छ्पी-अनछपी: बंपर वोटिंग मगर बढ़त किसको, राहुल फिर बोले- वोट चोरी रोकने को सतर्क रहें
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 121 सीटों पर 18 जिलों में 64.69% वोटिंग हुई और अब लोग इस चर्चा में जुट गए हैं के इसमें बढ़त किसे मिलेगी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर कहा कि वोट चोरी रोकने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन में वामपंथी दलों ने एबीवीपी का सूपड़ा साफ किया।
और, जनिएगा कि ईडी ने प्रसिद्ध पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना और शिखर धवन की 11 करोड़ की संपत्ति कुर्क की।
पहली ख़बर
भास्कर के अनुसार बिहार में आजादी के बाद सबसे अधिक मतदान दर्ज हुआ है। गुरुवार को पहले चरण में 64.69% लोगों ने वोट डाला। इससे पहले सबसे ज्यादा मतदान वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में हुआ था, जो 62.57% था। 121 सीटों पर 1314 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। 18 जिलों की इन सीटों पर शाम 7 बजे तक मतदान हुआ। पहले चरण में कुल 3.75 करोड़ मतदाता थे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस रिकॉर्ड मतदान के लिए बिहार के मतदाताओं को बधाई दी। वहीं, राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया कि इस बार भी महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोट डाले हैं। उन्होंने कहा कि 121 सीटों पर 45,341 बूथों पर वोटिंग हुई। अब तक 41,943 बूथों का डेटा मिला है। शेष 3,398 बूथों से आंकड़े आने के बाद मतदान प्रतिशत और बढ़ सकता है। इस चरण में 1314 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें 1192 पुरुष और 122 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। सभी का भाग्य ईवीएम में सील हो गया है। बिहार में महिलाओं की वोटिंग भागीदारी लगातारं बढ़ रही है। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने 60.48% मतदान किया, जबकि पुरुषों ने 53.32% वोट डाले थे। वर्ष 2020 में भी महिलाओं की वोटिंग 56.69% रही और पुरुषों की 54.45% 1 मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल के अनुसार, 2025 के चुनाव में भी महिलाएं पुरुषों से आगे हैं। मतगणना 14 नवंबर को होगी।
वोट चोरी रोकने को सतर्क रहें: राहुल
कांग्रेस नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को अरिया और पूर्णिया में चुनावी सभा को संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह दिल्ली में ‘जंगल राज’ चला रहे हैं। “जाति पर राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा- महागठबंधन के समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इस बार सतर्क रहकर वोट चोरी रोकनी होगी। उन्होंने कहा कि बिहार में उद्योग लगाने के लिए जमीन नहीं मिलती। लेकिन अंबानी-अदाणी को एक रुपए में एक एकड़ जमीन दी जाती है। केंद्र सरकार सिर्फ उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। बिहार को अब मोदी और शाह चला रहे हैं, नीतीश कुमार सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री हैं।”
किसने क्या दावा किया?
