छ्पी-अनछपी: वेनेज़ुएला के जलजले में 188 की मौत, अयोध्या चढ़ावा चोरी में 8 गिरफ्तार

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। वेनेजुएला 40 सेकंड के बीच आए भूकंप के दो झटकों में कम से कम 188 लोगों की मौत हो गई। अयोध्या के राम मंदिर के दानपात्रों की धनराशि में गबन किए जाने के मामले में आठ लोग गिफ्तार किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री के प्रोग्राम के वक़्त ग़ैर हाज़िर पीएमसीएच के प्रिंसिपल हटाए गए।

और, सरकार ने कहा- पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज, नागरिकता विवाद में नहीं किया जा सकता इस्तेमाल।

पहली ख़बर

भास्कर के अनुसार दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला 40 सेकंड के बीच आए भूकंप के दो झटकों से दहल गया। 7.2 तीव्रता का पहला झटका भारतीय समयानुसार गुरुवार तड़के 3:34 और 7.5 तीव्रता का दूसरा झटका 3:35 बजे आया। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) ने बताया कि इसके बाद 30 आफ्टरशॉक महसूस किए गए। यह वेनेजुएला में सन् 1900 में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद सबसे शक्तिशाली भूकंप था। भूकंप से 188 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। एक हजार लोग घायल हैं। वेनेजुएला में बुधवार को सन् 1821 के काराबोबो युद्ध की याद में राष्ट्रीय अवकाश था। इसलिए अधिकतर लोग घरों में थे और फीफा वर्ल्ड कप मैच देख रहे थे। इससे मलबे में दबने वालों की संख्या ज्यादा होने की आशंका है। सरकार ने देर रात बताया कि 39 हजार से अधिक लोग लापता हैं। भूकंप की भयावहता की असल तस्वीर अभी स्पष्ट होनी बाकी है। इस बीच, यूएसजीएस ने अनुमान लगाया है कि मृतक संख्या 10 हजार से 1 लाख तक पहुंच सकती है। इस आपदा से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को 9.5 लाख करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका है।

चढ़ावा चोरी मामले में 20 दिन बाद प्राथमिकी, आठों आरोपित गिरफ्तार

अयोध्या से जागरण की ख़बर है कि राम मंदिर के दानपात्रों की धनराशि में गबन किए जाने के मामले में अंततः 20 दिन बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एफआइआर दर्ज करा दी गई। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर गुरुवार शाम रामजन्मभूमि थाने में आठ नामजद व अन्य अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। हिंदुस्तान के अनुसार एफआईआर में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉक्टर अनिल मिश्रा और व्यवस्थापक गोपाल राव का नाम शामिल नहीं किया गया है। नामजद आरोपितों में मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के अलावा ट्रस्ट कर्मी अनुकल्प मिश्र, उसका बहनोई लवकुश, मिश्र, टिन्नू का भतीजा मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल व रिटायर्ड बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। संज्ञेय अपराध की धाराओं में दर्ज प्राथमिकी में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी चंपतराय, डा. अनिल मिश्र, गोपाल राव आदि के नाम नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि सभी आठों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनसे उच्चाधिकारियों ने पूछताछ भी की है। हालांकि कोई अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है।

पीएमसीएच के प्रिंसिपल हटाए गए

प्रभात ख़बर के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने पहला बड़ा एक्शन लिया है. 23 जून को पीएमसीएच के निरीक्षण के दौरान प्रभारी प्राचार्य डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह ड्यूटी से गायब थे. इस पर मंत्री निशांत कुमार ने कहा था कि उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे. गुरुवार को उन्होंने डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह को पीएमसीएच के प्रभारी प्राचार्य पद से हटा दिया. उन पर लापरवाही, कर्तव्यहीनता, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और अनधिकृत अनुपस्थिति का आरोप है और उन्हें बेतिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में प्राध्यापक के पद पर योगदान देने को कहा गया है. उनकी जगह पीएमसीएच के प्राचार्य का प्रभार स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष प्रो डॉ गीता सिन्हा को सौंपा गया है. गुरुवार को डॉ गीता सिन्हा ने अपना पदभार भी ग्रहण भी कर लिया. इधर, पीएमसीएच के पूर्व प्रभारी प्रिंसिपल डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह ने इस . फैसले पर नाराजगी जतायी है. उन्होंने कहा कि मुझे स्वास्थ्य मंत्री के अस्पताल निरीक्षण की पूर्व सूचना नहीं थी. कुछ दिन पहले मेरे शरीर पर गर्म पानी गिर गया था और मेरा इलाज चल रहा है. इसी कारण मैं कॉलेल में उपस्थित नहीं हो सका. स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद उन्होंने चिकित्सा सेवा से इस्तीफा दे दिया है. डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि विभाग ने उनसे किसी प्रकार का स्पष्टीकरण नहीं मांगा. बिना उनका पक्ष. जाने सीधे कार्रवाई कर दी.

