छ्पी-अनछपी: होली से पहले 10 लाख कर्मियों को मिलेगा वेतन, गया से हज का सफर बंद
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। खजाने की स्थिति नाजुक होने की चर्चा के बीच बिहार के वित्त मंत्री ने कहा है कि सभी कर्मचारियों को होली से पहले इसी महीने वेतन मिल जाएगा। गया एयरपोर्ट को हज इम्बार्केशन प्वाइंट से हटा दिया गया है। अमेरिकी टैरिफ की चिंता में शेयर बाजार एक बार फिर धड़ाम हो गया।
और, जानिएगा कि मीट-मछली की दुकान के लिए कितने रुपये में मिलेगा लाइसेंस।
पहली ख़बर
प्रभात खबर के अनुसार बिहार सरकार होली से पहले कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के खाते में वेतन और पेंशन की राशि भेज देगी. ऐसे में बिहार में काम करने वाले लगभग 10 लाख नियमित और नियोजित कर्मियों को 28 फरवरी तक वेतन मिल जाएगा। वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने घोषणा की कि फरवरी माह का वेतन इसी महीने जारी कर दिया जायेगा. उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य की वित्तीय स्थिति पूरी तरह संतुलित है. सरकार का खजाना खाली होने वाली बात बेबुनियाद है. उन्होंने यह बात इसलिए कहीं क्योंकि विधायक पारित होने की प्रक्रिया के दौरान राजद के सदस्य सुनील कुमार ने कहा कि राज्य में खजाने की स्थिति बेहद नाजुक है। वित्त मंत्री मंगलवार को विधान परिषद में पेश आय-व्ययक 2026-27 से संबंधित विनियोग (संख्या 2) विधेयक पर सरकार का जवाब रख रहे थे. विपक्ष की आपत्तियों के बीच विनियोग सदन में ध्वनिमत से पारित हो गया.
गया से हज सफर की सहूलत बन्द
इस साल बिहार के हज यात्रियों को गयाजी एयरपोर्ट से उड़ान की सुविधा नहीं मिलेगी। 15 साल बाद गया एयरपोर्ट को हज इम्बार्केशन प्वाइंट से हटा दिया गया है। कम संख्या में हज यात्रियों के चयन के कारण केंद्र सरकार ने यहां से हज ऑपरेशन नहीं करने का फैसला लिया है। बिहार के हज यात्रियों का पहला काफिला 18 अप्रैल को रवाना होगा। अंतिम काफिला 19 मई को हज यात्रा पर जाएगा। इस वर्ष बिहार से कुल 2556 लोग हज यात्रा पर जा रहे हैं। इनमें 1466 पुरुष और 1090 महिलाएं शामिल हैं। जिन आजमीने हज ने गयाजी एयरपोर्ट को पहला विकल्प चुना था, उन्हें अब दूसरे विकल्पके तहत दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलुरु, लखनऊ, नागपुर और हैदराबाद एयरपोर्ट से रवाना किया जाएगा। बिहार में पटना से सर्वाधिक 333 हज यात्री जाएंगे। सबसे कम संख्या शिवहर से 2, मधेपुरा से 6, अरवल से 7 और शेखपुरा से 9 यात्रियों की है।
टैरिफ की चिंता में शेयर बाजार धड़ाम
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी टैरिफ में बढ़ती अनिश्चितता और आईटी शेयरों में भारी बिकवाली से घरेलू शेयर बाजारों में मंगलवार को बड़ी गिरावट आई। सेंसेक्स 1,069 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी में 288 अंक लुढ़क गया। इस गिरावट से निवेशकों को करीब तीन लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक व्यापार और अमेरिकी शुल्क को लेकर चिंताएं दोबारा बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक और घरेलू शेयर बाजारों पर देखा जा रहा है।
एसआईआर के लिए बंगाल में बाहरी जज लगाए जाएंगे
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में एसआईआर के लिए ओडिशा और झारखंड के वर्तमान और सेवानिवृत्त जजों को भी तैनात करने की अनुमति दे दी। शीर्ष कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट पर विचार करते हुए यह आदेश दिया। इसमें कहा गया था कि इस काम को समय से पूरा करने के लिए पर्याप्त न्यायिक अधिकारी नहीं हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया। पीठ ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एसआईआर के लिए जिला जज के अलावा, सीनियर डिवीजन और जूनियर डिवीजन, दोनों के सिविल जज को, जिनके पास कम से कम तीन वर्ष का अनुभव हो, को इस काम के लिए तैनात करने की अनुमति दे दी।
बोर्ड-निगम में आयोग से होगी भर्ती
