छपी-अनछपी: अदाणी ग्रुप बिहार में 60 हजार करोड़ लगाएगा, फिर बोला ईरान… तो अंजाम बुरा होगा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अदाणी समूह ने बिहार में अगले तीन-चार वर्षों में 50- 60 हजार करोड़ रुपये निवेश करने की इच्छा जताई है। ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दोबारा युद्ध थोपा गया, तो उसका नतीजा पहले जैसा ही होगा। 

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान के अनुसार अदाणी समूह ने बिहार में अगले तीन-चार वर्षों में 50- 60 हजार करोड़ रुपये निवेश करने की इच्छा जताई है। अदाणी समूह पटना में ‘सामाजिक आधारभूत संरचना’ को विकसित करना चाहता है। इसके तहत स्कूल, विश्वविद्यालय और अस्पताल बनाने की योजना है। अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने रविवार को खुद ये बातें कहीं। गौतम अदाणी सारण के परसा स्थित मस्तीचक में 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नेत्र अस्पताल और प्रशिक्षण केंद्र के भूमि पूजन के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अदाणी समूह की बिहार में अभी बिजली और सड़क निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं। मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स परियोजना पर बातचीत राज्य सरकार से हो रही है। शिक्षा उनकी प्राथमिकता सूची में है। गौतम अदाणी ने कहा कि मस्तीचक में बनने वाले नेत्र अस्पताल से ग्रामीण इलाकों में सस्ती दरों पर आंखों का इलाज संभव हो सकेगा। हर साल करीब 3.3 लाख आंखों की सर्जरी मुमकिन हो सकेगी। हर साल आंखों की देखभाल को 1,000 हेल्थ प्रोफेशनल को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। 

युद्ध थोपा गया तो अंजाम बुरा होगा: ईरान

हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची ने साफ शब्दों में कहा है कि तेहरान बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन इसके लिए धैर्य और गंभीर वार्ता जरूरी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दोबारा युद्ध थोपा गया, तो उसका नतीजा पहले जैसा ही होगा। भारत में ईरान के दूतावास ने अराक़ची के हवाले से पोस्ट कर कहा कि युद्ध और शांति का सवाल है। इसलिए, अगर वे वार्ता से हल चाहते हैं, तो उन्हें सब्र रखना होगा, क्योंकि एक सही हल तक पहुंचने को पेचीदा-विस्तृत वार्ता की जरूरत होती है। अगर वे फिर युद्ध करना चाहते हैं, तो यह उनकी मर्जी है। विदेश मंत्री अराक़ची का यह बयान ट्रंप की उस पोस्ट के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ये तूफान से पहले की शांति हैं।

अमेरिका की पांच नई शर्तें

जागरण के अनुसार पश्चिम एशिया में पिछले डेढ़ महीने से कायम युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि समय तेजी से निकल रहा है, बेहतर होगा ईरान जल्दी फैसला कर ले। उधर, ईरानी मीडिया ने दावा किया कि अमेरिका ने तेहरान के प्रस्तावित शांति एजेंडे के जवाब में पांच सूत्रीय प्रस्ताव दिया है, जिसमें तेहरान को केवल एक परमाणु केंद्र संचालित रखने की बात कही गई है। इसके अलावा अमेरिका ईरान की विदेशों में फ्रीज संपत्ति का 25 प्रतिशत हिस्सा भी जारी करने को तैयार नहीं है। अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में ईरान ने भी पांच शर्तें रखी हैं और साफ कर दिया है कि इनके पूरा होने के बाद ही बातचीत की जाएगी। गतिरोध बढ़ने से बातचीतं आगे बढ़ने की संभावना कमजोर पड़ गई है।  

यूएई के एटॉमिक पावर प्लांट पर ड्रोन हमला

प्रभात खबर के अनुसार यूएई के अल-धफरा क्षेत्र स्थित बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के बाहरी हिस्से में रविवार को ड्रोन हमले के बाद आग लग गयी. अबू धाबी मीडिया कार्यालय के अनुसार संयंत्र के बाहर लगे एक विद्युत जनरेटर में आग लगी, जिस पर जल्द काबू पा लिया गया. घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि परमाणु सुरक्षा व्यवस्था और रेडियोधर्मी विकिरण स्तर पूरी तरह सामान्य हैं. हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन या देश ने नहीं ली है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोटों में ईरान पर संदेह जताया गया है. 

