छपी-अनछपी: ‘जासूसी ऐप’ पर नर्म पड़ी सरकार, अप्रैल से शुरू होगी जनगणना

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। स्मार्टफोन में हर हाल में संचार साथी ऐप इंस्टॉल करने को जासूसी के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगने के बाद सरकार ने कहा है कि इसे हटाया जा सकता है। 2021 से टलती आ रही जनगणना अगले साल फरवरी से शुरू होगी। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान की बहन बोलीं, जिंदा है मेरा भाई। जमीन के रिकॉर्ड में सुधार के लिए ढाई लाख घूस लेने वाला राजस्व कर्मचारी गिरफ्तार।

और, जानिएगा कि चिता जलाने के लिए पैसे नहीं थे तो मां ने बेटे के शव का क्या किया।

पहली ख़बर

भास्कर की खबर है कि हर स्मार्टफोन में ‘संचार साथी’ ऐप अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने के आदेश पर विवाद शुरू हो गया है। विपक्ष ने इसे नागरिकों की ‘जासूसी’ बताते हुए सरकार पर ‘तानाशाही’ का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया। हालांकि, चर्चा नहीं हो सकी। विवाद बढ़ता देख संचार मंत्री सिंधिया ने इस पर स्पष्टीकरण दिया है। सिंधिया ने कहा, ‘यह एप पूरी तरह वैकल्पिक है। यूजर चाहें तो इसे अपने फोन से हटा सकते हैं। रजिस्टर नहीं करेंगे तो ऐप इनएक्टिव रहेगा। कोई डेटा नहीं चलेगा।’ इससे पहले, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, ‘हर किसी को यह अधिकार होना चाहिए कि वह सरकार की नजर के बिना परिवार व दोस्तों को संदेश भेज सके।’ वहीं, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, यह ऐप व्यक्तिगत डेटा और मैसेज नहीं पढ़ता। न कॉल सुनता है। दूरसंचार विभाग में 28 नवंबर को आदेश दिया था कि 90 दिन में नए फोन में संचार साथी ऐप प्रीलोड होगा।

अप्रैल में शुरू होगी जनगणना

जागरण के अनुसार सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में जानकारी दी कि जनगणना 2027 को दो चरणों में अगले साल अप्रैल से शुरू किया जाएगा। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान होगा, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में पूरा कर लिया जाएगा। जनगणना में जातिवार गणना भी की जाएगी। इस संबंध में इस साल 30 अप्रैल को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने फैसला लिया था। गौरतलब है कि 1931 के बाद ये पहली बार है जब जनगणना के साथ जातिवार गणना भी कराई जाएगी। राहुल गांधी के सवाल पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि पहले चरण में मकान सूचौकरण और आवास जनगणना होगी, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना कराई जाएगी।

इमरान की बहन बोलीं, जिंदा है मेरा भाई

हिन्दुस्तान के अनुसार पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की अफवाहों के बीच मंगलवार को जेल में उनसे बहन उज्मा खान ने मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि मेरा भाई जिंदा है। दोनों की ये मुलाकात रावलपिंडी की अदियाला जेल में हुई जो करीब 20 मिनट तक चली। उज्मा ने बताया कि वो ठीक हैं। उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है। उन्होंने बताया कि इमरान ने कहा, उन्हें मानसिक यातना दी जा रही है। उन्हें दिन के अधिकतर समय जेल की कोठरी में ही रखा जाता है और केवल थोड़ी देर के लिए बाहर जाने की अनुमति मिलती है। उन्हें किसी से बात करने की इजाजत नहीं है। बता दें कि इमरान को एक महीने से ज्यादा समय से किसी से मिलने नहीं दिया गया है। आशंका जताई जा रही थी कि उनकी मौत हो गई है। इस बीच, इमरान समर्थक सड़कों पर उतर आए।

राजस्व कर्मचारी ने ली ढाई लाख की घूस, गिरफ्तार

प्रभात खबर के अनुसार विभाग की टीम ने किशनगंज अंचल में पदस्थापित राजस्व कर्मचारी राजदीप पासवान को 2.50 लाख घूस लेते गिरफ्तार किया है. शहर के वार्ड संख्या 22 स्थित खगड़ा निवासी ओवैस अंसारी ने 30 नवंबर को निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज करायी थी. इसके अनुसार राजस्व कर्मचारी राजदीप पासवान ने जमीन के परिमार्जन के लिए 2.70 लाख रिश्वत की मांग की थी. मामला 2.50 लाख पर फाइनल हुआ था. निगरानी थाना में परिवाद दर्ज होने के बाद टीम ने मामले का सत्यापन के बाद मामला दर्ज कर कार्रवाई की. आरोपित राजस्व कर्मचारी ने रुपया फेंककर भागने का प्रयास किया, लेकिन उसे पकड़ लिया गया.

एग्रीकल्चर ऑफिसर घूस लेते गिरफ्तार

दलसिंहसराय (समस्तीपुर) के बाजार समिति परिसर में अवैध निर्माण के लिए रिश्वत लेते अनुमंडल कृषि पदाधिकारी (एसडीओं) राकेश कुमार व उनके लिपिक ललन कुमार को निगरानी विभाग पटना की टीम ने 40 हजार रुपये की रिश्वत के साथ पकड़ लिया. बसदिया वार्ड संख्या 10 निवासी प्रमोद कुमार सिंह ने कृषि विभाग पर दुकान निर्माण को लेकर भ्रष्टाचार की शिकायत की थी.

