छ्पी-अनछपी: ईरान का इसराइल के एटमी सेंटर पर हमला, बिहार में आंधी पानी से भारी नुकसान

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ईरान ने  चार हजार किलोमीटर दूर अमेरिकी सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया और इसराइल के सबसे बड़े एटॉमिक सेंटर पर हमला किया है। बिहार के कई जिलों में आंधी बारिश से फसलों और फलों को नुकसान पहुंचा है। और, जानिएगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जगह उनके बेटे निशांत ने ली और इफ्तार के बाद ईद की नमाज में भी नीतीश नहीं, निशांत गए।

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार ईरान ने रविवार को चार हजार किलोमीटर दूर अमेरिकी सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया और इसराइल के डिमोना पर हमले करके पूरी दुनिया को चौंका दिया। डिमोना में इसरायल का सबसे बड़ा परमाणु केंद्र है। मिसाइल हमले से परमाणु केंद्र को किसी तरह का नुकसान हुआ या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। इन हमलों के जरिये ईरान ने अपनी मारक सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करने के साथ ही अमेरिका और इसरायल के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए, जो पिछले कई दिनों से कह रहे थे कि ईरान का सैन्य ढांचा तबाह कर दिया गया है। डिमोना में हुए हमले में 20 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इससे पहले ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी आइएईए से शिकायत की थी कि उसके नतांज परमाणु केंद्र पर फिर से बमबारी की गई है। हालांकि, इसरायल ने इससे इन्कार किया है। अमेरिका-इसरायल ने बुशेहर के यात्री टर्मिनल और खार्ग द्वीप पर खाली यात्री जहाज पर हमला किया। 

ट्रंप ने फिर कहा- जंग खत्म होने के करीब

हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को समाप्त करने पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर शुक्रवार देर रात एक पोस्ट में यह बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘हम ईरान में अपने लक्ष्य को हासिल करने के बहुत करीब हैं। हम मध्य पूर्व में ईरान के आतंकवादी शासन के संबंध में चलाए गए अपने सैन्य अभियानों को धीरे-धीरे समाप्त करने पर भी अब विचार कर रहे हैं।’

पुतिन ने कहा- ईरान के साथ खड़ा है रूस

जागरण के अनुसार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुत्तिन ने नवरोज के अवसर पर ईरानी नेताओं को बधाई दी और कहा कि मास्को तेहरान का एक वफादार मित्र और विश्वसनीय सहयोगी बना हुआ है। हालांकि, ईरान को मास्को के समर्थन का दायरा विवादित है। कुछ ईरानी सूत्रों का कहना है कि 1979 की क्रांति में अमेरिका समर्थित शाह के सत्ता से बेदखल होने के बाद से ईरान के सबसे बड़े संकट में मास्को से उन्हें कोई खास मदद नहीं मिली है। क्रेमलिन ने शनिवार को बताया कि पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा ख़ामेनई और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान को नए साल की बधाई भेजी है। पुतिन ने ईरानी जनता द्वारा कठिन परिस्थितियों का गरिमापूर्ण ढंग से सामना करने की उम्मीद जताई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच जारी गंभीर संघर्ष के बीच पीएम नरेन्द्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति डा. मसूद पेजेश्कियान से टेलीफोन पर बातचीत की। यह जंग शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच दूसरी चचर्चा है। दोनों पक्षों ने मौजूदा तनाव के समाधान के लिए विभिन्न उपायों पर विस्तार से विचार किया। इसमें शांति बहाली, कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दिया गया। मोदी ने युद्ध के रास्ते को किसी के हित में न बताते हुए सभी पक्षों से तुरंत शांति की दिशा में कदम उठाने की अपील की। मोदी ने फारस की खाड़ी में नौवहन की स्वतंत्रता और होर्मुज स्ट्रेट की निरंतर सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व पर विशेष जोर दिया, क्योंकि इस स्ट्रेट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। उधर, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराक़ची से बात की और पश्चिम एशिया में चल रही जंग तथा क्षेत्र पर इसके प्रभावों पर चर्चा की।

आंधी-पानी से फसलों और फलों को नुकसान

प्रभात ख़बर के अनुसार बिहार में शुक्रवार की रात से मौसम के अचानक बदले मिजाज ने व्यापक तबाही मचायी है. पिछले 24 घंटे के दौरान मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच पटना समेत बिहार के कई जिलों में बारिश के साथ 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, ओलावृष्टि और ठनका गिरने की घटनाएं होती रहीं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. कई घर क्षतिग्रस्त हो गये और खड़ी फसलें बर्बाद हो गयीं. आम, लीची व रबी की फसल गेहूं, मकई और अरहर को काफी नुकसान हुआ है. कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से आवागमन बाधित रहा. पटना, गोपालगंज, वैशाली, सारण और सीवान जिलों में मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की गयी. इसके अलावा मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, वैशाली और शिवहर जिले में भी बारिश से जनजीवन प्रभावित रहा. इधर, बारिश से राज्य में अधिकतम तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गयी. पटना समेत बिहार के कई जिलों में आज भी हल्की बारिश के आसार हैं। 

