छपी-अनछपी: पहली बार $1 के लिए ₹90 से अधिक, देशभर में इंडिगो की 200 फ्लाइट्स कैंसिल
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भारतीय रुपया में जारी गिरावट के बाद पहली बार $1 के लिए ₹90 से अधिक का मूल्य लगा है। तकनीकी खराबी की वजह से पटना समेत पूरे देश में हवाई सेवा प्रभावित रही। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज भारत दौरे पर आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ के दौरान 12 नक्सलियों को ढेर करने का दावा किया गया है जबकि तीन पुलिस वाले भी मारे गए हैं।
और, जानिएगा कि महिला रोजगार और फ्री बिजली पर बिहार सरकार को 27000 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार रुपये में बुधवार को पांचवें दिन गिरावट आई और यह पहली बार 90 रुपये का स्तर तोड़ते हुए सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 19 पैसे टूटकर 90.15 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। जानकारों के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अनिश्चितता कायम रहने और डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट थामने के लिए रिजर्व बैंक के आगे न आने से स्थानीय मुद्रा रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ ई। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर निवेशकों की भारी बिकवाली के कारण भी यह गिरावट देखने को मिल रही है। बीते सात महीने में रुपये में छह रुपए से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है। इस दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले में करीब पांच फीसदी से अधिक तक टूट चुका है। जानकारों का कहना है कि रुपये का 90 के नीचे फिसलना बाजार के लिए एक ‘मनोवैज्ञानिक स्तर’ टूटने जैसा है। इससे रुपये पर और कमजोरी का खतरा बढ़ गया है।
इंडिगो की 200 उड़ानें रद्द
जागरण के अनुसार क्रू मेंबर्स की भारी कमी से जूझ रही देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को बुधवार को देशभर में अपनी करीब 200 उड़ानें रद करनी पड़ीं। यही नहीं, सैकड़ों फ्लाइटें घंटों देरी से उड़ीं। इससे हवाईअड्डों पर अफरातफरी का माहौल रहा। इस बीच, एयरलाइन ने परिचालन सामान्य करने के लिए अगले 48 घंटों के लिए कैलिब्रेटेड शेड्यूल एडजेस्टमेंट की घोषणा की है। इसके तहत फ्लाइटों का रद्दीकरण और पुनर्निर्धारण किया जाएगा। पिछले महीने नए रोस्टर नियम यानी फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) लागू होने के बाद से एयरलाइन को पायलटों की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। इंडिगो प्रतिदिन लगभग 2,300 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करती है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज पहुंचेंगे दिल्ली
भास्कर ने लिखा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिनी यात्रा पर गुरुवार को भारत पहुंचेंगे। यात्रा को लेकर आशान्वित पुतिन ने कहा है कि भारत के साथ दोस्ती और विभिन्न सेक्टरों में साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर पुतिन नई दिल्ली में 23वें भारत-रूस सालाना समिट में हिस्सा लेंगे। इस बीच सूत्रों के अनुसार भारत-रूस परंपरागत रक्षा सौदों के अलावा इस बार भारत से 10 लाख स्किल्ड वर्कर्स को रूस में रोजगार देने के लिए मोबिलिटी पैक्ट होने की संभावना है। साथ ही दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर डील हो सकती है। ये इसलिए भी अहम है कि भारत के अब तक जर्मनी और इजराइल के साथ ही मोबिलिटी पैक्ट हैं। सिविल न्यूक्लियर डील भी अमेरिका और फ्रांस के साथ ही है। इस डील से छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर की योजना को मजबूती मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में 12 नक्सली मारे गए
प्रभात खबर के अनुसार छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में बुधवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में कम से कम 12 नक्सली मारे गये. इस कार्रवाई में जिला रिजर्व गार्ड के तीन जवान भी शहीद हो गए, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं. अधिकारियों ने बताया कि बीजापुर-दंतेवाड़ा जिले की सीमा से लगे पश्चिम बस्तर डिवीजन इलाके में बुधवार सुबह मुठभेड़ शुरू हुई. डीआरजी, और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम गश्त के लिए रवाना हुई थी तभी उनकी नक्सलियों से भिड़ंत हो गई.
