बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव लड़ेंगे लेकिन राजद क्या करेगा? अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की सभ्यता को बचाने की बात कही तो ईरान ने कहा आपके पास सभ्यता ही नहीं।
और, वक़्फ़ बोर्ड में दो हिंदू सदस्य नियुक्त करने वाला पहला राज्य बना मध्य प्रदेश।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के त्यागपत्र से रिक्त हुई विधानसभा की बांकीपुर सीट पर जन सुराज पार्टी (जसुपा) ने प्रशांत किशोर (पीके) को प्रत्याशी बनाया है। रविवार को प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने उनके नाम की आधिकारिक घोषणा की। बताया कि पार्टी की कोर कमेटी ने जागरण सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है। प्रेस वार्ता में पीके भी उपस्थित थे। पार्टी-जनों से बधाइयां लेने के बाद उन्होंने रेलवे जंक्शन स्थित महावीर मंदिर और बोरिंग रोड चौराहा स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की। उससे पहले उन्होंने कहा कि भाजपा को पराजित करने के लिए वे पूरा प्रयास करेंगे। मुझ पर भरोसा जताने के लिए पार्टी-जनों का आभार। पिछले चार वर्षों से जन सुराज ही मेरा जीवन है। आगे कम-से-कम 10 वर्षों तक इसके अतिरिक्त कोई दूसरा उद्देश्य नहीं। अगर जनता जसुपा के एक प्रतिनिधि को भी विधानसभा में भेजती है, तो हम 242 विधायकों पर भारी पड़ेंगे।
क्या करेगा राजद? क्या करेगी कांग्रेस?
जागरण लिखता है कि महागठबंधन अब नाम का ही रह गया है। विधानसभा की बांकीपुर सीट पर घटक दलों (राजद और कांग्रेस) की अपनी-अपनी दावेदारी के बाद अब कोई संशय शेष नहीं रह जाता। भाजपा भी यही चाहती है कि राजद और कांग्रेस, दोनों के प्रत्याशी, मैदान में उतर आएं। उसके बाद जन सुराज पार्टी (जसुपा) के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) से मुकाबला अपेक्षाकृत सहज हो जाएगा, क्योंकि तब विरोधी वोट तीन फरीक में बंट जाएंगे। इसमें थोड़ा-बहुत छीनाझपटी के लिए जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेजप्रताप यादव पहले ही वीणा मानवी को मैदान में उतार चुके हैं। पिछली बार यानी 2025 में इस सीट पर महागठबंधन से राजद की रेखा कुमारी ने दांव आजमाया था। उस हवाले से राजद अपनी दावेदारी पर अडिग है। 2020 और 2015 में करारी पराजय के बाद कांग्रेस ने यह सीट राजद के हवाले की थी। उस आधार पर वह अपनी दावेदारी जता रही। हालांकि, अंतिम तौर पर निर्णय दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से लिया जाएगा।
ईरान-अमेरिका सभ्यता पर भिड़े
प्रभात ख़बर के अनुसार तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला में खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए तीसरे दिन भी लाखों लोगों की भीड़ उमड़ी. भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित अंतिम दर्शन में बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए. इस घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव को और तीखा कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में देश का पूरा शीर्ष नेतृत्व मौजूद था और यदि अमेरिका चाहता तो एक ही हमले में सभी को निशाना बना सकता था. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ऐसा इसलिए नहीं किया, क्योंकि फिर बातचीत के लिए कोई नहीं बचता. उन्होंने अंतिम संस्कार में रो रहे लोगों पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि संभव है उनके आंसू भी असली न हों. ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोगों को मारा जा सकता है, लेकिन विचारों को नहीं. आपके पास न सभ्यता है, न इतिहास और न सम्मान.
