बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में गंगा और पुनपुन की बाढ़ मैं कमी आई है लेकिन परेशानी अभी बरकरार है। दरभंगा जिले के बहादुरपुर के बीडीओ के खिलाफ आय से अधिक अकूत संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया गया है।
और, जानिएगा कि मरीज को टीबी था, प्राइवेट हॉस्पिटल ने कैंसर का इलाज किया तो 23 लाख का जुर्माना लगा।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार गंगा और पुनपुन नदी के जलस्तर में मंगलवार को कमी आई है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की परेशानी, अब भी बरकरार है। पानी कम होने से जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद जगी है। हालांकि, कई पंचायतों की ग्रामीण सड़कों पर अब भी पानी जमा है। मोकामा से मनेर तक खेतों में फसलें अब भी डूबी हुई हैं, जिससे किसानों की चिंता बनी हुई है। पुनपुन नदी के जलस्तर में मंगलवार को सात सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई, लेकिन बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है। नदी का पानी अब भी खतरे के निशान से 2.88 मीटर ऊपर है। निचले इलाकों में बाढ़ का पानी जमा रहने से जनजीवन प्रभावित है। सोमवार शाम चार बजे श्रीपालपुर के समीप नदी का जलस्तर 53.55 मीटर था, जो मंगलवार शाम पांच बजे घटकर 53.48 मीटर हो गया। बाढ़ नियंत्रण पटना सिटी के अनुसार, मंगलवार दोपहर 12 बजे से जलस्तर में कमी शुरू हुई और करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से पानी घट रहा है।
एनएच 80 पर तीन चार फ़ीट पानी जमा
मोकामा-मुंगेर एनएच-80 पर हाथीदह रेल ओवरब्रिज के नीचे बाढ़ का पानी जमा होने से वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। ब्रिज के नीचे तीन से चार फीट तक पानी जमा है। मंगलवार को 30 से अधिक गाड़ियां पानी में फंसकर बंद हो गईं। हाथीदह प्रशासन ने मौके पर डायवर्सन लगा दिया है। अब लखीसराय जाने वाले वाहनों को ओवरब्रिज से पहले बाबा दुखहरण स्थान के पास से डायवर्ट कर निकाला जा रहा है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा को भी डायवर्सन के रास्ते से निकाला गया।
भागलपुर में जिंदगी संभालना मुश्किल
भागलपुर में गंगा के उफान ने न केवल ग्रामीण इलाकों को निगला है, बल्कि शहर की पॉश कॉलोनियों को भी पूरी तरह जलमग्न कर दिया है। आदमपुर बैंक कॉलोनी की स्थिति इन दिनों दिल दहला देने वाली है। सड़कों पर कमर भर पानी है तो घरों के भीतर घुटने भर गंदा पानी हिलकोरे मार रहा है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि वे अपने घर-सामान बचाएं या खुद की जिंदगी संभालें।
एक लाख हेक्टेयर में फसल बर्बाद
बिहार में गंगा, गंडक, सोन, पुनपुन समेत अन्य नदियों की बाढ़ ने 13 जिलों में करीब एक लाख हेक्टेयर में लगी फसल को नुकसान पहुंचाया है। जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर कृषि विभाग का यह प्रारंभिक आकलन है। विभाग ने जिलों से फसल क्षति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सर्वाधिक क्षति पटना, भागलपुर, वैशाली और खगड़िया जिले में हुई है, जहां धान, मक्का और सब्जी के साथ ही उद्यानिक फसलें नष्ट हो गई हैं। आकलन के मुताबिक, पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल के 77 प्रखंडों में बाढ़ से फसल की क्षति हुई है। पटना, वैशाली और भागलपुर के दियारा इलाके में मक्का, सब्जी और केला की खेती को काफी नुकसान हुआ है। कृषि विभाग के अनुसार, बाढ़ का पानी जल्द उतर जाने पर धान की फसल को अधिक नुकसान नहीं होगा। लेकिन, खरीफ दलहनी फसलों के साथ सब्जी और मक्का को बचाना मुश्किल होगा।
