बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में हर साल 3000 करोड़ रुपए की नकली दवाएं बिकती हैं और इस मामले में पटना और गया पहले दो स्थानों पर हैं। पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट से पता चला है कि बिहार में हर दिन 40 बच्चे गुम होते हैं जिनमें 60% लड़कियां हैं। (साथ लगी तस्वीर एआई जेनरेटेड है।)
और, जानिएगा कि त्योहारों के इस सीजन में आप मिठाई पर जिसे चांदी का वर्क समझ रहे हैं वह अल्युमिनियम फॉयल तो नहीं?
पहली ख़बर
प्रभात खबर के अनुसार बिहार में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाला नकली दवाओं का काला कारोबार खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. राज्य में हर साल तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की नकली और अमानक दवाएं बेची जा रही हैं. नकली दवाओं की खपत के मामले में राजधानी पटना पहले स्थान पर है, जबकि गयाजी दूसरे नंबर पर है. इसके अलावा मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा और पूर्णिया समेत सीमावर्ती जिलों में इसका नेटवर्क तेजी से पांव पसार चुका है. दवा कारोबारियों और ड्रग कंट्रोलर के अनुसार, बिहार में सबसे अधिक खपत एंटीबायोटिक दवाओं की होती है, और यही वजह है कि जालसाज सबसे अधिक इसी ग्रुप की नकली दवाएं बाजार में उतार रहे हैं. मरीज डॉक्टर की पर्ची देखकर दुकान से दवा खरीदता है, लेकिन असर न होने पर बीमारी को कसूरवार मानता है, जबकि असली वजह दवा का नकली या घटिया होना है.
50 हजार दवा दुकानों पर नजर रखने को महज 150 अफसर
बिहार में दवाओं के इतने बड़े नेटवर्क के मुकाबले निगरानी का ढांचा बेहद कमजोर है। बिहार में करीब 35 हजार रिटेल (खुदरा) दवा विक्रेता और 15 हजार से अधिक थोक (होलसेल) विक्रेता पंजीकृत हैं। इन 50 हजार दुकानों की जांच और दवाओं के सैंपल लेने की जिम्मेदारी ड्रग कंट्रोलर के अधीन महज 150 अफसरों पर है. डॉक्टरों के मुताबिक, घटिया व नकली एंटीबायोटिक दवाएं लेने से शरीर में बैक्टीरिया पर दवा का असर खत्म हो जाता है. इससे “एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस” (एएमआर) का खतरा बढ़ रहा है, जिससे सामान्य बीमारियों का इलाज भी विफल हो रहा है.
बिहार में हर दिन गुम होते हैं 40 बच्चे
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में हर साल गुमशुदा होने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या 60 फीसदी से अधिक है। बीते साल राज्य में हर दिन औसतन 40 बच्चे गायब हुए। वर्ष 2025 में बच्चों की गुमशुदगी के दर्ज 14,699 मामलों में करीब 8600 जबकि 2026 में जून तक दर्ज 10,577 मामलों में लड़कियों की संख्या लगभग 6700 तक रही है। हालांकि, मिशन वात्सल्य पोर्टल की निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद इनकी बरामदगी की संख्या बढ़ी है। पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, 2025 में 7772 बच्चे बरामद हुए, जिनमें लड़के 1,205 जबकि लड़कियां 6,567 रहीं। इसी तरह, 2026 में जून तक बरामद 5,232 बच्चों में 868 लड़के एवं 4,364 लडकियां शामिल रहीं। गरीब परिवार की किशोरियों की नौकरी और शादी के नाम पर दूसरे राज्यों में तस्करी से गुमशुदगी की घटनाएं सबसे अधिक हुई हैं। कई मामलों में उनको घरेलू काम, बंधुआ मजदूरी, जबरन विवाह, यौन शोषण, भिक्षावृत्ति आदि में धकेले जाने की बात भी सामने आयी है। 24 घंटे तक लापता बच्चों के मामले में एफआईआर दर्ज करने की अनिवार्यता से गुमशुदगी के आंकड़े बढ़े हैं। हालांकि, पुलिस पर गोल्डन ऑवर में कार्रवाई करने के आरोप लगते हैं।
गंडक के उफान से उत्तर बिहार में संकट
नेपाल के तराई क्षेत्रों और सीमावर्ती जिलों में मूसलाधार बारिश से उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। नेपाल के देवघाट गेज स्टेशन से रिकॉर्ड 6.52 लाख क्यूसेक से अधिक पानी की डिस्चार्ज दर्ज हुआ। इससे पहले 27 अगस्त 1999 को 5.26 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा था। नेपाल से पानी छोड़ने के बाद वाल्मीकिनगर बराज से रविवार रात 9 बजे गंडक नदी में 5.15 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह इस साल का सबसे बड़ा डिस्चार्ज दर्ज हुआ। इधर हिंदुस्तान में खबर दी है कि बाघ शहर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। पश्चिम चंपारण के 10 प्रखंडों के द्वारा और निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी आ गया है। इसके अलावा बागमती और कोसी का जलस्तर बढ़ने से पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, सुपौल और सहरसा के कई गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
ईरान ने अमेरिकी समुद्री वाहन जब्त किया
हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान ने होर्मुज में एक और अमेरिकी समुद्री वाहन (अंडरवाटर व्हेहिकल) को जब्त कर लिया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रविवार को यह दावा किया। इससे क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया। रिवोल्यूशनरी गाड्र्ड्स (आईआरजीसी) ने होर्मुज में एक अमेरिकी ‘रेमस 600’ को जब्त कर लिया। वह समुद्र के नीचे चलने वाला मानवरहित वाहन है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना के अनुसार अमेरिकी वाहन जासूसी गतिविधियों में शामिल था। ईरान ने दावा किया कि उसने खुफिया जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं का इस्तेमाल कर इस वाहन को अपने कब्जे में लिया। इसे आई आरजीसी ने विशेषज्ञ सैन्य तकनीशियनों को सौंप दिया है, जो इसके सिस्टम की जांच कर उसमें मौजूद डाटा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
मिठाई पर लगा वर्क चांदी का है या अल्मुनियम फॉयल?
