बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिका ईरान से अब और युद्ध नहीं चाहता लेकिन एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इसराइल जंग के लिए बेचैन है। सुधा दूध और अन्य उत्पादों की कीमतें 25 मई से बढ़ जाएगी। कोलकाता हाईकोर्ट ने बंगाल में जानवर ज़बह करने पर नई सरकार के नोटिफिकेशन के मामले में फिलहाल रोक नहीं लगाई है।
और, जानिएगा कि बिहार सरकार अपने नए विभाग की जानकारी सीएजी को देना भूली तो साढ़े चार हज़ार कर्मचारियों का वेतन अटक गया।
पहली ख़बर
प्रभात ख़बर के अनुसार ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और इसराइल के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर हुई बातचीत में तनाव पैदा हो गया. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप फिलहाल ईरान के साथ सीजफायर और समझौते की दिशा में बढ़ना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह कमजोर करने के लिए युद्ध जारी रखने के पक्ष में हैं. अमेरिकी मीडिया ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को दोनों के बीच फोन पर बातचीत काफी तल्ख रही है. इसके बाद नेतन्याहू काफी नाराज दिखे. वहीं ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि ईरान युद्धविराम के दौरान तेजी से अपनी सैन्य ताकत बहाल कर रहा है और उसने ड्रोन उत्पादन भी दोबारा शुरू कर दिया है.
देश से बाहर नहीं जाएगा यूरेनियम: ईरान
जागरण के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता एक बार फिर मुश्किलों में घिरता दिख रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को किसी भी स्थिति में देश से बाहर नहीं भेजेगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि हम किसी भी तरह यूरेनियम हासिल कर लेंगे। हालांकि, हमें इसकी जरूरत नहीं है और संभवतः हम इसे नष्ट कर देंगे। इसके साथ ही ट्रंप ने ये भी कहा कि समझौता करने के लिए ईरान के पास ज्यादा समय नहीं बचा है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें 107 डालर पर पहुंच गईं।
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर करने के लिए परमिट जरूरी किया
हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सीमाएं तय कर दी हैं। साथ ही कहा है कि यहां से पोत को गुजरने के लिए परमिट अनिवार्य है। ईरान की ओर से हाल ही में गठित फारसी खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (पीजीएसए) ने होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन और निगरानी क्षेत्र की सीमाएं निर्धारित की हैं। पीजीएसए ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह निगरानी क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में स्थित ईरान के कुह मुबारक और यूएई के फुजैरा के दक्षिणी छोर को जोड़ने वाली रेखा से शुरू होकर, पश्चिम में स्थित ईरान के केश्म द्वीप के अंतिम छोर और यूएई के ‘उम्म अल-कैवेन’ को जोड़ने वाली रेखा तक फैला है।
25 मई सुधा दूध का दाम बढ़ेगा
भास्कर के अनुसार बिहार और झारखंड के करोड़ों उपभोक्ताओं की जेब पर सोमवार से महंगाई का बोझ बढ़ेगा। अमूल और अन्य प्रमुख डेयरी ब्रांड्स द्वारा कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (कम्फेड) ने भी सुधा दूध और अन्य उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की पूरी तैयारी कर ली है। सोमवार तक सुधा दूध की नई दरें जारी कर दी जाएंगी, जिसके तहत प्रति लीटर 2 से 4 रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है। कम्फेड के एजीएम (मार्केटिंग) के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। इस कारण प्लास्टिक और पैकेजिंग मटेरियल महंगे हुए हैं। प्रोसेसिंग और स्टीम जनरेशन की लागत बढ़ी है। दूध लाने और फिर सप्लाई करने का लॉजिस्टिक्स खर्च काफी बढ़ चुका है।
सीधे बीएसएफ को सौंपे जाएंगे “बांग्लादेशी घुसपैठिए”
जागरण के अनुसार बंगाल में पुशबैक कानून को तत्काल प्रभाव से लागू करने के अगले ही दिन गुरुवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में पकड़े जाने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों को अब अदालत में पेश करने के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपा जाएगा। हावड़ा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नई व्यवस्था बुधवार से लागू हो चुकी है। इस संबंध में पुलिस आयुक्त तथा रेलवे सुरक्षा बल को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब से किसी भी बांग्लादेशी घुसपैठिये को अदालत नहीं भेजा जाएगा। उन्हें सीधे बीएसएफ को सौंप दिया जाएगा, ताकि वापस सीमा पार भेजा जा सके। यह कदम केंद्र सरकार की ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति का हिस्सा है। इसके तहत अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
जानवर ज़बह करने पर बंगाल सरकार की रोक
प्रभात खबर के अनुसार कलकत्ता हाईकोर्ट ने ईद-उल-अजहा के दौरान पशुवध पर राज्य सरकार की हालिया अधिसूचना को चुनौती देने वालीं कई याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया. याचिकाकर्ताओं ने बकरीद पर कुर्बानी के लिए पश्चिम बंगाल पशुवध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 के तह तहत छूट देने की मांग की है. एक याचिकाकर्ता की से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने अदालत में दलील दी कि यह कानून उस समय बनाया गया था, जब कृषि मुख्य रूप से घरेलू पशुओं पर निर्भर थी, जबकि अब खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. उन्होंने कहा कि अधिनियम की धारा 12 धार्मिक उद्देश्यों के लिए छूट का प्रावधान देती है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि राज्य में पिछले कुछ वर्षों में मवेशियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है. राज्य और केंद्र सरकार की ओर से पेश वकीलों ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि सरकार की अधिसूचना कानून और उच्च न्यायालय के पूर्व के आदेशों के अनुरूप जारी की गयी है.