फ़र्ज़ी डिग्री लेकर 1346 लोग शिक्षक बने, सबकी नौकरी जाएगी

भास्कर के अनुसार नियोजित शिक्षक बहाली में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ हैं। अब तक जांच में फर्जी प्रमाणपत्र और अंकपत्र का मामला सामने आता रहा। अब गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों की डिग्री पर नौकरी पाने का मामला सामने आया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में पता चला है कि यूपी, झारखंड, महाराष्ट्र, चेन्नई और उत्तराखंड के 10 कॉलेज, बोर्ड और विश्वविद्यालयों की मान्यता बिहार सरकार ने 2008 में ही समाप्त कर दी थी। इसके बावजूद इन संस्थानों से डिग्री लेकर 1346 लोग शिक्षक बन गए। इनमें सबसे अधिक वैशाली में 159 शिक्षक हैं। समस्तीपुर दूसरे स्थान पर है, जहां 136 शिक्षक ऐसे पाए गए। पटना में 64 शिक्षक इस श्रेणी में हैं। अब इन पर कार्रवाई की तैयारी है। इनकी नौकरी जाएगी। इनसे वेतन की वसूली भी होगी।

ईद की नमाज में भी नीतीश नहीं, निशांत गए

जागरण के अनुसार इफ्तार की दावत के बाद ईद की मुख्य नमाज में भी निशांत कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जगह ले ली। मुख्य नमाज का आयोजन गांधी मैदान में किया जाता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ही हर बार इसमें शामिल होते थे। कोरोना को छोड़ कर यह सिलसिला 2006 से पिछले साल तक जारी रहा। लेकिन, शनिवार को उनके प्रतिनिधि के रूप में पहली बार पुत्र निशांत शामिल हुए हैं। इससे पहले बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित इफ्तार की पार्टी में भी निशांत ही मुख्य भूमिका में थे। निशांत अपने पिता की तरह रोजेदारों की पंक्ति में बैठे थे। नीतीश कुमार कुर्सी पर थे। नमाज के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा- ईद के इस पावन अवसर पर अपनी ओर से तथा अपने पिता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से समस्त बिहारवासियों एवं देशवासियों को हार्दिक मुबारकबाद और शुभकामनाएं। अल्लाह की रहमत और बरकत हम सभी पर सदैव बनी रहे, यही दुआ है।

कुछ और सुर्खियां:

  • रिमझिम बारिश के बीच पटना के गांधी मैदान में 15000 लोगों ने ईद की नमाज अदा की
  • गया जंक्शन पर मेगा ब्लॉक खत्म, आज से आम दिनों की तरह चलेंगी ट्रेनें
  • बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की दूसरी किस्त के तौर पर अप्रैल के आखिर में मिलेंगे ₹20000
  • बीपीएससी की 71वीं मुख्य परीक्षा 25 से 30 अप्रैल तक

अनछपी: ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले से यह बात लगातार साफ होती रही है कि यह केवल दो पक्षों के बीच हुई लड़ाई नहीं है बल्कि इसकी जद में आने वाले पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था है। रसोई गैस और पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स की कमी से यह बात पहले से स्पष्ट होती रही है। इस बीच दुनिया में सबसे ताकतवर समझे जाने वाले अमेरिका को भी दबाव का एहसास होता रहा है और अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अमेरिका ने कुछ ऐसी घोषणाएं की हैं जिनसे उस पर इल्जाम कम लगे। ऐसी ही एक घोषणा में अमेरिका ने ईरानी तेल से पाबंदी हटाने की बात कही है जो भरोसे के लायक नहीं है। अमेरिका ने दावा किया है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने की कोशिश में समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री पर अस्थाई रूप से पाबंदी हटाई गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह पाबंदी लगाने वाला अमेरिका कौन होता था और अब वह इसे हटाने की घोषणा कर किस पर एहसान कर रहा है? अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इस अस्थाई उपाय से दुनिया के बाजारों को 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल मिल सकेगा। दरअसल यह केवल उस तेल की बात है जो रास्ते में फंसा हुआ है और ईरान से सीधे तेल बेचने पर अमेरिका अब भी दुनिया के देशों पर रोक लगाई रखेगा। लेकिन अमेरिका के इस दावे के उलट ईरान का कहना है कि जिस तेल को बाजार में उतरने की बात अमेरिका कर रहा है वैसा कोई स्टॉक उपलब्ध ही नहीं है। ईरान का साफ तौर पर कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए समुद्र में फंसा हुआ कोई कच्चा तेल या एक्स्ट्रा स्टॉक नहीं है। ईरान के इस बयान से यह साफ होता है कि अमेरिका दरअसल तेल और गैस संकट के लिए अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहता है और वह लोगों को यह भरमाना चाहता है कि उसने ईरान से पाबंदी हटाकर ऐसी कोशिश की है कि इस कमी को महसूस ना किया जाए। कुल मिलाकर अमेरिका इस मामले में बुरी तरह फंसा हुआ है और दुनिया को ऐसे संदेश देना चाहता है जो दरअसल झूठ है लेकिन ज़ाहिर तौर पर यह बताने के लिए है कि उसने तेल संकट को कम करने के लिए यह छूट दी है। दुनिया को अमेरिका के इस नकली एहसान से सावधान रहना चाहिए। 

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