बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। स्पेन ने पिछले बार की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप जीत लिया। जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने और एक के लापता होने के बाद ईरान पर हमले तेज हो गए हैं। सरकार वंदे मातरम को लेकर एक कानून लाने जा रही है जिसमें 3 साल तक की सजा हो सकती है।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार फुटबॉल विश्व कप 2026 के फाइनल में अर्जेंटीना और स्पेन के बीच मुकाबला काफी रोमांचक रहा। हालांकि, स्पेन ने पिछले बार की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से पराजित कर दिया। 106वें मिनट में स्पेन के फेरेन टॉरेस ने गोल दागकर टीम को दूसरी बार विश्व विजेजा बना दिया। इससे पहले 2010 में स्पेन विश्व चैंपियन बना था। इससे साथ ही लगातार दूसरी बार विश्व बिजेता बनने का अर्जेंटीना का सपना टूट गया। अर्जेटीना अब तक तीन बार विश्व चैंपियन रह चुका है। न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए इस मैच में 90 मिनट की पूरी अवधि तक मुकाबला बराबरी पर रहा। इसके बाद 9 मिनट का इंजरी टाइम भी हुआ। लेकिन, कोई टीम गोल नहीं कर सकीं। फिर मैच एक्स्ट्रा टाइम में पहुंचा। दूसरे हाफ की शुरुआत में स्पेन नै लगातार आक्रमण किए। लामिन यमाल, रुइज और मिकेल ओयारजाबाल की शानदार पासिंग ने अर्जेंटीना की डिफेंस पर दबाव बनाया।
जॉर्डन में सैनिकों की मौत पर भड़का अमेरिका
जागरण के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज होता जा रहा हैं। दोनों पक्षों के बीच लड़ाई दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर गई है। जार्डन में दो अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने और एक के लापता होने के बाद ईरान पर हमले तेज हो गए हैं। यूएस सेंटकाम ने बताया कि रविवार को ईरान के तटीय क्षेत्रों में सर्विलांस और एयर डिफेंस फैसिलिटीज के साथ-साथ आइआरजीसी ठिकानों पर भी हमले “किए गए। ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने देश के दक्षिण में इराक सीमा के करीब दारखोविन में एक निर्माणाधीन परमाणु संयंत्र पर हमला किया। इन हमलों के जवाब में ईरान ने कुवैत के अल अदीरी कैंप और अली अल सलेम अमेरिकी एयर बेस पर ड्रोन से हमले किए। कुवैत ने ईरानी हमलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया है। बहरीन में भी ईरानी हमलों को विफल करने के दावे किए गए हैं। जार्डन ने तीन ईरानी मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया। आइआरजीसी ने दावा किया कि अहवाज इलाके में दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए गए।
वंदे मातरम के मामले में 3 साल तक की सजा का प्रस्ताव
जागरण के अनुसार सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को हमेशा अपने राजनीतिक एजेंडे में लेकर चली भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम-1971’ में महत्वपूर्ण बदलाव करने की तैयारी में है। संशोधित विधेयक में राष्ट्र गीत बंदे मातरम को भी शामिल किया गया है, जिसका अपमान करने पर तीन वर्ष की सजा या जुर्माना या दोनों का प्रविधान होगा। देश के राजनीतिक माहौल को गर्माते रहे राष्ट्र गीत से संबंधित इस विधेयक को गृह मंत्री अमित शाह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ही राज्यसभा में पेश करने वाले हैं। इस मुद्दे पर अधिकतर विपक्षी दलों का जो रुख रहा है, उससे चर्चा में टकराव और गर्म बहस के पूरे आसार हैं। राष्ट्र गीत वंदे मातरम की 150वीं जयंती पर वर्षभर के कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाने वाली मोदी सरकार ने इसे लेकर महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं।
टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने पर हंगामा
प्रभात ख़बर के अनुसार संसद के मॉनसून सत्र से ठीक एक दिन पहले रविवार को सरकार द्वारा बुलाई गयी सर्वदलीय बैठक बेहद हंगामेदार रही, जिसमें 40 दलों के नेता शामिल हुए. बैठक की शुरुआत में ही टीएमसी के 20 बागी सांसदों को ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ के रूप में आमंत्रित किए जाने पर ‘इंडिया’ गठबंधन के दलों ने कड़ी आपत्ति जताई. विपक्ष का तर्क था कि जब लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष इन सांसदों की योग्यता पर अंतिम फैसला लंबित है, तो उन्हें बुलाना नियमों के खिलाफ है. इसके विरोध में समूचे विपक्ष ने बैठक से प्रतीकात्मक वॉकआउट कर दिया. हालांकि कुछ देर बाद विपक्षी नेता वापस लौट आए.
