छ्पी-अनछपी: टाउनशिप में हुडको लगाएगा एक लाख करोड़, खामेनेई के जनाज़े में जुटे दुनिया भर के नेता

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में प्रस्तावित 12 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए हुडको एक लाख करोड़ का निवेश करेगा। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जनाज़े में उनके पुत्र तो शामिल नहीं हो रहे लेकिन 100 देशों के नेता पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किशनगंज जिले में उर्दू स्कूल खोलने के लिए 100 उपयुक्त जगहों की पहचान करने का निर्देश दिया है।

और, फुलवारी के रिटायर्ड प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट कर 82 लाख की ठगी।

पहली ख़बर

प्रभात ख़बर के अनुसार बिहार में प्रस्तावित 12 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए कुल सात लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा. राज्य सरकार इसमें से एक लाख करोड़ रुपये का निवेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (हुडको) के जरिये करेगी. इसके अलावा बाकी छह लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश बाहरी उद्यमियों और स्रोतों से आकर्षित किया जायेगा. शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में हुडको के साथ नगर विकास विभाग ने एक लाख करोड़ रुपये के दीर्घकालिक एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये.

खामेनेई का जनाज़े में जुटे 100 देशों के नेता

भास्कर के अनुसार ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का जनाजा शुक्रवार को तेहरान से शुरू हुआ। यह जनाजा 4 से 9 जुलाई के बीच कर्बला समेत 5 शहरों से गुजरेगा। इसमें 100 देशों के नेता व प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। 86 साल के खामेनेई की 28 फरवरी को तेहरान में अमेरिकी-इसराइली हमले में मौत हो गई थी। उनकी मौत के चार महीने बाद यह राजकीय जनाजा निकाला जा रहा है। तेहरान की इमाम खुमैनी मस्जिद में खामेनेई और परिवार के अन्य सदस्यों के ताबूत रखे गए। यहां ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान, संसद अध्यक्ष क़ालिबाफ और विदेशी प्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि दी। चार माह में में पहली बार वरिष्ठ सैन्य कमांडर जनरल वाहिदी भी जनाजे में नजर आए। वहीं, सुरक्षा कारणों से सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई जनाजे में नहीं पहुंच पाएंगे। जनाजा तेहरान से शुरू होकर कोम, फिर इराक के नजफ व कर्बला जाएगा। अंत में उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। यह खामेनेई का पैतृक शहर है।

मेडिकल इक्विपमेंट कंपनी अंपेरा लाइफ बिहार में खोलेगी कारखाना

हिन्दुस्तान के अनुसार मेडिकल का आधुनिक उपकरण बनाने वाली कंपनी अंपेरा लाइफ बिहटा में 5600 करोड़ रुपये निवेश करेगी। इसे बिहार में एक जगह पर किसी कंपनी द्वारा किया गया सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है। बियाडा की परियोजना समाशोधन समिति (पीसीसी) की बैठक में कंपनी को भूमि आवंटन पर मुहर लगी। बैठक में बियाडा ने कुल 29 औद्योगिक परियोजनाओं को भूमि आवंटन की स्वीकृति दी है। इन सभी को 37.95 एकड़ भूमि आवंटित की गई। इन परियोजनाओं में 6000 करोड़ रुपये निवेश होगा। 3000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

किशनगंज में खुलेंगे 100 उर्दू स्कूल

भास्कर के अनुसार मुख्यमंत्री ने भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा और विकास पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने किशनगंज जिले में 100 उपयुक्त जगहों की पहचान करने का निर्देश दिया है। इन चुनी गई जगहों पर उर्दू विद्यालय खोले। मुख्यमंत्री ने बॉर्डर इलाके के 7 जिलों के डीएम और एसपी को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिनकी आय ज्ञात स्त्रोतों से अचानक असामान्य रूप से बढ़ी है, उनकी पूरी जानकारी जुटाएं। ऐसे लोगों पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करें। इस काम के लिए थानास्तर पर विशेष टीम गठित की जाएगी।

ई रिक्शा की बैटरी हैक करने वाले चीन के ऐप हटे

प्रभात खबर के अनुसार देश में बैटरी चालित वाहनों (इ-रिक्शा) को दूर से बंद करने में कथित तौर पर इस्तेमाल हो रहे चीन के तीन मोबाइल ऐप्स पर सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इन चीनी एप्स बैट-बीएमएस, लॉसिजी और एपॉक-आइ-आयन को तुरंत हटाने (बैन करने) का आदेश दिया है. सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुछ प्रैंक वीडियो वायरल होने के बाद साइबर सुरक्षा और सड़क सुरक्षा को लेकर मिली शिकायतों का संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया गया है. दरअसल, इन वीडियो में कुछ अराजक तत्व ब्लूटूथ-सक्षम लिथियम आयन बैटरियों से लैस इ-रिक्शों को करीब 15 मीटर की दूरी से इन एप्स के ‘रिमोट शटडाउन’ फीचर के जरिए चलते-चलते बंद करते दिख रहे थे. आइटी सचिव एस कृष्णन ने कहा कि सरकार ऐप स्टोर्स के समक्ष इस मुद्दे को उठाएगी ताकि ऐसे नुकसानदेह एप्स दोबारा उपलब्ध न हो सकें.

