नीतीश बाबू, टीचर से बोरा बेचवाओ हो और सस्पेंड भी करो हो?

बिहार लोक संवाद डॉड नेट

आदाब-सलाम, मैं सैयद जावेद हसन। गांव की गलियों में आप जिस शख़्स को बोरा बेचते हुए देख रहे हैं, वह कोई फेरी वाला नहीं है। ये टीचर हैं। वही टीचर जिनके सम्मान में बच्चे 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाते हैं। लेकिन बिहार की नीतीश सरकार की नज़र में शिक्षकों का कोई मान-सम्मान नहीं। इसीलिए शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को आदेश दिया कि वे साल 2014-15 और 15-16 के मध्याह्न भोजन यानी एमडीएम के ख़ाली बोरे को 10 रुपये किलो के भाव से बेचें और उसकी राशि स्कूल में जमा करवाएं। नहीं तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस महान काम को अंजाम देने का आदेश इस लिए दिया गया क्योंकि चूहों ने बोरे को कुतर-कुतर कर सत्यानाश कर दिया था। इस आदेश का पालन करने के लिए कटिहार के कांताडीह प्राइमरी स्कूल के इंचार्ज हेडमास्टर मोहम्मद तमीजुद्दीन सिर पर बोरा लाद कर सड़कों पर निकल पड़े।

लेकिन शिक्षा विभाग को तमीजुद्दीन की यह अदा बेहद नागवार गुज़री। उसने सरकार की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए तमीजुद्दीन को सस्पेंड कर दिया। तमीजद्दनी कहते हैं कि आखि़र उनका कुसूर क्या है?

ऑल इंडिया आइडियल टीचर्स एसोसिएशन – आईटा के बिहार प्रदेश सचिव अनवर साहिल ने सरकार से तमीजुद्दीन का सस्पेंशन वापस लेने और शिक्षकों से बोरा बेचवाने का आदेश वापस लेने की मांग की है।

तमीजुद्दीन इन दिनों परेशान हैं और अपना दर्द गीत के माध्यम से बयान कर रहे हैं। आप भी सुनिये।

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