बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। मोदी सरकार को मनमाने ढंग से महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026 पास करने में नाकामी हाथ लगी और यह बिल लोकसभा में गिर गया। ईरान ने घोषणा की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी कमर्शियल जहाजों के लिए खोल दिया गया है। ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को उम्र में छूट, अतिरिक्त मौकों की मांग वाली याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।
और, जानिएगा कि पटना विश्वविद्यालय में 20 हजार छात्र-छात्राएं हैं लेकिन 150 से भी कम प्लेसमेंट हुए हैं।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026 शुक्रवार को लोकसभा में गिर गया। मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। बहुमत के लिए 352 वोट की जरूरत थी। पक्ष ने विधेयक का विरोध किया, जिससे संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई का आंकड़ा हासिल नहीं हो सका। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यह एक शर्मनाक कानून है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल देश के निर्वाचन क्षेत्र के नक्शे को बदलने के लिए लाया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास का सबसे कड़वा सच यह है और वह इसके बारे में सब कुछ जानते हैं। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पर मत विभाजन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह के साथ ही सत्तापक्ष तथा विपक्ष के कई प्रमुख नेता मौजूद थे। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अफसोस जाहिर किया और इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
लोकतंत्र की रक्षा में उठाया गया कदम: विपक्ष
विधेयक पारित नहीं हो पाने को विपक्ष ने एकजुटता के साथ लोकतंत्र की रक्षा में उठाया गया कदम बताया है। कांग्रेस ने सभी विपक्षी दलों का विधेयक के विरोध में समर्थन देने के लिए आभार भी जताया। विपक्ष ने महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन सहित तीन विधेयकों का विरोध किया। दलील दी कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन कर अपना राजनीतिक हित साधना चाहती है। विपक्ष ने लोस की मौजूदा संख्या में 33 फीसदी आरक्षण की मांग दोहराई। तृणमूल ने मंत्रिमंडल में भी आरक्षण की मांग जोड़ दी। सांसद कल्याण बनर्जी ने भाजपा पर महिला आरक्षण के नाम पर दिखावा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की नीयत ठीक है, तो वह 50%आरक्षण का विधेयक लाए, पूरा विपक्ष उसे पारित करने के लिए तैयार है।
ईरान ने सबके लिए खोला होर्मुज
प्रभात खबर के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और 48 दिनों से जारी अनिश्चितता के बाद आखिरकार होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा फैसला सामने आया. ईरान ने शुक्रवार को घोषणा की कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से अब वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पूरी तरह से खुली रहेगी और उन्हें आने-जाने पूर्ण छूट दी गयी है. यह कदम लेबनान में सीजफायर लागू होने के बाद उठाया गया है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया की प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर घोषणा की कि लेबनान में सीजफायर समझौते के अनुरूप होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह खोल दिया गया है. उधर, अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने ईरान के बंदरगाहों से निकलने की कोशिश कर रहे 13 जहाजों को वापस लौटा दिया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, सोमवार से शुरू हुई इस नाकाबंदी के बाद अब तक कोई भी जहाज इसे पार नहीं कर पाया है.
ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को उम्र में छूट नहीं: कोर्ट
हिन्दुस्तान के अनुसार केंद्र सरकार की सीधी भर्तियों और नौकरियों में ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को उम्र में छूट, अतिरिक्त मौकों की मांग वाली याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार उम्र में छूट के लिए आरक्षित वर्गों के बराबर हकदार नहीं हैं। न्यायमूर्ति अनिल क्षत्रपाल की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को उम्र और मौकों में छूट न देने का केंद्र सरकार का फैसला न तो मनमाना है और न ही असंवैधानिक। पीठ ने तर्क दिया कि संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 के बाद ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को 10 फीसदी आरक्षण दिया गया, लेकिन अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के विपरीत उन्हें ऊपरी आयु सीमा या मौकों की संख्या में कोई संबंधित छूट नहीं दी गई। पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 342ए सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई सूचियों को अलग-अलग मानता है।