रिटायर्ड प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट कर 82 लाख की ठगी

जागरण के अनुसार फुलवारीशरीफ की जामा मस्जिद के समीप रहने वाले सेवानिवृत्त प्राध्यापक मो. गयासुद्दीन को साइबर अपराधियों ने 13 दिनों तक उनके ही घर में डिजिटल अरेस्ट करके रखा। 27 मार्च से आठ अप्रैल तक उन्हें प्रताड़ित किया। इस दौरान केंद्रीय जांच एजेंसियों का खौफ दिखाकर बुजुर्ग प्राध्यापक और उनके परिवार को मानसिक रूप से पंगु बना दिया गया। आरटीजीएस और यूपीआइ के जरिए 82 लाख रुपये ऐंठ लिए। ठगी और मानसिक उत्पीड़न के इस पूरे खेल की शुरुआत एक फोन काल से हुई। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली की एक जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। उसने गयासुद्दीन से कहा कि उनके नाम पर जारी सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल हुआ है और उनके बैंक खाते से संदिग्ध एवं अवैध ट्रांजेक्शन पाए गए हैं। शातिरों ने बुजुर्ग को डराते हुए कहा कि उनका नाम मनी लांड्रिंग और देश विरोधी गतिविधियों जैसे गंभीर मामलों में शामिल हो चुका है। इससे वे पूरी तरह सहम गए और यहीं से अपराधियों ने उन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। जब प्राध्यापक पूरी तरह अपराधियों के नियंत्रण में आ गए, तो उन्होंने पैसों की मांग शुरू कर दी। बुजुर्ग को मोबाइल का कैमरा आंन रखकर ही बैंक जाने का निर्देश दिया गया। जब उन्होंने अपने परिचित से इस पूरे मामले का जिक्र किया और भेजे गए कागजात को दिखाया तो परिचित ने कहा आप साइबर फ्राड का शिकार हो गए हैं। यह जानने के बाद उन्होंने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई।

कुछ और सुर्खियां:

  • भागलपुर के पास शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन और लक्ष्मीपुर बारंग हॉल्ट के बीच काम कर रहे तीन मजदूरों को मालगाड़ी ने रौंदा, तीनों की मौके पर
  • राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को ज़ेड कैटेगरी की सिक्योरिटी वापस मिल सकती है
  • पांच नए जिलों समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली, सीवान और पूर्वी चंपारण जिलों में अब एसएसपी का पोस्ट भी होगा
  • बिहार राज भवन ने 10 विश्वविद्यालय में कुलपति और 14 में प्रति कुलपति के लिए आवेदन की तारीख 21 जुलाई तक बढ़ाई

अनछपी: भारतीय राजनीति में हम अक्सर यह सुनते हैं कि नेताओं की विचारधारा चाहे जो हो जब वह मिलते हैं तो काफी दोस्ती देखने को मिलती है लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं होता है। ऐसा ही मामला पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड के सरकारी आवास का है। इस आवास को खाली करने के मामले पर राबड़ी देवी ने जो विरोध दर्ज कराया या और कोई विवाद हुआ, उससे अलग हटकर यह चर्चा का विषय बना कि उन्होंने भवन निर्माण विभाग से उन सभी सामान की सूची मांगी जो विभाग ने उपलब्ध कराए थे। इसके पीछे की वजह यह थी कि भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थकों ने पहले के नेताओं पर सरकारी आवास से चोरी का आरोप लगा रखा है। इसी राजनीतिक घटियागिरी के मद्देनजर राबड़ी देवी के शुभचिंतकों ने यह सोचा होगा कि क्यों ना विभाग से सूची मांग कर उससे सत्यापन और पुष्टि करा ली जाए ताकि बाद में किसी को यह इल्जाम लगाने का मौका ना मिले कि उन्होंने जाते-जाते सरकारी सामान की चोरी कर ली। अब खबर आई है कि विभाग ने सारे सामान का मिलान कर लिया है और फिलहाल ऐसी कोई संभावना नहीं है जिसकी बुनियाद पर भारतीय जनता पार्टी या उसके समर्थक राबड़ी देवी पर किसी तरह की चोरी का इल्जाम लगा सकें। दरअसल अभी की राजनीति का घटियापन यह है कि विपक्षी नेताओं के बारे में घटिया से घटिया आरोप लगाकर उसका खूब प्रचार किया जाए। फिलहाल राबड़ी देवी ने इससे बचने के उपाय तो कर लिए हैं। मगर क्या यह राजनीति का कोई स्वस्थ रुझान है?

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