छ्पी-अनछपी: एनडीए में नीतीश का बड़े भाई का दर्जा खत्म, अफगान-पाक तनाव चरम पर 

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। एनडीए में सीट साझेदारी के फैसले के साथ यह तय हो गया कि नीतीश कुमार अब वहां बड़े भाई का दर्जा खो चुके हैं क्योंकि भाजपा और जदयू 101-101 सीटों पर लड़ेंगे। अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर लगातार गोलाबारी से तनाव चरम पर है। मधुबनी में जमींदारी बांध टूटने से कई गांव में पानी घुस गया है। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के इस बयान पर घमासान मचा है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार गलत था।

और, जनिएगा कि अमेरिका में पढ़ाई के इच्छुक भारतीय छात्रों की परेशानी कैसे बढ़ सकती है।

पहली ख़बर

प्रभात खबर के अनुसार विधानसभा चुनाव को लेकर रविवार को एनडीए में सीटों का बंटवारा हो गया। जदयू-101, भाजपा-101, चिराग पासवान की लोजपा (रा)-29, उपेंद्र कुशवाहा का रालोमो-6 और जीतन राम मांझी का हम-6 सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारेंगे।। सभी 243 सीटों पर बंटवारे की घोषणा एनडीए के सभी घटक दलों के नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर दी। अब सभी घटक दलों की तरफ से सीट सहित उम्मीदवारों की घोषणा सोमवार को होने की संभावना है। दरअसल इस संबंध में जदयू से तालमेल कर भाजपा के शीर्ष नेता कई दिनों से चिराग, मांझी सहित उपेंद्र को मनाने की कड़ी मशक्कत कर रहे थे। रविवार सुबह भी नयी दिल्ली में लगातार कई बैठक हुई। इसमें एनडीए घटक दल के नेता शामिल रहे। सोमवार से एनडीए में उम्मीदवारों व सीटों की घोषणा के साथ ही सिंबल बंटना शुरू हो जायेगा। सीट बंटवारे पर जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें कम आंका गया है तो उपेंद्र कुशवाहा ने बयान जारी किया की सीटें कम हैं, समर्थक उनकी और पार्टी की मजबूरी को समझें।

चुनाव बुलेटिन:

  • विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की 122 सीटों के लिए आज से हो सकता है नामांकन
  • जन सुराज पार्टी के उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट आज जारी होगी
  • पशुपति कुमार पारस ने कहा- महागठबंधन में बात नहीं बनी तो सभी सीटों पर लड़ेंगे चुनाव
  • राजद के दो विधायक प्रकाशवीर और विभा देवी ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया
  • आज शाम हो सकता है एनडीए के उम्मीदवारों के नाम का ऐलान
  • 15 अक्टूबर को अपने प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे नरेंद्र मोदी

अफगानिस्तान का दावा- 58 पाकिस्तानी सैनिक मार गिराए

जागरण के अनुसार पाकिस्तान की ओर से नौ अक्टूबर को अफगानिस्तान के काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में की गई एयरस्ट्राइक का अफगानिस्तान ने शनिवार देर रात बदला ले लिया। अफगानी बलों ने डूरंड लाइन के पास पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर जोरदार हमले किए और 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराने क् दावा किया। यही नहीं, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान की 25 सैन्य चौकियों पर भी कब्जे का दावा किया। उधर, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 200 से ज्यादा सैनिकों व आतंकियों को ढेर करने की बात कही है। फिलहाल देशों के बीच तनाव बना हुआ है। बता दें कि इस हफ्ते की शुरुआत में अफगान अधिकारियों ने पाकिस्तान पर राजधानी काबुल और देश के पूर्वी हिस्से में एक बाजार को निशाना बनाकर बमबारी करने का आरोप लगाया था। वैसे दोनों देशों के बीच सीमा पर जंग ऐसे समय शुरू हुई जब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत के दौरे पर हैं।

मधुबनी में जमींदारी बांध टूटने से कई गांव में बाढ़ 

हिन्दुस्तान के अनुसार बीते तीन दिनों से जारी पानी के दबाव के कारण अधवारा समूह की धौंस नदी पर बना बांध शनिवार देर रात बेनीपट्टी के नजरा के पास 40 फीट में टूट गया है। इस कारण बेनीपट्टी के नजरा में 50 घरों में पानी घुस गया है। लोग घरों की छत पर या अन्य ऊंची जगहों पर शरण लिए हुए हैं। बांध टूटने से 14 गांवों में रहनेवाले 10 हजार से अधिक लोग प्रभावित हैं और करीब 20 हजार की आबादी पर संकट मंडरा रहा है। बाढ़ से घिरे लोग राहत कार्य का इंतजार कर रहे हैं।

