छ्पी-अनछपी: ट्रंप पर भड़का यूरोपीय यूनियन, बिहार में बिल्डिंग बायलॉज बदलेंगे

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ग्रीनलैंड मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद यूरोपीय यूनियन (ईयू) भड़क गया है। बिहार सरकार बिल्डिंग बायलाज़ में संशोधन कर रही है, जिसके तहत अब बायलाज उल्लंघन पर जेल की सजा के प्रविधान को हटाकर आर्थिक दंड का प्रावधान किया जाएगा।

और जानिएगा कि कोर्ट के क्लर्क की गलती से जमानत के इनकार का फैसले को इजाज़त लिख दिया जाए तो क्या इसे बदला जा सकता है?

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान के अनुसार ग्रीनलैंड मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद यूरोपीय संघ भड़क गया है। ईयू ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत रोक दी। वहीं, डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी तो जर्मनी, फ्रांस आदि देशों ने भी सैन्य टुकड़ियां भेजी हैं। यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि अमेरिका का यह कदम अमेरिका-यूरोप संबंधों को कमजोर कर सकता है और एक खतरनाक नकारात्मक दौर को जन्म दे सकता है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि इस कदम से संबंधों में गिरावट का दौर शुरू होगा। उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ पूर्ण एकजुटता जताते हुए नाटो सहयोगियों के बीच मतभेद सुलझाने के लिए संवाद पर जोर दिया।

ट्रंप के कब्जे वाले बयान पर ग्रीनलैंड में बड़ा प्रदर्शन

भास्कर ने लिखा है कि ग्रीनलैंड में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्रीनलैंड पर कब्जे वाले बयानों के खिलाफ शनिवार को राजधानी नूक में देश का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन हुआ। पुलिस के मुताबिक इसमें नूक की करीब 10 हजार लोग आए थे, जो शहर की करीब आधी आबादी है। सड़कों पर हजारों लोग अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक मार्च करते हुए पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय झंडे लहराए और ट्रम्प का पुतला लेकर ‘ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है’, ‘अमेरिका वापस जाओ’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन में परिवार भी बड़ी संख्या में पहुंचे। लोगों ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर कोई सौदा मंजूर नहीं। अमेरिका के नए टैरिफ ऐलान ने माहौल और गरमा दिया।

बिल्डिंग बायलाज़ में होगा बदलाव

जागरण की खबर है कि बिहार में भवन निर्माण से जुड़े नियमों को आम लोगों के लिए आसान और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार बिल्डिंग बायलाज़ में संशोधन कर रही है, जिसके तहत अब बायलाज उल्लंघन पर जेल की सजा के प्रविधान को हटाकर आर्थिक दंड का प्रावधान किया जाएगा। इससे आम नागरिकों, छोटे भवन मालिकों और बिल्डरों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही राज्य के सभी नगर निकायों में नक्शा पास कराने, भूमि उपयोग परिवर्तन (भू-परिवर्तन) और अन्य टाउन प्लानिंग से जुड़ी सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन की जाएंगी। सरकार ने एक जुलाई से नगर निकायों में आम जनता को फेसलेस और डिजिटल सुविधाएं देने का लक्ष्य तय किया है। फेसलेस व्यवस्था होने के बाद इन कार्यों के लिए लोगों को कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।

नीट छात्रा रेप-मर्डर कांड: बयानों में मेल नहीं

प्रभात खबर ने पटना से खबर दी है कि चित्रगुप्त नगर थाने के एक निजी हॉस्टल में नीट की तैयारी करने वाली जहानाबाद की छात्रा की मौत के मामले में रविवार को एसआईटी ने दो निजी अस्पतालों में दो घंटे जांच की. एसआईटी ने डॉक्टरों से आमने-सामने पूछताछ की और कई अहम दस्तावेज जब्त किये. सूत्रों के अनुसार टीम में शामिल पुलिस पदाधिकारियों ने डॉक्टर, स्टाफ और नर्स से अलग-अलग पूछताछ भी की और सभी के बयान एक-दूसरे से मैच नहीं हो पाये. टीम ने स्त्री रोग विशेषज्ञ से भी पूछताछ की है, जिसने छात्रा की जांच की थी. टीम ने कई लोगों के कॉल डिटेल और डंप डाटा जहानाबाद भी जांच के लिए पहुंची. रविवार को सबसे पहले एसआइटी की टीम वहां पहुंची, जहां छात्रा का सबसे पहले इलाज किया गया था. वहां लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की गयी और सारे फुटेज को पुलिस ने जब्त कर लिया.