चिता जलाने को पैसे नहीं थे, मां ने बेटे का शव लेने से इनकार किया

कानपुर से हिंदुस्तान लिखता है कि स्वर्ग फिल्म में गोविंदा का एक डायलॉग है ‘दुनिया में गरीब पैदा होना कोई जुर्म नहीं, कोई पाप नहीं… मगर गरीब मरना सबसे बड़ा जुर्म है, सबसे बड़ा पाप है। यह डायलॉग फिल्मी जरूर है लेकिन चकेरी के टटियन झनाका में रहने वाली वृद्धा माधुरी की हकीकत के बेहद करीब। रविवार रात को पड़ोसी की पिटाई से घायल बेटे का पैसों के अभाव में इलाज नहीं करा सकी। इसके चलते बेटे ने सोमवार रात को घर में ही तड़पकर दम तोड़ दिया। गरीबी का आलम यह कि… पोस्टमार्टम के बाद मां ने शव लेने से ही इनकार कर दिया क्योंकि उसके पास रुपये नहीं थे। अंत में पुलिस को ही शव का अंतिम संस्कार कराना पड़ा। मूलरूप से बिहार के दरभंगा के नेहरा गांव निवासी संतोष कुमार चौधरी के परिवार में पत्नी माधुरी व दो बेटे हैं।

कुछ और सुर्खियां:

  • गया के भाजपा सांसद प्रेम कुमार सर्वसम्मति से बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए
  • बिहार कांग्रेस ने समीक्षा बैठक से गैर हाजिर रहे 15 जिला अध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया
  • पटना में एनसीईआरटी की किताबों का डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर बनेगा
  • सीबीएसई के प्रैक्टिकल एग्जाम्स 1 जनवरी से 14 फरवरी तक
  • अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 90 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद 89.95 पर बंद हुआ
  • बीपीएससी की 71वीं सिविल सेवा मेंस परीक्षा के लिए आज से ऑनलाइन आवेदन
  • शादियों की वजह से पटना से दिल्ली का फ्लाइट किराया ₹25000 तक पहुंचा

अनछपी: महान साहित्यकार विलियम शेक्सपियर के हवाले से यह बात कही जाती है कि नाम में क्या रखा है लेकिन भारत में नाम बदलना एक बड़ा मिशन बना हुआ है। आजकल केंद्र सरकार अपने कार्यालय का नाम बदलने का ऐलान कर रही है और उसके तहत अब यह बताया गया है कि प्रधानमंत्री के नए कार्यालय और आवासीय परिसर जिसे हम पहले पीएमओ के नाम से भी जानते हैं उसका नाम अब ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है। यह नया नाम भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने कुछ सोच कर ही रखा होगा लेकिन अगर एक आम आदमी के हिसाब से देखा जाए तो इससे कहीं नहीं लगता कि यह प्रधानमंत्री का कार्यालय है बल्कि इससे किसी धर्मस्थल का भाव पैदा होता है। इसी तरह अब राज्यपाल के आवास यानी राजभवन का नाम लोक भवन होगा। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया था। इसके अलावा राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया। नाम बदलने के मामले में उत्तर प्रदेश का नाम सबसे आगे माना जाता है जहां अक्सर हम यह सुनते हैं कि जो नाम उर्दू या मुसलमान से जुड़ा हुआ हो उसे वहां के मुख्यमंत्री बदलने का ऐलान कर अपने लिए समर्थन जुटाना और एक तरह का उन्माद पैदा करने की कोशिश करते हैं। वैसे ही जरूरी नहीं की नाम केवल भारतीय जनता पार्टी की सरकार वाले राज्यों में बदल जाए बल्कि कोलकाता से कोलकाता और मद्रास से चेन्नई नाम बदलने का सिलसिला भी हम देख चुके हैं। इसलिए कुछ नाम के बदलाव का मतलब तो समझ में आता है लेकिन इसके साथ जरूरी यह भी है कि केवल नाम में नहीं बल्कि काम में भी बदलाव आए। खबरों में बताया गया कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण परिवर्तन है। यह भी कहा गया कि सरकार का उद्देश्य सत्ता से सेवा और अधिकार से जिम्मेदारी की ओर बढ़ना है। प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ कर दिया गया लेकिन सवाल यह है कि क्या आम लोगों के लिए वहां पहुंचना अब ज्यादा आसान होगा? इसी तरह क्या लोक भवन आम लोगों के लिए ज्यादा पहुंच में होगा? सेवा और लोक जैसे सब पहले भी इस्तेमाल होते रहे हैं और हमारे नेता तो अक्सर खुद को जनता का सेवक बताते हैं लेकिन जैसे ही एक बार वह एमपी-एमएलए बन जाते हैं खुद को बाकी लोगों से ऊपर समझने लगते हैं। यहां तक कि उनके लिए ट्रैफिक के नियम भी आम आदमी से अलग होते हैं और जो लोग उन्हें चुनकर भेजते हैं उनकी गाड़ियां रोक कर चुने हुए लोगों की गाड़ियां आगे बढ़ाई जाती हैं। बताने का मकसद केवल इतना है कि नाम बदलने से नहीं बल्कि काम बदलने से इंसान की भलाई होती है।

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