छ्पी-अनछपी: अमेरिका- ईरान में जंगबंदी, बंगाल में 91 लाख वोटरों के नाम काटे
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ईरानी सभ्यता को एक रात में खत्म कर देने की धमकी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 दिन की सीजफायर की घोषणा की है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर की वजह से 91 लाख वोटरों का नाम कट गया है। मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़क गई है और कम से कम चार लोगों की मौत हुई है।
पहली ख़बर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 दिन की सीजफायर की घोषणा की है हालांकि यह खबर अखबारों में नहीं है क्योंकि यह ऐलान उनके छपने के बाद किया गया। बीबीसी के अनुसार पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ हुई बातचीत के बाद, अगर ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही की अनुमति देने पर सहमत हो जाता है, तो अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हो जाएगा. उन्होंने कहा, “मैं ईरान पर बमबारी और हमले को दो हफ्तों के लिए रोकने पर सहमत हूं.” ट्रंप ने कहा कि इस युद्धविराम पर दोनों पक्ष सहमत हैं.

ईरान ने क्या कहा?
वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने भी घोषणा की है कि अगर ईरान पर हमले रोक दिए जाते हैं, तो ईरान युद्धविराम के लिए सहमत होगा. उन्होंने आगे कहा, “दो हफ़्ते के पीरियड के दौरान होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही संभव होगी.” अराग़ची के मुताबिक, ” यह व्यवस्था ईरान की सशस्त्र सेनाओं के साथ समन्वय से लागू की जाएगी और इसमें तकनीकी सीमाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा.”
सभ्यता को मिटाने की धमकी और ईरानी जनता की बहादुरी का जज़्बा
भास्कर के अनुसार खुद को सीजफायर से पहले ‘शांतिदूत’ बताने का ढिंढोरा पीटने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ‘युद्ध उन्मादी’ जैसा बयान दिया। ईरान में सत्ता को पलटने के मंसूबे से युद्ध में उतरे ट्रम्प ने अब पूरी सभ्यता को मिटाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा- एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा। मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन शायद ऐसा ही होगा। ट्रम्प के जवाब में ईरान के राष्ट्रपति पजेशकियान कहा, जनता का जज्बा कुर्बानी का है। हम मिट जाएंगे, लेकिन झुकेंगे नहीं। उन्होंने कहा, ‘सिकंदर ने जलाया, मंगोलों ने तबाही मचाई। इतिहास ने कई बार परीक्षा ली- फिर भी ईरान मौजूद है। किसी नेता की धमकी से हम मिटेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि ईरान के 1 करोड़ 40 लाख लोग वॉर वॉलन्टियर बन रहे हैं। अमेरिका यदि ईरान में जमीनी हमला करता है तो हमने भी पूरी तैयारी कर ली है। उधर, आईआरजीसी ने लोगों से अपील में कहा है कि वे अपने बच्चों को चेक पॉइंट्स की सुरक्षा के लिए भेजने को प्रोत्साहित करें।
ईरान के आम नागरिक अमेरिका के सामने सीना तानकर खड़े
अपने देश के पुलों और पावर प्लांट को बचाने के लिए ईरान के आम नागरिक अमेरिका के सामने सीना तानकर खड़े हो गए हैं। ईरान के अहवाज, तबरीज, इलाम सहित कई शहरों में हजारों लोगों ने बिजली संयंत्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों के चारों ओर लंबी ‘मानव शृंखला’ बना ली है। ईरानी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ के अनुसार, पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और चेन बनाकर विरोध दर्ज कराया। प्रतिभागियों के हाथों में ईरानी झंडे और राष्ट्रीय नेताओं की तस्वीरों वाले पोस्टर थे, और कई लोग मुख्य मार्ग पर एक-दूसरे का हाथ पकड़कर लंबी कतार में खड़े थे। ईरान के अहवाज में ‘व्हाइट ब्रिज’, तबरीज में पावर प्लांट सहित कई स्थानों पर मानव शृंखला बनाई गई।
सऊदी अरब के जुबैल में ईरान का हमला
हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान ने मंगलवार को सऊदी अरब के जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमला किया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह जानकारी दी। ईरान ने कहा कि यह हमला उसके असलुयेह पेट्रोकेमिकल संयंत्रों पर हुए हमलों के जवाब में था। जो साउथ पार्स गैस क्षेत्र से जुड़े हैं। अमेरिका और इसरायल ने सोमवार को यहां हमले किए थे। विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने या विनाश का सामना करने की धमकी से पहले तेहरान की जवाबी क्षमता रखता है।
बंगाल में 91 लाख वोटरों का नाम कटा
प्रभात ख़बर के अनुसार पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिये गये हैं. यह पिछली मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं का 11 प्रतिशत है. निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को आंकड़ा जारी कर दिया है. यह आंकड़ा जिलावार है. हालांकि, एसआइआर प्रक्रिया अभी जारी है. इसके पूरा होने के बाद राज्य के अंतिम मतदाता आधार की घोषणा अभी बाकी है. पिछले वर्ष अक्तूबर के अंत में 7.66 करोड़ मतदाता वोटर लिस्ट में थे. निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने कहा 60.06 लाख विवेचनाधीन मतदाताओं में से 59.84 लाख का डेटा सार्वजनिक हो चुका है. 22,163 मामलों का निस्तारण हो चुका है, लेकिन ई-हस्ताक्षर होना बाकी है. सभी लंबित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नाम हटाने और जोड़ने के आंकड़ों में मामूली बदलाव संभव है, पर पहले चरण में मतदाता सूची में कोई और नाम शामिल नहीं किया जायेगा.
