छ्पी-अनछपी: बिलकीस बानो के गुनहगारों की माफी सुप्रीम कोर्ट से रद्द, शिक्षा मंत्री के बयान से बवाल

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिलकीस बानो गैंगरेप मामले के जिन दोषियों को गुजरात सरकार ने माफी देकर रिहा कर दिया था, उनकी माफी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने की खबर पहले पेज पर है। बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के मंदिर जाने को गुलामी बताए जाने के बयान पर बवाल मचा है। इस विवाद को सभी अखबारों ने अच्छी जगह दी है।

जागरण की सबसे बड़ी खबर है: बिलकीस बानो कांड के सभी 11 दोषी, फिर से जाएंगे जेल। भास्कर की सुर्खी है: बिलकीस के गुनहगारों की रिहाई कोर्ट के साथ धोखाधड़ी, दोषी फिर जेल जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने बिलकीस बानो से सामूहिक दुष्कर्म मामले में समय से पहले सभी 11 दोषियों को रिहा करने का गुजरात सरकार का फैसला सोमवार को रद्द कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने वर्ष 2002 के दंगों के दौरान हुए इस मामले के दोषियों को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना, न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने गुजरात सरकार पर शक्तियों के दुरुपयोग और एक दोषी के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया। कोर्ट ने कहा- रिहाई का हक़ गुजरात सरकार को नहीं था क्योंकि दोषियों को महाराष्ट्र की कोर्ट ने सजा दी थी। गुजरात सरकार को महाराष्ट्र सरकार से रिहाई की मंजूरी लेनी चाहिए थी। दोषी और गुजरात सरकार ने हमसे तथ्य छुपाए। यह कोर्ट के साथ धोखाधड़ी का क्लासिक उदाहरण है।”

बिलकीस का संघर्ष

बिल्किस के गैंगरेप का मामला 2002 के गुजरात दंगों से जुड़ा है। 28 फरवरी की रात उग्र भीड़ ने बिलकीस के घर पर हमला किया। बिलकीस तब पांच महीने की गर्भवती थीं। भीड़ ने बिलकीस, उनकी मां और चचेरी बहन से सामूहिक दुष्कर्म किया। बहन के दो दिन के बेटे को पटक कर मार दिया। बिलकीस की चाची, चचेरे भाई-बहनों समेत 7 लोगों की हत्या कर दी। इसके बाद बिलकीस ने कानूनी लड़ाई शुरू की। इस मामले को सुनवाई के लिए गुजरात से महाराष्ट्र की सीबीआई कोर्ट में शिफ्ट किया गया। कोर्ट ने 2008 में 11 लोगों को उम्र कैद की सुविधा सुनाई लेकिन 14 साल बाद गुजरात सरकार ने दोषियों को रिहा कर दिया। इस फैसले पर बिलकीस बानो ने कहा कि ऐसा लगा जैसे मेरे सीने से पत्थर का एक भारी पहाड़ हट गया और मैं सांस लेने लगी हूं।

मंदिर का रास्ता गुलामी का: मंत्री

भास्कर ने लिखा है: आस्था पर मंत्री के शर्मनाक बोल। शिक्षा मंत्री बोले- मंदिर का रास्ता मानसिक गुलामी का हालांकि वह खुद भी मंदिर जाते रहे हैं। शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर ने कहा कि मंदिर का रास्ता मानसिक गुलामी का रास्ता है। “स्कूल का रास्ता प्रकाश का रास्ता दिखाता है। जब हर आदमी में हर जगह राम हैं तो फिर उनको ढूंढने कहां जाओगे?” वे डेहरी ऑन सोन में सावित्रीबाई फुले के जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। वे बाद में मीडिया से भी मुखातिब हुए। उन्होंने मीडिया कर्मियों से सवालिया लहजे में कहा, बताओ चोट लगेगी तो कहां जाओगे? मंदिर या अस्पताल? उन्होंने कहा, “इस देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्री सावित्री बाई फुले ने मंदिर को मानसिक गुलामी का रास्ता व स्कूल को प्रकाश का रास्ता बताया था। बिल्कुल ठीक कहा था।”

भाजपा भड़की

मंत्री चंद्रशेखर की बात पर भाजपा भड़क गई है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, गिरिराज सिंह, सुशील कुमार मोदी, प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने मंत्री पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रदेश राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि धर्म आस्था का विषय है, मंत्री हो या कोई अन्य व्यक्ति, आस्था पर ऐसे बयान से बचना चाहिए। इधर जदयू के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि जो ऐसे बयान दे रहे हैं वह उनके लिए महत्वपूर्ण है, मनुष्य को धार्मिक ग्रन्थों के प्रति सम्मान का भाव व्यक्त करना जरूरी है।

अलग खेल विभाग बना

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है: मंजूरी: बिहार में खेल का अलग विभाग बना। सूबे में खेल के लिए अलग विभाग का गठन होगा। सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में खेल के लिए अलग विभाग बनाने के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी। यह राज्य के 45 वें सरकारी विभाग के रूप में काम करेगा। इस समय यह एक निदेशालय के रूप में कला संस्कृति व युवा विभाग के अधीन संचालित होता था। छह जनवरी को एक अणे मार्ग में ‘मेडल लाओ नौकरी पाओ’ योजना के तहत 71 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र देते हुए मुख्यमंत्री ने खेल से संबंधित विभाग के गठन की घोषणा की थी।

