छ्पी-अनछपी: लिस्ट से हटेंगे 35 लाख वोटर, जम्मू कश्मीर के सीएम से पुलिस की धक्का-मुक्की
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से यह खबर दी गई है कि जगह बदल चुके या दुनिया से जा चुके लगभग 35 लाख वोटरों का नाम लिस्ट से हटाया जाएगा। जम्मू कश्मीर पुलिस ने वहां के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ धक्का मुक्की की है। इस साल 10 लाख कुशल भारतीयों को रूस रोजगार देगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता ना रुके लेकिन हेट स्पीच रोकना जरूरी।
और, जानिएगा कि समोसे में कितना तेल और रसगुल्ले में कितनी चीनी है, यह बताना होगा।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान जारी है। अब तक की प्रक्रिया के तहत 35 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाया जाना तय है। इनमें वे लोग शामिल हैं जो या तो मृत पाए गए हैं, स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं या जिनका नाम एक से अधिक जगह है। चुनाव आयोग ने सोमवार को बताया कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अब तक 83.66 फीसदी गणना फॉर्म प्राप्त हो चुके हैं। आयोग के अनुसार, अब तक के आंकड़ों से पता चला है कि 1.59 फीसदी (12,55,620) मतदाता मृत पाए गए हैं, जबकि 2.2 फीसदी (17,37,336) मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं। इसके अलावा, 0.73 फीसदी (5,76,479) मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए हैं। आयोग के अनुसार, इन आंकड़ों के आधार पर कुल 35,69,435 नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। यह संख्या अंतिम नहीं है और आगामी दिनों में इसमें वृद्धि संभव है, क्योंकि अब भी फॉर्म भरने की प्रक्रिया जारी है।
खेतों में भरवा रहे फॉर्म
भास्कर के अनुसार बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की प्रक्रिया गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था से जूझ रही है। बीएलओ कहीं खेतों और बागीचों में फॉर्म भरा रहे हैं। कहीं व्हाट्सएप पर पहचान पत्र मांग कर काम निपटाया जा रहा है। पटना के नगर निगम क्षेत्र में दो तरह के फॉर्म से मतदाता कन्फ्यूज्ड है। कई जगह एक ही एपिक पर कई नाम दर्ज हैं। पैसे लेकर फॉर्म भरने के मामले भी सामने आ रहे हैं। लगातार दूसरे दिन सोमवार को भास्कर के 100 से अधिक रिपोर्ट ने पूरे राज्य में वाटर पुनरीक्षण कार्य का जायजा लिया।
विपक्ष ने आयोग से पूछा, बिहार में कहां मिले बांग्लादेश के लोग
बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची के सघन विशेष पुनरीक्षण पर घमासान जारी है। इन सब के बीच राज्य की मतदाता सूची में कथित तौर पर विदेशी नागरिकों के नाम होने की खबरों को झूठा करार देते हुए विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर जमकर हमला बोला है। कांग्रेस से लेकर बिहार में महागठबंधन की अगुवाई कर रहे राजद ने आरोप लगाया कि पुनरीक्षण के बहाने गरीबों, वंचितों तथा पिछड़ों को मतदाता सूची से बाहर करने की साजिश हो रही है। उन्होंने आयोग को चुनौती दी कि वह बताए कि बिहार में बांग्लादेश, नेपाल तथा म्यांमार के लोग कहां मिले हैं। कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने विदेशी नागरिकों के बिहार की मतदाता सूची में कथित तौर पर होने के आयोग के दावे पर तंज करते हुए पुनरीक्षण फ़ॉर्म पर जलेबिया परोसे जाने और रद्दी में बिक्री की खबरों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या ज्ञानेश कुमार गुप्ता इस पर सार्वजनिक अथवा गुप्त जवाब देंगे।
जम्मू कश्मीर के सीएम के साथ वहीं की पुलिस ने की धक्का मुक्की
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सोमवार को 13 जुलाई, 1931 को डोगरा सेना की गोलीबारी में शहीद 22 लोगों की कब्र पर फातिहा पढ़ने के लिए नक्शबंद साहिब कब्रिस्तान का गेट फांद गए। दरअसल, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया थे। उनके साथ पुलिस ने धक्का मुक्की भी की। उमर ने कहा, “उपराज्यपाल के निर्देश पर हमें फातिहा पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। हमें रविवार को घर में नजरबंद रखा गया। हर मायने में यह एक स्वतंत्र देश है, लेकिन ये हमें गुलाम समझते हैं। हम गुलाम नहीं हैं। हम जनता के सेवक हैं।”
इस साल 10 लाख भारतीयों को रोजगार देगा रूस
जागरण के अनुसार रूस अपने औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिए इस साल के अंत तक भारत से करीब 10 लाख कुशल श्रमिकों को अपने यहां रोजगार देगा। रूस के एक दिग्गज कारोबारी ने यह जानकारी दी। रूसी उद्योग मंडल उराल चैंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख आंद्रेई बेसेदिन ने समाचार एजेंसी रास बिजनेस कंसलटिंग (आरबीसी) के साथ बातचीत में भारत से कुशल कामगारों को बुलाने की योजना के बारे में बताया। बेसेदिन ने कहा, जहां तक मुझे पता है साल के अंत तक भारत से 10 लाख विशेषज्ञ कामगार रूस आएंगे।
बोलने की छूट, हेट स्पीच की नहीं
