छपी-अनछपी: लैंड फ़ॉर जॉब में लालू परिवार पर आरोप तय, शेयर बाज़ार में 13 लाख करोड़ डूबे

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में अदालत ने लालू प्रसाद, उनकी पत्नी व बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती व हेमा यादव सहित 46 अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार और साजिश की धाराओं के तहत आरोप तय कर मुकदमा चलाने का आदेश दिया। पिछले पांच दिनों के दौरान सेंसेक्स में निवेशकों को 13 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ईरान के सर्वोच्च नेता 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने संकेत दिया कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। 

और, जानिएगा कि अस्पतालों को कुत्तों से बचाने के लिए नोडल अफसर रखे जाएंगे। 

पहली ख़बर

जागरण की खबर है कि जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में आरजेडी प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद, उनके परिवार समेत अन्य आरोपितों को विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मामले में लालू प्रसाद, उनकी पत्नी व बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती व हेमा यादव सहित 46 अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार और साजिश की धाराओं के तहत आरोप तय कर मुकदमा चलाने का आदेश दिया। आरोप तय होने के बाद अब 29 जनवरी से इस मामले का औपचारिक ट्रायल शुरू होगा। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू और उनके परिवार को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, लालू पर्स ने रेल मंत्री रहते हुए रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया। कोर्ट ने कह्य कि यह मामला एक आपराधिक सिंडिकेट का है, जिसमें सरकारी नौकरियों को सौदेबाजी के साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया।

शेयर बाज़ार में 13 लाख करोड़ डूबे

हिन्दुस्तान के अनुसार शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स 605 अंक नुकसान में रहा जबकि एनएसई निफ्टी में 193 अंक की गिरावट आई। पिछले पांच दिनों के दौरान सेंसेक्स में करीब 2200 अंकों की गिरावट आई। इस अवधि में निवेशकों को 13 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अमेरिकी शुल्क बढ़ने की चिंताओं और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।

ईरान बोला- ट्रंप को खुश करने के लिए हिंसा

हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान के सर्वोच्च नेता 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक संक्षिप्त संबोधन में संकेत दिया कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। वहीं, कुछ लोग ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे। खामेनेई ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं। सरकारी टीवी पर दावा किया गया कि प्रदर्शनों में हिंसा हुई जिससे लोग हताहत हुए, लेकिन उसने इसका विस्तृत विवरण नहीं दिया। उसने यह भी कहा कि प्रदर्शनों में लोगों की कार, मोटरसाइकिल के अलावा मेट्रो जैसे सार्वजनिक स्थानों, दमकल की गाड़ियों और बसों में आग लगा दी गई।

ईरान में कई जगह हालात बेकाबू, 62 की मौत

ईरान में शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने महंगाई के खिलाफ मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कार, बस और मेट्रो जैसे सार्वजनिक स्थानों पर आग लगा दी। कई जगहों पर हालात बेकाबू हो गए। बताया जा रहा है कि इस हिंसा में अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है। देश में प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को तेहरान से हुई थी, जो पूरे देश में फैल गई। 

ईडी की कार्रवाई को लेकर पश्चिम बंगाल की सियासत उबाल पर

प्रभात खबर के अनुसार पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर राज्य की सियासत उबाल पर है. तृणमूल कांग्रेस के आइटी सेल और चुनावी रणनीतिकार संस्था आइ-पैक से जुड़े ठिकानों पर गुरुवार को हुई इडी की छापेमारी के विरोध में पार्टी ने दिल्ली से कोलकाता तक जोरदार प्रदर्शन किया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए इडी के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज करायी और खुद सड़कों पर उतरकर कोलकाता में मार्च निकाला. ईडी की कार्रवाई के जवाब में ममता सरकार के इस आक्रामक रुख से केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव और गहरा गया है. टीएमसी का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को डराने और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है. ममता ने कहा कि ऐसी कार्रवाई से टीएससी न तो डरने वाली है और न ही झुकने वाली. कुल मिलाकर, आइ-पैक पर छापे से शुरू हुआ यह मामला अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि केंद्र बनाम बंगाल की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है.

