छपी-अनछपी: “चुनाव आयुक्त के लिए बिजली जैसी तेजी क्यों?” बिहटा में लाखों का सोना लूटा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। चुनाव आयुक्त के तौर पर अरुण गोयल की नियुक्ति में जल्दी पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। यह खबर कई जगह प्रमुखता से छपी है। इसके अलावा पटना से सटे बिहटा में लाखों के सोना लूट की खबर भी सुर्खियों में है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जगदानंद सिंह बने रहेंगे। राजद कार्यकारिणी से जुड़ी खबर भी प्रमुखता से छापी गई है।

जागरण की पहली खबर है: चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में क्यों भर्ती इतनी तत्परता: सुप्रीम कोर्ट। भास्कर दूसरी सबसे बड़ी सुर्खी है: 24 घंटे में ही अर्जी-मंजूरी-नियुक्ति: चुनाव आयुक्त के लिए बिजली सी तेजी क्यों? हिन्दुस्तान ने लिखा है चुनाव आयुक्त की नियुक्ति 24 घंटे में कैसे: सुप्रीम कोर्ट।
केंद्र सरकार ने न्यायालय की टिप्पणियों का विरोध किया और कहा कि नियुक्ति से जुड़े पूरे मामले पर विस्तारपूर्वक गौर किया जाना चाहिए। अदालत ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस केएम जोसेफ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने निर्वाचन आयुक्त के तौर पर गोयल की नियुक्ति से जुड़ी मूल फाइल पर विचार किया। पीठ ने कहा, यह किस तरह का मूल्यांकन है।
संविधान पीठ ने कहा कि 1985 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गोयल ने एक ही दिन में सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। एक ही दिन में कानून मंत्रालय ने उनकी फाइल को मंजूरी दे दी। गोयल को 24 घंटे के भीतर राष्ट्रपति से मंजूरी भी मिल गई।

बिहटा में लूट

भास्कर की पहली खबर है: बिहटा में लूट: सुबह एक करोड़ का था सोना, शाम को FIR में 15 लाख हुआ। प्रभात खबर की सुर्खी है: कन्हौली बाजार में दुकान से दिनदहाड़े पांच मिनट में लूटे एक करोड़ के जेवर। इसके साथ यह भी लिखा है कि देर शाम एसएसपी बोले- 15 लाख के ही थे जेवरात। सुबह 10:30 बजे दुकान खुलते ही तीन अपराधी पहुंचे थे और ज़ेवर के साथ ढाई लाख कैश भी ले गए। सीसीटीवी फुटेज में सफेद अपाचे बाइक पर तीनों अपराधी देखे हैं। प्रभात खबर के अनुसार पटना में इस साल अब तक 17 करोड़ रुपये का सोना लूटा जा चुका है।

राजद में बने चार उपाध्यक्ष

प्रभात खबर की पहली खबर है: राजद में बने चार उपाध्यक्ष व 10 महासचिव, जगदानंद भी मान गए। भास्कर ने लिखा है: राबड़ी, शिवानंद, चौधरी, देवेंद्र उपाध्यक्ष बने; सुनील सिंह राजद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष होंगे। जागरण की सुर्खी है: राजद के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव बने सिद्दीकी, जगदानंद पद पर बने रहेंगे।

अतिक्रमण

प्रभात खबर की दूसरी सबसे बड़ी सुर्खी है: पांच किमी की नहर पर 2000 निर्माण, 10 हज़ार की आबादी का 40 वर्षों से है कब्जा। यह खबर दानापुर, खगौल से लेकर पटना क्षेत्र में कृषि भूमि सिंचाई के लिए बनाई गई पटना नहर के बारे में है। पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने किस नहर से अतिक्रमण हटाने को कहा है।

जिहादी मीडिया के नाम पर

जागरण की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: जिहादी मीडिया के नाम पर जोड़ रहे मुस्लिम युवाओं को। इसमें दावा किया गया है कि आतंकी संगठन अलकायदा से जुड़ा इस्लामिक ट्रांसलेशन सेंटर जिहादी मीडिया के नाम पर मुस्लिम युवक युवतियों को भड़का रहा है। बिहार पुलिस मुख्यालय ने इसको लेकर सभी जिलों को अलर्ट किया है। प्रभात खबर की सुर्खी है: जिहादी साहित्य के अनुवाद के लिए युवाओं को जोड़ रहा अलकायदा का सहयोगी संगठन।

समान नागरिक संहिता

हिन्दुस्तान में पहले पेज पर एक सुर्खी है: केंद्र समान नागरिक संहिता लागू करने को प्रतिबद्ध: शाह। बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को एक साक्षात्कार में कही। अमित शाह का एक और बयान टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड है जिसमें उन्होंने कहा है कि कोई कानून न्यायिक जांच से ऊपर नहीं है। ‘टाइम समिट’ कार्यक्रम में यह बात उन्होंने पूजा स्थलों से सम्बंधित 1991 के कानून के बारे में कही। इसी खबर से जुड़ी एक और सुर्खी है कि किसी को सपने में भी यह नहीं सोचना चाहिए किसी से लागू नहीं किया जाएगा।

पाकिस्तान के नए सेनाध्यक्ष

भास्कर के पहले पेज पर पाकिस्तान के नए सेनाध्यक्ष के बारे में सुर्खी है: पाक पीएम शरीफ ने पुलवामा अटैक प्लानर आसिम मुनीर को नया आर्मी चीफ बना दिया। जागरण ने लिखा है: पुलवामा आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मुनीर बने पार्क के सैन्य प्रमुख।

नगर निकाय भंग, कैसे काम कर रहे प्रशासक?
हिन्दुस्तान में पहले पेज पर खबर है: नगर निकाय भंग होने के छह माह बाद भी कैसे काम कर रहे प्रशासक: कोर्ट। राज्य के नगर निकायों में अब तक चुनाव नहीं कराये जाने तथा सरकार की ओर से बहाल प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त होने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने राज्य के नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को एक दिसंबर को तलब किया है। कोर्ट ने प्रधान सचिव से जानना चाहा है कि जब राज्य में नगर निकाय के विघटन की अवधि 6 माह से ज्यादा हो गई है तो फिर किस कानून के तहत प्रशासक निकायों में कार्य कर रहे हैं।
अनछपी: पिछले दो दिनों से सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग में होने वाले नियुक्ति के बारे में एक दिलचस्प बहस चल रही है। ऐसा लग रहा है कि सुप्रीम कोर्ट पहली बार मोदी सरकार से कुछ सख्त सवाल पूछ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने यूं ही नहीं पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को याद किया है। सरकारी वकील जिस तरह सुप्रीम कोर्ट में कह रहे हैं कि उसे इस मामले में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है, इससे यह बात साबित होती है कि दाल में कहीं कुछ न कुछ काला जरूर है। नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति महज 24 घंटे में पूरी कर लेना वास्तव में सरकार के इस अति विश्वास का उदाहरण है कि वह चाहे जैसे जिस प्रक्रिया की धज्जियां उड़ा कर काम करे, उससे कोई सवाल पूछने वाला नहीं है। चुनाव आयोग के बारे में विपक्षी दलों की वैसे तो हमेशा कोई ना कोई शिकायत रहती है लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह शिकायत बहुत अधिक हो गई है। ऐसे में यह सवाल उठना भी लाजमी है कि क्या चुनाव आयोग स्वायत्त संस्था के रूप में काम कर रही है या यह सरकार के इशारे पर चल रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई में जो तेवर अपनाया है वह उसे निर्णय देने तक कायम रख पाती है या फिर कुछ ऐसा निर्णय देती है जिससे सरकार खुश रहे।

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