मणिपुर में मर्डर, कर्फ्यू
जागरण के अनुसार मणिपुर में बम विस्फोट की एक घटना ने शांति बहाली की प्रक्रिया को छिन्न-भिन्न कर दिया। इस पूर्वोत्तर राज्य के बिश्नुपुर जिले में सोमवार देर रात एक घर पर बम फेंककर किए गए उग्रवादी हमले में दो बच्चों की मौत हो गई और उनकी मां घायल हो गईं। इससे कुद्ध स्थानीय लोगों ने हिंसक विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दो तेल टैंकरों और एक ट्रक को आग लगा दी। एक पुलिस चौकी को भी नुकसान पहुंचाया और वाहनों की आवाजाही रोक दी। उन्होंने सीआरपीएफ कैंप पर भी हमला बोल दिया। परिणामस्वरूप सुरक्षाबलों को गोली चलानी पड़ी, जिसमें दो लोग मारे गए जबकि 20 और लोग जख्मी हो गए।
कुछ और सुर्खियां:
- कटिहार के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में ट्रक से टक्कर के बाद बाइक सवार तीन युवकों की मौत
- असम, केरlम और पुडुचेरी में चुनावी शोर थमा, मतदान कल
- पटना जिले के मोकामा में जमीन के झगड़े में कुदाल से कटकर मां बेटे का मर्डर
- बिहार की एक करोड़ जीविका दीदियों का बीमा होगा, प्राकृतिक मौत या दुर्घटना में मौत होने पर अस्तित्व को चार लाख रुपए मिलेंगे
- असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी पर आरोप लगाने के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर पर छापेमारी
अनछपी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तमाम धमकियों के बावजूद ईरान के साथ सीजफायर के ऐलान से एक तरफ जहां पाकिस्तान अपनी वाहवाही करने में जुट गया है तो वहीं भारत के लिए इस जंग में हिस्सा लिए बिना ही हारने जैसा मामला हो गया है। भारत की यह हार नैतिक और कूटनीतिक दोनों तरह की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बड़े पैमाने पर बच्चों की हत्या और ग़जा में नरसंहार करने वाले इसराइल के साथ खड़े होकर अपना नैतिक आधार खो दिया था जिसकी भारत के विपक्ष ने काफी आलोचना भी की थी। याद रखने की बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसराइल का दौरा ठीक उस समय किया था जिसके एक हफ्ते के भीतर ईरान के सबसे बड़े लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनई की इसराइल और अमेरिका ने हत्या कर दी थी। जब मामला बिगड़ गया तो भारत ने ईरान के साथ कुछ हमदर्दी जताने की कोशिश की और ख़ामेनई की हत्या पर शोक संदेश भी लिखा। याद रखने की बात यह है कि भारत ने ईरान के साथ बेहद महत्वपूर्ण चाबहार समझौते को भी अमेरिका के दबाव में चुपचाप ठंडे बस्ते में डाल दिया था। फिर इसराइल और अमेरिका के हमलों के बाद जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया तो भारत के लिए तेल और गैस लाना मुश्किल हो गया। इसके बाद से भारत में इसरायल के पक्ष में बयान देना बंद किया और अपने मामले को ईरान से ठीक करने की कोशिश से तेज की। इस बीच पाकिस्तान ने इस जंग को खत्म करवाने के लिए अपना नाम आगे बढ़ाया और उसे इसमें एक हद तक कामयाबी भी मिली। अब इस बात पर गहन चर्चा शुरू होगी कि क्या भारत के लिए यह स्थिति असहज करने वाली है क्योंकि भारत की नीति पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की है लेकिन इस वक्त वह अमेरिका और ईरान दोनों के करीब हो गया है।
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