बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी के नहीं जाने की बात कहे जाने पर यह कह दिया कि “मोदी का बाप भी जाएगा” तो भाजपा भड़क गई। जदयू से निकाले गए विधायक अनंत सिंह ने कहा-जदयू नीतीश जी की पार्टी थी। नीतीश जी खत्म, जदयू खत्म।
और जानिएगा कि चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से किया इनकार, कांग्रेस बोली जानकारी छिपाने की कोशिश।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे रविवार को पटना में श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति विवादित टिप्पणी कर विवादों में घिर गए। संबोधन के दौरान भीड़ से एक व्यक्ति के टोकने पर खरगे ने आपा खो दिया। कहा- ‘मोदी क्या, मोदी का बाप भी जाएगा।’ प्रधानमंत्री के पिता के प्रति ऐसी टिप्पणी पर भड़की भाजपा ने कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया। पार्टी ने खरगे और राहुल गांधी से तुरंत माफी की मांग की है।
बात कैसे बिगड़ी?
पटना के बापू सभागार में कांग्रेस की ओर से बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के 139वीं जयंती समारोह का आयोजन किया गया था, जिसे बतौर मुख्य अतिथि मल्लिकार्जुन खरगे संबोधित कर रहे थे। एसआईआर, महगाई तथा बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर खरगे केंद्र और प्रधानमंत्री पर हमलावर थे। उन्होंने कहा कि वोट चोरी कर सरकारें चोरी कर ली गई हैं। इन्हें हम जेल भेजने का काम करेंगे। इन्हें हटना ही होगा, तभी चीजें बदलेंगी। इस दौरान सभागार में मौजूद एक विक्षुब्ध कांग्रेस कार्यकर्ता ने खड़े होकर ऊंची आवाज में कहा-‘कांग्रेस को मजबूत कीजिए, वैसाखी से कांग्रेस को हटाइए, नहीं तो मोदी नहीं हटेंगे।’ इस पर, खरगे ने कहा- “मोदी क्या, मोदी का बाप भी जाएगा।” उन्होंने उत्तेजित स्वर में दो बार यह वाक्य बोला। उधर, कांग्रेस के कई कार्यकर्ता उस व्यक्ति की ओर लपके। उसे बैठाया और फिर हॉल से बाहर कर दिया। वायरल वीडियो में दिख रहा कि कुछ लोग उसे धक्का भी दे रहे हैं। सभागार में कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। हालांकि, बाद में खरगे ने अपना संबोधन जारी रखा। उन्होंने बिहार, बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र में हुए विस चुनाव को रद्द करने तथा यहां की सरकारों को बर्खास्त करने की मांग की।
अनंत बोले- नीतीश खत्म,जदयू खत्म
भास्कर के अनुसार जदयू से निकाले गए विधायक अनंत सिंह फट पड़े। कई मर्तबा अश्लील शब्दों तक का इस्तेमाल किया। कहा-जदयू नीतीश जी की पार्टी थी। नीतीश जी खत्म, जदयू खत्म। उनको तो दिन-रात भी नहीं बुझा रहा। उनके ठीक रहते मुझे कौन निकाल सकता था? अब यह की पार्टी है। ककोड़ा-बिच्छा मालिक बन गया। 10 सीट भी नहीं आएगा। अनंत, रविवार को मीडिया से मुखातिब थे। अनंत ने कहा कि मैंने एनडीए सरकार बचाने के लिए तेजस्वी यादव से गद्दारी की। नीतीश जी के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानी दी। नीरजा (नीरज कुमार) 18 साल खाली गरियाया। उसको कुछ नहीं किया। तब पार्टी की आंख में… घुसल था?
ड्रग्स तस्करी के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़, 18 गिरफ्तार
जागरण के अनुसार भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमा के बीच स्थित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी के मार्ग ‘डेथ ट्राइंगल कारिडोर’ में सक्रिय तस्करों के एक बड़े नेटवर्क पर भारतीय एजेंसियों ने कड़ा प्रहार किया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के नेतृत्व में 38 टीमों ने असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान 100 करोड़ रुपये के हवाला कारोबार का राजफाश हुआ। 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया और 17.82 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं। 500 डेटोनेटर तथा 12 लाख रुपये नकद जब्त किए गए। 18 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।
जामिया में स्टूडेंट्स यूनियन चुनाव की मांग पर आंदोलन
जागरण के अनुसार जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन के दौरान रविवार को गालिब स्टैच्यू लान में साढ़े छह बजे सुरक्षा गार्ड की वर्दी में एक संदिग्ध युक्क घुस आया और वह ‘फ्री कश्मीर’ के नारे लगाने लगा। धरना स्थल पर पहले से मौजूद छात्रों ने उसे दबोच कर पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं दूसरी ओर, परिसर के बाहर गेट नंबर सात पर आंदोलन के समर्थन में नारेबाजी और हंगामा कर रहे करीब छह प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने मौके से पकड़कर हटा दिया। पुलिस हिरासत में लिए गए संदिग्ध युवक ने खुद को गाजियाबाद का डिलीवरी बाय बताया है। बता दें कि प्रशासन द्वारा ‘जेएमआइएसयू संविधान मसौदा समिति’ के गठन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा के भरोसे के बावजूद आंदोलनकारी छात्र निश्चित समय सीमा में चुनाव कराने के लिखित आश्वासन पर अड़े हुए हैं।
