती देती हैं जिनमें वह कहते हैं कि बिहार में आपसी रंजिश में अपराध होता है और संगठित अपराध खत्म हो चुका है। इस एनकाउंटर का एक पहलू यह भी है कि बिहार के डीजीपी का कहना है कि मारे गए अपराधी सुपारी किलर थे और चुनाव में व्यवधान डाल सकते थे। इससे यह शक पैदा होता है कि क्या इस गैंग का कोई राजनीतिक कनेक्शन भी था। बहरहाल विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव बार-बार यह कहते रहे हैं कि पिछले 20 सालों में बिहार में 70000 हत्याएं हुई हैं। इन बातों से नीतीश कुमार के उस दावे को कड़ी चुनौती मिलती है जिसमें वह बिहार में क्राइम कंट्रोल का दावा करते हैं।

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