बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे वाले यूनिफॉर्म सिविल कोड के मामले पर जेडीयू ने एक दिन पहले विरोध करने के बाद सरेंडर कर दिया है। बिहार के डीजीपी और दो और बड़े अधिकारियों ने अचानक छुट्टी ले ली है। बिहार सरकार गया जिले में विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर बनाने और फल्गु में सोने का पानी लाने के लिए 3516 करोड़ रुपए खर्च करेगी।
और, ईरान युद्ध में अमेरिका को 33 अरब डॉलर की चोट लगी।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार एक दिन के भीतर ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को बिहार में लागू करने के मुद्दे पर जदयू के रूख में नरमी आ गई। सरकार के उप मुख्यमंत्री एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को कहा कि अभी के समान नागरिक संहिता के प्रविधान सार्वजनिक नहीं हुए हैं। पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए इस मामले पर केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात कर चर्चा करने की बात कही है। विजय चौधरी का यह रुख पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं विधायक श्याम रजक के दावे से अलग हैं, जिसमें उन्होंने दो टूक कहा था कि बिहार में समान नागरिक संहिता को लागू नहीं होने देंगे। सोमवार को श्याम रजक ने यह भी कहा था कि संसद के दोनों को सदनों में यूसीसी से जुड़े विधेयक समर्थन देते समय भी जदयू ने स्पष्ट कर दिया था कि इसे बिहार में लागू नहीं किया जाएगा। हालांकि विजय चौधरी ने इसे बिहार में में लागू न करने के प्रश्न पर कुछ नहीं कहा। लेकिन, उन्होंने केंद्र सरकार से टकराव का कोई संकेत नहीं दिया। उन्होंने कहा-यूसीसी के प्रविधानों के अध्ययन के बाद पार्टी इस पर विमर्श करेगी। यदि इसमें किसी प्रकार की चिंता या परेशानी सामने आती है तो उसे दूर करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री के के समक्ष पार्टी की बात रखी जाएगी।
तेजस्वी बोले यूसीसी पर गोल-गोल ना बोलें: चिराग
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि विहार में यूसीसी लागू करने के मुद्दे पर जदयू और लोजपा (रा) साफ-साफ कहे कि उनके मन में क्या है। दोनों केंद्र और राज्य सरकार में शामिल हैं। उन्हें बताना चाहिए कि राज्य में यूसीसी लागू करने देंगे कि नहीं। इधर, राजद के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में किसी भी कीमत पर यूसीसी लागू नहीं होने देंगे। राज्य के सभी लोगों को अपना धर्म मानने का अधिकार है। उन्होंने जदयू को राजद के साथ मिल कर राज्य में सरकार बनाने का प्रस्ताव भी दिया। कहा कि भाजपा बिहार को बर्बाद करने में लगी है। प्रभात खबर के अनुसार : भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय ने कहा कि बिहार में किसी भी कीमत पर यूनिफार्म सिविल कोर्ड (यूसीसी) नहीं लागू होनी चाहिए.
डीजीपी, बीपीएससी और पुलिस अवर सेवा आयोग के अध्यक्ष अचानक छुट्टी पर गए
हिन्दुस्तान के अनुसार बीपीएससी के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग के अध्यक्ष केएस द्विवेदी अवकाश पर चले गए हैं। उधर, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार भी मंगलवार को 21 दिनों की छुट्टी पर चले गए। तीन बड़े पदधारकों के एक साथ अवकाश पर जाने को लेकर मंगलवार को तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। वैसे तीनों ने अलग-अलग कारण बताए हैं। गृह विभाग ने विनय कुमार के अवकाश पर रहने तक होमगार्ड की महानिदेशक प्रीता वर्मा को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। उधर, बीपीएससी अध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार राजस्व पर्षद की अध्यक्ष सह सदस्य हरजोत कौर बम्हरा को दिया गया है। पुलिस अवर सेवा आयोग के अध्यक्ष पद का प्रभार अभी किसी को नहीं दिया गया है। केएस द्विवेदी एक माह के अवकाश पर हैं। उन्होंने इसके पारिवारिक कारण बताए हैं।
डीजीपी एलटीसी के तहत बुधवार से 21 दिनों की छुट्टी पर रहेंगे। विनय कुमार ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि उन्होंने पिछले दस साल से एलटीसी का उपयोग नहीं किया, जबकि आईपीएस अधिकारियों के लिए हर एक दो साल पर इसका प्रावधान है। विनय कुमार इसी साल दिसंबर में सेवानिवृत्त होंगे।
₹3516 करोड़ से विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर बनेगा और फल्गु में सोन का पानी आएगा
प्रभात खबर के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में कुल 17 प्रस्तावों पर मुहर लगी. इसके तहत गया स्थित ऐतिहासिक धार्मिक विष्णुपद मंदिर परिक्षेत्र को वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने की योजना को मंजूरी दी गयी. इसके साथ ही सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना की भी प्रशासनिक स्वीकृति मिली है. इन दोनों परियोजनाओं पर कुल 3,516.05 करोड़ खर्च किये जायेंगे, जिनमें विष्णुपद मंदिर के विकास पर 2,520 करोड़ और सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के लिए 996.05 करोड़ रुपये शामिल हैं.