पटना एम्स को जल्द ही मिलेगी 24 एकड़ और ज़मीन
हिन्दुस्तान के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार पटना एम्स के विस्तार एवं विकास के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। एम्स के विस्तार के लिए 24 एकड़ भूमि जल्द उपलब्ध करायी जाएगी। अतिरिक्त भूमि मिलने के बाद पटना एम्स में 200 नये बेड उपलब्ध होंगे। इससे संस्थान की रोगी सेवा क्षमता में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने रविवार को पटना एम्स का निरीक्षण किया और पदाधिकारियों को कई निर्देश दिये। इस दौरान उन्होंने संस्थान में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, आधारभूत संरचनाएं तथा भविष्य की विकास योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि बर्न मरीजों के उपचार के लिए स्किन स्टोरेज (त्वचा भंडारण) की व्यवस्था विकसित करने में भी राज्य सरकार सहयोग करेगी। इससे गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को बेहतर एवं समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
बिहार में न तो नए कॉलेज खुले, ना ट्रांसफर नीति सामने आई
भास्कर ने लिखा है कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के सरकारी दावे 1 जुलाई की डेडलाइन समाप्त होने के साथ ही ढेर हो गए हैं। सरकार ने जोर-शोर से ऐलान किया था कि नए डिग्री कॉलेजों और मॉडल स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो जाएगी, लेकिन हकीकत यह है कि वहां अभी सन्नाटा पसरा है। शिक्षा विभाग पिछले 6 महीने से तैयारी का दावा कर रहा था, पर हकीकत में न शिक्षक मिले और न ही तबादलों का पोर्टल खुला। राज्य के 211 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज शुरू होने थे। इसके लिए 60 हजार छात्रों ने आवेदन भी कर दिया है। कॉलेज चलाने के लिए 6752 शिक्षकों की जरूरत है। सरकार ने पहले स्कूलों के नेट और पीएचडी पास शिक्षकों को कॉलेज में भेजने का आदेश निकाला। जब शिक्षकों ने विरोध किया, तो सरकार को आदेश वापस लेना पड़ा। नतीजा यह कि छात्र अब भी डिग्री कॉलेज शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश वक़्फ़ बोर्ड में दो हिंदू सदस्य
जागरण के अनुसार वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति करने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य बन गया है। वक्फ बोर्ड में कुल 11 सदस्य रखने का प्रविधान है, जिसमें कुछ पदेन होते हैं। बोर्ड में अध्यक्ष डा. सनव्वर पटेल के अतिरिक्त पहले से सदस्य नेजमा हेपुतुल्ला, भोपाल उत्तर से विधायक आतिफ अकील, उज्जैन के रहने वाले फैजान खान, इंदौर की फातिमा चौधरी, बैरसिया भोपाल की पार्षद शाइस्ता सुल्तान, रतलाम की पार्षद शबाना खान और हिंदू सदस्यों में इंदौर के मनोज मालपानी और राघवगढ़ (गुना) के अनिमेष भार्गव को बोर्ड में सदस्य बनाया गया है।
कुछ और सुर्खियां:
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अनछपी: भारतीय जनता पार्टी के पिता-पुत्र का गढ़ मानी जानी वाली बांकीपुर सीट से उम्मीदवार बनकर प्रशांत किशोर ने एक तरफ जन सुराज पार्टी को नया जीवन देने की कोशिश की है तो दूसरी ओर राजद और कांग्रेस के लिए यह गंभीर सवाल है कि उनका महागठबंधन क्या रोल निभाएगा? भारतीय जनता पार्टी ने अपना उम्मीदवार ऐलान नहीं किया है लेकिन नितिन नवीन के हटने के बाद भी वह यहां से जीत के लिए आश्वस्त नजर आती है। इस सीट पर नितिन और उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा लंबे समय से जीतते आये हैं। इसकी एक वजह तो उसकी हिंदुत्व वादी राजनीति और कायस्थ समुदाय का बड़ा वोट बैंक है जो परंपरागत रूप से भारतीय जनता पार्टी का समर्थक माना जाता है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी इस बात को भी बहुत दिलचस्पी से देख रही होगी कि इस सीट पर विपक्ष कैसे उसका मुकाबला करता है? इसमें कोई शक नहीं कि उम्मीदवार के रूप में प्रशांत कुमार से बेहतर विपक्ष का उम्मीदवार शायद ही कोई हो लेकिन गौर से देखा जाए तो यह दरअसल विपक्ष की जगह पर कब्जा करने की एक कोशिश भी है। ऐसे में राजद के लिए यह फैसला करना महत्वपूर्ण है कि वह भारतीय जनता पार्टी को हर हाल में हराना चाहता है या उसके लिए ज्यादा जरूरी यह बात है कि प्रशांत किशोर को विपक्ष का स्पेस ना मिले? एक और बात यह है कि राजद और कांग्रेस खुद इस सीट के लिए आपस में गुत्थम गुत्थी कर रही है हालांकि उनके किसी उम्मीदवार का ना तो पता है और ना ही जीत की उम्मीद। यह बात भी ध्यान रखने की है कि प्रशांत किशोर के लिए कांग्रेस का दिल जरा नरम रहता है लेकिन राजद उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं करता क्योंकि यह कहा जा रहा है कि दरअसल वह तेजस्वी यादव के लिए खतरा बन सकते हैं । ऐसे में तेजस्वी यादव को यह फैसला करना होगा कि उनके लिए भारतीय जनता पार्टी को हराना कितना महत्वपूर्ण है और क्या वह इसके लिए गुपचुप प्रशांत किशोर का समर्थन कर सकते हैं या उन्हें लगता है कि इतनी जगह भी प्रशांत किशोर को न दी जाए? राजनीति में कई बार बड़े विपक्षी को हराने के लिए छोटे विपक्षी का साथ देना महत्वपूर्ण होता है, अब देखना यह है कि इसके लिए महागठबंधन अपना दिल कितना बड़ा कर पाता है।
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