छपी-अनछपी: इश्तेहारी मुजरिम बनाने वाली सरकार की हार, ईरान फिर बोला- होर्मुज हमारा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार सरकार नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक के विरोध में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 26 जुलाई की शाम छह बजे तक दर्ज सभी मुकदमे वापस लेगी। ईरान ने फिर दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर अब भी उसी का नियंत्रण है।

और जानिएगा कि केंद्र सरकार ने बिहार में 547 वक्फ़ संपत्तियों को अवैध कब्जे में माना। 

पहली ख़बर

प्रभात ख़बर के अनुसार बिहार सरकार नीट पेपर लीक के खिलाफ पूरे राज्य में हुए विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश के बाद गृह विभाग ने सोमवार की शाम यह फैसला लिया. इसके साथ ही प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण 26 जुलाई की शाम छह बजे तक दर्ज सभी एफआइआर, आपराधिक शिकायतों या कारण बताओ नोटिसों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गयी. साथ ही इन मामलों के संबंध में गिरफ्तार या हिरासत में लिये गये सभी व्यक्तियों को तुरंत रिहा कर दिया जायेगा. गृह विभाग के विशेष सचिव छत्रनील सिंह के दस्तखत से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 26 जुलाई की शाम छह बजे तक राज्य के किसी भी हिस्से में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध सरकार कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी. उक्त अवधि में दर्ज इन सभी केस में नामजद व्यक्तियों के खिलाफ भविष्य में भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी.

पूरे राज्य में 355 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया

बिहार पुलिस मुख्यालय ने बताया कि छात्र आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा को लेकर राज्यभर से कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से 339 नाबालिगों और छात्रों को सत्यापन के बाद रिहा कर दिया गया. हालांकि, हिंसक घटनाओं में सीधे तौर पर संलिप्त 355 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर जेल  भेजा गया है. इनके खिलाफ मामले दर्ज किये गये हैं. पूरे राज्य में इस मामले में 59 प्राथमिकियां दर्ज कराई गई हैं। 

अब सुप्रीम कोर्ट ने भी माना, शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठी भांजना गलत

जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को सुगम बनाने और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक समान प्रोटोकाल की आवश्यकता बताई है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान की ओर से दिया गया है। किसी आंदोलन का हवाला देकर पुलिस की ज्यादतियों या लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता। जस्टिस सूर्यकांत, जोयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ मंगलवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, जिनमें काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती का आरोप लगाया गया है।

पेपर लीक रोधी बिल पर संसद में चर्चा आज

केंद्र सरकार ने पेपर लीक सहित परीक्षाओं से जुड़ी गड़बड़ियों को सख्ती से रोकने के लिए सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित. साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 लोकसभा में पेश किया। सोमवार को हंगामे के चलते विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी। बाद में स्पीकर ओम बिरला की पहल और सभी दलों के शीर्ष नेताओं से वार्ता के बाद विधेयक पर चर्चा करने पर सहमति बन गई। इससे लगातार हंगामे व ठप पड़े कामकाज के बाद मंगलवार से मानसून सत्र सामान्य होने की उम्मीद है और अवरुद्ध विधायी कामकाज गति पकड़ सकता है। इस विधेयक पर छह घंटे चर्चा का प्रस्ताव है। इसमें पेपर लीक से जुड़े मामलों में अब 10 वर्ष की अधिकतम सजा और 10 करोड़ के जुर्माने का प्रस्ताव है। इस दौरान जांच और सुनवाई दोनों साथ चलेंगी। 

असम में 50 साल में पहली बार इतनी बाढ़

भास्कर के अनुसार वैसे तो असम में ब्रह्मपुत्र हर साल बाढ़-तबाही लाती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा भयानक हैं। सबसे ज्यादा दर्दनाक स्थिति जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव जहां 500 से ज्यादा गांव 1 जुलाई से आज तक जलमग्न हैं। करीब 7 लाख घरों में न बिजली है, न पीने का पानी। सरकार राशन व राहत सामग्री भी बड़ी मुश्किल से पहुंचा पा रही है। जहां बाढ़ खत्म मिली, वहीं जिंदगी थमी हुई हैं।