महिला रोजगार और फ्री बिजली पर बिहार सरकार 27000 करोड़ खर्च करेगी
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर 21 हजार करोड़ और बिजली उपभोक्ताओं को 125 यूनिट बिजली मुफ्त देने पर 6462 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 1886 करोड़ रुपये वृद्धों को पेंशन और 800 करोड़ स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड पर खर्च किये जाएंगे। समग्र शिक्षा के लिए 1548 करोड़ केन्द्रांश और 4197 करोड़ राज्यांश के रूप में खर्च होंगे। बुधवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में 91717.1135 करोड़ रुपये का द्वितीय अनुपूरक बजट पेश किया गया। यह इस वर्ष के बजट का करीब 30 फीसदी है। इस वर्ष का बजट 3 लाख 16 हजार 895 करोड़ रुपये है। सदन अनुपूरक बजट पर पांच दिसंबर को स्वीकृति प्रदान करेगा।
कुछ और सुर्खियां:
- रोहतास के कोचस में तेंदुए के हमले में 11 लोग जख्मी
- बिहार के सरकारी स्कूलों में 2026 में 75 दिन की छुट्टी रहेगी, इसमें 10 रविवार भी शामिल
- पीएमसीएच में डॉक्टर और तीमारदारों में भिड़ंत, इमरजेंसी सेवा ठप, जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल, आज बंद रह सकती है ओपीडी सेवा
- एडम मार्करम के शतक से दक्षिण अफ्रीका ने भारत से दूसरा वनडे क्रिकेट मैच जीता
- धनबाद जिले के केंदुआडीह, राजपूत बस्ती, मस्जिद मोहल्ला समेत कई जगह गैस रिसाव से एक महिला की मौत, कई बीमार
- नौकरी के बदले जमीन घोटाले के मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर फैसला आज संभव
- कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अकेले पंचायत चुनाव लड़ेगी, समाजवादी पार्टी से नहीं होगा समझौता
- सरकारी मीडिया प्रसार भारती के चेयरमैन नवनीत कुमार सहगल का इस्तीफा
अनछपी: सुप्रीम कोर्ट के एक बयान पर सुर्खी लगी है: कानून इंसानियत से बड़ा नहीं, गर्भवती को वापस लाएं। सुप्रीम कोर्ट ने जबरदस्ती बांग्लादेश निर्वासित की गई गर्भवती महिला सुनाली खातून और उसके आठ साल के बच्चे को मानवीय आधार पर भारत लाने की अनुमति दी है। कुछ माह पहले ही उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया था लेकिन अब अदालत ने कहा है कि कानून इंसानियत से बड़ा नहीं है। यह बात सुनने में अच्छी लग सकती है कि सुप्रीम कोर्ट ने मानवता को कानून के ऊपर रखा लेकिन इसकी हकीकत जानने के बाद मालूम होता है कि यह कोई एहसान नहीं बल्कि किसी का छीना हुआ अधिकार हो सकता है। इस महिला के पिता का आरोप है कि दिल्ली के रोहिणी इलाके के सेक्टर 26 में दो दशक से ज्यादा समय से दिहाड़ी मजदूर करने वाले परिवारों को पुलिस ने 18 जून को बांग्लादेशी होने के शक में उठाया था और बाद में 27 जून को बॉर्डर पार भेज दिया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारत वापस आने पर महिला को निगरानी में रखा जाएगा। इसके बाद, शीर्ष अदालत ने मानवीय आधार पर महिला और उसके बेटे को वापस भारत आने की इजाजत दे दी। पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को नाबालिग बच्चे का ध्यान रखने और राज्य के बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से गर्भवती महिला को हर मुमकिन चिकित्सा सहायता देने का निर्देश दिया, जिसमें नि:शुल्क प्रसव भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार की एक याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कलकत्ता हाईकोर्ट के 26 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने महिला और उसके बेटे को बांग्लादेश भेजे जाने के केंद्र सरकार के फैसले को गैर कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया था। दरअसल इस मामले में कोर्ट को इस बात पर भी विचार करना चाहिए था कि क्या उस महिला को सरकार ने गैर कानूनी तरीके से बांग्लादेश भेजा है। देश में जहां-जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार है वहां के बारे में यह आरोप लग रहा है कि वहां बांग्ला बोलने वाले भारतीय लोगों को बांग्लादेशी बताकर तंग किया जा रहा है और उन्हें सीमा पार धकेल दिया जा रहा है। ऐसे पीड़ित लोगों पर एहसान जताने के बदले सुप्रीम कोर्ट से यह उम्मीद थी कि वह उनके अधिकारों की बात करेगी और सरकार को इस गैर कानूनी हरकत के लिए फटकार लगाएगी। इससे पहले रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में जिस तरह सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि उनके लिए रेड कारपेट नहीं बिछाया जा सकता है वह दरअसल संवेदनहीनता की पराकाष्ठा लगती है। कोई किसी आम विदेशी नागरिक के लिए रेड कारपेट नहीं बिछा सकता लेकिन जब भारत विश्व गुरु होने का दावा करता है तो उसे विश्व के मानवीय मूल्यों का भी ध्यान रखना होगा। शरणार्थियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुविधा देने से इस तरह कतराना भारत के लिए कोई अच्छी छवि नहीं बनाता।
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