छ्पी-अनछपी: राहुल का हमला- भारत माता को बेच दिया, बांग्लादेश में आज आम चुनाव
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि अपने भारत माता को बेच दिया है। बांग्लादेश में शेख हसीना के देश से भागने के बाद पहली बार आम चुनाव के लिए आज वोटिंग हो रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किया है कि अब वंदे मातरम का विवादित हिस्सा भी गाना पड़ेगा।
और, जानिएगा कि एक मॉडल का इल्ज़ाम हेयर स्टाइलिस्ट ने बाल ज़्यादा काट दिए, सुप्रीम कोर्ट का फैसला- 25 लाख का हर्ज़ाना।
पहली ख़बर
लोकसभा में बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए बुधवार को राहुल ने मार्शल आर्ट की विद्या का हवाला देकर आरोप लगाया कि अमेरिका ने सरकार की गर्दन पकड़ रखी (चोक्होल्ड) है और इसीलिए उसने हमारे हितों को नुकसान पहुंचाने वाली इस डील पर हस्ताक्षर किए हैं। राहुल ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि मोदी सरकार समेत भारत की कोई भी सरकार, ऐसी डील पर तब तक हस्ताक्षर करेगी जब तक उस पर कोई दबाव न हो।’ राहुल गांधी ने अमेरिका से ट्रेड डील को संपूर्ण सरेंडर करार देते हुए कहा कि सरकार ने भारत माता को बेच दिया है। (भास्कर के अनुसार राहुल ने कहा, आपने भारत को बेच दिया है, आपने हमारी मां, भारत माता को बेच दिया है। क्या आपको कोई शर्म नहीं आती?)। राहुल ने सरकार के निकट माने जाने वाले एक बड़े औद्योगिक घराने पर अमेरिका में दर्ज मामले और विवादित एपस्टीन फाइल्स के संदर्भ में अनिल अंबानी व केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का नाम लेते हुए आरोप लगाया। इस पर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रीजीजू और सत्तापक्ष के एतराज के बाद पीठासीन जगदंबिका पाल ने रिकार्ड से हटाने की बात कही।
हरदीप पूरी ने मानी एपस्टीन से मुलाकात की बात
लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा ‘एपस्टीनन फाइल्स’ का मुद्दा उठाए जाने के वाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिह पुरी ने स्पष्ट किया है कि उनकी एपस्टीन से केवल तीन-चार मुलाकातें हुई थीं और वे भी पूरी तरह पेशेवर तथा आधिकारिक प्रकृति की थीं। अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए पुरी ने कहा कि उनका किसी भी अवैध गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। राहुल गांधी ने अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों का हवाला देते हुए लोकसभा में दावा किया था कि जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में हरदीप सिंह पुरी का नाम भी है।
बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए आज वोटिंग
जागरण के अनुसार बांग्लादेश में गुरुवार को कड़ी सुरक्षा के बीच होने वाले आम चुनाव के नतीजे सिर्फ ढाका की सत्ता का फैसला नहीं करेंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र की कूटनीतिक दिशा और रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। 350 सदस्यीय संसद की 300 सीटों के लिए चुनाव आज मतदान है। 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित है। 12.7 करोड़ मतदाता 1981 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे और वोटिंग के तुरंत बाद गिनती शुरू होगी। सत्ता परिवर्तन भारत-बांग्लादेश संबंधों, सीमा सुरक्षा, पूर्वोत्तर की स्थिरता और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर दूरगामी असर डाल सकता है। अवामी लीग के बिना यह पहला चुनाव हो रहा है, जबकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की संभावित वापसी, चीन और अमेरिका की बढ़ती सक्रियता के अलावा भारत के आर्थिक और सामरिक हित, इन सबके बीच यह चुनाव दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकता है। मुख्य मुकाबला बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के साथ माना जा रहा है।
वंदे भारत का विवादास्पद हिस्सा भी राष्ट्रगीत के तौर पर गाना ज़रूरी
प्रभात खबर के अनुसार केंद्र सरकार ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वें वर्ष के उपलक्ष्य में इसके गायन का नया राष्ट्रीय प्रोटोकॉल जारी किया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के नये निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी आधिकारिक और सरकारी समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों व इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के गायन से होगी. गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति के आगमन, ध्वजारोहण और राज्यपालों के अभिभाषण जैसे उच्च-स्तरीय कार्यक्रमों में अब गीत के केवल पहले दो छंद नहीं, बल्कि पूरे छह छंद गाये जायेंगे. इस निर्णय के साथ ही सरकार ने 1937 के उस ऐतिहासिक कालखंड के फैसले को भी प्रभावी रूप से पलट दिया है, जिसके तहत राजनीतिक कारणों से इसके अंतिम चार छंदों को गायन से बाहर कर दिया गया था. मंत्रालय ने यह भी कहा कि उन सभी अवसरों की पूरी सूची देना संभव नहीं है, जहां राष्ट्रगीत का गायन किया जा सकता है.
