अब शहाबुद्दीन की कब्र पर विवाद, बेटे-पत्नी को जदयू में आने का आॅफर

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट पटना

सीवान के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन के व्यक्तित्व से जुड़ा विवाद उनकी मौत के बाद भी जारी है। विवाद उनकी कब्र तक जा पहुंचा है।

राजद के क़द्दावार नेता रहे शहाबु्द्दीन से जुड़ा नया विवाद उनकी क़ब्र को पुख़्ता करने को लेकर है। उनकी मौत 1 मई को दिल्ली के पंडित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई थी। कहते हैं, 53 वर्षीय बाहुबली नेता को कोरोना हो गया था। लेकिन इसको लेकर भी विवाद है कि उन्हें कोरोना हुआ था या नहीं। वो हत्या के एक मामले में दिल्ली के तिहाड़ जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे थे। तबीयत खराब होने पर उन्हें इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। विवाद इसपर भी है कि उन्हें एम्स दिल्ली में भर्ती क्यों नहीं कराया गया।

शहाबुद्दीन की मौत के बाद परिजन उन्हें कफन-दफन के लिए आबाई वतन सीवा लेकर जाना चाहते थे। लेकिन इसकी इजाजत नहीं मिली। इसके बाद उन्हें दिल्ली गेट स्थित जदीद कब्रिस्तान में सुपर्दे खाक किया गया।

परिजन शहाबुद्दीन की कब्र को पुख्ता कराना चाह रहे थे। इसके लिए कब्रिस्तान में बालू, गिट्टी, सीमेंट, ईंट और लोहे लाकर रख दिए गए। कब्र के चारों तरफ दीवारें भी खड़ी कर दी गईं। इसी बीच जदीद कब्रिस्तान कमिटी ने शहाबुद्दीन की कब्र को पुख्ता करने के काम पर रोक लगा दी। दरअसल, 1992 में ही कब्रिस्तान कमिटी ने एक नियम बनाकर जदीद कब्रिस्तान में कब्र को पुख्ता करने पर रोक लगा दी थी। कमिटी का कहना है कि यहां जमीन की कमी और कोरोना से लगातार हो रही मौत की वजह से पुख्ता कब्र बनाने पर रोक लगी हुई है।

दूसरी तरफ सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू ने मो. शहाबुद्दीन की पत्नी हेना शहाब और बेटे ओसामा को सत्ताधारी दल में शामिल होने की पेशकश की है। जदयू एमपी कविता सिंह के पति अजय सिंह ने कहा है कि हेना और ओसामा को अगर जेडीयू के सिद्धांत और विचारधारा के साथ-साथ नीतीश कुमार की कार्यशाली पसंद है तो पार्टी उनका स्वागत करेगी।

दिलचस्प बात है कि मो. शहाबुद्दीन आखिर आखिर तक नीतीश के आलोचक और लालू के समर्थक रहे थे। अब देखना है जदयू के आॅफर पर भाजपा और राजद में क्या प्रतिक्रिया होती है।

पाॅलिटिकल डेस्क, बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना।

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