बिहार में जनगणना का काम शुरू
बिहार में भारत की जनगणना-2027 के लिए डिजिटल स्व-गणना की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन ने प्रथम नागरिक के तौर पर ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज कर इस डिजिटल पहल की शुरुआत की। उन्होंने प्रदेशवासियों से भी अभियान का लाभ उठाने की अपील की। उधर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी करते हुए इस अभियान को जनभागीदारी से सफल बनाने का संदेश दिया। सीएम ने इसे संवैधानिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य बताते हुए सभी नागरिकों से इसमें भाग लेने की अपील की। शुक्रवार से प्रारंभ स्वगणना की प्रक्रिया एक मई, 2026 तक चलेगी। दो मई से 31 मई, 2026 तक राज्यभर में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना होगी।
पटना यूनिवर्सिटी: 20 हजार छात्र-छात्राएं हैं लेकिन 150 से भी कम प्लेसमेंट
भास्कर के अनुसार पटना विश्वविद्यालय में प्लेसमेंट में विगत एक वर्ष में भारी कमी आयी है। 20 हजार छात्र-छात्राएं हैं लेकिन 150 से भी कम प्लेसमेंट हुए हैं। विश्वविद्यालय में चार सदस्यीय प्लेसमेंट सेल है। प्लेसमेंट को लेकर समय-समय पर प्रयास भी हो रहे हैं लेकिन विश्वविद्यालय में प्लेसमेंट रफ्तार नहीं पकड़ रहा है। खासकर विगत एक वर्ष में विश्वविद्यालय में जो परिस्थितियां रहीं, और विवि में जिस प्रकार से उथल पुथल चला, उस वजह से भी ये स्थिति रही है। विवि प्रशासन की मानें तो एक वर्ष में करीब 150 के आस-पास प्लेसमेंट हुए हैं। सबसे अधिकतम पैकेज साढ़े पांच लाख का है।कंपनियां “जॉब रेडी स्किल” चाहती हैं, सिर्फ डिग्री नहीं। मतलब डिग्री के साथ ही उन्हें इंडस्ट्री ट्रेनिंग भी मिली हो लेकिन यहां इंडस्ट्री ट्रेनिंग व इंटर्नशिप आदि की स्थिति भी ठीक नहीं है। प्लेसमेंट सेल बीच-बीच में कुछ कुछ ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाती है लेकिन फिर भी हर कोर्स के स्तर पर यह नहीं है।
कुछ और सुर्खियां:
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मोबाइल फोन पर जान से मारने की धमकी देने वाला बांका निवासी शेखर कृष्ण यादव गुजरात से गिरफ्तार
- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कथित दोहरी नागरिकता मामले में एफआईआर का आदेश दिया
- हरिवंश तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति निर्वाचित
- गौतम अदानी बने एशिया के सबसे अमीर कारोबारी, मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ा
अनछपी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2014 से चली आ रही सरकार में जनता को मिले जिन अधिकारों में कटौती की गई है उनमें एक प्रमुख अधिकार है सूचना का अधिकार। अफसोस की बात यह है कि बिहार में तथाकथित डबल इंजन की सरकार है और यहां भी जानकारी देने के मामले में सरकार की तरफ से ही काफी आनाकानी होती है। एक तो सरकार ने सूचना के अधिकार कानून को काफी कमजोर कर दिया है और कई मामलों में जनता से यह अधिकार वापस ले लिए गए हैं। इसके अलावा सूचना के अधिकार के लिए काम करने वाले कई कार्यकर्ताओं के साथ हिंसक घटनाएं हुई हैं और कई ऐसे कार्यकर्ता अपनी जान भी गंवा चुके हैं। अब बिहार से ताजा जानकारी यह आई है कि कम से कम 30000 सूचना के अधिकार के तहत दिए गए आवेदनों का कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है और इस पर हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है। एक रिपोर्ट नहीं बताया गया है कि पटना हाईकोर्ट ने बिहार में सूचना के अधिकार व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर सख्त रुख अपनाया है। करीब 30 हजार लंबित अपीलों के मामले में मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। अदालत ने माना कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य स्तर पर गंभीर विफलता सामने आई है। इस संबंध में अधिवक्ता प्रवीण कुमार द्वारा दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सूचना का अधिकार, जो संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (क) के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकार का हिस्सा है, अधिकारियों की उदासीनता और सज़ा के कमजोर क्रियान्वयन के कारण बेअसर होता जा रहा है। याचिका में बताया गया कि राज्य सूचना आयोग में बरसों तक मामले लटके रहते हैं और दोषी लोक सूचना अधिकारियों पर शायद ही जुर्माना लगाया जाता है। इससे आम नागरिक अपने सूचना पाने के अधिकार से वंचित हो रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है। हाई कोर्ट की इस कड़ी टिप्पणी के बावजूद बिहार में शायद ही किसी को यह भरोसा होगा कि सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने में सरकार के अधिकारी मुस्तैदी दिखाएंगे।
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