छपी-अनछपी: ईरान-अमेरिका समझौते में ट्रंप का आजकल, बंगाल में बनेगा हिरासत केंद्र

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ईरान और अमेरिका के बीच जब जब लगता है कि समझौता हो जाएगा डोनाल्ड ट्रंप कोई न कोई रोड़ा अटका रहे हैं। घुसपैठियों के खिलाफ धर-पकड़ अभियान व पुशबैक नीति के तहत अब बंगाल में हर जिले में डिटेंशन सेंटर बनाया जाएगा। पाकिस्तान में सैनिकों की ट्रेन पर आत्मघाती हमले में 24 लोगों की मौत हो गई।

और, छापेमारी करने गई पुलिस की ली गई तलाशी के मामले में दो थानेदार हुए सस्पेंड। 

पहली ख़बर

भास्कर के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच डील की कवायद फिर डांवाडोल हो गई है। डील को लेकर खाड़ी देशों और इसराइल के साथ वार्ता का आखिरी दौर चलने की बात कहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 24 घंटे में ही पलट गए। ट्रम्प ने रविवार देर रात कहा, मुझे डील की कोई जल्दी नहीं है। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, हम बराक ओबामा के जैसे ईरान के साथ आत्मघाती डील नहीं करेंगे। ईरान को अपना परमाणु प्रोग्राम बंद करना होगा। दूसरी ओर, ईरान के तेवर कायम हैं। आईआरजीसी चीफ अहमद वाहिदी ने कहा, यदि डील होती है तो भी होर्मुज से आवाजाही बहाली में कम से कम 30 दिन का समय लगेगा। इधर, नई दिल्ली में रविवार सुबह ईरान से डील पर जल्द गुड न्यूज का दावा करने वाले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी देर शाम फ्लट गए। एक इंटरव्यू में रूबियो ने कहा, डील गंभीर मुद्दा है। संभल कर बात बढ़ेगी। अमेरिका का लक्ष्य ईरान को किसी भी सूरत में परमाणु हथियार नहीं बनाने देना है।

बंगाल में हर जिले में बनेगा हिरासत केंद्र

जागरण के अनुसार पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद घुसपैठियों के खिलाफ धर-पकड़ अभियान व पुशबैक नीति को तत्काल प्रभाव से लागू करने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली सरकार ने अब राज्य के सभी जिलों में ‘होल्डिंग सेंटर’ (हिरासत केंद्र) बनाने का निर्देश दिया है। इन होल्डिंग सेंटरों में उन लोगों को रखा जाएगा, जिन्हें बांग्लादेशी घुसपैठिए या रोहिंग्या होने के शक में हिरासत में लिया गया है या जिन्हें आगे पकड़ा जाएगा। देश से बाहर भेजने से पहले इन होल्डिंग सेंटरों में संदिग्धों को 30 दिन तक हिरासत में रखा जा सकेगा।

बकरीद के दिन होने वाली सीयूईटी यूजी की परीक्षा स्थगित

हिन्दुस्तान के अनुसार बकरीद की छुट्टी की तारीख में बदलाव को को देखते हुए हुए 28 मई को होने वाली कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) यूजी परीक्षा स्थगित कर दी गई है। एनटीए ने बताया कि प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा जल्द की जाएगी।

पाकिस्तान में सैनिकों की ट्रेन पर आत्मघाती हमले में 24 लोगों की मौत

प्रभात खबर के अनुसार पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को सैन्य कर्मियों और उनके परिवारों को ले जा रही जाफर एक्सप्रेस पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें कम से कम 24 लोगों की मौत हो गयी और 80 से अधिक घायल हो गये. अधिकारियों के अनुसार, चमन फाटक के पास विस्फोटकों से भरी कार ट्रेन की बोगी से टकरा गयी, जिससे कई डिब्बे पटरी से उतर गये. प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए), ने हमले की जिम्मेदारी ली है. घायलों को क्वेटा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां आपातकाल घोषित किया गया. पाकिस्तान के रेल मंत्री हनीफ अब्बासी ने कहा कि ‘शटल’ ट्रेन में असैन्य यात्री भी थे और बिस्फोट से इंजन व तीन डिब्बे प्रभावित हुए. विस्फोट इतना जोरदार था कि आसपास के वाहनों के शीशे और आस-पास की इमारतों के शीशे चकनाचूर हो गये. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने हमले की निंदा की है. प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के ऐसे कायरतापूर्ण कृत्य पाकिस्तान की जनता के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते.

चीन में बैठे डॉक्टर ने हैदराबाद में की रोबोटिक सर्जरी

जागरण के अनुसार चीन के वुहान में बैठे भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने हैदराबाद में मौजूद मरीज की रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की। करीब 3000 किलोमीटर की दूरी पर हुई इस सर्जरी में अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम और अल्ट्रा-फास्ट 5जी नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। ब्लैडर रीकनेक्शन यानी मूत्राशय को जोड़ने से जुड़ी यह जटिल सर्जरी महज 90 मिनट में पूरी कर ली गई। रिपोर्ट के मुताबिक, आपरेशन से पहले वुहान स्थित टोंगजी अस्पताल और हैदराबाद की मेडिकल टीम ने मरीज की मेडिकल रिपोर्ट आनलाइन साझा कर पूरी सर्जरी की योजना तैयार की। चाइना डेली के अनुसार, हैदराबाद में मौजूद डाक्टरों और नसों ने मरीज को एनेस्थीसिया दिया और उसके शरीर में हाई डेफिनिशन 3डी कैमरों तथा बारीक सर्जिकल उपकरणों से लैस रोबोटिक हाथ फिट किए। इसके बाद वुहान में कंप्यूटर कंसोल पर बैठे डा. गौस ने रियल टाइम उडी तस्वीरों की मदद से रोबोटिक हाथों को नियंत्रित करते हुए आपरेशन किया।

