छ्पी-अनछपी: चिराग को चचा के उम्मीदवारों से जूझना होगा, ग़ज़ा पीस प्लान पर दस्तख़त

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जहां एक तरफ महागठबंधन और एनडीए में उम्मीदवारों को लेकर मंथन जारी है वहीं पशुपति कुमार पारस ने ऐलान किया है कि भतीजे चिराग पासवान की पार्टी के उम्मीदवारों को उनके निर्दलीय उम्मीदवारों से जूझना होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइल और हमास के बीच पीस प्लान पर दस्तख़त होने की खबर दी है।

और, जानिएगा कि कैसे राशन के लिए एटीएम जैसी व्यवस्था होगी और दुकान जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पहली ख़बर

बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान जिन विस सीटों पर अपने उम्मीदवार देंगे, उन सीटों पर उनके चाचा पशुपति कुमार पारस भी निर्दलीय उम्मीदवार उतारेंगे। बुधवार को पटना के कौटिल्य नगर स्थित रालोजपा कार्यालय में स्व रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम के बाद पशुपति पारस ने मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी। रालोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने कहा कि महागठबंधन में जो सीट हमको मिलेगी, उस पर हमारी उम्मीदवारी रहेगी। हम तैयारी करेंगे। लेकिन, जहां-जहां चिराग के उम्मीदवार होंगे, वहां भी हम अपने उम्मीदवार निर्दलीय उतारने पर विचार करेंगे, क्योंकि चिराग ने परिवार व पार्टी को तोड़ा है।

ग़ज़ा पीस प्लान पर दस्तख़त

यह खबर आज सुबह की है, इसलिए अखबारों में नहीं है। इस खबर की अहमियत को देखते हुए इसे बीबीसी हिंदी सर्विस से लिया गया है। बीबीसी ने लिखा है- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इसराइल और हमास दोनों ने अमेरिका की ग़ज़ा शांति योजना के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, “इसका मतलब है कि सभी बंधकों को बहुत जल्द रिहा किया जाएगा और इसराइल अपनी सेना को तय की गई सीमा तक वापस बुलाएगा। यह एक मज़बूत, स्थिर और स्थायी शांति की दिशा में पहला क़दम होगा. सभी पक्षों के साथ निष्पक्ष व्यवहार किया जाएगा। ” ट्रंप ने लिखा है, “यह अरब और मुस्लिम दुनिया, इसराइल उसके सभी पड़ोसी देशों के साथ अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दिन है।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने क़तर, मिस्र और तुर्की को इस मामले में मध्यस्थता के लिए धन्यवाद दिया है।

चुनावी बुलेटिन:

  • कैग को नहीं मिला 70000 करोड़ का यूटिलिटी सर्टिफिकेट, जन सुराज पार्टी ने हाई कोर्ट में दायर किया मामला
  • चुनाव आयोग का दावा- अंतिम मतदाता सूची पर 9 दिन बाद भी नहीं आई कोई शिकायत
  • बिहार विधानसभा चुनाव में केंद्र सरकार पर भी लागू होगी आदर्श आचार संहिता
  • जीतन राम मांझी की चेतावनी, 15 सीटें नहीं मिली तो एक भी सीट पर नहीं लड़ेंगे चुनाव
  • विश्वास मत के दौरान पाला बदलने वाले कांग्रेस के विधायक मुरारी प्रसाद गौतम ने दिया इस्तीफा, भाजपा से लड़ेंगे चुनाव
  • पूर्व आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे जमालपुर और अररिया से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे
  • नए मतदाताओं के घर आज से पहुंचेगा वोटर कार्ड, डाक विभाग को अगर पता नहीं मिला तो बीएलओ पहुंचाएंगे

सीटों के बंटवारे पर दोनों गठबंधनों में खींचतान जारी

हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में चुनाव की घोषणा के बावजूद दो प्रमुख गठबंधनों में सीटों के बंटवारे पर रार- तकरार जारी है। एनडीए के दो प्रमुख सहयोगी दल लोजपा (आर) और हम अपनी नाराजगी सार्वजनिक करने लगे हैं। दोनों दलों को गठबंधन की ओर से जितनी सीटें मिल रही हैं, इससे वे संतुष्ट नहीं हैं। लोजपा आर के प्रुमख चिराग पासवान और हम के संरक्षक जीतन राम मांझी ने बुधवार को कविता के माध्यम से अपनी-अपनी नाराजगी जाहिर की। चिराग अपनी पार्टी के लिए 40 सीटों की मांग पर अड़े हैं। अपने पिता रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के मौके पर सोशल मीडिया एक्स पर उन्हें याद करते हुए लिखा कि पापा हमेशा कहा करते थे कि जुर्म करो मत, जुर्म सहो मत। जीना है तो मरना सीखो, दम-कदम पर लड़ना सीखो। गौर हो कि पिछली बार चिराग ने अंतिम समय में खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘हनुमान’ बता अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। इसलिए इस बार भी सभी की निगाहें उनपर टिकी हैं। वहीं, हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी ने दिल्ली में बुधवार को कहा कि 15 से कम सीटें मिलीं तो भी एनडीए में रहेंगे पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। सोशल मीडिया एक्स पर उन्होंने लिखा कि हो न्याय अगर तो आधा दो, यदि उसमें भी कोई बाधा हो, तो दे दो केवल 15 ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम, हम वहीं खुशी से खायेंगें, परिजन पे असी ना उठायेंगे। कहा कि अगर 15 सीट नहीं मिलती है तो हम फिर निबंधित पार्टी ही रह जाएंगे। ऐसे में चुनाव लड़ने का क्या फायदा? वहीं, रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अब तक पत्ते नहीं खोले हैं।