टीआरई 4 के लिए 46 हज़ार पदों पर होगी सीधी बहाली
हिन्दुस्तान के अनुसार में चौथे चरण यानि टीआई 4 में 46 हजार शिक्षक बहाल होंगे। मार्च में विज्ञापन जारी होगा। आवेदन की प्रक्रिया भी मार्च से शुरू हो जाएगाी। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के सचिव सत्य प्रकाश शर्मा ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग से अधियाचना मिल गई है। विस्तृत अधिसूचना जल्द जारी होगी। सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा विभाग से प्राप्त हुई। कक्षा एक से बारहवीं तक के लिए शिक्षा विभाग में कुल 44,500 रिक्तियां भेजी हैं। इसमें शिक्षा विभाग के अन्तर्गत कक्षा पहली से पांचवीं, छठी से आठवीं, 9वीं से 10वीं और 11वीं से 12वीं के विद्यालय अध्यापक तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अन्तर्गत वर्ग से भी नियुक्ति के लिए एक से पांच, छठी से आठवीं, नवमीं से दसवीं और 11वीं से 12वीं के विद्यालय अध्यापक एवं प्रधानाध्यापक तथा पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अन्तर्गत वर्ग 6 से 8, 9 से 10, 11 से 12 के विद्यालय अध्यापक एवं प्रधानाध्यापक के पदों पर नियुक्ति के लिए अधियाचना प्राप्त हुई है।
हेयर कट की शिकायत पर 25 लाख का मुआवजा
क्या एक खराब हेयरकट किसी को करोड़ों रुपये का मुआवजा दिला सकता है? इस दिलचस्प सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त और स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा नहीं, जब तक कथित नुकसान का ठोस, विश्वसनीय और प्रमाणित साक्ष्य पेश न किया जाए तब तक नहीं। अदालत ने दो टूक कहा कि करोड़ों का हर्जाना भावनात्मक तर्कों, अनुमानों या मात्र दावों के आधार पर नहीं दिया जा सकता। इसके लिए वास्तविक क्षति का स्पष्ट और प्रमाणिक आधार होना अनिवार्य है। न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने 34 पेज के फैसले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के दो करोड़ रुपये के मुआवजे के आदेश को बदलकर 25 लाख कर दिया। अदालत ने कहा कि इतना बड़ा दावा होने पर आयोग का दायित्व था कि वह साक्ष्यों का गंभीर परीक्षण करता और स्पष्ट करता कि वास्तविक नुकसान की गणना किस आधार पर की गई। यह ख़बर जागरण ने दी है।
कुछ और सुर्खियां:
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अनछपी: इस समय अमेरिका से ट्रेड डील और एपस्टीन फाइल्स में केंद्रीय मंत्रियों नेताओं के नाम आने के बाद बुरी तरह घिरी हुई नरेंद्र मोदी सरकार ने लोगों का ध्यान भटकने के लिए एक और बेहद खतरनाक सांप्रदायिक विवाद- वंदे मातरम का सहारा लिया है। मोटे तौर पर यह समझा जा रहा है कि सरकार ने इन विवादों को एक दूसरे विवाद से बदलने के लिए यह फैसला किया है ताकि लोग अमेरिका की डील और एपस्टीन फाइल्स को भूल जाएं। इस देश को आजादी दिलाने के लिए जेल जाने वाले लोगों ने बहुत सोच समझकर वंदे भारत के गीत से उन हिस्सों को हटा दिया था जिसमें स्पष्ट रूप से देवी देवताओं का जिक्र है और भारत के हर समुदाय को इन पंक्तियों को गाने पर मजबूर करने का मतलब होगा उनकी धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता को छीन लेना। सरकार बहाने बनाने के लिए कह सकती है कि यह एक नैतिक कर्तव्य है और उसे ना गाने वालों पर कोई मुकदमा नहीं होगा लेकिन चुपके से यह बात भी रख देती है कि सरकारी कर्मियों के लिए यह नहीं गाना सेवा नियमों का उल्लंघन हो सकता है। ध्यान रहे कि 1937 के कोलकाता अधिवेशन में कांग्रेस ने गीत के अंतिम चार छंदों को हटा दिया था क्योंकि उसमें मातृभूमि की तुलना हिन्दू देवियों दुर्गा और कमला से की गई थी जिसपर मुसलमानों को तब भी आपत्ति थी, आज भी है और हमेशा रहेगी। ऐसे में अगर सरकार के इस फैसले का कोई विरोध करता है तो सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी इसे भारत और परोक्ष रूप से हिंदू धर्म के विरोध के रूप पर पेश करेगी। साफ है कि भारतीय जनता पार्टी को दूसरे धर्म की धार्मिक आस्था की कोई परवाह नहीं है और अफसोस की बात है कि इस तरह धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता छीनने वाली पार्टी का समर्थन वैसी पार्टियां भी करती हैं जो समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता का दावा करती हैं। इनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी शामिल हैं। इसका एक पहलू यह भी है कि वंदे मातरम के विवाद से भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल का चुनाव जीतना चाहती हो क्योंकि ममता बनर्जी के लिए भी इस फैसले का विरोध करना मुश्किल होगा। अफसोस की बात यह है कि संविधान की रक्षा का जो काम सुप्रीम कोर्ट के ज़िम्मे है वह नहीं हो पा रहा है और इस मामले में भी यह होगा या नहीं, कहना मुश्किल है।
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