अभ्रक की ग़ैर क़ानूनी माइनिंग से नवादा में पहाड़ आधा

प्रभात खबार ने लिखा है कि नवादा जिले का गौरव कहे जाने वाले रजौली वनक्षेत्र की वादियों में इन दिनों शांति नहीं, अवैध विस्फोट की गूंज, माफियाओं की मशीनों व वाहनों का शोर सुनाई दे रहा है. अभ्रक के अवैध खनन से 2700 हेक्टेयर में फैले वन्यप्राणी आश्रयणी (वाइल्ड लाइफ सेंचुरी) को गंभीर खतरा पैदा हो गया है. रजौली की सवैयाटांड़ पंचायत अंतर्गत आने वाले सघन जंगली इलाकों (630 हेक्टेयर) के चटकरी स्थित शारदा, ललकी, सेठवा, फागुनी, जरलाही बसरौन, टोपा पहाड़ी, अंगड्या, काली पहाड़ी टिटहिंया व पननमा सहित कई जगहों पर अभ्रक (मायका) का अवैध कारोबार जारी है. शारदा पहाड़ की बात करें तो एक अनुमान के अनुसार 2016 तक इसकी ऊंचाई करीब 500 मीटर हुआ करती थी, जो अवैध खनन के कारण अब आधी 250 मीटर के आसपास रह गयी है. अवैध खनन से सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है. यह पूरा खेल संगठित सिंडिकेट के जरिये चल रहा है, जिसमें झारखंड के मायका माफिया भी शामिल हैं. यहां तैनात वन विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मी इसे रोकने में पूरी तरह विफल हैं.

अफसरों से सीधे मिलने का प्रोग्राम आज शुरू हो रहा

बिहार में पंचायत से लेकर सचिवालय तक के अधिकारी लोगों की समस्याएं सुनने के लिए सोमवार को दफ्तरों में मौजूद रहेंगे। कार्यालय अवधि में लोगों की समस्याएं सुनेंगे। छोटी-मोटी समस्याओं का तत्काल समाधान निकालेंगे। सोमवार से राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में लोगों की समस्याएं सुनने और उसका निदान सुनिश्चित करने की नई व्यवस्था शुरू हो रही है। हरेक सप्ताह सोमवार के अलावा शुक्रवार को भी अधिकारी दफ्तर में लोगों से मिलेंगे। सात निश्चय-3 के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ के तहत यह व्यवस्था लागू हो रही है।

गलत टाइप किये हुए फैसले पर जज दस्तख़त कर दे तो बदल नहीं सकता

हिन्दुस्तान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि एक बार जब जज किसी आदेश पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो उसे बदला नहीं जा सकता। भले ही गलती कितनी भी अजीब क्यों न हो। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने नारकोटिक्स केस में एक आरोपी की जमानत फिर से बहाल कर दी है। दरअसल, पटना हाई कोर्ट में एक नशीले पदार्थों के मामले के आरोपी की जमानत पर सुनवाई हुई। आदेश लिखते समय कोर्ट के स्टाफ ने गलती से रिजेक्टेड की जगह अलाउड लिख दिया। जब हाईकोर्ट को इस गलती का पता चला तो उसने पिछला आदेश रद्द कर दिया और जमानत वापस ले ली। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए आरोपी की जमानत बहाल कर दी।

कुछ और सुर्खियां:

  • बिहार राज मदरसा शिक्षा बोर्ड की फ़ौकानिया और मौलवी की परीक्षा आज से
  • जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में सुरक्षा कर्मियों पर हमला, सात जवान घायल
  • झारखंड के लातेहार में क्षमता से दुगने लोगों को ले जा रही बस पलटी, छह की मौत, 85 घायल
  • बिहार में पहले से पांचवी क्लास तक के छात्रों की पोशाक जीविका दीदियां सिलेंगी

अनछपी: यूरोपियन यूनियन ने जिस तरह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जे के मंसूबे का विरोध किया है वह अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए एक छोटी लेकिन जरूरी और सुखद पहल है। डोनाल्ड ट्रंप यह बता रहे हैं कि उनके लिए दुनिया का कोई कानून कोई मतलब नहीं रखता और वह अपनी ताकत के बल पर किसी देश पर आसानी से कब्जा कर सकते हैं और उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता। यह बात उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उनके देश से उठाकर साबित कर दिया जिसे वह तो पकड़ना बताते हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय अपहरण समझता है। यूरोपीय संघ में जो कदम उठाया है वह इसलिए महत्वपूर्ण है कि अगर वह ऐसा नहीं करते तो राष्ट्रपति ट्रंप का अगला निशाना डेनमार्क और दूसरे देश भी हो सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति ट्रंप की बुरी नजर क्यूबा और कोलंबिया पर पहले से ही है। इस मामले में ट्रंप अकेले राष्ट्रपति नहीं है बल्कि उनके पहले कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इसी तरह की विस्तारवादी नीतियों पर अमल किया है और अंतरराष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाई हैं। फर्क शायद यह है कि ट्रंप सबसे ज्यादा मजाक के पात्र लग रहे हैं और जिस तरह उन्होंने किसी दूसरे को दिए गए नोबेल पीस प्राइज को खुद लेने में खुशी का इज़हार किया है, उसे स्वस्थ मानसिक हालत नहीं माना जा सकता। इस मामले में भारत को भी अपनी नीति पर गौर करते रहना चाहिए क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका के दबाव में ही उसने ईरान की चाबहार बंदरगाह से अपने हाथ खींच लिए हैं। भारत को किसी न किसी मुकाम पर आकर अमेरिका को यह बताना पड़ेगा कि वह उसके दबाव में अब और झुकने वाला नहीं है।

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