छपी-अनछपी: बिहार में ओला से फसलों को नुकसान, मंत्री इसराइल के पीछे पड़ी भाजपा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में मौसम बदलने के साथ ओला बरसने से फसलों को नुकसान अहम खबर है। आरजेडी से संबंध रखने वाले पसमांदा समुदाय के मंत्री इसराइल मंसूरी के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर हंगामा खड़ा किया है। पसमांदा समाज के इस मंत्री पर भाजपा के हंगामे की खबर प्रमुखता से ली गई है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का राम और रावण के बारे में दिया गया बयान भी चर्चित है।

ओला गिरने से फसलों को नुकसान की खबर सभी जगह लीड है। भास्कर ने छोटी सी हेडिंग लगाई है: फसलों का कफन। उत्तर भारत में शुक्रवार को मौसम ने करवट बदली और कई राज्यों में तेज आंधी के साथ वर्षा ने किसानों के लिए परेशानी बढ़ा दी। पहले बढ़ते तापमान की वजह से गेहूं को नुकसान हुआ और अब ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसल को बिछा दिया। बिहार में गुरुवार की रात से शुक्रवार सुबह तक हल्की वर्षा और तेज हवा के साथ ओलावृष्टि हुई इससे सड़क से लेकर खेतों तक ओले की मोटी परत बिछ गई। मुजफ्फरपुर, शिवहर और सीतामढ़ी में सबसे ज्यादा ओला पड़े। ऐसे में गेहूं मक्का दलहन और सब्जी की फसलों को काफी नुकसान हुआ। आम और लीची के मंजर भी गिरे हैं। मधुबनी और गोपालगंज में बिजली गिरने से दो लोगों की मौत भी हुई है। मौसमविदों के अनुसार शनिवार को भी पटना समेत राज्य के 23 जिलों में आंधी-पानी और ओला गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नुकसान का ब्योरा तैयार करने को कहा है।

मंत्री इसराइल के खिलाफ भाजपा

भास्कर की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: मंत्री इसराइल की बर्खास्तगी की मांग पर हंगामा, सदन में हनुमान चालीसा का पाठ। अखबार लिखता है: विधानसभा के प्रतिपक्ष के नेता विजय सिन्हा ने शुक्रवार को सदन में मुजफ्फरपुर के कांटी में राहुल सहनी की हत्या के बाद अपराधियों की गिरफ्तारी का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि मंजू देवी के बेटे राहुल की हत्या के अपराधी उनके दामाद की हत्या की धमकी दे रहे हैं। मंजू देवी थाने में बैठी हैं। उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इस मामले में आइटी मंत्री इसराइल मंसूरी शामिल हैं जो जांच प्रभावित कर रहे हैं। उन्हें तत्काल बर्खास्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले को सीएम ने खुद ही संज्ञान में लिया है। क्या कार्रवाई हो रही है? सरकार अपना पक्ष रखे। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने अल्पसूचित प्रश्न शुरू कर दिया। इससे नाराज विधायकों ने वॉकआउट किया।

राम और जीतन राम

जागरण की सुर्खी है: राम से ज्यादा बड़ा रावण का चरित्र मांझी। भास्कर ने लिखा है: राम-रावण दोनों काल्पनिक, राम से बड़ा रावण, रामायण लिखने वाले वाल्मीकि की नहीं होती पूजा। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने फिर से विवादित बयान दिया है। शुक्रवार को विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मांझी ने कहा कि मैं राम और रावण दोनों को काल्पनिक मानता हूं फिर भी कर्मकांड के आधार पर राम से रावण का चरित्र ज्यादा बढ़ा है। रामायण में भी काल्पनिक कहानी है मगर कल्पना में भी रावण के साथ न्याय नहीं किया गया। इसका आधार पूछे जाने पर मांझी ने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत समझ है। रामायण में जब-जब राम किसी परेशानी से गुजरते थे तो अलौकिक शक्तियों की सेवाएं राम को मिलती थी मगर रावण के साथ ऐसा कुछ नहीं था। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण में भी बहुत सी बातें ठीक नहीं हैं, उसको निकालना चाहिए। इसलिए वाल्मीकि की पूजा नहीं होती। इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने जीतन राम मांझी के बयान को निंदनीय बताया है।

