छपी-अनछपी: पहले बिजली 125 यूनिट मुफ्त- अब महंगी, बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। चुनाव से पहले 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना शुरू की गयी थी, अब चुनाव रिज़ल्ट के एक महीने के अंदर खबर आई है कि बिजली की दर बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा के बावजूद अयोध्या की बाबरी मस्जिद ढाए जाने की बरसी पर 6 दिसंबर को बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव डाली गई है जिसपर बहुत बवाल मचा है।
और, जानिएगा एक ऐसे फ्रॉड के बारे में जिसमें 3000 नेता, अफसर और पत्रकारों की जांच हो रही है।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार अगले साल एक अप्रैल 2026 से बिहार के लोगों को महंगी बिजली मिल सकती है। बिजली कंपनी ने बिहार विद्युत विनियामक आयोग को महंगी बिजली का अनुदानरहित प्रस्ताव सौंपा है। गरीब, ग्रामीण इलाके, घरेलू, गैर घरेलू से लेकर खेती और औद्योगिक सहित सभी श्रेणी में कंपनी ने मौजूदा बिजली दर में वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। अगर आयोग की मुहर लग गई तो लोगों को कम से कम 35 पैसे प्रति यूनिट महंगी बिजली मिल सकती है। हालांकि, आयोग की घोषणा के बाद सरकार अनुदान की घोषणा करती है, उसी दर पर लोगों को बिजली बिल देना होता है। कुटीर ज्योति, ग्रामीण व शहरी घरेलू की अनुदानरहित बिजली दर अभी 7.42 रुपये प्रति यूनिट है जिसे 7.77 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव दिया गया है
बाबरी मस्जिद की नींव रखने पर विवाद
जागरण के अनुसार कांग्रेस के अनुसार निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर ने शनिवार दोपहर कड़ी सुरक्षा के बीच बंगाल के मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा के मोरादिघी इलाके में आयोजित कार्यक्रम में बाबरी भारत-बांग्लादेश की सीमा से सटे मस्जिद की नींव रखीं। कबीर ने मंच पर मौलवियों के साथ फीता भी काटा। कार्यक्रम में दो लाख से अधिक लोग ईंट लेकर पहुंचे थे, इस दौरान अल्लाहु अकबर के नारे भी लगे। कार्यक्रम की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग-12 पर घंटों ट्रैफिक जाम रहा। जाम में फंसे कई लोगों ने इंटरनेट मीडिया के जरिए अपनी परेशानी साझा की। भाजपा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी पर निशाना साधा। भाजपा आइटी सेल के प्रमुख व राज्य में पार्टी के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि ममता मुस्लिम भावनाओं का ध्रुवीकरण करने के लिए हुमायूं का इस्तेमाल कर रही हैं। कार्यक्रम के मंच से हुमायूं ने हुंकार भरते हुए कहा-‘ मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनकर रहेगी। कोई भी ताकत इसकी एक ईंट भी हिला नहीं सकती। छह दिसंबर, 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि यह 33 साल पुराने जख्म पर थोड़ी सी मरहम पट्टी है।’ दावा किया कि बाबरी मस्जिद के लिए फंड की कमी नहीं होगी।
इंडिगो संकट: दो लाख लोग प्रभावित
भास्कर के अनुसार इंडिगो संकट से शनिवार को भी देश की घरेलू विमानन व्यवस्था बड़े पैमाने पर प्रभावित रही। पांचवें दिन इंडिगो की 800 उड़ानें रद्द हुईं। इससे शनिवार शाम तक करीब 2 लाख यात्री प्रभावित हुए। वहीं, इंडिगो ने दावा किया कि 95% नेटवर्क कनेक्टिविटी बहाल हो चुकी है। पटना एयरपोर्ट से इंडिगो की 13 जोड़ी फ्लाइट रद्द रहीं। विमान संकट से ट्रेनों पर दबाव बढ़ गया है। दिल्ली जाने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनों में 12 दिसंबर तक सीट नहीं है। वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं है। यात्री जनरल कोच में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की कर रहे हैं। रेलवे ने प्रीमियम ट्रेनों में एसी कोच बढ़ा दिए हैं। तेजस राजधानी, डिब्रूगढ़ राजधानी समेत देश की 37 प्रीमियम ट्रेनों में 116 कोच जोड़े गए हैं। अब रोज करीब 8120 अतिरिक्त यात्री सफर कर सकेंगे। दिल्ली के लिए छह स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं।
कई घरेलू रूट पर किराया 6 गुना तक बढ़ गया। पटना-मुंबई का किराया 90 चंद हजार, पटना-दिल्ली का 40 हजार तक पहुंच गया था। हालात बिगड़े तो नागर विमानन मंत्रालय ने दूरी के आधार पर किराया सीमा तय की। हालांकि, विशेषज्ञों ने बताया, कैपिंग नॉन स्टॉप उड़ानों के बेस फेयर पर है। कनेक्टिंग उड़ानें, सरचार्ज और अन्य शुल्क कैपिंग से बाहर हैं। ऐसे में, यात्रियों को ज्यादा किराया चुकाना पड़ा।
