छ्पी-अनछपी: अखिलेश ने मांगा मुस्लिम महिला आरक्षण, जनगणना आज से

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा व विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण के तहत ओबीसी-मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण देने की मांग की है। बिहार में आज से जनगणना 2027 की शुरुआत होगी। इसराइल और लेबनान 10 दिनों के संघर्षविराम पर सहमत हो गये हैं।

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान के अनुसार समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा कि ओबीसी-मुस्लिम महिलाओं को भी महिला आरक्षण कानून के प्रावधानों से आरक्षण दिया जाए। लोकसभा में तीन विधेयकों पर बहस में अखिलेश यादव ने कहा, भाजपा ‘नारी को नारा’ बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने नोएडा में चल रहे मजदूरों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि यह विधेयक इतने अच्छे हैं तो प्रदर्शन कर रही महिलाओं के बीच जारी किया जाए।

अमित शाह का जवाब

लोकसभा में मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर सपा और शाह के बीच तीखी बहस हुई। शाह ने मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की मांग को असंवैधानिक करार दिया। कहा कि समाजवादी पार्टी अपनी सीटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें आपत्ति नहीं है। पर संविधान के तहत धर्म के आधार पर कोई आरक्षण नहीं हो सकता। सपा नेता धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इन विधेयकों के माध्यम से जिस तरह परिसीमन को जनगणना से अलग करने का प्रयास किया जा रहा है, वह संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। उन्होंने पिछड़े वर्ग और मुस्लिम महिलाओं को शामिल करने की मांग की। वहीं, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसका विरोध करते हुए कहा कि असंवैधानिक है।

महिला आरक्षण बिल पर मोदी की सभी दलों से सहयोग की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महिला आरक्षण के लिए लोकसभा में लाए गए विधेयकों पर सभी दलों से सहयोग की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि परिसीमन पर किसी राज्य के साथ पक्षपात नहीं होगा। यह उनकी गारंटी है और वादा भी। मोदी ने आश्वासन दिया कि देश में परिसीमन के अनुपात में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में आगाह करते हुए कहा कि जो भी इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए, वह इसका श्रेय विपक्षी दलों को भी देने को तैयार हैं। महिला आरक्षण संशोधन बिल और परिसीमन आयोग गठित करने वाले विधेयकों पर शुक्रवार शाम वोटिंग होगी।

जनगणना 2027 की शुरुआत आज से

बिहार में जनगणना 2027 के प्रथम चरण में 17 अप्रैल से 15 दिनों के लिए स्व-गणना अवधि शुरू होगी और एक मई तक चलेगी. वहीं 31 मई तक होगा घर-घर सर्वेक्षण होगा. इस दौरान राज्य के नागरिक जनगणना पोर्टल एसइ. सेंसस.जीओवी.इन पर स्वयं अपने परिवार, आवास और सुविधाओं से संबंधित जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं. स्व-गणना के दौरान नागरिकों को पोर्टल पर उपलब्ध 33 प्रश्नों का उत्तर देना होगा. इस प्रश्नावली के माध्यम से घर के संबंध में प्रश्न, परिवार के संबंध में प्रश्न, जल, स्वच्छता एवं ऊर्जा संबंधी विवरण के साथ घरेलू उपकरणों की उपलब्धता से जुड़ी जानकारी दर्ज की जायेगी. यह जानकारी आगे चलकर साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण, जन कल्याण के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

इसराइल-लेबनान में 10 दिन का सीजफायर

प्रभात ख़बर के अनुसार इसराइल और लेबनान 10 दिनों के संघर्षविराम पर सहमत हो गये हैं. यह घोषणा गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की. 34 साल बाद दोनों देशों के बीच वाशिंगटन में हुई पहली सौधी राजनयिक वार्ता के दो दिन बाद यह घोषणा हुई है. हालांकि, उनके बयान में लेबनान स्थित हिजबुल्ला समूह का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, जिसके साथ इस्राइल लंबे समय से संघर्ष में है. ट्रंप के मुताबिक, यह संघर्षविराम भारतीय समयानुसार गुरुवार देर रात 2:30 बजे से लागू होगा.

