बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को शांति प्रयासों में अड़ंगा लगाने को लेकर फटकार लगाई है। सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया । मशहूर डेयर कंपनी अमूल में बिहार में 200 करोड़ का प्रोजेक्ट शुरू करेगी।
और, मशहूर कोचिंग संचालक खान सर के सेंटर पर हमला हुआ है।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान से तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लेबनान पर हमलों को लेकर इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू पर भड़क गए। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू को फटकार लगाई, जिसके बाद इसराइल ने लेबनान पर हमले रोक दिए। अमेरिकी समाचार पोर्टल एक्सियोस ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा, ‘ये क्या कर रहे हो? अब हर कोई आपसे नफरत कर रहा है’, इन सब की वजह से हर कोई इसराइल से नफरत कर रहा है।’ ट्रंप की बात पर नेतन्याहू ने ओके-ओके कहते हुए कहा कि सभी चीजों का ध्यान रखा जाएगा। ट्रंप ने एक हिज्बुल्ला कमांडर को मारने के लिए पूरे भवन को मलबे में तब्दील करने पर भी आपत्ति जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति नेतन्याहू पर तब भड़के जब ईरान ने चेतावनी दी कि लेबनान पर हो रहे हमलों को देखते हुए वह शांति वार्ता फिलहाल रोक रहा है।
सीबीएसई के चेयरमैन व सेक्रेटरी हटाए गए
जागरण के अनुसार ऑन-स्क्रीन मार्किंग के जरिए बारहवीं के छात्र के कराए गए मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों को लेकर विवादों में घिरे सीबीएसई के खिलाफ सरकार मंगलवार को एक्शन में दिखी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश के बाद सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। यही नहीं, आन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) से जुड़े टेंडर मामले की जांच के लिए भी एक सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसका जिम्मा कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की अध्यक्ष एस. राधा चौहान को सौंपा गया है। उन्हें एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इस बीच, केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आइएएस लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया चेयरमैन और इंडियन इंफोर्मेशन सर्विस के अधिकारी वरुण भारद्वाज को सचिव नियुक्त किया है।
इसराइल में अनिवार्य सैन्य भर्ती के विरोध में प्रदर्शन
इसराइल में हजारों अति-रूढ़िवादी यहूदियों ने सोमवार को अनिवार्य सैन्य भर्ती के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख सड़कों और रेल मार्गों को जाम कर दिया, जिससे यरुशलम और तेल अवीव समेत कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ. कुछ स्थानों पर आगजनी और हिंसा की घटनाएं भी हुईं. पुलिस के अनुसार, एक सैनिक पर हमला किये जाने के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा. सेना में बढ़ती कर्मियों की कमी के बीच भर्ती छूट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिससे प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार पर भी राजनीतिक दबाव बढ़ गया है.0
खान सर के कोचिंग सेंटर पर हमला
भास्कर के अनुसार पटना का मुसल्लहपुर इलाका मंगलवार रात गोलियों की तड़तड़ाहट और पत्थरबाजी से दहल उठा। खान ग्लोबल स्टडीज परिसर में जमकर तांडव मचाया गया। कोचिंग संस्थानों के बीच की प्रतिद्वंद्विता इस कदर बढ़ गई कि ईंट-पत्थरों के बाद गोलियां भी चलीं। उपद्रवियों ने कोचिंग के गार्ड चुनचुन को निशाना बनाया। उनके सिर पर ईंट-पत्थरों से हमला किया गया, जिससे वे लहूलुहान हो गए। उन्हें गंभीर हालत में पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है। इस बारे में खान सर ने बताया कि वह कोचिंग के अंदर ही थे। उन्होंने कहा, “अचानक करीब 8 से 10 राउंड गोलियां चलीं। इस हमले में हमारा एक सुरक्षा गार्ड गंभीर रूप से घायल हो गया है। दरअसल, कुछ लोगों को इस बात से परेशानी है कि हम इतनी कम फीस में बच्चों को क्यों पढ़ाते हैं और यहां से बड़ी संख्या में छात्रों का सिलेक्शन क्यों हो रहा है। यह हमला इसी रंजिश का नतीजा है।”
अमूल कंपनी पटना के फतुहा में लगाएगी 200 करोड़ रुपए की डेयरी यूनिट
प्रभात खबर का ब्रेकिंग न्यूज़ है कि बिहार में औद्योगिक विकास की रफ्तार के क्रम में देश की प्रमुख डेयरी कंपनी अमूल ने पटना के फतुहा क्षेत्र में अपनी नयी उत्पादन इकाई स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है. मंगलवार को उद्योग विभाग में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में अमूल को फतुहा में 13 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने पर सहमति बनी. बैठक के दौरान परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गयी और भूमि आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी. इस परियोजना पर कंपनी करीब 200 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. अमूल देश की अति महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई है. इस तरह की औद्योगिक इकाई आने से भारत के अन्य बड़े औद्योगिक घराने बिहार की ओर कदम बढ़ायेंगे.