घूसखोर बीडीओ की अकूत संपत्ति
प्रभात खबर के अनुसार आर्थिक अपराध इकाई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में दरभंगा जिले के बहादुरपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी आनंद कुमार विभूति के पांच ठिकानों पर मंगलवार को छापेमारी की. इस दौरान बीडीओ के आवास से आय से अधिक करीब 1,71,84,000 रुपये की संपत्ति की जानकारी मिली. पूर्वी चंपारण के चिरैया स्थित पैतृक गांव में करीब 70 लाख रुपये की लागत से बना मकान मिला. वास्तविक कीमत का आकलन हो रहा है. मुजफ्फरपुर के अहियापुर में निजी आवास से 16 प्लॉट से जुड़े दस्तावेज मिले हैं. इनमें नौ प्लॉट उनके और परिवार के नाम तथा 7 अन्य लोगों के नाम से हैं. इओयू ने बताया कि बीडीओ आनंद कुमार विभूति पर आरोप है कि उन्होंने ज्ञात आय से 121.87% अधिक संपत्ति अर्जित की है. आनंद 2014 में बिहार लोक सेवा आयोग की 53वीं से 56 वीं बैच में सीधे नियुक्त पदाधिकारी बने थे. आनंद दो महीने पहले ही मुजफ्फरपुर के कांटी प्रखंड से स्थानांतरित होकर दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड पहुंचे थे.
बिहार सरकर के कर्मियों के लिए 13 अक्टूबर से उर्दू की ऑनलाइन क्लास
प्रभात खबर के अनुसार बिहार सरकार के विभागों और क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत गैर-उर्दू भाषी अधिकारी और कर्मचारी अब उर्दू सीखेंगे. राज्य की द्वितीय राजभाषा उर्दू का ज्ञान कराने के लिए मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के उर्दू निदेशालय ने पहल की है. उर्दू प्रशिक्षण- अधिगम केंद्र के तहत 13 अक्तूबर से 70 दिवसीय ऑनलाइन उर्दू प्रशिक्षण का अगला सत्र शुरू होगा. इसकी जानकारी अपर सचिव-सह-निदेशक एसएम परवेज आलम ने सभी विभागीय प्रमुखों, विभागाध्यक्षों और जिला अधिकारियों को दी है.
एफिल टावर का दौरा कर रहे स्वामीनारायण संतों के दौरे पर महिला स्टाफ हटाया, विरोध में हड़ताल
भास्कर के अनुसार दुनिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल फ्रांस का एफिल टावर 137 साल के इतिहास में पहली बार लिंगभेद के आरोप के बाद बंद रहा। वजह दो दिन पहले की घटना है। धार्मिक संगठन बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) से जुड़े 100 संत शनिवार को टावर देखने पहुंचे थे। आरोप है कि इस दौरान महिला कर्मचारियों को उनके काम की जगह से हटाने को कहा गया था। प्रतिनिधिमंडल के वहां रहने तक महिलाओं को कुछ क्षेत्रों से गुजरने से भी रोका गया। स्टाफ और प्रबंधन की मंगलवार को बैठक के बाद इसे दोबारा खोला गया। टावर की संचालक कंपनी एसईटीई ने भी माना है कि प्रतिनिधिमंडल ने महिलाओं से संपर्क सीमित रखने का अनुरोध किया था। हालांकि कंपनी ने माना कि ऐसी शर्ते मंजूर नहीं की जानी चाहिए थीं। इस बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे संगठन का निजी मामला बताते हुए टिप्पणी से इनकार किया है। विवाद बढ़ने के बाद पेरिस स्थित बीएपीएस मंदिर ने माफी मांगी है।
मरीज को टीबी था, प्राइवेट हॉस्पिटल ने कैंसर का इलाज किया- हालत बिगड़ी