जस्टिस कौल ने बताया- जजों की नियुक्ति से पहले सरकार से राय लेते थे चंद्रचूड़
भास्कर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया डीवाई चंद्रचूड को लेकर नई बात बताई है। उन्होंने कहा कि जजों की नियुक्ति के मामले में चंद्रचूड सरकार के प्रति नरम थे। अपनी आने वाली आत्मकथा ‘विदाउट फियर और फेवर’ में कौल ने बताया कि 6 जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की बैठक थी। पहले से 5 नामों पर सहमति थी। पर बैठक से ठीक पहले चंद्रचूड ने छठा नाम सामने रखा पूर्ण ग्राम कॉल ने विरोध किया पूर्ण राम इस पर चंद्रचूड़ ने उनसे पूछा कि क्या सरकार की राय जानने के लिए फोन करना चाहिए। इधर, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठे हैं। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पूर्व सीजेआई चंद्रचूड का बचाव किया।
चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से किया इनकार
प्रभात खबर के अनुसार निर्वाचन आयोग ने एसआइआर के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां पहचानने के लिए इस्तेमाल किये गये सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से इनकार कर दिया है. आयोग ने आरटीआइ आवेदन के जवाब में कहा कि यह जानकारी व्यापारिक गोपनीयता व बौद्धिक संपदा से जुड़ी है. इसे आरटीआइ के तहत सार्वजनिक नहीं कर सकते. आयोग ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां पहचानने के लिए एआइ का इस्तेमाल हुआ था या नहीं? कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने निर्वाचन आयोग पर विवादित इसीआइएनइटी सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी छिपाने का आरोप लगाया. दावा किया कि वह बार-बार यह जानकारी देने से इनकार कर रहा है, क्योंकि इससे एसआइआर में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी की सच्चाई सामने आ जायेगी.
कुछ और सुर्खियां:
- कुशल युवा प्रोग्राम (केवाईपी) बचाओ आंदोलन के 17वें दिन भूख हड़ताल पर बैठे संचालक की तबीयत बिगड़ी
- इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला-जाति सूचक गली के बिना एससी ₹/एसटी एक्ट में केस नहीं होगा
- बेगूसराय में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार करने के लिए खदेड़ा तो वह नदी में कूद पड़ा, डूबने से मौत
- वैशाली के राघोपुर नाव हादसा में मृतकों के दुष्कर्म के दौरान भाजपा और जदयू कार्यकर्ता आपस में भिड़े
अनछपी: आरएसएस भी कैसे कैसे कार्यक्रम करते रहता है और अपने हिसाब से बातों को तय करता है। रविवार को आरएसएस के प्रमुख या कथित सर संघचालक मोहन भागवत जबलपुर के श्रीराम इंजीनियरिंग कालेज में आयोजित संघ के “महाकोशल प्रांत के युवा शिविर के जिज्ञासा समाधान सत्र” में सवालों के जवाब दिए। युवाओं की जिज्ञासाओं में जनसंख्या असंतुलन, राम मंदिर, जम्मू-कश्मीर और संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े विषय शामिल रहे। भागवत ने इन भी सवालों के जवाब देकर संघ के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। जागरण की खबर में बताया गया है कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के प्रति संघ के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि जो भारत को अपना मानता है, उसकी प्रगति में सहभागी बनता है और देश की उन्नति से खुश होता है, संघ उसके साथ भारतीय के रूप में व्यवहार करता है। उनके अनुसार, ऐसा इसलिए, क्योंकि संघ धर्म और प्रांत के आधार पर भेदभाव को नहीं, देश के प्रति व्यक्ति के भाव और व्यवहार को को महत्वपूर्ण मानता है। सवाल यह है कि भारतीय कौन है, का सवाल केवल मुसलमानों के लिए क्यों? ऐसा सवाल करने की इजाज़त क्यों दी गई है? ऐसे सवाल के जवाब में मोहन भागवत ने यह क्यों नहीं कहा कि इसे किसी एक समुदाय का सवाल नहीं बनाना चाहिए। सवाल यह है कि जो व्यक्ति वंशानुगत रूप से रह रहा और भारत में जन्म ले रहा है और पल-बढ़ रहा है उसके लिए किसी को भी यह तय करने का अधिकार नहीं है कि वह भारतीय है कि नहीं। अलबत्ता मोहन भागवत की बात उनके लिए सही हो सकती है जो विदेशों में पैदा हुए लेकिन भारत को अपना मानते हैं और इसकी प्रगति में सहभागी बनते हैं। ऐसे में यह सवाल करना जरूरी है कि आखिर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जब भारत को अपना मान लिया और हमेशा के लिए यहीं बस गई तो उनकी नागरिकता पर बार-बार सवाल क्यों उठाया जाता है? दिलचस्प बात यह है कि ऐसी कोई व्यक्ति जो विदेशी मूल की हैं और जिनकी भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता से शादी हुई है, उनके बारे में ऐसा कोई सवाल नहीं उठाया जाता। इससे यह बात साफ है कि दरअसल भारतीय कौन है, का सवाल अपने राजनीतिक हित साधने के लिए है, राष्ट्र प्रेम के लिए नहीं।
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