छ्पी-अनछपी: तीन करोड़ वोटरों को देना होगा सर्टिफिकेट, वक़्फ़ क़ानून को कूड़ेदान दिखाया गया
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार के लगभग तीन करोड़ वोटरों को 26 जुलाई तक जन्म स्थान का प्रमाण पत्र देना होगा नहीं तो उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा। पटना में आयोजित वक़्फ़ बचाव संविधान बचाओ सम्मेलन में विवादास्पद वक़्फ़ कानून को कूड़ा दान दिखाया गया। झारखंड और उत्तराखंड में भारी बारिश से तबाही की खबरें हैं। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि बिना अनुमति घर को प्रार्थना घर में नहीं बदला जा सकता।
और, जानिएगा कि बिहार में हर दिन औसतन कितने लोगों की सड़क हादसे में जाती है जान।
पहली खबर
जागरण के अनुसार निर्वाचन आयोग जल्द ही 2003 की बिहार की मतदाता सूची को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा ताकि लगभग 4.96 करोड़ मतदाता जिनके नाम इसमें शामिल है वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए नामांकन प्रपत्र के साथ संलग्न करने के लिए अपने नाम से संबंधित हिस्से को निकाल सकें। ऐसी सूरत में इन मतदाताओं को अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान साबित करने के लिए कोई भी दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है। इनके अलावा राज्य में बच्चे और करीब तीन करोड़ मतदाता ऐसे मतदाताओं को सत्यापन के लिए अपना जन्म स्थान या जन्मतिथि का प्रमाण पत्र देना होगा। इसके अलावा यदि किसी मतदाता के माता या पिता में से कोई भी एक जनवरी 2003 तक मतदाता सूची में शामिल रहा है तो ऐसे व्यक्ति को इस विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नामांकन के लिए उनसे संबंधित किसी भी दस्तावेज को प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी चाहे उसे व्यक्ति की जन्म तिथि कुछ भी हो।
इन प्रमाण पत्र को नहीं माना जाएगा
हिन्दुस्तान के अनुसार पटना के डीएम डॉक्टर एस त्यागराजन ने बताया कि मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान भारत निर्वाचन आयोग ने जिन दस्तावेजों को मान्यता दी है उसे ही जमा किया जा सकता है। आधार कार्ड, पैनकार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस को दस्तावेज की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
वक़्फ़ कानून को कूड़ादान दिखाया गया
भास्कर के अनुसार इमारत-ए-शरीया के प्रमुख फैसल रहमानी ने गांधी मैदान में आयोजित ‘वक़्फ़ बचाओ, संविधान बचाओ’ सम्मेलन में लोगों को संकल्प दिलाया कि केंद्र सरकार जब तक वक़्फ़ का काला कानून वापस नहीं लगी तब तक संघर्ष जारी रहेगा। बिहार, झारखंड, ओडिशा और बंगाल समेत कई राज्यों से आए लोगों ने उनकी बातों पर लब्बैक कहा। रहमानी ने कहा, किसान आंदोलन की तरह एकजुट होकर विरोध करेंगे। दिल्ली से लेकर देश के अन्य राज्यों में विरोध प्रदर्शन होगा। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन की सरकार बनी तो वक़्फ़ कानून बिहार में लागू नहीं करेंगे और उसे कूड़ादान में डाल देंगे। उन्होंने कहा कि वक़्फ़, संविधान के साथ-साथ वोट के अधिकार को बचाने के लिए सजग रहना है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि केंद्र सरकार वक़्फ़ की जमीन कब्जा करने के बाद अपने धन्नासेठों को देना चाहती है। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि काली टोपी पहनने वाले आरएसएस ने काला कानून लाया है। उन्होंने कहा कि गरीब मुसलमानों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि वक़्फ़ की जमीन उन्हें दी जाएगी पर जो छत पर नमाज पढ़ने नहीं दे रहे हुए, वह मुसलमानों को जमीन क्या देंगे।
झारखंड और उत्तराखंड में भारी बारिश से तबाही
हिन्दुस्तान के अनुसार झारखंड के कई जिलों में शनिवार रात से जमकर बारिश हुई। इस बारिश ने जमकर तबाही मचाई। दर्जनों घर और पुल-पुलिया ध्वस्त हो गए। इस बीच, पूर्वी सिंहभूम के पोटका के पांडरशुली स्थित लव कुश आवासीय विद्यालय में गुड़रा नदी में आई बाढ़ का पानी रविवार तड़के घुस गया। बाढ़ के इस पानी में स्कूल में रह रहे 162 बच्चे फंस गए। इसके बाद चीखपुकार मच गई। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद सभी को सुरक्षित निकाला गया। जिस समय पानी घुसा, उस समय बच्चे सो रहे थे। नींद खुली तो चारों तरफ पानी देख बच्चे शोर मचाने लगे। चीख-पुकार सुन वार्डन जगीं और हिम्मत दिखाते हुए सभी को लेकर छत पर दौड़ पड़ीं। छत पर बैठे बच्चों ने तत्काल परिजनों को फोन पर जानकारी दी। उन्होंने बगैर समय गंवाये रेस्क्यू शुरू कर दिया। सुबह आठ बजे तक सभी बच्चों को निकाल लिया। उत्तराखंड में शुक्रवार रात से ही हो रही मूसलाधार बारिश से एक दर्जन से अधिक स्थानों पर भूस्खलन हो गया है। मलबा आने से 150 से अधिक सड़कें बंद चल रही हैं। लोक निर्माण विभाग के एचओडी राजेश शर्मा ने बताया कि कि राज्य में भूस्खलन की वजह से बंद सड़कों को खोलने के लिए 450 से अधिक जेसीबी मशीनों को तैनात किया गया है।