तीन सदस्यों की टीम करेगी मदरसों की जांच, 10 दिनीं में रिपोर्ट
शिक्षा विभाग के सचिव ने प्रदेश भर के मदरसों की जांच के लिए सभी प्रखंडों में तीन सदस्यीय कमेटी के गठन का आदेश दिया है। सभी जिलों के डीएम को उनसे संबंधित राजकीय प्रस्वीकृत अनुदानित मदरसों की जांच करनी है। प्रखंड स्तर पर इनकी जांच के लिए जो तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्देश जारी किया गया है उनमें संबंधित प्रखंड के प्रखंड विकास अधिकारी या अंचलाधिकारी, प्रखंड पदाधिकारी व समीप के सरकारी हाई स्कूल के सीनियर प्रधानाध्यापक रहेंगे। इस कमेटी को 10 दिनों के भीतर शिक्षा विभाग को अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इस संबंध में यह देखा जाएगा कि मदरसे नियमों के हिसाब से चल रहे या नहीं। अगर कोई मदरसा बंद पाया गया या फिर किसी के बारे में स्थानीय स्तर पर यह रिपोर्ट मिलती है कि मदरसा चल नहीं रहा है तो उसके खिलाफ शिक्षा विभाग के स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। संबंधित मदरसे के अनुदान को बंद किया जा सकता है।
कुछ और सुर्खियां:
- किशनगंज के बहादुरगंज थाना क्षेत्र में स्वर्ण व्यवसाय से 60 लाख के जेवरात की लूट
- दरभंगा के सिमरी में स्वर्ण व्यवसाय से 22 लाख के आभूषण की लूट
- आंध्र प्रदेश में पूर्णिया के मजदूरों को बंधक बनाकर काम लिया गया, घर लौटे मजदूरों में से चार की मौत, सात गंभीर
- भागलपुर जिले के विक्रमशिला सेतु पर बने बेली ब्रिज से 7 जून से हल्के वाहन का परिचालन शुरू होगा, सितंबर से नवंबर तक बंद रहेगा सेतु
- वोटिंग के बाद पश्चिम बंगाल में हिंसा के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना, कहा- भाजपा को हटाए बिना नहीं रुकूंगी
- बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी प्रवेश परीक्षा पर लगी रोक, अब यूजीसी नेट स्कोर से होगा दाखिला
अनछपी: बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी मकान को लेकर जो बयानबाजी जारी है उसे यह पता चलता है की राजनीति में नेताओं का ध्यान कितनी छोटी बातों पर टिकी रहती है। यह बात सबको पता है कि राबड़ी देवी राजनीतिक रूप से इसलिए महत्वपूर्ण हैं कि उनके पति लालू प्रसाद राजद के प्रमुख हैं और उनके पुत्र तेजस्वी यादव विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। वैसे तो राबड़ी देवी को पूर्व मुख्यमंत्री और इस समय विधान पार्षद होने की वजह से भी उनके पद के हिसाब से सुविधा मिली हुई है, लेकिन उनको उनके आवास से हटाने की जिद से ऐसा लगता है की राबड़ी देवी राजनीतिक रूप से सरकार में शामिल दोनों पार्टियों भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के लिए चुनौती बनी हुई हैं। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह उत्तेजक बयान सामने आया है कि कोई माई का लाल सरकारी घर खाली कराने से नहीं रोक सकता। इससे पहले राबड़ी देवी ने भी कुछ ऐसे ही बातें की थी और उन्होंने कहा था कि सरकार फोर्स लगाकर घर खाली करा ले। इस मामले में जदयू के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी का बयान संतुलित माना जा सकता है जिन्होंने कहा था कि सरकारी क्वार्टर लेने के लिए नियम है और सबको नियम का पालन करना चाहिए। तो फिर यह देखना होगा कि जिस नियम की बात राबड़ी देवी और राजद के लोग कर रहे हैं क्या उसके तहत कोई बीच का रास्ता निकाला जा सकता है? राजनीतिक हमले के बारे में अगर बात की जाए तो सम्राट चौधरी पर भी यह आरोप लग सकता है कि उन्होंने अब तक चले आ रहे मुख्यमंत्री आवास का दायरा बढ़ा लिया और जो मकान पूर्व मुख्यमंत्री के लिए रहता था उसे भी अपने आवास में शामिल कर लिया तो क्या यह सही कदम है?
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