छ्पी-अनछपी: सरकार ने माना- इथेनॉल से माइलेज कम, भाजपा विधायक को 4 साल की सजा,

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। सरकार ने पहली बार स्वीकार किया है कि 20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज दो से छह प्रतिशत तक घट सकता है। मुजफ्फपुर के साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को चार साल कैद की सज़ा मिली है जिससे उनकी विधायकी खत्म हो सकती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य सौ फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा की। दिल्ली दंगों की कथित साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं। वैभव सूर्यवंशी बने भारत के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर।

और, जानिएगा कि वह कौन नेता हैं जिनके रिश्तेदार इस बात पर नाराज़ हो गए कि उन्हें मोतियाबिंद ऑपेरशन के तीन दिन बाद ही क्यों छुट्टी दी गई। 

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार देशभर में ई-20 (20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच सरकार, आटो कंपनियों और आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन आफ इंडिया (एआरएआइ) ने पहली बार स्वीकार किया है कि इस ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज दो से छह प्रतिशत तक घट सकता है। कंपनियों ने स्पष्ट किया कि इससे इंजन या फ्यूल सिस्टम को कोई नुकसान नहीं होता। इससे पहले पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी माना था कि ई-20 पेट्रोल से माइलेज प्रभावित होता है। हालांकि, इंजन क्षमता में कमी नहीं आती है। उन्होंने कहा था कि इथेनोल का इस्तेमाल रेसिंग कारों में भी किया जा रहा है। शनिवार को उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की और कहा कि वे गलत सूचनाओं की बजाय विज्ञानी सुबूतों पर भरोसा करें। केंद्र सरकार की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में मारुति सुजुकी, हुंडई, टोयोटा, हीरो समेत कई प्रमुख वाहन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कारपोरेट अफेयर्स) राहुल भारती ने कहा कि ई-20 पेट्रोल से कारों का माइलेज लगभग तीन प्रतिशत तक कम हो सकता है। (साथ लगी तस्वीर एआई जेनेरेटेड है।)

भाजपा विधायक को 4 साल कैद की सज़ा

भास्कर के अनुसार दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को चार साल के कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला 2018 में एक न्यू ईयर पार्टी के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत के मामले में आया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने विधायक को गैर इरादतन हत्या (आईपीसी 304-II) और शस्त्र अधिनियम की धारा 30 के तहत दोषी पाया। कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा देने का भी कड़ा आदेश दिया है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि राजू सिंह छह बार विधायक रह चुके हैं और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, इसलिए सजा दो साल से कम रखी जाए। हालांकि, जज ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। नियम के अनुसार 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर विधानसभा सदस्यता रद्द हो सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। घटना 31 दिसंबर 2018 की रात की है। दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फर्म हाउस में नए साल के जश्न के लिए पार्टी आयोजित की गई थी। इसका आयोजन विधायक के भाई संजीव सिंह के फर्म हाउस में हुआ था, जहां बड़ी संख्या में मेहमान मौजूद थे। डीजे की धुन पर लोग डांस कर रहे थे, तभी हर्ष फायरिंग हुई और एक गोली डॉ. अर्चना गुप्ता को लगी। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान 3 जनवरी 2019 को मौत हो गई। 

100 फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

प्रभात ख़बर के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य सौ फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा की है. इसका मकसद अपराध से जुड़े मामलों का जल्द समाधान करना है. शनिवार को नये आपराधिक कानूनों के एकीकृत कार्यान्वयन पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि 112 आपातकालीन सेवा के माध्यम से पुलिस औसतन 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच रही है, इसे घटाकर सात से आठ मिनट करने का लक्ष्य तय किया गया है. स्पीडी ट्रायल, फास्ट ट्रैक कोर्ट और समय पर न्याय व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सरकार हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध करायेगी.

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्ज़ी फिर खारिज

जागरण के अनुसार दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं शनिवार को खारिज कर दी गईं। कड़‌कड़डूमा अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले से दिए गए आदेश के चलते वह इन अर्जियों पर न तो विचार कर सकती है और न ही कोई राहत दे सकती है। उस आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने यह राय दी थी कि अभियोजन पक्ष द्वारा जिन सुरक्षित गवाहों पर भरोसा किया गया है, उनकी गवाही पूरी होने या इस आदेश की तारीख से एक साल बीतने पर ही याचिकाकर्ता दोबारा जमानत के लिए अर्जी दे सकते हैं। ऐसे में अब शरजील और उमर को जेल में ही रहना पड़ेगा। यूएपीए सहित अन्य धाराओं में नामजद शरजील पिछले छह साल से जेल में है। इस बीच उमर ने छह और शरजील ने तीन बार जमानत याचिकाएं दाखिल की हैं।

ईरान ने ख़ामेनेई को अलविदा कहने सड़कों पर उतरा हुजूम

हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को आखिरी विदाई देने शनिवार को 100 देशों के नेता ईरान पहुंचे। इस दौरान लाखों लोग तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में जुटे। अंतिम विदाई की रस्मों के तहत खामेनेई के साथ उनकी 14 महीने की पोती, बेटी, पत्नी और दामाद को भी अंतिम श्रद्धांजलि दी गई। ये प्रक्रिया गुरुवार यानी नौ जुलाई तक चलेगी। खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। यह शहर खामेनेई का जन्मस्थान और ईरान का सबसे पवित्र शहर है। खामेनेई को अंतिम विदाई के लिए के लिए लाखों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान काले कपड़े पहने लोग गमगीन और शोक मनाते नजर आए। एक युवती जो उन्हें अंतिम विदाई देने आई थी, उसने कहा कि वो हमारे पिता जैसे थे।