जम्मू में बाढ़ का कहर, अमरनाथ यात्रा रुकी
हिन्दुस्तान के अनुसार देश के 60 से 70 फीसदी हिस्से में बादलों की मोटी परत छाई है। इससे अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। उधर, जम्मू के पुंछ राजौरी में भूस्खलन और बाढ़ में 12 मौतें हो गई, जबकि कई अन्य लापता हैं। 23 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी के बाद अमरनाथ यात्रा, माता वैष्णो देवी की यात्राएं अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई हैं। अमरनाथ यात्रा को पहलगाम और बालटाल, दोनों मागों से रोक दिया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून के और अधिक सक्रिय होने की संभावना है। उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में देश के बड़े हिस्से पर मानसूनी बादलों का डेरा नजर आ रहा है। इन तस्वीरों में पंजाब से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक बादलों की लंबी पट्टी दिखाई दे रही है।
कुछ और सुर्खियां:
- भागलपुर के मेडिकल कॉलेज में भर्ती 66 वर्षीय मरीज कोरोना पॉजिटिव
- जम्मू कश्मीर में बादल फटने से 12 लोगों की मौत, कई लापता
- राजधानी पटना समेत बिहार के 14 जिलों में भारी से बेहद भारी वर्षा होने का पूर्वानुमान
- बिहार विधान मंडल का मानसून सत्र आज से, 24 जुलाई तक चलेगा
- कोलकाता के नेशनल म्यूजियम में भारत के पहले ‘म्यूजियम आफ वर्ड्स’ का उद्घाटन
- बिहार में कॉन्ट्रैक्ट पर 2532 पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए इंटरव्यू आज से, 8034 अभ्यर्थी होंगे शामिल
- बिहार का बड़ा भू माफिया संतोष डॉन पटना से गिरफ्तार
अनछपी: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इन दोनों नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की घोषणा लगातार कर रहे हैं। उनकी ताजा घोषणा के अनुसार अब बेगूसराय में कवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इसके पहले वह फिजिक्स और एआई के नाम पर भी विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा कर चुके हैं। बेगूसराय के विश्वविद्यालय के बारे में उनका कहना है कि यह उच्च शिक्षा, रिसर्च, साहित्य और भारतीय चिंतन का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। एक तरफ नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की घोषणा है तो दूसरी तरफ विश्वविद्यालयों की बदहाली सबके सामने है। समस्या यह है कि सरकार से पहले से स्थापित विश्वविद्यालयों के बारे में कोई सवाल नहीं पूछा जा रहा है और वह दनादन नई घोषणाएं करने में लगी हुई है। इस समय बिहार के पुराने विश्वविद्यालयों की सबसे बड़ी उपलब्धि यह मानी जाती है कि वहां सेशन लेट नहीं है हालांकि इसमें भी सारे विश्वविद्यालय कामयाब नहीं है। नैक ग्रेडिंग के बारे में बहुत सारे सवाल किए जाते हैं लेकिन अफसोस की बात यह है कि बिहार का एक भी सरकारी (राज्य) विश्वविद्यालय में की ए ग्रेडिंग में नहीं है। अक्सर विश्वविद्यालय में परीक्षाओं में कराचार की शिकायत आम है और इस पर किसी को कोई ताज्जुब भी नहीं होता। यहां शिक्षकों की और दूसरे कर्मचारियों की भारी कमी है लेकिन इस सवाल पर सरकार को घेरने वाला कोई सामने नजर नहीं आता। इसलिए छात्रों और अभिभावकों के लिए नए विश्वविद्यालयों की घोषणा राजनीतिक नारों से ज्यादा अहमियत नहीं रखती। इसलिए महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या बिहार के विश्वविद्यालयों में क्वालिटी एजुकेशन मिलेगा या सिर्फ घोषणाओं का दौर जारी रहेगा?
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