महादेव सट्टा एप फ्रॉड में 3000 नेता, अफसर व पत्रकार
भिलाई से जागरण की खबर है कि महादेव आनलाइन सट्टा एप नेटवर्क पर छत्तीसगढ़ पुलिस का शिकंजा लगातार कस रहा है। दुर्ग पुलिस ने 3,000 संदिग्ध लोगों की सूची तैयार की है। इन लोगों की मोबाइल गतिविधियों, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल वालेट की गहन निगरानी की जा रही है, क्योंकि जांच में इनकी सट्टा कारोबार में संलिप्तता का संदेह है। इस हाई-प्रोफाइल सूची में स्थानीय नेताओं, सरकारी अफसरों, कर्मचारियों के साथ-साथ कुछ पत्रकारों के नाम भी शामिल हैं। इस मामले में अब तक 70 एफआइआर दर्ज की गई हैं और 300 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामले की जांच सीबीआइ और ईडी भी कर रही है।
कुछ और सुर्खियां:
- आईआरसीटीसी घोटाला मामले में राबड़ी देवी बोलीं, विशेष अदालत पर मुझे भरोसा नहीं
- पटना के गुलजारबाग स्थित पॉलिटेक्निक के हॉस्टल सुपरिंटेंडेंट मेस बिल पास करने को डेढ़ लाख घूस लेते गिरफ्तार
- तीसरे वनडे में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 9 विकेट से हराकर सीरीज 2-1 से जीती
- जदयू एक करोड़ सदस्य बनाएगा, सदस्यता अभियान की शुरुआत नीतीश कुमार ने की
- बिहार विधानसभा में चुनकर आए 220 विधायकों को सरकारी क्वार्टर मिला
- पटना के बेउर में तेल एजेंसी के मालिक से दिन दहाड़े ₹5.25 की लूट
अनछपी: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे पर शुरू हुई बहस लंबे समय तक जारी रहेगी लेकिन मशीनरी की जीत जो बात राजद नेता तेजस्वी यादव कर रहे हैं, उस पर अलग-अलग राय हो सकती है। तेजस्वी यादव की ज्यादा चर्चा इन दिनों इसलिए हो रही थी कि वह यूरोप के दौरे पर निकल गए हैं लेकिन उनकी एक बातचीत सामने आई है जो पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के साथ हुई है। तेजस्वी यादव ने पूरे चुनाव को फिक्स बताया और कहा कि कोई भी यह बात पचा नहीं पा रहा है कि 75 से 25 सीट पर राजद कैसे आ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में लोकतंत्र की हार हुई है और मशीनरी जीती है। तेजस्वी यादव जब मशीनरी की बात करते हैं तो इसे समझना होगा कि इसमें कौन-कौन सी चीजें शामिल हैं। मिसाल के लिए चुनाव आयोग का नाम सबसे पहले आता है और जब भी हार होती है तो ईवीएम पर आरोप लगाए जाते हैं लेकिन इसके जवाब में लोग यह सवाल पूछते हैं कि जब जीत होती है तब वह ईवीएम के बारे में कोई बात क्यों नहीं कहते। तेजस्वी यादव हों या कोई और नेता, जब वह ईवीएम को हार के लिए दोषी करार देते हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है लेकिन इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि चुनाव आयोग का रोल बहुत से लोगों की नजर में पक्षपातपूर्ण रहता है। मशीनरी में दूसरी बात यह है कि जो पार्टी सरकार चलाती है उसको काफी सुविधाएं मिलती हैं। मिसाल के लिए ऐसा माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकारी खर्चे पर चुनाव प्रचार के लिए आते हैं। तुलसी यादव ने अपनी योजनाओं के बारे में बात की और यह आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव के 10 दिन पहले 40000 करोड़ रुपए रिश्वत के रूप में बांटे। उनका इशारा लाखों महिलाओं को दिए गए ₹10000 की तरफ है जो रोजगार शुरू करने के नाम पर दिए गए हैं और जिसे वापस नहीं करना है। यही नहीं सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि बढ़ाई गई और 125 यूनिट बिजली फ्री दी जाने लगी। अभी चुनाव नतीजा आए हुए एक महीना भी नहीं हुआ है और सरकार की तरफ से यह खबर आ रही है कि बिजली की दर बढ़ेगी। यानी एक तरफ फ्री बिजली देने का झांसा है तो दूसरी तरफ उसे वसूलने के लिए दर बढ़ाने की चाल भी है। तेजस्वी यादव कहते हैं कि उनका वोट परसेंटेज बढा है लेकिन ध्यान में रखने की बात यह है कि इससे ज्यादा सरकार में शामिल दलों का वोट बढ़ा था। असली बात यह है कि मशीनरी की बात तेजस्वी यादव और कांग्रेस पार्टी को पहले से मालूम थी, इसलिए उसकी शिकायत की जगह उन्हें इस मशीनरी के बावजूद जीतने की रणनीति बनानी होगी। उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच रहना होगा और चुनाव जीतने के लिए राहुल गांधी की तरह के राजनीतिक पर्यटन से काम नहीं चलने वाला।
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