ईरान बोला होर्मुज हमारे नियंत्रण में

जागरण के अनुसार ईरान ने सोमवार को दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर अब भी उसी का नियंत्रण है और अमेरिका के साथ शांति वार्ता फिर से शुरू करने का कोई इरादा नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दो दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगातार दो हफ्ते से जारी बमबारी रोक दी गई। इस बीच, सऊदी अरब, जार्डन और इराक ने ड्रोन हमलों की जानकारी दी। इन हमलों से जाहिर होता है कि ईरान ट्रंप की बमबारी रोकने की नीति की परीक्षा ले रहा है।

बिहार में 547 वक़्फ़ संपत्तियों पर अवैध कब्जा

हिन्दुस्तान के अनुसार राज्यसभा में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड की 63 और बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड की 511 वेक्फ संपत्तियां यानी कुल 574 वक्फ संपत्तियां वर्तमान में अवैध कब्जे में हैं। इन संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए संबंधित वक्फ बोर्डों द्वारा वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 54 के तहत कार्रवाई की जा रही है। राज्यसभा में भाजपा के सांसद डॉ. भीम सिंह ने अतारांकित प्रश्न का वे उत्तर दे रहे थे। अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने कहा कि इस साल 21 जुलाई तक देशभर में बिहार सहित विभिन्न राज्यों की वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण यूएमईईडी केंद्रीय पोर्टल 2025 पर किया जा रहा है। जिन राज्य वक्फ बोर्डों ने उचित कारण बताते हुए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया है, उन्हें कानून के प्रावधानों के अनुसार दस्तावेज अपलोड करने के लिए समय-विस्तार भी दिया गया है।

कुछ और सुर्खियां:

  • छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सिवान में सिपाही ने बिना आदेश के एके-47 से की थी फायरिंग सस्पेंड
  • मुजफ्फरपुर के साहिबगंज से भाजपा के विधायक राजू कुमार सिंह की चार साल की सजा हाईकोर्ट से निलंबित, जमानत भी मिली
  • केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक को ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोट लाने की मंजूरी दी
  • कोसी-मेची नदी लिंक प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने दी मंजूरी

अनछपी: बिहार सरकार ने 22 और 25 जुलाई को हुए छात्रों के प्रदर्शन को लेकर जिस बड़े पैमाने पर क्रैकडाउन किया था उसकी भारी आलोचना के बाद मुकदमे की वापसी की घोषणा तो कर दी है, लेकिन इससे जुड़े सवालों पर गौर करना भी जरूरी है। ध्यान रहे कि दिल्ली में जंतर मंतर प्रदर्शन के बाद सरकार से जो समझौता हुआ था उसमें यह बात भी तय  पाई थी कि सरकार सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी मुकदमे वापस ले गई और उन्हें जेल से रिहा करेगी। लेकिन बिहार में इसके बावजूद मुकदमे और जेल में डालने की कार्रवाई जारी थी। अब, सबसे जरूरी बात यह है कि सरकार ने जो वादे अभी किए हैं उसके मुताबिक कार्रवाई हो और पुलिस के जरिए इसमें कोई हेराफेरी की कोशिश ना की जाए। यानी प्रक्रिया के नाम पर या किसी और बहाने किसी भी प्रदर्शनकारी को मुकदमे और जेल में फंसाए रखने की नीति नहीं अपनाई जाए। दूसरी अहम बात यह है कि प्रशासन ने जिस तरह छात्र प्रदर्शनकारियों को इश्तेहारी मुजरिम बना दिया उसके बारे में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। अखबारों में जिस तरह प्रदर्शनकारियों की तस्वीर देकर उन्हें उपद्रवी घोषित करने का विज्ञापन छपवाया गया वह बिहार की राजनीति में आम बात नहीं थी। दरअसल समझा यह जा रहा है कि यह बिहार के राजनीतिक नेतृत्व का फैसला नहीं था बल्कि यह केंद्रीय गृह मंत्रालय संभालने वाले अधिकारियों के इशारे पर और उन्हीं के कहने पर हो रहा था। उस इश्तेहार में अभिभावकों को भी संबोधित किया गया था और साफ तौर पर यह संदेश दिया जा रहा था कि उनके बच्चे किसी भी तरह ऐसे प्रदर्शन में हिस्सा ना लें। दरअसल यह प्रशासन के कंधे पर बंदूक रखकर सरकार द्वारा बच्चों को और उनके अभिभावकों को डराने और धमकाने की  कोशिश थी। उम्मीद की जाने चाहिए कि बिहार में सरकार चला रहा राजनीतिक नेतृत्व आगे से दिल्ली के दबाव में आकर ऐसी कोई अत्याचार पूर्ण कार्रवाई पर सहमति नहीं देगा। 

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