प्रभात खबर के अनुसार त्योहारी सीजन के आते ही बाजार में खाने-पीने की चीजों में मिलावट कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले गिरोह सक्रिय हो गये हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न जिलों से लिये गये खाद्य पदार्थों के नमूनों की प्रयोगशाला जांच में 11 सैंपल असुरक्षित, अमानक व निर्धारित मानकों के विपरीत (फेल) पाये गये हैं. इसकी गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य के सचिव कुमार रवि ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत सभी 11 मामलों में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है. मुजफ्फरपुर में बर्फी पर लगा वर्क चांदी का नहीं बल्कि अल्मुनियम फॉयल की परत निकली। यह सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है और इसे पहचानना जरूरी है। इसे पहचानने का तरीका यह है कि वर्क को छुट्टियों से रगड़ने पर यह चमड़े पर मिल जाता है। अगर यह अलमुनियम का हुआ तो गोली जैसा बन जाएगा और घुलेगा नहीं। इसी तरह हल्दी की मिलावट को पकड़ने का तरीका यह है कि अगर उसे हाथ पर रगड़ा जाए तो उसका रंग आसानी से छूट जाता है। हल्दी में केमिकल मिला होगा तो उसे छुड़ाने में वक्त लगेगा और उसकी महक भी अलग होगी।
कुछ और सुर्खियां:
- आज से 30 सितंबर तक प्रस्तावित बैंकों की हड़ताल फिलहाल टल गई
- अंबाला में अवैध कमर्शियल बिल्डिंग गिरी 25 मजदूर दबे, 6 की मौत
- बांका जिले के मंदार पर्वत इलाके में युवती से छेड़खानी के मामले में दो नाबालिक समेत पांच गिरफ्तार
- पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी,फगवाड़ा में छात्रा से दुष्कर्म के आरोप के बाद हिंसा भड़की, दिल्ली-अमृतसर हाईवे जाम कई पुलिसकर्मी घायल
- कॉकरोच जनता पार्टी के सहसंयोजक आशुतोष रांका को असम पुलिस ने हिरासत में लिया, देर रात छोड़ा
अनछपी: भारत में पति-पत्नी के रिश्तों के चलने या टूटने की प्रक्रिया कितनी अमानवीय और अतार्किक है इसके उदाहरण तो हमें मिलते ही रहते हैं लेकिन इस समस्या के हल के लिए कोई कोशिश सामने नहीं आती है। इसकी वजह से क्या-क्या परेशानी हो सकती है, इसका एक उदाहरण हमें आज के अखबारों में मिला जिसमें यह बताया गया कि पटना हाईकोर्ट ने 13 साल से अलग रह रहे पति से तलाक की पत्नी की अर्जी को मंजूरी दी। इतने लंबे अरसे तक तलाक न होने की वजह से पति और पत्नी स्वतंत्र रूप से दूसरी शादी भी नहीं कर सकते थे तो जिस वजह से पत्नी को इतने लंबे अरसे के बाद ताला के की मंजूरी मिल पाई, उसे इंसाफ कहा जा सकता है क्या? ऐसा नहीं है कि यह 13 वर्ष पूरी तरह अदालत में ही गुजरे लेकिन अदालत तक पहुंचने और फिर फैमिली कोर्ट से हाई कोर्ट तक मामला पहुंचने और फिर इंसाफ मिलने में इतना वक्त तो लगा। इस बात का सामाजिक अध्ययन होना चाहिए कि ऐसे मामलों की वजह से स्त्री पुरुष के रिश्तों में कितनी खटास आई है और व्यक्तिगत जीवन कितना कष्टदायक होता है। इस तलाक की खबर में बताया गया है कि शादी 2007 में हुई और पत्नी का कहना है कि पति एक साल के बाद से ही अलग रहने लगे और उन्हें मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी। इससे पहले इस मामले में 15 जून 2024 को परिवार न्यायालय ने यह कहकर तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी कि इसके लिए पूरे सबूत नहीं हैं। अब 2 साल इस फैसले तक पहुंचने में लग गए कि लंबे अरसे तक अलग रहना पति का साथ नहीं रहना पत्नी के साथ क्रूरता है। यह अच्छी बात है कि पटना हाई कोर्ट ने यह माना की 13 साल तक पत्नी से अलग रखना पति की क्रूरता है लेकिन सवाल यह है कि अलग रहने की कितनी अवधि को क्रूरता माना जाए? अदालतों में फैसला करने वाले जज भी आम इंसान होते हैं और दो दूसरे इंसानों के बीच के रिश्तों को तय करने यह जिम्मेदार भी, तो समाज को यह सोचना पड़ेगा कि आखिर इसमें कितना वक्त लगना चाहिए? एक पुरानी कहावत है कि देर से किया गया इंसाफ दरअसल नाइंसाफी है।
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