कश्मीर में थाने पर हमला मामले में 40 सैनिकों पर केस दर्ज

भास्कर की ख़बर है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने किश्तवाड़ जिले में थाने पर हमला करने, पुलिसकर्मियों से मारपीट, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में सेना के 40 जवानों पर एफआईआर दर्ज की है। इनमें एक कमांडिंग ऑफिसर भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, ट्रैफिक उल्लंघन पर बुधवार को सेना अधिकारी की निजी गाड़ी जब्त की गई थी। इसके बाद 17 राष्ट्रीय राइफल्स के 30-40 जवानों ने लाठी, रॉड से हमला किया। एसएचओ की वर्दी फाड़ी गई। 4 पुलिसकर्मी घायल हुए। सेना ने कहा है कि मामला जांच में है।

पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज नागरिकता विवाद में नहीं किया जा सकता

हिन्दुस्तान के अनुसार पासपोर्ट के नागरिकता का प्रमाण नहीं होने संबंधी विदेश मंत्रालय के ताजा स्पष्टीकरण पर बहस छिड़ने के बाद सरकार की तरफ से गुरुवार को फिर से स्थिति साफ की गई है। केंद्र सरकारने कहा, पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज का सबूत हो सकता है, लेकिन नागरिकता विवाद में यह अस्वीकार्य है। कहा कि यह प्रावधान 1967 के पासपोर्ट अधिनियम में पहले से है तथा पिछले 12 खालों के दौरान मोदी सरकार ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है। इधर, काग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पोस्ट में आरोप लगाया कि केंद्र ने लोगों में भय पैदा कर दिया है। लिखा, यह कहकर कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, केंद्र लोगों के अधिकारों को मनमाने तरीके से नकारने की तैयारी में है। आरोप लगाया, कथित तौर पर कुछ समुदायों के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के गुप्त प्रयास किए जा रहे हैं।

कुछ और सुर्खियां:

  • पासपोर्ट बनवाने की फीस 1500 से 2500 हुई, तत्काल पासपोर्ट की फीस में ₹2000 का इजाफा
  • नीट यूजी: दोबारा हुए टेस्ट के लिए प्रोविजनल आंसर की जारी, जुलाई के पहले हफ्ते में आ सकता है रिजल्ट
  • पश्चिम बंगाल में 29 जून को पेश होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल
  • पटना में बेली रोड, अटल पथ, गंगा पथ समेत 9 मुख्य सड़कों पर ई रिक्शा चलाने पर लगेगी रोक

अनछपी: पीएमसीएच यानी पटना मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह प्रभारी प्राचार्य थे और उन्हें जिस तरह हटाया गया है उससे ऐसा लगता है कि यह मामला दरअसल नाक का मामला बना दिया गया है। इस अस्पताल में सीनियर डॉक्टरों का गायब रहना कोई नई बात नहीं मानी जाती लेकिन जिस तरह प्रिंसिपल पर यह कार्रवाई हुई है उससे यह सवाल जरूर खड़ा होता है कि सरकार के पास इसके लिए क्या प्रक्रिया और नियम है? डॉ नरेंद्र प्रताप की इस बात पर सवाल हो सकता है कि उनके शरीर पर गर्म पानी गिरा था या नहीं और उनका इलाज हो रहा था या नहीं लेकिन उनका यह कहना बिल्कुल सही है कि उनसे कोई जवाब तलब नहीं किया गया, उनका पक्ष नहीं लिया गया और सीधे उन्हें प्रभारी प्रचार के पद से हटा दिया गया। इसीलिए ऐसा लगता है कि स्वास्थ्य मंत्री और उनके अधिकारियों ने इस मामले को नाक का मामला बना लिया और शायद उस नियम और प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया जो सरकार ने ही तय की होगी। दूसरी तरफ डॉक्टर नरेंद्र पर भी यह इल्जाम लग सकता है कि उन्होंने प्रभारी प्राचार्य से हटाए जाने की प्रतिक्रिया में चिकित्सा सेवा से ही इस्तीफा दे दिया तो क्या इसका कारण भी नाक का सवाल तो नहीं था? इस प्रक्रिया और प्रतिक्रिया की बहस में जो असली सवाल है उसका जवाब न तो मंत्री, ना उनके अधिकारी और न ही डॉक्टर नरेंद्र सिंह से मिलता है। वह सवाल यह है कि मरीजों को सीनियर डॉक्टरों की सेवा समय पर क्यों नहीं मिल पाती। इसी से जुड़ा सवाल यह है कि क्या एक प्रिंसिपल के गैर हाजिर रहने पर उन्हें हटाए जाने से अस्पतालों की व्यवस्था ठीक हो जाएगी और मरीजों को होने वाली असुविधा दूर हो जाएगी? स्वास्थ्य मंत्री निशान राजनीति में बिल्कुल नए हैं, इसलिए ऐसा लगता है कि उन्होंने और उनके अधिकारियों ने यह निर्णय हड़बड़ी में लिया है और डॉक्टर नरेंद्र ने भी इस पर अनुचित प्रतिक्रिया दी है। चूंकि डॉक्टर नरेंद्र का ट्रांसफर बेतिया किया गया है इसलिए कोई भी इस बात को समझ सकता है कि उससे उनके प्राइवेट प्रैक्टिस पर कितना असर पड़ेगा। तो मूल सवाल यह है कि जनता की समस्या किसी के लिए प्राथमिकता में नहीं है।

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