प्रभात खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर अहम टिप्पणी की है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस के विश्वनाथन की पीठ ने सोमवार को कहा कि सोशल मीडिया पर बढ़ती हेट स्पीच पर रोक लगाई जानी चाहिए पर यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बाधित न हो। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी से साफ किया की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीड है लेकिन इसका गलत इस्तेमाल समाज में नफरत और विघटन को जन्म दे सकता है। इसलिए नागरिकों को चाहिए कि वह जिम्मेदारी से बोलें, संयम रखें और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सेंसरशिप की बात नहीं कर रहा है बल्कि चाहता है कि लोग खुद से जिम्मेदारी निभाएं और अपनी बातों में संयम बरतें।
सिर्फ पाकिस्तान का समर्थन करना अपराध नहीं लेकिन…: कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति भारत या किसी विशिष्ट घटना का उल्लेख किए बिना केवल पाकिस्तान का समर्थन करता है, तो प्रथमदृष्टया यह बीएनएस की धारा 152 के तहत अपराध नहीं बनता है। यह उन कृत्यों को दंडित करती है जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी टिप्पणी से सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है। ऐसे मामले बीएनएस की धारा 196 के तहत वैमनस्यता को बढ़ावा देने का अपराध हैं और आरोपी को इस धारा के तहत सात साल तक की सजा हो सकती है। त्रुटिवश गत शनिवार को प्रकाशित इसी मामले की खबर में बीएनएस की धारा 152 के तथ्य ही छपे थे और 196 के तथ्य प्रकाशित होने से छूट गए थे। न्यायमूर्ति अरुण देशवाल ने यह टिप्पणी 18 वर्षीय रियाज की जमानत मंजूर करते हुए की, जिस पर एक इंस्टाग्राम स्टोरी पोस्ट करने का आरोप था।
समोसे में तेल और रसगुल्ला में चीनी की मात्रा बताना होगा
जागरण के अनुसार समोसा और जलेबी भला किसे पसंद नहीं, लेकिन हममें से ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि इसमें तेल और चीनी की कितनी मात्रा होती है। पर अब हम लोग यह जान सकेंगे। दरअसल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों विभागों और स्वास्थ्य निकायों से कहा है कि वह समोसा, कचौरी, पिज़्ज़ा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पकौड़े, वड़ा पाव, सॉफ्ट ड्रिंक, चॉकलेट पेस्ट्री और गुलाब जामुन जैसे खाद्य पदार्थों में चीनी और तेल की मात्रा का उल्लेख करने वाले तेल और चीनी बोर्ड प्रदर्शित करें ताकि स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा दिया जा सके। मोटापा और गैर संचारी रोगों से मुकाबला किया जा सके।
कुछ और सुर्खियां:
- तत्काल रेल टिकट बुकिंग के लिए आज से आधार और ओटीपी जरूरी
- विधायकों की कथित खरीद फरोख्त में बीमा भारतीय समेत चार को नोटिस
- विपुल पंचोली पटना हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश होंगे
- राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव दिनेश कुमार राय ने वीआरएस ली, विधानसभा चुनाव लड़ेंगे
- तीसरे क्रिकेट टेस्ट में इंग्लैंड ने भारत को 22 रनों से हराकर 2-1 की बढ़त ली
- दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक फौजा सिंह का 114 साल की उम्र में निधन
- पंजाब में धार्मिक ग्रन्थों की बेअदबी पर उम्र कैद तक की सजा का कानून पेश
अनछपी: पुरानी कहावत है हड़बड़ का काम गड़बड़ लेकिन भारत का चुनाव आयोग बिहार की वोटर लिस्ट के मामले में पूरी तरह से हड़बड़ी में नजर आता है और अपने एजेंडे को जल्द से जल्द पूरा करना चाहता है। लिखित तौर पर तो यह एजेंडा बिहार में मतदाताओं की सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करना है लेकिन सूत्रों के हवाले से जो बातें बताई जा रही हैं लगता यह है कि चुनाव आयोग का असली एजेंडा वही है। मीडिया में चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से यह खबर आई कि बिहार में बड़ी संख्या में विदेशी वोटरों की पहचान हुई है लेकिन उसकी ओर से इसके बारे में औपचारिक तौर पर कोई बात नहीं बताई जा रही है। इस एजेंडे के पीछे भारतीय जनता पार्टी का एजेंडा है जो एक विशेष वर्ग को विदेशी बताकर न केवल वोट के अधिकार से वंचित करना चाहती है बल्कि उससे भारतीय नागरिकता भी छीनना चाहती है। इस एजेंडे पर काम करने के लिए चुनाव आयोग को इतनी जल्दबाजी है कि वह अपने ही बताए गए दिशा निर्देशों का उल्लंघन करवा रहा है। इस बात के उदाहरण बढ़ते जा रहे हैं। पहले उसने दस्तावेजों की मांग की और बाद में इस पर पलटते हुए कहा कि फिलहाल दस्तावेज के बिना ही फॉर्म जमा कर दें। पहले उसने कहा कि नाम और एपिक नंबर आदि भरा हुआ फॉर्म मिलेगा जिसे भरना है लेकिन अब सादा फॉर्म दिया जा रहा है जिसमें क्यूआर कोड भी नहीं है। 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में जब इस मामले की दोबारा सुनवाई होगी तब इन मुद्दों को भी उसके सामने उठाया जाना चाहिए। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन लोगों ने ऑफलाइन फॉर्म जमा किया है उन्हें कोई पावती नहीं दी जा रही है और ऐसे लोगों के पास इस बात का कोई सबूत नहीं होगा कि उन्होंने फॉर्म जमा किया है। ऐसे में चुनाव आयोग को धांधली करने से कौन रोक सकता है? यह कहते हुए अफसोस होता है लेकिन सच्चाई यही है कि एक संवैधानिक संस्था के तौर पर चुनाव आयोग हर तरह के असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक काम में लगा हुआ है।
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