महागठबंधन में सीटों के बंटवारे का फार्मूला सामने नहीं आया

राजद, कांग्रेस, वीआईपी और वामपंथी दलों वाले महागठबंधन में भी अभी तक सीटों के बंटवारे का कोई फॉर्मूला सामने नहीं आया है और न ही सहमति बनी है। बैठकों का दौर लगातार जारी है। वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और वामदलों की दावेदारी से सीट बंटवारे में पेच फंसा है। वाम दलों को पिछले चुनाव के मुकाबले पांच सीटें अधिक देने की बात चल रही है। लेकिन, ये दल इस पर सहमत नहीं हैं। तीनों वाम दलों ने अपनी अपनी सूची समन्वय समिति संयोजक तेजस्वी यादव को सौंप दी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा और पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी को भी इस बार समायोजित करना है। मुकेश सहनी 60 सीटों की दावेदारी कर रहे हैं।

राशन के लिए एटीएम जैसी व्यवस्था होगी

जागरण की ख़बर है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस के तहत राशन लेने के लिए अब उपभोक्ताओं को रोशन की दुकान पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राशन एटीएम से ही निकल जाएगा। वह भी 30 किलो अनाज महज 30 सेकेंड में। सुनने में यह आपको अजीब जरूर लगेगा, मगर यह हकीकत में होने जा रहा है। दरअसल, बुधवार को आयोजित मोबाइल कांग्रेस में एरिक्सन कंपनी ने राशन एटीएम लांच किया, जिसका प्रदर्शन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष किया गया। इस एटीएम मशीन की विशेषता यह है कि यह ब्रायोमेट्रिक तकनीक के माध्यम से संचालित होगी और एक बार में 25 से 30 किलोग्राम तक राशन प्रदान करने में सक्षम है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का राशन कोटा 15 किलोग्राम है तो मशीन उसे सूचित करेगी कि वह 15 किलोग्राम तक राशन ले सकता है।

कुछ और सुर्खियां:

  • सीवान के सिसवन में में एक-47 राइफल, कार्बाइन, बंदूक और देसी कट्टा के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार करने का दावा
  • सिंगापुर में असम के मशहूर सिंगर जुबिन गर्ग की हत्या के मामले में रिश्तेदार भाई और गिरफ्तार, असम पुलिस में हैं डीएसपी
  • चीन से 18.5 करोड़ रुपए में 20 लड़ाकू विमान खरीदेगा बांग्लादेश
  • दिल्ली से पटना आने के किराए में बेतहाशा इजाफा, अभी ₹23500

अनछपी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल के दिनों में दो अहम बदलाव देखे जा रहे हैं।

  1. अफगानिस्तान के तालिबान का भारत में स्वागत हो रहा है।
  2. हमास को आतंकवादी संगठन बताने वाले लोगों को यह पता चल रहा है कि अमेरिका उसके साथ इसराइल का समझौता करा रहा है जिसका भारत ने स्वागत किया है।

भारत में आमतौर पर किसी हिंसक गतिविधि और अमानवीय हरकतों के लिए तालिबानी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन ऐसे लोगों को अब इस शब्द के इस्तेमाल पर दोबारा गौर करना चाहिए क्योंकि भारत सरकार तालिबान से अपने रिश्ते मधुर करने में लगी है और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार में विदेश मंत्री भारत का दौरा कर रहे हैं। हालांकि अभी यह बात साफ तौर पर नहीं मालूम हो सकी है कि भारत ने तालिबान वाली सरकार को औपचारिक मान्यता दी है या नहीं लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि तालिबान और मोदी सरकार एक दूसरे को स्वीकार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार और भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर जो लोग तालिबान और उनके बहाने इस्लाम पर हमले करते थे अब वह क्या करेंगे? यह तल्ख़ सच्चाई सबको माननी होगी कि सरकार अपने देश का हित देखती है और वह दूसरे देश की विचारधारा की लड़ाई को तभी तक हथियार बनाती है जब तक कि वह उसे अपने लिए फायदेमंद ना समझे।

एक दूसरी बात है फलस्तीन के लिए हमास की लड़ाई जिसे भारत में बहुत से लोग आतंकवादी संगठन बताते हैं। अब जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के नेतृत्व में इसराइल और हमास के बीच समझौते पर दस्तखत होने का ऐलान कर चुके हैं और भारत सरकार ने इसका स्वागत किया है तो हमास को आतंकवादी कहने वाले लोग अब उसे क्या कहेंगे? क्या वह भारत सरकार से सवाल करेंगे या अब अपनी राय में बदलाव लाएंगे? बेहतर तो यही होगा कि लोगों को ऐसे मामलों के बारे में खुले दिल से सोचना चाहिए और दूसरों के कहने पर अपनी राय बिल्कुल नहीं बनानी चाहिए।

 

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