ईरान युद्ध में अमेरिका को 33 अरब डॉलर की चोट
जागरण के अनुसार ईरान के साथ युद्ध में अमेरिकी सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी रक्षा विभाग के इंस्पेक्टर जनरल की रिपोर्ट ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें ईरानी मिसाइलों को लगातार बीच रास्ते में ही रोकने और अमेरिकी ठिकानों को सुरक्षित रखने की तस्वीर पेश की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी से 30 जून के बीच अमेरिका को युद्ध में करीब 33 अरब डालर की लागत उठानी पड़ी और लगभग 22 अरब डालर का गोला-बारूद खर्च हुआ। पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा। दर्जनों लड़ाकू विमान क्षतिग्रस्त हुए, 30 से अधिक एमक्यू-१ रीपर ड्रोन नष्ट हुए और सैकड़ों सैन्य इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह तबाह हो गईं।
कुछ और सुर्खियां:
- ₹2000 से अधिक यूपीआई भुगतान पर व्यापारियों को देना होगा 0.4%
- दारोगा भर्ती और बीपीएससी की 70वीं परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर पटना में छात्रों का प्रदर्शन
- सऊदी अरब पर होती लड़ाकू के हमले जारी रहने के मद्देनजर मक्का में अलर्ट
- आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के नीतिगत निर्णय लेने पर लगी रोक
- रूस के संसदीय चुनाव के लिए मधुबनी के राजनगर से भाजपा विधायक सुजीत पासवान बने ऑब्जर्वर
- लखीसराय के चानन में विकास योजनाओं के भुगतान के एवज कमीशन मांगने पर प्रखंड पंचायती राज अधिकारी बृजेश कुमार गिरफ्तार
अनछपी: भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे में शामिल यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के बारे में जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी का सरेंडर करना कोई ताज्जुब की बात नहीं है। जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह बयान सामने आया था कि देश के 21 उन राज्यों में जहां भारतीय जनता पार्टी या एनडीए की मिली जुली सरकार है वहां 2029 से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया जाएगा तो इसके विरोध में जदयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने जरूर आवाज उठाई लेकिन उनका यह विरोध एक दिन भी नहीं टिक पाया।
मुसलमानों की महफिल में उर्दू जबान में गोल-गोल बातें करने वाले बिहार के उप मुख्यमंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने श्याम रजक के बयान से बिल्कुल अलग स्टैंड लिया। श्री चौधरी ने यह नहीं कहा कि उनकी पार्टी यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करेगी क्योंकि उनके नेता यानी नीतीश कुमार ने यह कह रखा था कि वह यूसीसी लागू होने नहीं देंगे। श्याम रजक ने कहा था कि उनकी पार्टी अब भी नीतीश कुमार के पुराने स्टैंड पर कायम है लेकिन विजय कुमार चौधरी ने ऐसी कोई बात नहीं कही बल्कि उन्होंने यह शगुफा छोड़ा कि उनकी पार्टी पहले ड्राफ्ट देखेगी, उसके बाद आखिरी फैसला करेगी। क्या विजय कुमार चौधरी को यह नहीं मालूम है कि भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड और कई दूसरे भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू कर चुकी है और उसका ड्राफ्ट कैसा था?
यह बात दोहराने की है कि पहले नीतीश कुमार यूनिफॉर्म सिविल कोड का सीधे विरोध करते थे और अब विजय कुमार चौधरी इससे कतरा रहे हैं क्योंकि अंततः उन्हें वही करना है जो भारतीय जनता पार्टी की इच्छा है।
दरअसल विजय कुमार चौधरी सीधे झटका ना देखकर मुसलमानों को राजनीतिक तौर पर हलाल कर रहे हैं ताकि उनके बारे में कुछ भरम बना रहे। वैसे इस मामले में सिर्फ विजय कुमार चौधरी पर इल्जाम लगाना सही नहीं होगा क्योंकि उन्हें भी पता है कि उनके कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा भारतीय जनता पार्टी से आए हैं और उनकी विचारधारा भी भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा जैसी ही है। ऐसे में विजय कुमार चौधरी को अपना राजनीतिक करियर भी देखना है। इसलिए वह कोई ऐसा बयान नहीं देंगे जिससे संजय कुमार झा और भारतीय जनता पार्टी नाराज हो।
सबसे बड़ी बात यह है कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार इस समय इन मुद्दों पर कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं लेकिन जब उनकी सेहत सही थी तब भी वह अपने बनावटी सेक्यूलर महल की हर उस दीवार को तोड़ते रहे हैं जिसे वह भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे से अलग बताते थे। तीन तलाक का मामला हो, नागरिकता संबंधी कानून सीएए हो या अनुच्छेद 370 का मामला हो, नीतीश कुमार ने इन मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी के सामने उस समय सरेंडर किया जब उनकी सेहत अच्छी मानी जाती थी।
यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध नीतीश कुमार की धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक छवि का अंतिम किला था और अब उसे भी भारतीय जनता पार्टी ढाहने की तैयारी कर चुकी है। इसके बावजूद अगर जनता दल यूनाइटेड के नेताओं को यह शिकायत रहती है कि मुसलमान उन्हें वोट नहीं देते तो इससे बड़ा राजनीतिक मजाक क्या हो सकता है।
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