सरकार ‘कैग’ को नए विभाग की जानकारी देना भूल गई तो वेतन रुका
भास्कर के अनुसार बिहार में अफसरशाही की एक बेहद हैरान करने वाली लापरवाही सामने आई है। राज्य सरकार ने एक नया विभाग तो बना दिया। लेकिन इसकी जानकारी सीएजी (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) को देना ही भूल गई। नतीजा यह है कि इस नए ‘युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग’ के 4500 कर्मचारियों को मार्च और अप्रैल की सैलरी नहीं मिली है। मई का महीना भी बीतने को है। सैलरी संकट में फंसे इन लोगों में नियोजन भवन सचिवालय के चपरासी से-लेकर आईएएस कैडर तक के बड़े अफसर शामिल हैं।
कुछ और सुर्खियां:
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- पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना की फलता विधानसभा सीट पर कड़ी सुरक्षा में
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अनछपी: क्या कानून से चलने वाली सरकार और अपराधियों की भाषा एक हो सकती है? यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि आज के एक अखबार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह बयान सुर्खी बना है कि पुलिस को चैलेंज करने वालों को उसी की भाषा में 48 घंटे के अंदर जवाब मिलेगा। पुलिस को चैलेंज करने का मतलब यहां अपराधियों से है और इस बारे में सम्राट चौधरी का कहना है कि किसी भी हालत में अपराधी ना बचे, यह सरकार की कोशिश है। यह कोशिश बिल्कुल सही है और इसका समर्थन किया जाना चाहिए लेकिन जब पुलिस की कार्रवाई पर ऐसे आरोप लगने शुरू हो जाएं कि वह जाति देखकर कार्रवाई कर रही है तो मुख्यमंत्री से एक बेहतर जवाब की उम्मीद की जानी चाहिए। यहां पर खास तौर पर एनकाउंटर यानी की चर्चा की जा रही है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में पुलिस ने एनकाउंटर यानी मुठभेड़ के नाम पर जिन अपराधियों को या तो मार गिराया या घायल किया गया है उनके बारे में यह शिकायत आती है कि वह कुछ खास जातियों के अपराधी ही होते हैं और ऐसी कार्रवाई दूसरी जातियों के अपराधियों के साथ नहीं की जात। और यह अपराधी अदालत से सजा पाए नहीं हैं बल्कि उन पर अपराध का आरोप है तो ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मुख्यमंत्री के स्तर पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल सही है और संविधान इसकी इजाजत देता है? हो सकता है कि मुख्यमंत्री को ऐसा लगे कि उनकी इस भाषा को लोग पसंद करेंगे लेकिन सवाल लोगों की पसंद का नहीं है बल्कि कानून और संविधान के बताए गए तरीके का है। कानून और संविधान तो यह कहता है कि अपराधी चाहे जैसी हरकत करें सरकार और पुलिस के लिए जरूरी है कि वह कानून के मुताबिक ही कार्रवाई करें और अपराधियों का तरीका ना अपनाएं। इसलिए सरकार तक यह संदेश पहुंचाना जरूरी है कि उसका रवैया अपराधियों के रवैया जैसा हो जाएगा तो फिर दोनों में क्या फर्क रह जाएगा?
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