चिदंबरम ने ऑपरेशन ब्लू स्टार को गलत बताया, बवाल

प्रभात खबर के अनुसार कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम की तरफ से ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर की गयी टिप्पणी ने देशभर की सियासत में गर्माहट बढ़ा दी है। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा है कि 1984 में स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए चलाया गया ऑपरेशन ब्लू स्टार सही तरीका नहीं था और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। यह सेना, खुफिया विभाग, पुलिस और नागरिक सुरक्षा एजेंसियों का संयुक्त निर्णय था व आप पूरी तरह से इंदिरा गांधी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। चिदंबरम ने खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव में पत्रकार और लेखिका हरिंद बावेजा के साथ उनकी पुस्तक ‘दे विल शूट यू मैडम: माई लाइफ थ्रू कनफ्लिक्ट्स पर बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की। सूत्रों ने बताया कि इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी भी उनसे नाराज हैं जबकि भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर घेरा और कहा कि चिदंबरम कांग्रेस की गलतियां बहुत देर से स्वीकार कर रहे हैं। 

अमेरिका में दाखिले पर तय की जा सकती है 15% की सीमा, भारतीय छात्रों को होगी मुश्किल 

हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी सरकार ने नौ शीर्ष विश्वविद्यालयों को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसके तहत विदेशी छात्रों के दाखिले पर 15% की सीमा तय की जा सकती है। इसमें किसी एक देश से पांच फीसदी से अधिक छात्र नहीं लिए जाएंगे। यदि यह लागू होता है तो इसका सीधा असर अमेरिका में पढ़ाई के इच्छुक भारतीय छात्रों पर पड़ेगा। अमेरिकी सरकार के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 2.7 लाख से अधिक भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं, जो सभी विदेशी छात्रों का करीब 28% हिस्सा हैं। यदि यह सीमा लागू होती है तो किसी भी विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रों का प्रतिशत पांच से अधिक नहीं हो सकेगा। ऐसे में कई प्रतिभाशाली भारतीय छात्रों को दाखिले से वंचित होना पड़ सकता है।

कुछ और सुर्खियां:

  • आईआरसीटीसी घोटाला मामले में लालू और तेजस्वी के खिलाफ आरोप तय करने पर आज आ सकता है फैसला
  • पूर्वी चंपारण के लखौरा थाना क्षेत्र में तियर नदी में नाव डूबी, तीन लोगों की मौत
  • औरंगाबाद के सलैया थाना क्षेत्र में ओझा गुनी के झगड़े में बुजुर्ग को पीट-पीट कर मार डाला
  • केरल में अत्यंत गरीबी श्रेणी खत्म, ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बना

अनछपी: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान पर काफी विवाद खड़ा हो गया है जिसमें उन्होंने हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं, खासतौर पर राज्य के बाहर की छात्रों को छात्रावास के नियमों का पालन करने और देर रात बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। उनकी यह सलाह दुर्गापुर में एक मेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप के बाद आई है। ममता बनर्जी ने यह सफाई भी दी की छात्राओं को जहां चाहे वहां जाने का मौलिक अधिकार है लेकिन उन्हें देर रात बाहर निकलने से बचना चाहिए। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि पुलिस हर व्यक्ति की आवाजाही पर नजर नहीं रख सकती, अधिकारियों को नहीं पता होता की रात में कौन घर से निकल रहा है और वह हर घर के बाहर पहरा नहीं दे सकते। ममता के इस बयान पर सबसे पहले तो यह आरोप लगा कि जो पीड़िता है वह उसे ही दोषी ठहरा रही हैं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशील नहीं है। ममता के बयान की आलोचना केवल सिविल सोसाइटी की ओर से नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से भी हो रही है। जहां तक सिविल सोसाइटी की बात है तो उसका यह कहना बिल्कुल सही है कि हर जगह कानून व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि किसी को इस तरह के खतरे का सामना न करना पड़े। इसका दूसरा पहलू यह है कि राजनेता केवल उस समय अपने विरोधियों को निशाना बनाते हैं जब यह मामला उनके शासन वाले प्रदेश का नहीं होता। उदाहरण के लिए बिहार में ही गैंगरेप की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं लेकिन विरोध का यह स्वर सामने नहीं आता। अब जब मुख्यमंत्री ही कह रही हैं कि छात्राओं को देर रात घर से नहीं निकलना चाहिए तो खुद छात्राओं को यह फैसला करना है कि वह अपने को खतरे में डालकर बाहर निकलें या नहीं। ममता बनर्जी के बयान को इस तरह भी लिया जा सकता है कि वह इस मामले में लाचार हैं और छात्राओं को तय करना है कि देर रात बाहर घूमना उनकी प्राथमिकता है या अपनी सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। 

 

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