- 20 साल में पहली बार इस तरह की अभूतपूर्व बदलाव की लहर दिख रही: तेजस्वी
- पहले चरण की 121 में एक सौ सीटों पर एनडीए जीतेगा: सम्राट चौधरी
- एनडीए 2010 से भी अधिक सीटें जीतेगा: संजय झा
- तवा से रोटी पलटती रहनी चाहिए, नहीं तो जल जाएगी। 20 साल बहुत हुआ, अब युवा सरकार: लालू प्रसाद
जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन में लेफ्ट पार्टियों का बोलबाला
हिन्दुस्तान के अनुसार जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में लेफ्ट गठबंधन ने चारों पदों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। बीते वर्ष वाम गठबंधन ने तीन सीटें जीती थी। संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। इस बार एबीवीपी ने वाम गठबंधन को कड़ी टक्कर तो दी मगर सीट नहीं हासिल कर पाई। अध्यक्ष पद पर अदिति मिश्रा ने विकास पटेल को, उपाध्यक्ष पद पर गोपिका ने तान्या कुमारी,सचिव पद पर सुनील यादव ने राजेश्वर कांत दुबे को और संयुक्त सचिव पद पर दानिश अली ने एबीवीपी के अमन को हराया।
सुरेश रैना और शिखर धवन की 11 करोड़ की संपत्ति कुर्क
जागरण के अनुसार ईडी ने अवैध सट्टेबाजी एप से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत पूर्व क्रिकेटरों सुरेश रैना और शिखर धवन को 11.14 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। एजेंसी ने कहा कि ‘वन एक्स बेट’ नामक ऑनलाइन सट्टेबाजी साइट के खिलाफ मामले में मनी लॉडिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत धवन की दिल्ली में 4.5 करोड़ रुपये की व्यावसायिक भूमि और रैना के 6.04 करोड़ रुपये के म्यूच्यूअल फंड को कुर्क करने के लिए अंतरिम आदेश जारी किया गया है। ईडी ने मामले की जांच के तहत युवराज सिंह और रोबिन उथप्पा जैसे पूर्व क्रिकेटरों, अभिनेता सोनू सानु सूद, उर्वशी रौतेला, मिमी चक्रवर्ती (तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद) और अंकुश हाजरा (बेगानी अभिनेता) से भी पूछताछ की है। कुराकाओ मैं रजिस्टर्ड 1xbet को सट्टेबाजी में 18 वर्षों के अनुभव के साथ विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त सैट बज बताया गया है।
कुछ और सुर्खियां:
- पूर्णिमा स्नान के दौरान दामोदर नदी में कैमूर के तीन युवक बहे, दो के शव मिले
अनछपी: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान का प्रतिशत बढ़ गया है और इसका मतलब हर पार्टी अपने हिसाब से लगा रही है। सच्चाई यह है की वोटिंग परसेंटेज बढ़ाने का नतीजा से कोई ऐसा लेना देना नहीं है जिसके लिए कोई एक नियम लागू हो। इस बात बिहार के उदाहरण से भी समझा जा सकता है। 2005 में जब बिहार में लालू प्रसाद की सरकार चुनाव हार गई तो वोटिंग परसेंटेज बहुत कम था। लेकिन इसका हमेशा यह मतलब नहीं हो सकता कि अगर वोटिंग परसेंटेज कम है तो सरकार बदल जाएगी। इसी तरह कई जगहों के बारे में यह बात भी कही गई है कि वोटिंग परसेंटेज बढ़ाने का मतलब है लोग सरकार में बदलाव चाहते हैं। यह बात भी हर चुनाव और हर क्षेत्र के लिए सही साबित हो, जरूरी नहीं है। यह जरूर देखा जाना चाहिए कि वोटिंग परसेंटेज बढ़ाने में किस वर्ग की ज्यादा हिस्सेदारी है। उस हिसाब से यह सोचा जा सकता है कि उसे वर्ग की बात कौन सी पार्टी कर रही है। इस बार वोटिंग परसेंटेज बढ़ने की एक वजह एसआईआर को भी बताया जा रहा है क्योंकि बड़े पैमाने पर नाम काटने से यह हुआ कि पहले अगर 550 वोट पढ़ते थे तो वोटर लिस्ट में 1000 नाम होते थे, अब 900 ही हैं। इस तरह भी वोटिंग परसेंटेज बड़ा है। यह संख्या केवल समझने के लिए है और एग्जैक्ट फिगर नहीं है। बहरहाल अब दूसरे चरण के लिए जिन जिलों में मतदान होना है वहां की 122 सीटों के मतदाताओं की जिम्मेदारी है कि वह अपने मुद्दों पर भरपूर तरीके से वोट करें क्योंकि यह मौका उन्हें अब अगले 5 साल के बाद ही मिलेगा।
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