पंचायत प्रतिनिधियों का भत्ता बढ़ा

प्रभात खबर की सबसे बड़ी खबर है: पंचायत प्रतिनिधियों का मानदेय दोगुना हुआ, सेविका सहायिका का भत्ता भी बढ़ा। राज्य की ग्राम पंचायत व ग्राम कचहरी के सदस्यों के मानदेय में दो गुनी वृद्धि की गई है। अब मुखिया और सरपंच को  ₹5000 प्रतिमाह, उप मुखिया और उप सरपंच को ढाई हजार और ग्राम पंचायत सदस्यों को ₹800 प्रतिमाह मिलेगा। इसी तरह आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी कर दी गयी है। कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गयी। कैबिनेट के इस फैसले का लाभ 2.30 लाख सेविका व सहायिकाओं को होगा।आंगनबाड़ी सेविका को अब 7 हजार जबकि सहायिका को 4 हजार रुपए मिलेंगे।

भागलपुर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सस्पेंड

हिन्दुस्तान के अनुसार पटना में शिक्षा विभाग के सभागार में चल रही बैठक में तिलकामांझी भागलपुर विवि के कुलपति प्रो. जवाहर लाल और कुलसचिव डॉ. गिरिजेश नंदन कुमार आपस में उलझ गये। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप गढ़ने लगे। बैठक में उपस्थित अन्य कुलपतियों ने कुलसचिव के व्यवहार पर नाराजगी जतायी। इसी बहस के बीच सभी कुलपति बीच बैठक में ही बाहर निकल गये। विभाग के सचिव बैद्यनाथ यादव बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। कुलपतियों के बाहर निकलने के बाद विवि के अन्य पदाधिकारियों के साथ बैठक जारी रही। बाद में तिलकामांझी विवि के कुलपति ने कुलसचिव को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया।

कुछ और सुर्खियां

  • मालदीव के राजदूत तलब, प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी का विरोध जारी
  • 220 सहायक प्रोफेसर की भर्ती के लिए आवेदन 17 जनवरी से
  • राजस्थान की करणपुर सीट पर भाजपा सरकार के मंत्री हारे, चुनाव से ठीक पहले बने थे मंत्री
  • ट्रक, बस और ऑटो चालकों की 27 जनवरी से बेमियादी हड़ताल
  • पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की आजीवन अयोग्यता खत्म, अब लड़ सकेंगे चुनाव
  • वायु सेवा में अग्निवीरों की भर्ती के लिए 17 जनवरी से 8 फरवरी तक आवेदन

अनछपी: बिलकीस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला गुजरात सरकार की धोखाधड़ी को उजागर करता है लेकिन अखबारों और मीडिया ने इस पर बहुत ध्यान नहीं दिया। इस फैसले से न्यायप्रिय लोगों को इसलिए भी राहत मिली है कि हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट के अक्सर फ़ैसलों से निराशा हुई है। ऐसी धारणा बन चुकी है कि सरकार के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का रवैया नरम रहा है और उसके खिलाफ बहुत कम ही फैसले आए हैं। लेकिन बिलकीस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर गुजरात सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार गुजरात सरकार ने कोर्ट के साथ धोखाधड़ी की है लेकिन सवाल यह है कि इस धोखाधड़ी के नतीजे में गुजरात सरकार के मुख्यमंत्री और अधिकारियों पर क्या असर पड़ेगा? सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला तकनीकी आधार पर दिया गया है लेकिन क्या इससे सरकारों द्वारा अपने राजनीतिक लाभ और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए आगे भी ऐसे कदम नहीं उठाए जाएंगे, इसकी कोई गारंटी है? इंसाफ की मांग तो यह थी कि गुजरात सरकार को उसकी धोखाधड़ी के लिए दंडित किया जाता लेकिन शायद सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा स्थिति में ऐसा करना बहुत ज्यादा उम्मीद लगाना होगा। ध्यान रहे कि बिलकीस बानो के गुनहगारों को गुजरात चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए छोड़ा गया था और उन दोषियों की आरती उतारी गई थी। जिन दोषियों ने मर्डर और रेप जैसे जघन्य अपराध किए, उनकी आरती उतारा जाना समाज के गिरने की अंतिम सीमा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश बहुत उम्मीद दिलाता है लेकिन मीडिया का रोल फिर भी बहुत ही घटिया है। मीडिया में इस फैसले के बाद गुजरात सरकार के बारे में जो सवाल उठाए जाने चाहिए वह कहीं नजर नहीं आते हैं। आज के चार प्रमुख हिंदी अखबारों में से सिर्फ एक भास्कर अखबार ने इस पर संपादकीय लिखा है, वह भी कमजोर सा। हिन्दुस्तान, और जागरण में संपादकीय का विषय मालदीव के साथ ताज़ा विवाद है जबकि प्रभात खबर ने देश के सभी डीजीपी के साथ बैठक में प्रधानमंत्री के संबोधन पर संपादकीय लिखा है। बिलकीस बानो का केस हमारे समाज और मीडिया के चरित्र पर एक गंभीर सवाल है।

 

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