टीआरई-4 में 46882 शिक्षकों की भर्ती के लिए अगले हफ़्ते से आवेदन

बिहार लोक सेवा आयोग शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण यानी टीआरइ-4 को लेकर तैयारी में है. आयोग अगले तीन से चार दिनों के भीतर इसका आधिकारिक विज्ञापन जारी कर देगा. इस चरण में कुल चार विभागों को मिलाकर 46,882 शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति की जायेगी. परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि आवेदन प्रक्रिया 25 या 26 अप्रैल से शुरू हो जायेगी. वहीं, परीक्षा 22 से 27 सितंबर के बीच ली जायेगी. उन्होंने बताया कि नोटिफिकेशन जारी होने के तुरंत बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पोर्टल पर आयेंगे. इसी को ध्यान में रखते हुए आवेदन की तिथि इस तरह तय की जा रही है, ताकि तकनीकी दिक्कतों से बचा जा सके.

मतदान से दो दिन पहले तक ट्रिब्यूनल में अपना केस जीतने वाले दे सकेंगे वोट

जागरण के अनुसार बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में वोटर लिस्ट से बाहर हो गए लोग यदि अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील करते हैं और मतदान से दो दिन पहले तक उनकी अपील मंजूर हो जाती है तो उन्हें इस विधानसभा चुनाव में मतदान करने का अधिकार प्राप्त होगा। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 में खुद को मिली विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि जिन मामलों में अपीलीय ट्रिब्यूनल 21 अप्रैल (जहां चुनाव 23 अप्रैल को है) या 27 अप्रैल (जहां चुनाव 29 अप्रैल को है) तक अपील का निपटारा करके उन्हें मंजूर कर लेता है तो उन मामलों में चुनाव आयोग पुनरीक्षित पूरक मतदाता सूची निकालेगा और उन्हें मतदान का अधिकार देने के लिए सभी आवश्यक कार्य करेगा।

कुछ और सुर्खियां:

  • दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल एक पर बड़ा हादसा टला, स्पाइसजेट और अकासा एयर के विमान आपस में टकराए
  • हरिवंश का राज्यसभा उपसभापति बनना तय, निर्वाचन आज
  • मंगल पांडे के इस्तीफा के बाद विधानसभा कोटे से विधान परिषद की एक सीट खाली, उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र बनेंगे विधान पार्षद

अनछपी: लोकसभा और राज्यसभा में सीटों की संख्या और क्षेत्रवार निर्धारण के मामले में सरकार चला रही पार्टी भारतीय जनता पार्टी पर विपक्षी दलों को भरोसा नहीं है और भरोसा नहीं होना बिना कारण नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने राजनीतिक नारे की तरह विपक्षी दलों से कह रहे हैं कि वह मोदी की गारंटी को मान लें लेकिन विपक्षी दलों के लिए यह एक महज एक राजनीतिक चाल है। इसी राजनीतिक चाल के तहत भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कहते हैं कि लोकसभा और विधानसभा की सीटों पर मुसलमानों को आरक्षण देने की बात असंवैधानिक है। श्री शाह उसी भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं जो मुसलमानों के पसमांदा तबके के लिए बहुत चिंतित रहती है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके लिए कुछ करने का वादा करते रहते हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की इस मांग पर उन्हें सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए कि पिछड़े वर्ग की मुस्लिम महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण के अंदर आरक्षण दिया जाए। इससे पसमांदा मुस्लिम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी कुछ तो सुधरेगी। जहां तक संविधान की बात है तो उसके लिए बस एक संशोधन की जरूरत पड़ेगी और इसमें किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यह बात भी याद रखने की है कि किसी वर्ग को आरक्षण देकर पिछड़ेपन से निकलने के लिए धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए और इस आधार पर किसी को अधिकार से वंचित नहीं करना चाहिए कि वह किस धर्म का है। हमारे देश में अनुसूचित जाति यानी एससी वर्ग में मुसलमानों को उनके धर्म के आधार पर शामिल करने से इनकार करने का मामला पहले से चल रहा है। इसे बदलने की सख्त ज़रूरत है।

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