बचौल के बिगड़े बोल

हिन्दुस्तान की पहली खबर है: बचौल बोले-अल्पसंख्यकों से वोट अधिकार छीने जाएं। भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने शुक्रवार को फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह भारत सरकार से मांग करेंगे कि अल्पसंख्यकों से वोट देने का अधिकार छीन लिया जाये। शुक्रवार को विधानसभा परिसर में वह पत्रकारों से बात कर रहे थे। एमआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सीमांचल यात्रा पर भाजपा विधायक ने कहा कि वो सिर्फ सीमांचल की जनता को भड़काने आ रहे हैं। ये लोग सिर्फ गजवा-ए-हिंद और लव जिहाद की बात कर यहां का माहौल खराब करना चाहते हैं। वहीं, राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने भाजपा विधायक के बयान पर पलटवार किया है। कहा है कि भाजपा के बड़े नेता जब अपनी बेटी की शादी अल्पसंख्यक समाज में करते हैं, तो फिर इनके खिलाफ क्यों बोलते हैं।

संसद में हंगामा

हिन्दुस्तान के देश पेज पर हेडलाइन है; संसद सत्र का पूरा हफ्ता हंगामे की भेंट चढ़ा। संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण का पहला सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के साथ सत्तापक्ष भी हंगामे में पीछे नहीं रहा, जिससे दोनों सदनों में कोई कामकाज नहीं हो सका। विपक्ष अडानी मुद्दे पर जेपीसी गठित करने की मांग नहीं छोड़ रहा। जबकि, सत्तापक्ष कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लंदन में दिए बयान पर उनसे माफी की मांग पर अड़ा रहा। लोकसभा शुक्रवार को सत्तापक्ष और विपक्षी दलों के शोर-शराबे के कारण कार्यवाही शुरू होने के करीब 20 मिनट बाद ही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी। इस अखबार में दो और सुर्खियां हैं: 1. विपक्ष संवाद के लिए तैयार नहीं है: शाह। 2. सदन में प्रसारण के दौरान आवाज बंद की गई: कांग्रेस।

जागरण की हेडिंग है: राहुल पर भाजपा और कांग्रेस में तेवर हुए तीखे। इसके तहत दो और सुर्खियां हैं: 1. राहुल गांधी बन गए हैं देश विरोधी टूलकिट का स्थाई हिस्सा: नड्डा। 2. स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा नहीं लेने वाले हमें देशभक्ति ना सिखाएं: खड़गे।

कुछ और सुर्खियां

  • किसी को मतदान के लिए बाध्य नहीं कर सकते: दिल्ली हाई कोर्ट
  • असम में सभी मदरसों को बंद करेंगे: हिमंत बिस्वा
  • बिहटा में छठी का छात्र गायब उसी के फोन से 40 लाख फिरौती मांगी
  • जेड प्लस सुरक्षा में घूमता रहा ठग, बडगांव डीसी को डांटा था, उन्हीं की शिकायत पर पकड़ाया
  • मोतिहारी से पीएफआई का संदिग्ध हुआ गिरफ्तार

अनछपी: आज के अखबारों के अनुसार दो लोगों ने विवादित बयान दिए हैं। एक तो जीतन राम मांझी हैं, जिन्होंने राम और रावण के चरित्र को काल्पनिक बताया है। इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने उनके बयान को निंदनीय बताया है। इससे पहले रामचरितमानस के बोल पर भी विवाद हो चुका है। उस विवाद पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने ऐसे बयानों से बचने को कहा था। इस बयान से हालांकि किसी के संवैधानिक अधिकार का हनन नहीं होता लेकिन जो बयान भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने दिया है, क्या उसके बारे में कोई शक है कि यह संविधान के विरुद्ध है? ऐसे संविधान विरोधियों का बिहार विधानसभा में बने रहने का कोई औचित्य है? मीडिया में ऐसे बयानों की जितनी तीव्र निंदा होनी चाहिए वह नहीं होती। किसी समूह का संवैधानिक अधिकार छीनने की बात करने वाला व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी का सदस्य और विधायक है, इसलिए भाजपा को भी इस पर विचार करना चाहिए। भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह ऐसी असंवैधानिक बात करने वाले विधायक को अपनी पार्टी में रखना उचित समझती है? भारतीय जनता पार्टी के अलावा दूसरे दलों को भी इस बारे में कठोर रवैया अपनाना चाहिए लेकिन उनकी ओर से इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष को इस बयान का स्वतः संज्ञान लेकर उनकी सदस्यता रद्द करने पर विचार करना चाहिए।

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