बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। सीवान जिले के जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट से सात लोगों के चिथड़े उड़ गए, हालांकि जिला प्रशासन ने फिलहाल तीन लोगों के मरने की पुष्टि की है। आईटीबीपी के डायरेक्टर जनरल ने कहा है कि भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई स्थानों पर तनाव की स्थिति अभी जारी है।
और, जानिएगा कि बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने 2 करोड़ से ज्यादा की जो दो लग्जरी बसें खरीदी थीं, उनमें एक महीने में कितनी बुकिंग हुई।
पहली ख़बर
भास्कर के अनुसार सीवान के आलमपुर गांव में शुक्रवार की देर शाम करीब पांच बजे अवैध पटाखा निर्माण के दौरान भीषण विस्फोट हो गया। बारूद के भारी स्टॉक में हुए धमाके से दो मंजिला पक्का मकान ढह गया। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। इनमें एक ही परिवार के चार सदस्य, पड़ोसी का बेटा और दो मजदूर शामिल हैं। मृतकों में घर के मुखिया अमीरुद्दीन (62), उनकी तीन पोतियां मुस्कान, खुशबू, इशरत, पड़ोसी फिरोज आलम का बेटा अरशद (8) और दो मजदूर शामिल हैं। परिवार की बहू और दो अन्य पोतियां गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसपी भारत सोनी ने बताया कि थाना स्तर पर लापरवाही के आरोप में जामो बाजार थानाध्यक्ष और स्थानीय चौकीदार चंद्रिका मांझी को निलंबित कर दिया गया है। जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। विस्फोट इतना भयावह था कि घर से करीब 200 मीटर की दूरी तक शवों के टुकड़े गिरे पड़े थे।
15 साल पहले धमाके में बेटे की मौत, कहा था-अब्बा यह काम छोड़ दो
आलमपुर में पटाखे का अवैध कारोबार दो दशकों से चल रहा था। अमीरूद्दीन के घर में 15 साल पहले भी विस्फोट हुआ था। तब उसके बड़े बेटे की मौत हो गई थी। मरते वक्त बेटे ने कहा था कि अब्बा, यह धंधा ठीक नहीं है। इसे छोड़ दीजिए। कुछ और करिए। लेकिन अमीरूद्दीन ने उसकी बात नहीं मानी। दो साल पहले उसके दूसरे बेटे की भी प्रेम प्रसंग में हत्या हो गई थी। दोनों बेटों को खोने के बाद भी वह बहू और पोतियों के सहारे पटाखे बनाता रहा। आलमपुर के कई घरों में यह अवैध कारोबार चल रहा था। इसके बावजूद पुलिस और अधिकारियों ने इसे रोकने पर ध्यान नहीं दिया। अब भीषण विस्फोट में पूरा परिवार तबाह हो गया।
अरुणाचल सीमा पर चीन के साथ जारी है ‘टकराव’
जागरण के अनुसार भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया कि अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई स्थानों पर तनाव की स्थिति अभी जारी है। यह जुलाई से चल रहे तनाव की पहली आधिकारिक पुष्टि मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने इस बारे में स्थिति साफ नहीं की है, लेकिन आइटीबीपी महानिदेशक के दावे को खारिज भी नहीं किया है। उधर, रक्षा मंत्रालय ने पूरे प्रकरण पर चुप्पी साध रखी है।
कांग्रेस का इल्जाम: सच्चाई छिपा रही केंद्र सरकार
कांग्रेस ने अरुणाचल में सीमा पर कई इलाकों में चीनी सेना से ‘टकराव’ जारी रहने के आइटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान को आधार बनाते हुए सरकार पर देश से सच्चाई छिपाने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें विपक्ष पर हमला करने के बजाय सीमा के हालात देश के सामने रखते हुए संसद को भी विश्वास में लेना चाहिए। शत्रुजीत कपूर का वीडियो शुक्रवार को एक्स पर साझा करते हुए खरगे ने कहा कि चीन को बहुत क्लीन चिट दी जा चुकी है।
पटना जंक्शन से मां-बाप के बगल में सो रहा बच्चा दिन दहाड़े चुरा लिया गया
जागरण के अनुसार पटना जंक्शन पर एक बार फिर मासूम की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। दशहरा मेला घूमने बेगूसराय से पटना आए दंपती की एक साल का बेटा शुक्रवार को स्टेशन परिसर से लापता हो गया। परिवार गेट संख्या तीन के पास टिकट घर के नजदीक बैठकर ट्रेन का इंतजार कर रहा था। सफर की थकान के बीच मां-बाप और परिवार के अन्य सदस्यों की आंख लग गई। जब दोपहर करीब एक से डेढ़ बजे के बीच नींद खुली, तो एक साल का बेटा गायब था। कुछ देर पहले तक परिवार के बीच मौजूद मासूम अचानक कहां चला गया, किसी को कुछ पता नहीं चला। बच्चे की तलाश में परिवार ने आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। बेटे के लापता होने से मां का रो-रोकर बुरा हाल है। बेगूसराय निवासी सुधीर कुमार दो दिन पहले पत्नी और दो बच्चों के साथ पटना में दशहरा, मेला घूमने आए थे।