बकरीद 28 मई को

जिल हिज्जा (बकरीद) का चांद रविवार को नजर नहीं आया। 19 मई को जिलहिज्जा की पहली तारीख होगी। इस लिहाज से कुर्बानी का पर्व 28 मई को मनाया जाएगा। हिन्दुस्तान के अनुसार मरकजी दारुल-कजा इमारत-ए-शरिया और मरकजी मजलिस रुयते हिलाल खानकाह मुजीबिया ने रविवार को यह घोषणा की है। दारुल-कजा के काजी-ए-शरीयत मौलाना अंजार आलम कासमी ने बताया कि रविवार को इमारत-ए-शरिया समेत आसपास की अन्य शाखाओं में चांद देखने का एहतेमाम किया गया। देश के अन्य भागों से भी संपर्क किया गया, लेकिन कहीं से भी चांद देखे जाने की पुष्टि नहीं की गई। इसलिए 28 मई (गुरुवार) को देशभर में बकरीद मनाई जाएगी।

जमीयत उलेमा ने हमेशा दिया मानवता का संदेश: मंत्री

प्रभात खबर के अनुसार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हमेशा सामाजिक सद्भाव, भाइचारे और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाया है. शिक्षा और सामाजिक जागरुकता के क्षेत्र में इस संस्था का योगदान सराहनीय रहा है. संस्था ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे रविवार को पटना स्थित एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान के सेमिनार हॉल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद बिहार की ओर से आयोजित समाज सुधार संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तरह ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाज सुधार के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाये हैं. मौके पर नयी दिल्ली स्थित जमीअत उलमा-ए-हिंद के सचिव मौलाना सैयद अजहर मदनी, बिहार जमीअत उलमा के अध्यक्ष मौलाना बदर अहमद मुजीबी, महासचिव मौलाना मोहम्मद अब्बास कासमी, सचिव डॉ फैज अहमद कादरी, बिहार विधान परिषद के सदस्य डॉ खालिद अनवर सहित अन्य मौजूद थे.

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़ा कर 38

जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़ा कर 38 करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अध्यादेश जारी करने के बाद केंद्र सरकार ने भी अधिसूचना जारी कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में अभी भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) को मिलाकर कुल 34 न्यायाधीश हैं। कानून मंत्रालय की जारी अधिसूचना में सुप्रीम कोर्ट में चार न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई गई है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में सीजेआइ सहित न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है। 1950 में जब सुप्रीम कोर्ट स्थापित हुआ था तब सीजेआई को मिला कर कुल आठ न्यायाधीश ही थे।

कुछ और सुर्खियां:

  • तिरुवनंतपुरम से दिल्ली आ रही राजधानी एक्सप्रेस के एक एसी कोच में रतलाम के पास आग लगी, सभी 68 यात्री सुरक्षित
  • कोलकाता के पार्क सर्कस के पास बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ उग्र प्रदर्शन, पथराव
  • वीडी सतीशन आज केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे
  • सीबीएसई ने 12वीं की रिज़ल्ट के बाद री- इवेलुएशन के लिए फीस 500 से घटकर ₹100 की
  • गया के बाराचट्टी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा की विधायक ज्योति देवी ने दुर्व्यवहार का आरोप लगाकर फिर दर्ज कराई
  • पटना में आठवीं तक की कक्षाएं 11:00 के बाद नहीं चलेंगी

अनछपी: दुनिया में चीजों को समझने और जानने के नित नए तरीके निकलते रहते हैं और उसमें ईद व बक्रईद और दूसरे महीनों का चांद देखने का मामला भी शामिल है। एक जमाना था जब चांद देखने के लिए केवल आंख ही एक सहारा थी, फिर दूरबीन या बाइनोक्युलर्स का इस्तेमाल होने लगा। हो सकता है कि अब भी कुछ जगहों पर इसका इस्तेमाल होता हो लेकिन क्या यह जरूरी है कि जब आप दूरबीन से चांद देखने की कोशिश कर रहे हों तो उसका वीडियो बनाया जाए और फिर वह मजाक का पात्र बन जाए? दरअसल 17 मई को बक्रईद का चांद देखने की कोशिश की जा रही थी तो लखनऊ से एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें कुछ मौलाना बाइनोक्युलर से और मोनोक्युलर से चांद देखने की कोशिश कर रहे थे। इस्लामी जगत को अब इस बात पर गंभीर और त्वरित चर्चा करने की जरूरत है कि अगर खुली आंख से चांद देखने का सिद्धांत लागू किया जाए तो फिर बाइनोक्युलर्स का इस्तेमाल क्यों और अगर सिर्फ चांद देखने का सही तरीका मालूम करना है तो इसके लिए जो आधुनिक विधि है उसे क्यों न अपनाया जाए? मोटे तौर पर समझने की बात यह है कि अगर दुनिया तरक्की कर रही है और चीजों को जानने के नए तरीके सामने आ रहे हैं तो पुराने तरीकों पर अड़े रहने का क्या मतलब है? अलबत्ता यह बात जरूर है कि इस मामले को समझने के लिए सही तरीका अपनाया जाए, ना कि उनका मजाक उड़ाया जाए। 

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