पुलिस की ली गई तलाशी के मामले में दो थानेदार हुए सस्पेंड

भास्कर के अनुसार मोकामा पंचमहला थाना के नौरंगा गांव में पुलिस के इकबाल को खुली चुनौती मिली है। पुलिस गैंगस्टर सोनू-मोनू के घर छापेमारी करने गई थी। सोनू-मोनू के परिजनों और समर्थकों ने पुलिस को घर में घुसने से रोक दिया। उन्होंने पुलिस से सर्च वारंट मांगा। पुलिस ने कहा कि सर्च वारंट जरूरी नहीं है। इसके बाद समर्थकों ने शर्त रखी कि अंदर जाने से पहले पुलिस को अपनी तलाशी देनी होगी। सोनू-मोनू के समर्थकों ने पंचमहला के थानेदार कुंदन कुमार और हथिदह थानेदार रंजन कुमार समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन में खड़ा किया। उनके शरीर से लेकर पॉकेट तक की तलाशी ली गई। इसके बाद ही उन्हें घर के अंदर जाने दिया गया। इससे पहले पंचमहला थानेदार रंजन कुमार कुख्यात सोनू से मोबाइल का स्पीकर ऑन कर बात कर रहे थे। यह सब सोनू के लोगों के सामने हुआ। समर्थकों ने पुलिस की तलाशी और थानेदार की बातचीत का वीडियो बना लिया। वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। वीडियो वायरल होने से पुलिस की भारी किरकिरी हुई। पुलिस मुख्यालय और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। मामले में एसएसपी कार्तिकय शर्मा ने कड़ा एक्शन लिया है। उन्होंने दोनों थानेदारों को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है। एसएसपी ने कहा कि पुलिस का लाइन में लगकर तलाशी देना गलत है। तलाशी स्वतंत्र गवाह के सामने देनी चाहिए थी। 

कुछ और सुर्खियां:

  • सारण जिले के तरैया थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े ज्वेलर्स से 18 लाख की लूट
  • पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर स्थगित चुनाव में भाजपा ने एक लाख से ज्यादा वोट से जीत हासिल की
  • आज से दक्षिण बिहार में गर्मी की शिद्दत और बढ़ेगी, उत्तर बिहार व सीमांचल में बारिश की संभावना
  • बिहार के सरकारी स्कूलों में जून से शनिवार को हाफ डे की पढ़ाई
  • औरंगाबाद में बिहार को तीन राज्यों से जोड़ने वाले बटाने दोमुहान पुल में आई दरार, भारी वाहनों पर लगी रोक

अनछपी: भारतीय जनता पार्टी के राज वाले प्रदेशों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने को लेकर बहुत हल्ला मचाया जाता है लेकिन सच्चाई यह है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड से केवल मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और इसमें कई वर्ग ऐसे हैं जिन्हें छूट दी जा रही है। यह बात इतनी बेशर्मी से और खुल्लम-खुल्ला कही जा रही है फिर भी सुप्रीम कोर्ट इस पर कोई ध्यान नहीं देता। जब यह कहा जाता है कि आदिवासी समुदाय को यूनिफॉर्म सिविल कोड की वजह से अपनी संस्कृति और परंपराओं से वंचित होना पड़ेगा तो देश के गृह मंत्री अमित शाह उसे षड्यंत्र बताते हैं। दिल्ली में आयोजित जनजाति संस्कृत समागम में श्री शाह ने साफ कहा कि जनजातीय पर यूनिफॉर्म सिविल कोड से कोई पाबंदी नहीं लगने वाली है। उनसे कोई यह नहीं पूछने वाला कि जब सिविल कोड समान रूप से लागू नहीं होगा तो फिर यह यूनिफॉर्म कैसे रहेगा? यही बात तो मुसलमान भी कहते हैं कि यूनिफॉर्म सिविल कोड से दरअसल उनकी संस्कृति और परंपराओं को मिटाने की साजिश चल रही है तो इस बात को खारिज कर दिया जाता है। इसकी वजह यह है कि आदिवासी, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी वनवासी कहना पसंद करती है, यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बेहद संवेदनशील हैं और वह इसका विरोध करते हैं। भारतीय जनता पार्टी को पता है कि अगर उसने यूनिफॉर्म सिविल कोड के दायरे में आदिवासियों को लाया तो उसे लेने के देने पड़ जाएंगे। आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी को यह भी पता है कि मुसलमान को अगर इस तरह उनकी संस्कृति और परंपरा से वंचित किया जाए तो उन्हें राजनीतिक लाभ होगा इसलिए वह खुलकर यह संदेश दे रहे हैं कि जनजाति समुदाय को इससे बाहर रखा जाएगा। लेकिन इस तरह बनाए गए यूनिफॉर्म सिविल कोड को कैसे यूनिफॉर्म कहा जा सकता है? 

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