जागरण के अनुसार राजस्थान के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने टीबी रोगी महिला को कैंसर पीड़ित मानकर करीब चार महीने तक कीमोथेरेपी दे दी। महिला का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ा तो स्वजन उसे मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल लेकर गए, चिकित्सकों को जांच में पता चला कि महिला कैंसर नहीं, बल्कि टीबी से पीड़ित है। इस गंभीर लापरवाही पर भरतपुर स्थित स्थायी लोक अदालत ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सक पर 23 लाख 36 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। भरतपुर के पुष्प वाटिका कालोनी निवासी लक्ष्मी शर्मा को अक्टूबर, 2022 में पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत होने पर स्वजन जयपुर स्थित महावीर कैंसर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच के बाद महिला को कैंसर पीड़ित मान लिया।
कुछ और सुर्खियां:
- अयोध्या से लौट रही कार मोकामा में डिवाइडर से टकराई, क्रिया के रहने वाले मियां- बीवी और ड्राइवर की मौत
- नई दिल्ली से लखनऊ आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट हवा के दबाव में फंसी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी थे सवार
- बक्सर की डाक अधीक्षक कुमारी सरिता समेत तीन कर्मियों को सीबीआई ने पैसे के लेन देन से जुड़ी शिकायत पर हिरासत में लिया
- धनबाद में बीसीसीएल सिल्वर क्षेत्र की गोदी दी कोलियरी में जमीन धंसने से बच्चे की मौत
अनछपी: भारत में और खासकर बिहार में आम लोगों की बेमौत जान कैसे जाती है इसके उदाहरण हमें अक्सर मिलते रहते हैं। बेमौत जान जान से हमारा मतलब यह है कि इससे बचा जा सकता था। भागलपुर जिले के अकबरनगर से खबर है कि बाढ़ के पानी से बचने के लिए एक मां-बाप अपनी बेटी के साथ केबिन रोड से रेल पटरी होते हुए अकबरनगर स्टेशन ट्रेन पकड़ने जा रहे थे। हमारे समाज में अक्सर यह देखा गया है कि प्लेटफार्म पर पहुंचने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल न करके लोग रेल पटरी को पार करने लगते हैं। इस खबर में बताया गया है कि जब यह तीनों प्लेटफार्म पर चढ़ने के लिए पटरी से जा रहे थे तो अप लाइन पर मालगाड़ी आ गई। यह देखकर वह डाउनलाइन पर गए लेकिन उसी वक्त उस लाइन पर रायगढ़ से देवघर जाने वाली ट्रेन आ गई। पहले उनकी बेटी ट्रेन की चपेट में आई और फिर जब बेटी को बचाने के लिए यह दोनों उसकी तरफ दौड़े तो खुद भी ट्रेन की चपेट में आ गए। मां बाप की मौत तो वहीं हो गई और बच्ची भी बाद में अस्पताल में दम तोड़ गई। इस तरह तीन इंसानों की जान बेमौत चली गई। हमारे समाज में इस पर बहुत चर्चा हुई तो बस इतना कहा जाएगा कि यह एक हादसा था लेकिन इसके साथ जुड़े गंभीर सवालों पर हम बात नहीं करते। हम इसकी चर्चा नहीं करते कि तीनों लोग एक डॉक्टर के पास जाना चाहते थे और ट्रेन पकड़ने के लिए बाढ़ के पानी की वजह से कोई और रास्ता नहीं बचा था। यही अगर हमारे किसी नेता या अधिकारी की जरूरत होती तो उनके लिए रास्ता भी बन जाता और हो सकता है कि ट्रेन भी रुक जाती या फिर वह अपनी कार से डॉक्टर के पास चले जाते। दरअसल हमारे यहां आम आदमी भी यही मानकर चलता है कि उनकी किस्मत में यही लिखा है कि वह ऐसे ही मरते रहेंगे।
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