आवारा कुत्तों से बचाने के लिए नोडल अफसर तैनात होंगे

हिन्दुस्तान के अनुसार राज्य के सभी अस्पतालों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित रखने के लिए नोडल अधिकारी तैनात होंगे। ये अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि अस्पताल परिसर में कोई आवारा कुत्ता प्रवेश नहीं कर सके। इसके लिए आवश्यक इंतजाम करेंगे। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने जिलों को दिशा-निर्देश जारी किया है। विभाग ने विस्तार से बताया है कि कौन-कौन सी व्यवस्था इसको लेकर करनी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य के हर स्तर के अस्पतालों में चहारदिवारी और गेट की सुविधा सुनिश्चित होनी चाहिए। ताकि, आवारा कुत्तों को परिसर में आनने से रोका जा सके। कुत्तों के आंतक से मरीजों और परिजनों को बचाने तथा सुप्रीम कोर्ट के इस संबंध में आये फैसले को देखते हुए यह व्यवस्था की जा रही है। जिलों को यह भी कहा गया है कि अस्पताल परिसर में आवारा कुत्ते दिखे तो संबंधित पदाधिकारी इसके लिए दोषी माने जाएंगे।

कुछ और सुर्खियां:

  • संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा
  • बिहार के 14 जिलों के पुलिस कप्तान बदले, कुल 71 आईपीएस अधिकारियों का तबादला
  • हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में 500 फीट गहरी खाई में बस गिरी, 14 लोगों की
  • फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों अगले महीने एआई इंपैक्ट समिट में भाग लेने दिल्ली आएंगे

अनछपी: इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिका इस वक्त दुनिया का सबसे ताकतवर देश है और उसके पास हथियारों के अलावा पैसों की और आर्थिक प्रतिबंध लगाने की ताकत भी है। लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं हो सकती कि चाहे अमेरिका जितना शक्तिशाली हो किसी भी देश की संप्रभुता और उसके मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता। अगर कोई देश चाहता है कि उसके साथ नाइंसाफी ना हो, अमेरिका अपनी दादागिरी ना करे तो सबसे पहले ईमानदारी से इसके लिए तैयार होना होगा और अपनी बात खुलकर कहनी होगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में ऐसी टिप्पणी की है जो किसी भी भारतीय को असहज कर सकता है और विदेश मंत्रालय के लिए इसे संभालना काफी मुश्किल काम लगता है। फिलहाल भारत ने इस बात को नकार दिया है जिसमें अमेरिका के मंत्री ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया इसलिए भारत पर बड़ा टैरिफ थोपा गया है या थोपा जाने वाला है। दरअसल दुनिया के देशों को इस बात पर जरूर ध्यान देना चाहिए कि रूस और चीन को छोड़कर बाकी देशों को जिस तरह दबाने की कोशिश अमेरिका कर रहा है उससे कैसे निपटा जाए। रूस और चीन पर अमेरिका की इसलिए ज्यादा नहीं चलती क्योंकि वह आर्थिक और सामाजिक रूप से खुद मजबूत देश हैं। ध्यान रहे कि भारत के अलावा ईरान पर भी राष्ट्रपति ट्रंप ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बिगाड़ होना लाज़िमी है। अमेरिका ने भारत और ईरान के बीच बंदरगाह समझौते को लेकर भी प्रतिबंध लगाने की धमकी दे रखी है। फिलहाल ऐसा लगता है कि अमेरिका ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के पीछे है और वह वहां की सरकार को अस्थिर करना चाहता है। ईरान के साथ अमेरिका का यह रवैया आज का नहीं बल्कि वर्षों पुराना है, फिर भी ईरान के नेताओं द्वारा इसका मुकाबला करने का संकल्प दोहराया जाता रहा है। इस बारे में भारत को यह जरूर तय करना होगा कि आखिर ट्रंप सरकार की रेड लाइन क्या है और इसे लांघने नहीं दिया जाए। 

 

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