बिना अनुमति घर को प्रार्थना घर में नहीं बदल सकते
जागरण के अनुसार मद्रास हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अथॉरिटीज की इजाजत के बिना घर को प्रार्थना घर में तब्दील नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पादरी की ओर से हलफनामा दाखिल कर लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन का इस्तेमाल किए बिना शांतिपूर्ण ढंग से घर में प्रार्थना करने का भरोसा दिलाए जाने के बावजूद उसे घर को प्रार्थना घर की तरह इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी। कोर्ट ने कहा कि मूल मुद्दा यह है की याचिकाकर्ता अपने घर को प्रार्थना घर में तब्दील नहीं कर सकता। यह फैसला मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश एन आनंद वेंकटेश ने तमिलनाडु के तिरुवर जिले के कोटा वेसल तालुका के पादरी एल जोसेफ विलियम्स की याचिका निपटाते हुए दिया। अधिकारियों ने घर में प्रार्थना सभा से आसपास के लोगों को हो रही परेशानी की शिकायत पर परिसर को सील कर दिया था।
बिहार में हर दिन सड़क हादसों में 21 लोगों की जाती है जान
प्रभात खबर के अनुसार बिहार में सड़क सुरक्षा का 50% काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है वहीं 60% साइनेज और अन्य यातायात नियमों का पालन सड़कों पर नहीं दिखता है। इस कारण सड़कों पर दुर्घटनाएं प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही हैं। सड़क दुर्घटना के शिकार होने वालों में पैदल चलने वाले, बाइक चलाने वाले और सड़क पार करने वालों की संख्या बढ़ी है। परिवहन विभाग के मुताबिक बिहार में हर रोज कम से कम 27 सड़क हादसे हो रहे हैं और इसमें औसतन 21 लोगों की जान जा रही है। बीते 8 वर्षों में बिहार में 80000 सड़क हादसे हुए और उसमें 60000 से अधिक लोग जान गवा चुके हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- ओडिशा के पुरी में गुंडिचा मंदिर के पास रथ यात्रा के दौरान मची भगदड़ में तीन लोगों की मौत, 50 घायल
- रेलवे का रिजर्वेशन चार्ट अब 8 घंटे पहले जारी होगा
- पटना समेत बिहार के 12 जिलों में आज बारिश और बिजली गिरने के आसार
- बिहार की पंचायत में 8093 क्लर्कों की बहाली प्रक्रिया जुलाई में शुरू होगी
अनछपी: एक तरफ दुनिया में तरह-तरह की तरक्की की खबरें आती है और अमेरिका दुनिया का नेतृत्व करने का दावा करता है तो दूसरी तरफ दुनिया के कई इलाकों से भूख और गरीबी की खबर आती है। एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में एक अरब से ज्यादा लोग भूख और गरीबी के साए में जी रहे हैं। कई लोग तो ऐसे हैं जो बस मरने का इंतजार कर रहे हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समय दुनिया के 39 देशों में युद्ध और दूसरे तरह का संघर्ष हो रहा है जिससे वहां तेजी से गरीबी और भुखमरी बढ़ रही है। वर्ल्ड बैंक की नई रिपोर्ट के अनुसार यह देश अब बाकी दुनिया की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पिछड़ते जा रहे हैं। यानी एक तरफ दुनिया के बड़े-बड़े देश विकास कर रहे हैं तो दूसरी और ऐसे कम् से कम 39 देश हैं जो बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हो रहे हैं। इनमें से अधिकतर देश अफ्रीका में है। वर्ल्ड बैंक का कहना है कि लोगों का ध्यान यूक्रेन रूस युद्ध और मध्य पूर्व पर है लेकिन 70% से अधिक संघर्षरत आबादी अफ्रीका में है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार काम से कम 42 करोड़ लोग इस समय संघर्ष और अस्थिरता से जूझते देश में हर दिन $3 से भी कम पर गुजर बसर कर रहे हैं। वैसे तो यह रिपोर्ट अफ्रीका के बारे में है लेकिन बिहार की भी एक बड़ी आबादी ऐसी है जो रोजाना लगभग इतने पैसे ही कमा पाती है। यह कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए के भारत के दूसरे राज्यों की तुलना में बिहार अब भी विकास के मामले में काफी पीछे है और यहां के लोग आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के संदर्भ में हम अमेरिका का उल्लेख इसलिए कर रहे हैं कि वह इस समय दुनिया का बादशाह बना हुआ है और दुनिया के नेतृत्व का दावा करता है लेकिन उसके नेतृत्व में आम लोगों की इतनी बड़ी आबादी तंगहाल है। ऐसे में सवाल यह है कि जब दुनिया कितनी बड़ी आबादी परेशान है तो कुछ देशों के विकास को हम मानवता का विकास कैसे मान सकते हैं।
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