विधानसभा ने बोर्ड-निगमों में नियुक्ति प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया है। अब तकनीकी पदों सहित वर्ग तीन और चार के पदों पर नियुक्ति का अधिकार संबंधित बोर्ड-निगमों के बजाय चयन आयोगों को सौंपा जाएगा। इसके लिए सदन ने बिहार तकनीकी सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक 2026 और बिहार कर्मचारी चयन आयोग (संशोधन) विधेयक 2026 को भी मंजूरी दी है। कर्मचारियों को इन संशोधनों से अलग हालाकि छंटनीग्रस्त कर्मियों और संविदा रखा गया है। सरकार का तर्क है कि इससे नियुक्ति अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी तथा मनमानी की शिकायतों पर रोक लगेगी। इसके अलावा विधानसभा ने नगर निकायों की कार्य प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए सशक्त स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया में संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब नगर निकायों में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों को महापौर या अध्यक्ष द्वारा नामित नहीं किया जाएगा, बल्कि उनका चयन वार्ड पार्षदों के गुप्त मतदान के जरिए होगा। इस संबंध में बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 को सदन ने पारित कर दिया।
मीट-मछली की दुकान के लिए कितने रुपये में मिलेगा लाइसेंस
मछली बेचने वालों को अब नगर निगम लाइसेंस देगा। यह एक साल के लिए जारी होगा, जिसके लिए 2 हजार रुपए शुल्क देना होगा। गरीबी रेखा (बीपीएल) से नीचे वाले दुकानदारों को लाइसेंस शुल्क नहीं देना होगा। ऐसे दुकानदारों को केवल आवेदन तौर पर 20 रुपए देने होंगे। लाइसेंस का सालाना नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा। सभी दुकानदारों को एक यूनिक क्यूआर कोड भी जारी होगा। इस क्यूआर कोड में दुकानदार और उसकी दुकान की पूरी जानकारी रहेगी। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने मंगलवार को इस संबंध में अफसरों के साथ बैठक करके लाइसेंस देने को लेकर फैसला किया। नगर विकास विभाग के निर्देश के बाद पटना नगर निगम ने शहर में अवैध मांस-मछली बिक्री पर सख्ती शुरू कर दी है। धार्मिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों के पास मांस-मछली बेचने पर रोक रहेगी।
कुछ और सुर्खियां:
- भागलपुर जिले के बिहपुर थाना क्षेत्र में तीन गाड़ियां आपस में टकराईं, टोटो पर सवार चार यात्रियों की मौत
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जाएंगे इसराइल
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आज से सीमांचल का तीन दिवसीय दौरा
- जदयू के राज्यसभा सदस्य संजय झा भारत-जर्मनी संसदीय मैत्री संघ के अध्यक्ष बने
- केरल का नया नाम अब केरलम होगा
- एआई सबमिट के दौरान अर्धनग्न प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु गिरफ्तार
अनछपी: भारतीय जनता पार्टी की सरकार कैसे मुसलमानों की सहूलतों को कम करती है, इसकी बहुत सारी मिसालें पहले से मौजूद हैं और अब गया एयरपोर्ट से हज का सफर बंद करना भी इस में जुड़ गया है। दरअसल सरकार चलाने वाली पार्टी इतनी दूर है कि वह सीधे अपने ऊपर जिम्मेदारी न लेकर भी मुसलमान की सहूलतों को खत्म करने में महारत रखती है। गया एयरपोर्ट से जब हज यात्रा शुरू हुई थी तब इसकी स्थिति अच्छी थी लेकिन बाद में ऐसा हुआ कि यहां से हज करना महंगा हो गया और लोग दूसरे शहरों में जाने लगे। जब दूसरे शहरों से 50000 उससे ज्यादा कम खर्च कर लोग सफर कर सकते हैं तो लोग गया को क्यों चुनते हैं? आम भाषा में इसे ही स्लो प्वाइजन देकर मारना कहा जाता है। बरहाल इस खबर में केंद्र सरकार की ओर से तर्क यह दिया गया है कि क्योंकि गया एयरपोर्ट से हज के लिए विकल्प चुनने वाले 100 से कम यात्री थे इसलिए यहां से हज ऑपरेशन नहीं करने का फैसला किया गया है। सवाल यह है कि आखिर केंद्र सरकार ने गया से हज के सफर को बाकी जगह की तुलना में महंगा क्यों बनाए रखा? बिहार से इस साल कुल 2556 लोग हज यात्रा पर जा रहे हैं। जिन लोगों ने पहले गया एयरपोर्ट को इंपार्टेशन पॉइंट चुना था उन्हें अब दूसरे शहरों जैसे दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलुरु, लखनऊ, नागपुर और हैदराबाद एयरपोर्ट का विकल्प दिया जाएगा। यानी इस तरह गया एयरपोर्ट से हज की सुविधा बंद कर दी गई। बिहार में डबल इंजन की सरकार है और शायद ही कोई उसकी तरफ से इसके बारे में आवाज़ उठाए क्योंकि उन्हें यह ना तो वोट के लिए हाथ से सही मुद्दा लगेगा और ना ही पटना और दिल्ली में सरकार चलाने के लिए लिहाज से। बिहार में नीतीश कुमार कैसे मजबूर हो रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी कैसे अपना एजेंडा लागू कर रही है, गया एयरपोर्ट से हज का सफर बंद होना एक और मिसाल है।
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