भारत और इसराइल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता

भारत और इसराइल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता (बीआइए) शनिवार से लागू हो गया। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश वातावरण सुनिश्चित करेगा। साथ ही सीमापार निवेश गतिविधियों में वृद्धि होगी। दोनों देशों ने इस समझौते पर पिछले वर्ष आठ सितंबर को हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत भारत ने इसराइली निवेशकों के लिए स्थानीय उपायों की समाप्ति अवधि को तीन वर्षों तक सीमित कर दिया है। स्थानीय उपायों का मतलब है कि निवेशकों को पहले मेजबान देश की कानूनी प्रणाली का उपयोग करके अपने विवादों को हल करने का प्रयास करना होगा। इसके बाद ही वे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता जा सकेंगे।

वैभव सूर्यवंशी बने भारत के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर

भास्कर के अनुसार मैनचेस्टर | 4 जुलाई 2026 को भारतीय क्रिकेट में नया इतिहास रचा गया। 15 साल 99 दिन के वैभव सूर्यवंशी इंग्लैंड के खिलाफ टी20 मैच में उतरते ही भारत के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बन गए। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 1989 में 16 साल 205 दिन की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू किया था। वैभव को तिलक वर्मा ने डेब्यू कैप सौंपी। टी20 में वैभव भारत के 122 वें खिलाड़ी बने। वैभव डेब्यू मैच में महज 14 रन बनाकर आउट हो गए। यह मैच इंग्लैंड 4 विकेट से जीत गया।

नेता जी के रिश्तेदार इस बात पर नाराज़

हिन्दुस्तान के अनुसार पूर्व विधायक व कैदी मुन्ना शुक्ला का तीन दिन पहले मोतियाबिंद का ऑपरेशन पटना मेडिकल कॉलेजे अस्पताल में किया गया था। तीन दिन बाद शनिवार को मुन्ना शुक्ला को डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके पहले आंख की पूरी जांच भी की गयी है। तीन दिन में ही अस्पताल से छुट्टी करने के कारण मुन्ना शुक्ला के परिजन पीएमसीएच के अधीक्षक कक्ष में आकर नोकझोंक करने लगे। कई घंटों तक अधीक्षक के साथ बहस करते रहे। इस दौरान परिजन ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया कि जब 14 दिनों के लिए भेजा गया था तो तीन दिन में डिस्चार्ज क्यों कर दिया गया। नेत्र रोग विभाग के चिकित्सकों के मुताबिक मुन्ना शुक्ला का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था। इसमें एक ही दिन में डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इन्हें रि-एग्जामिन के लिए दो दिन और रखा गया था।

कुछ और सुर्खियां:

  • बिहार विधान मंडल का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा, 24 जुलाई तक चलेगा
  • समस्तीपुर में गंगा पर बना रहे पुल का स्लैब गिरा, चार मजदूर घायल
  • बिहार के विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मियों को बकाया वेतन 20 जुलाई तक मिलेगा

अनछपी: बिहार में गलत कागजात से सरकारी सुविधा लेने और सही कागजात वालों को सरकारी सुविधा मिलने में होने वाली परेशानी एक ऐसा मामला है जिसका समाधान दूर-दूर तक नजर नहीं आता। क्या सरकार और समाज को इसका कारण नहीं मालूम और अगर मालूम है तो इसका हल क्यों नहीं निकलता? एक ऐसा ही मामला बिहार में सामाजिक सुरक्षा की पेंशन लेने वालों के बारे में सामने आया है जिसमें यह बताया गया है कि घर-घर जांच में अब तक तीन लाख 58000 से ज्यादा पेंशन पाने वाले जीवित नहीं पाए गए। यह हो सकता है कि कुछ हजार लोगों की मौत के बाद भी उनके खाते में पेंशन के पैसे जाते रहे लेकिन सरकार तो बार-बार लाइफ सर्टिफिकेट मांगती है, ऐसे में सवाल पैदा होता है कि आखिर यह गड़बड़ी कैसे हो रही है? सच्चाई शायद यह है कि लाइफ सर्टिफिकेट को ऑनलाइन करने की व्यवस्था में ही झोल है और उसे ठीक करने की जरूरत है। बिहार में लगभग एक करोड़ 20 लाख लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिल रही थी जिसमें लगभग एक करोड़ पेंशन पाने वालों का लाइफ सर्टिफिकेशन किया जा चुका है। एक तरफ सरकार यह चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा हकदारों को सामाजिक सुरक्षा की पेंशन मिले तो दूसरी तरफ लाइफ सर्टिफिकेशन का मामला इतना पेचीदा है और  इसके बावजूद इसमें घोटाले की बात सामने आती है। सुनने में यह बात बहुत अच्छी लगती है कि सरकार घर-घर जांच कर रही है लेकिन यह पता लगाने की जरूरत है कि क्या वाकई ऐसा हो रहा है और जो लोग जीवित हैं उनको लाइफ सर्टिफिकेट देने में कोई परेशानी तो नहीं हो रही है? 

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