छपी-अनछपीः जातिगत गिनती एक माह में शुरू होगी, कटिहार सब रजिस्ट्रार के पास बिहार से बंगाल तक जमीन-जायदाद

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उम्मीद जतायी है कि बिहार में जाति आधारित गिनती एक माह में शुरू हो जाएगी। यह हिन्दुस्तान, जागरण व भास्कर की पहली खबर है। जातीय जनगणा अगले साल फरवरी तक पूरी होने की संभावना है।
प्रभात खबर ने कटिहार के सब रजिस्ट्रार के पास बिहार से बंगाल तक पांच शहरों में 11 प्लाॅट, फ्लैट और मकान खरीदने की खबर को लीड की जगह दी है। यह जानकारी सब रजिस्ट्रार जय कुमार के घर पर विजिलेंस ब्यूरो की छापेमारी में मिली है।
भास्कर ने भारतीय जनता पार्टी के उस बयान को प्रमुखता से छापा है जिसमें उसने आरोप लगाया है कि जातीय गणना में रोहिंग्या को गिनने से ओबीसी आरक्षण पर असर पड़ेगा। अन्य अखबारों में भी इसे जगह दी गयी है।
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित होने वाली बिहार की एमबीबीएस फाइनल ईयर की सर्जरी पेपर टू का प्रश्नपत्र वायरल होने की खबर के बाद इसे रद्द कर दिया गया है। यह खबर टाइम्स आॅफ इंडिया में पहले पेज पर है।
बिहार में तीन माह से विश्वविद्यालय कर्मियों को वेतन नहीं मिलने की खबर हिन्दुस्तान में प्रमुखता से छपी है। इसी अखबार में बिहार में बीजों की किल्लत की खबर को भी अच्छी जगह दी गयी है।
कश्मीर में 177 हिन्दू शिक्षकों के सुरक्षित तबादले की खबर भी सभी अखबारों में प्रमुखता से छपी है जबकि सरकार का दावा था कि नोटबंदी और अन्य कदमों से वहां सुरक्षा का माहौल बेहतर हुआ है। इसके बावजूद वहां हो रही हत्याओं के बाद सरकार का यह कदम उसके दावे पर सवाल खड़े करता है।
अनछपीः बिहार में जातीय जनगणा के लिए हां कहने के बाद भाजपा लगातार इसे हल्का करने और इसमें हिन्दू-मुस्लिम बहस घुसेड़ने में लगी है। एक तरफ उसके नेता जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग पर बयान बाजी तेज करने लगे हैं तो दूसरी तरफ मुसलमानों की गिनती पर उनकी खास नजर है। उनके नेता रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को इस गिनती से दूर रखने की बात कह रहे हैं। मगर कोई उनसे यह नहीं पूछ रहा कि 2005 से भाजपा बीच के दो साल छोड़कर 15 साल से सरकार में है, इसके बावजूद घुसपैठिया बिहार में कैसे आये और रह रहे हैं। इसके अलावा उसके नेता यह भी कह रहे हैं कि सीमांचल के अगड़ी जाति के मुसलमान पिछड़ी जाति मंे अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। मगर यह मामला जब सरकार के स्तर पर तय हो रहा तो इस पर बयानबाजी का क्या मतलब है। क्या भाजपा जातीय जनगणना पर अनिच्छा से राजी होने के बाद उसकी काट में यह सब कर रही है?
। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उम्मीद जतायी है कि बिहार में जाति आधारित गिनती एक माह में शुरू हो जाएगी। यह हिन्दुस्तान, जागरण व भास्कर की पहली खबर है। जातीय जनगणा अगले साल फरवरी तक पूरी होने की संभावना है।
प्रभात खबर ने कटिहार के सब रजिस्ट्रार के पास बिहार से बंगाल तक पांच शहरों में 11 प्लाॅट, फ्लैट और मकान खरीदने की खबर को लीड की जगह दी है। यह जानकारी सब रजिस्ट्रार जय कुमार के घर पर विजिलेंस ब्यूरो की छापेमारी में मिली है।
भास्कर ने भारतीय जनता पार्टी के उस बयान को प्रमुखता से छापा है जिसमें उसने आरोप लगाया है कि जातीय गणना में रोहिंग्या को गिनने से ओबीसी आरक्षण पर असर पड़ेगा। अन्य अखबारों में भी इसे जगह दी गयी है।
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित होने वाली बिहार की एमबीबीएस फाइनल ईयर की सर्जरी पेपर टू का प्रश्नपत्र वायरल होने की खबर के बाद इसे रद्द कर दिया गया है। यह खबर टाइम्स आॅफ इंडिया में पहले पेज पर है।
बिहार में तीन माह से विश्वविद्यालय कर्मियों को वेतन नहीं मिलने की खबर हिन्दुस्तान में प्रमुखता से छपी है। इसी अखबार में बिहार में बीजों की किल्लत की खबर को भी अच्छी जगह दी गयी है।
अनछपीः बिहार में जातीय जनगणा के लिए हां कहने के बाद भाजपा लगातार इसे हल्का करने और इसमें हिन्दू-मुस्लिम बहस घुसेड़ने में लगी है। एक तरफ उसके नेता जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग पर बयान बाजी तेज करने लगे हैं तो दूसरी तरफ मुसलमानों की गिनती पर उनकी खास नजर है। उनके नेता रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को इस गिनती से दूर रखने की बात कह रहे हैं। मगर कोई उनसे यह नहीं पूछ रहा कि 2005 से भाजपा बीच के दो साल छोड़कर 15 साल से सरकार में है, इसके बावजूद घुसपैठिया बिहार में कैसे आये और रह रहे हैं। इसके अलावा उसके नेता यह भी कह रहे हैं कि सीमांचल के अगड़ी जाति के मुसलमान पिछड़ी जाति मंे अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। मगर यह मामला जब सरकार के स्तर पर तय हो रहा तो इस पर बयानबाजी का क्या मतलब है। क्या भाजपा जातीय जनगणना पर अनिच्छा से राजी होने के बाद उसकी काट में यह सब कर रही है?

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