विधान परिषद की शिक्षक निर्वाचन सीट पर ग्रेजुएट सीट से ज्यादा वोटिंग
प्रभात खबर के अनुसार विधान परिषद की स्नातक की चार और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर शुक्रवार को शाम चार मतदान संपन्न हो गया. पटना, सारण, तिरहुत और दरभंगा स्नातक सीट के लिए 474 मतदान केंद्रों पर कुल 43.87% मतदाताओं ने वोट डाले. वहीं, शिक्षक निर्वाचन की चार सीटों पटना, तिरहुत, सारण और दरभंगा के 335 मतदान केंद्रों पर 74.55% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
आंध्र प्रदेश में नामांकन के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों पर हमले
आंध्र प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बावजूद निकाय चुनाव के लिए नामांकन के दौरान हिंसा हुई। शुक्रवार को 13 जिलों में कम से कम 31 जगह पथराव, विपक्ष के उम्मीदवारों पर हमले, आगजनी और नामांकन पत्र छीनने, फाड़ने या नष्ट करने की घटनाएं सामने आई हैं। चिलकलुरिपेट में नजरबंद पूर्व मंत्री व वाईएसआरसीपी नेता विददला रजनी को एक एसआई ने उम्मीदवार से मिलने नहीं दिया। रजनी ने बाहर निकलने की कोशिश की तो उन्हें धक्कामुक्की करके गिरा दिया।
सरकार की खरीदी 2 करोड़ से ज्यादा की लग्जरी बसों एक महीने में कोई बुकिंग नहीं
भास्कर के अनुसार पर्यटन निगम द्वारा बिना किसी जमीनी सर्वे और ठोस कार्ययोजना के 2.18 करोड़ की भारी-भरकम लागत से खरीदी गई दो लग्जरी कैरावैन बसें अब महकमे के लिए सफेद हाथी साबित हो रही हैं। आलम यह है कि पिछले एक महीने से इन आलीशान बसों के पहिए पूरी तरह थमे हैं और निगम को एक भी बुकिंग नहीं मिली है। अत्यधिक किराया और महज 8 सीटों की सीमित क्षमता के कारण पर्यटक इसे बुक कराने से कतरा रहे हैं। बीते 270 दिनों में ये बसें कुल मिलाकर महज 50 दिन ही चल सकी हैं। इससे निगम को लगभग 12 लाख रुपए का ही राजस्व मिल सका, जबकि इनके रखरखाव पर लगातार भारी खर्च हो रहा है।
कुछ और सुर्खियां:
- जियो प्लेटफॉर्म्स 1.39 करोड़ आवेदन के साथ विश्व का सबसे बड़ा आईपीओ बना
- शिक्षकों का ब्योरा नहीं देने के मामले में बिहार के 54 निजी आईटीआई में दाखिले पर रोक
- पटना से मुंबई और बेंगलुरु समेत 6 रूट पर कल से एक-एक नई फ्लाइट
- तिब्बत में रिक्टर स्केल पर 7 इंटेंसिटी वाले भूकंप से 16 लोगों की मौत
अनछपी: सीवान में पटाखे बनाने के लिए जो बारूद जमा किया गया था उसमें जिस तरह धमाका हुआ उससे यह बात तो साफ है कि उस घर में विस्फोटकों को स्टॉक करने में जिस एहतियात की ज़रूरत थी उसका बिल्कुल ख्याल नहीं रखा गया। लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि अगर उस घर में 15 साल पहले भी इस तरह का एक हादसा हुआ था और उसके बाद भी यह काम जारी था तो क्या उसके लिए लाइसेंस लिया गया था? अगर लाइसेंस लिया गया था तो लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई जरूरी है। अगर लाइसेंस नहीं लिया गया था तो फिर यह पता लगाना जरूरी है कि इस तरह पटाखे बनाने का काम रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? लाइसेंस के साथ अगर वहां पटाखे बन रहे थे या बिना लाइसेंस के, दोनों हालत में अब कार्रवाई सिर्फ पुलिस और अधिकारियों पर हो सकती है क्योंकि उस घर में अब कोई बचा नहीं है। ध्यान रहे कि इस हादसे में फैक्ट्री के घर वालों के अलावा दो मजदूरों के साथ कुल 7 लोगों की मौत हो गई। अब उन सभी जगह पर तुरंत छापेमारी की जानी चाहिए जहां पटाखे बनाए जा रहे हैं या बारूद स्टॉक किया जा रहा है और यह देखा जाना जरूरी है कि उनमें से कितने लोगों ने लाइसेंस लेने के लिए सभी शर्तें पूरी की हैं। कुछ ही दिनों में दिवाली आने वाली है और ऐसे में पटाखे की मांग बढ़ जाती है और उसी हिसाब से इसके बनाने में एहतियात की कमी भी हो जाती है। मुश्किल यह है कि हमारा समाज इस तरह के हाथों से सबक नहीं लेता और लोगों की जान जाती रहती हैं। इसके बाद सरकार और पुलिस कार्रवाई के नाम पर कुछ छापेमारी कर चुपचाप बैठ जाती है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या सीवान का पटाखा फैक्ट्री हादसा सरकार और समाज को ऐसा संदेश दे पाएगा कि आइंदा ऐसी घटना ना हो?
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